Monday, February 29, 2016

चोपता से सारी गाँव होते हुए देवरिया ताल (Chopta to Deoria Taal via Saari Village)

सोमवार, 25 जनवरी 2016

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !


सुबह जब सोकर उठे तो कमरे में अंधेरा था, नियम के मुताबिक बिजली जा चुकी थी ! वैसे ये सही भी है वरना मैने अक्सर देखा है कि होटलों में लोग दिन भर बल्ब जला कर रखते है ! जहाँ सीमित संसाधन हो वहाँ इन संसाधनों का तरीके से ही प्रयोग करना चाहिए ! बिस्तर में सोते हुए ही मैने मोबाइल उठाकर समय देखा तो सुबह के 8 बजने वाले थे, खिड़की-दरवाजे बंद होने के कारण कमरे में अंधेरा था इसलिए समय का अंदाज़ा ही नहीं लग रहा था ! बगल वाले कमरे से अभी तक भी लोगों की तेज आवाज़ें सुनाई दे रही थी, पता नहीं ये लोग रात को सोए भी थे या नहीं ? चोट के कारण मेरे घुटने में अभी तक भी दर्द था, हिम्मत करके जैसे-तैसे करके मैं उठा और कमरे में ही धीरे-2 टहलने लगा ! मैं ये अनुमान लगाने की कोशिश कर रहा था कि आज देवरिया ताल जाने के लिए मेरे पैर साथ देंगे या नहीं ! मैं दर्द से कराह रहा था, संकट की इस घड़ी में भले ही मेरे पैर मेरा साथ नहीं दे रहे थे लेकिन दोस्तों ने भरपूर साथ दिया ! मैने भी हिम्मत करके सबके साथ देवरिया ताल जाने की घोषणा कर दी, सोचा सारी गाँव जाते हुए रास्ते में कहीं रुककर घुटनों की पट्टी बदलवाकर दर्द निवारक दवा ले लूँगा, तो देवरिया ताल की चढ़ाई आराम से हो जाएगी !


देवरिया ताल का एक दृश्य (A Glimpse of Deoria Taal)

Friday, February 26, 2016

तुंगनाथ से चोपता वापसी (Tungnath to Chopta Trek)

रविवार, 24 जनवरी 2016

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !


पिछले लेख में आपने पढ़ा कि कैसे हम चोपता से तुंगनाथ मंदिर पहुँचे, मंदिर के बाहर से ही दर्शन करने के बाद आस-पास के खूबसूरत दृश्यों को अपने कैमरों में लेते हुए हमने वापसी की राह पकड़ी ! हम जानते थे कि तुंगनाथ से वापसी की राह चढ़ाई के मुक़ाबले काफ़ी आसान है, इसलिए उतरते समय हमें चढ़ाई के मुक़ाबले काफ़ी कम समय लगेगा ! शाम होने लगी थी और सूरज की लालिमा में सफेद बर्फ से लदी पहाड़ियाँ बहुत सुंदर लग रही थी ! जहाँ सूर्य देव अपनी लालिमा लिए डूबने की ओर अग्रसर थे और वहीं हम भी सूर्यास्त की प्रतीक्षा में ही थे ताकि पहाड़ी से सूर्यास्त के बेहतरीन नज़ारे का दीदार कर सके ! इस बीच हम तेज़ी से उतरते हुए काफ़ी नीचे आ गए, थोड़ी देर बाद हम उन दो झंडो तक पहुँच गए, जिन्हें जयंत मंदिर परिसर में बता रहा था ! थोड़ी ओर नीचे आए तो यहाँ से सूर्यास्त का शानदार नज़ारा दिखाई दे रहा था, सब अपना-2 कैमरा चालू करके इन यादगार पलों को सहेजने में लग गए ! यहाँ से कुछ दृश्य तो बिल्कुल ऐसे लग रहे थे जैसे कैलेंडर या कंप्यूटर में वॉलपेपर पर देखने को मिलते है ! हालाँकि, वो चित्र भी किसी ने तो खींचे ही होते है लेकिन अगर आपको अपनी आँखों से ऐसे दृश्य देखने को मिले तो क्या कहने !


तुंगनाथ से वापस आने का मार्ग

Tuesday, February 23, 2016

विश्व का सबसे ऊँचा शिव मंदिर – तुंगनाथ (Tungnath - Highest Shiva Temple in the World)

रविवार, 24 जनवरी 2016

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !


मेरे पिछले लेखों में आपने पढ़ा कि किस तरह हम दिल्ली से हरिद्वार होते हुए चोपता पहुँचे ! दिन-रात के इस सफ़र से हम सब थक गए थे इसलिए रात को खूब अच्छी नींद आई ! सुबह जब आँख खुली तो स्लीपिंग बैग में सोते-2 ही मैने अपनी घड़ी में समय देखा, सुबह के साढ़े सात बज गए थे, लेकिन ठंड की वजह से बिस्तर से बाहर निकलने का मन नहीं हो रहा था ! मैं 6 बजे से पहले उठने वाला इंसान हूँ, अपनी हर यात्रा पर अमूमन सुबह समय से उठ ही जाता हूँ, लेकिन यहाँ की ठंड वाकई जबरदस्त थी जिसने मुझे स्लीपिंग बैग के अंदर सिमटकर रहने को मजबूर कर दिया था ! वैसे यहाँ जयंत के अलावा बाकी सबको अच्छी नींद आई थी, जयंत की परेशानी की वजह थी टेंट में पर्याप्त जगह का ना होना ! वैसे तो हमारा टेंट 4 लोगों के रुकने के लिए पर्याप्त था लेकिन सामान ज़्यादा होने के कारण टेंट में जगह थोड़ी कम थी, इसलिए जयंत को ठीक से नींद नहीं आई और वो सारी रात परेशान ही रहा, सुबह होते ही उसने एलान कर दिया कि आज कुछ भी हो जाए, टेंट में नहीं किसी होटल में रुकेंगे ! सारी रात वो सुबह होने का ही इंतजार करता रहा, जैसे ही मैं हिम्मत करके टेंट से बाहर निकला, जयंत को सोने के लिए जगह मिल गई !


दुनिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर (Highest Shiv Temple of the world, Tungnath)

Saturday, February 20, 2016

हरिद्वार से चोपता की बस यात्रा (A Road Trip to Chopta)

शनिवार, 23 जनवरी 2016

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !


मेरे पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम दिल्ली से रात्रि का सफ़र करके हरिद्वार पहुँचे ! हरिद्वार से जब हमारी बस ने चलना शुरू किया तो सुबह के 6 बज रहे थे, बाहर अभी भी अंधेरा ही था ! पहाड़ी मार्ग पर बस में सफ़र करते हुए मुझे उल्टी की परेशानी रहती है, मेरे अलावा इस यात्रा पर मेरे अन्य साथियों को भी ये परेशानी थी ! इसलिए बस में बैठने से पहले ही हमने उल्टी से बचने की दवा खा ली थी ! कृत्रिम रोशनी से हरिद्वार चमक रहा था, इस जगमगाहट की वजह था हरिद्वार में अर्ध-कुंभ का आयोजन ! अगले 3 माह यानि अप्रैल तक यहाँ अर्ध-कुंभ की छटा बिखरी रहेगी, इस दौरान हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए करोड़ों श्रद्धालु आएँगे ! रंग-बिरंगे इस कृत्रिम प्रकाश में हरिद्वार शहर बहुत वाकई बहुत खूबसूरत लग रहा था ! भोर का समय होने के कारण अभी सड़क पर ज़्यादा भीड़ भी नहीं थी, वरना दिन के समय तो इस मार्ग पर काफ़ी भीड़-भाड़ रहती है ! इस मार्ग पर रास्ते में एक-दो जगह सड़क निर्माण का काम भी चल रहा था ! काफ़ी देर तक इस मार्ग पर चलने के बाद देहरादून से आने वाला एक मार्ग भी आकर इसी मार्ग में मिल गया !


चोपता जाने का मार्ग (Snow Covered way to Chopta)

Wednesday, February 17, 2016

दिल्ली से हरिद्वार की ट्रेन यात्रा (A Train Journey to Haridwar)

शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

चोपता यात्रा बहुत दिनों बाद हमारी कोई ऐसी यात्रा थी, जिसकी योजना काफ़ी पहले बन गई थी और अंत में ये यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न भी हुई ! इस यात्रा से पहले ऐसी कई यात्राओं की योजनाएँ बनी, लेकिन कोई भी अपना अंतिम रूप नहीं ले पाई ! लैंसडाउन यात्रा के दौरान भी जब एक मित्र ने अंतिम समय में साथ चलने से मना कर दिया था तो हम 3 मित्रों ने ही वो यात्रा पूरी की ! उसके बाद रेणुकाजी झील जाने की योजना तो बनी लेकिन मेरी वजह से वो यात्रा होते-2 रह गई ! ऐसी और भी कई यात्राएँ थी जो सिर्फ़ योजनाओं में ही रह गई, अगर मैं यहाँ सबका ज़िक्र करने बैठ गया तो इस लेख का उद्देश्य ही बदल जाएगा ! वैसे किसी ने सही कहा है "देर आए दुरुस्त आए" ! चोपता यात्रा की सफलता के बाद शायद हमारे पुराने दिन लौट आए और दोस्तों संग ऐसी यात्राओं पर जाने के द्वार शायद खुल जाएँ ! चलिए, इस यात्रा की शुरुआत करते है, चोपता यात्रा पर हम चार मित्र जयंत कौशिक, सौरभ वत्स, जतिन सोलंकी (जीतू) और मैं जा रहे थे ! सामूहिक यात्रा होने के कारण किसी एक को इस यात्रा के सफल होने का श्रेय देना ठीक नहीं होगा, लेकिन फिर भी सौरभ वत्स ने अगर इस यात्रा की पहल ना की होती तो शायद चोपता जाने के लिए हमें अभी और इंतजार करना पड़ता !


nanda devi express
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का एक दृश्य (A view from New Delhi Railway Station)

Sunday, February 14, 2016

लखनऊ का कुकरैल वन - घड़ियाल पुनर्वास केंद्र (Kukrail Reserve Forest – A Picnic Spot in Lucknow)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

लखनऊ में स्थित कुकरैल वन के बारे में शायद गिनती के लोगों को ही जानकारी होगी, अगर आप भी उन लोगों में से एक है तो आप इस जगह से अच्छी तरफ वाकिफ़ होंगे ! जिन्हें जानकारी नहीं है उन्हें बता दूँ कि मुख्य शहर की भीड़-भाड़ से दूर इंदिरा नगर में स्थित ये घड़ियाल केंद्र यहाँ आने वाले लोगों को खूब पसंद आता है ! अधिकतर लोग यहाँ छुट्टी वाले दिन परिवार संग फ़ुर्सत के कुछ पल बिताने आते है ! बच्चे भी यहाँ आकर काफ़ी रोमांचित हो जाते है और अच्छी यादों के साथ-2 घड़ियालों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी भी अपने साथ ले जाते है ! लखनऊ भ्रमण के बाद दिल्ली वापसी से पहले मुझे भी कुकरैल वन जाने का अवसर मिला ! दरअसल, दिल्ली वापसी की मेरी ट्रेन रात्रि 10 बजे की थी, और बुआजी के घर से इस वन की दूरी भी ज़्यादा नहीं थी ! शाम के समय जब उदय ने कहा कि चलो भैया आपको कुकरैल वन भी घुमा लाता हूँ तो मैं जाने के लिए फटाफट तैयार हो गया ! कैमरे की बैटरी ख़त्म हो चुकी थी इसलिए अपना मोबाइल लेकर ही कुकरैल वन देखने चल दिया ! अगले 10 मिनट में हम दोनों मोटरसाइकल लेकर कुकरैल वन जाने वाले मार्ग पर थे !

kukrail van
कुकरैल वन का प्रवेश द्वार (Entrance to Kukrail Van, Lucknow)

Thursday, February 11, 2016

लखनऊ का अंबेडकर पार्क - सामाजिक परिवर्तन स्थल (A Visit to Ambedkar Park, Lucknow)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

अपने पिछले लेख में मैने अंबेडकर पार्क का ज़िक्र किया था तो सोचा क्यों ना आपको ये पार्क भी घुमा ही दूँ ! अंबेडकर पार्क के बारे में अपनी इस लखनऊ यात्रा पर जाने से पहले मैने काफ़ी सुन रखा था, उम्मीद है कि आपने भी इस पार्क के बारे में सुन ही रखा होगा ! इस बार जब मैं लखनऊ पहुँचा तो मेरे पास समय भी था और मौका भी, इसलिए तय किया कि क्यों ना लगे हाथ इस पार्क को भी देख ही लिया जाए ! ना जाने अगली बार कब लखनऊ आना हो और अगली बार यहाँ आने पर पर्याप्त समय भी मिले या ना ! दरअसल, मैं लखनऊ काम के सिलसिले में तो आता ही रहता हूँ पर हर बार समय की कमी के कारण लखनऊ में घूमना नहीं हो पाता ! आज सुबह नहा धोकर तैयार होने के बाद मैं और उदय मोटरसाइकल पर सवार होकर अंबेडकर पार्क की ओर चल दिए ! घर से 15-20 मिनट का सफ़र तय करके हम दोनों पार्क के सामने पहुँच गए, पार्क के सामने वाली सड़क पर हमेशा वाहनों का आवागमन लगा ही रहता है ! इस पार्क तक आने के लिए बस की सुविधा भी है, पार्क के सामने एक विशाल पार्किंग स्थल है जहाँ आप अपने वाहन खड़े कर सकते है ! इसी पार्किंग स्थल में हमने अपनी मोटरसाइकल खड़ी की जिसका शुल्क 10 रुपए था और पार्क के प्रवेश स्थल की ओर चल दिए यहाँ सड़क पार करने के बाद पार्क के प्रथम द्वार से हमने अंदर प्रवेश किया !


ambedkar park, lucknow
अंबेडकर पार्क का एक दृश्य (A Glimpse of Ambedkar Park, Lucknow)

Monday, February 8, 2016

लखनऊ का खूबसूरत जनेश्वर मिश्र पार्क (The Beauty of Janeshwar Mishr Park, Lucknow)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

लखनऊ के अंबेडकर पार्क का नाम तो आप सबने ही सुना होगा, ये पार्क अपने शुरुआती दिनों में काफ़ी चर्चा में भी रहा था ! लेकिन वो अब पुरानी बात हो गई, लखनऊ में वैसे तो अनेको छोटे-बड़े पार्क है, या अगर यूँ कहें कि लखनऊ पार्कों का गढ़ है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी ! लखनऊ के इन पार्कों की श्रेणी में अब एक नाम और जुड़ गया है, जी हाँ, ये है लखनऊ का जनेश्वर मिश्र पार्क ! 376 एकड़ में फैले इस पार्क की नींव उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने सत्ता संभालने के बाद 6 अगस्त 2012 को रखी ! ये पार्क समाजवादी पार्टी के मुखिया श्री मुलायम सिंह यादव का सपना था जिसे उनके बेटे ने पूरा किया ! 168 करोड़ रुपए की लागत से बने इस पार्क को एशिया का सबसे बड़ा पार्क होने का रुतबा भी हासिल है ! 2 साल में तैयार हुए इस पार्क को आम जनता के लिए 5 अगस्त 2014 को खोल दिया गया ! लखनऊ के गोमती नगर एक्सटेंशन में बने इस पार्क में जाने का मौका मुझे इस नए साल पर अपनी लखनऊ यात्रा के दौरान मिला !


janeshwar mishr park
जनेश्वर मिश्र पार्क का प्रवेश द्वार (Entrance to Janeshwar Mishr Park, Lucknow)

Friday, February 5, 2016

नवाब शादत अली ख़ान और बेगम मुर्शीदज़ादी का मकबरा (Tomb of Saadat Ali Khan and Begam Murshid Zadi)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

नवाब शादत अली ख़ान का मकबरा

लखनऊ के बेगम हज़रत महल पार्क के बारे में तो आपने सुना ही होगा, अगर नहीं सुना तो आपको बता दूँ कि ये पार्क लखनऊ में धरना देने और रेलियों के आयोजन के लिए मशहूर है ! परिवर्तन चौक के पास स्थित इस पार्क को पहले विक्टोरिया पार्क के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर बेगम हज़रत महल पार्क कर दिया गया ! इस पार्क के बगल से जाने वाले मार्ग के उस पार एक बड़े मैदान में दो प्राचीन इमारतें है ! मुख्य मार्ग से जाने पर ये दोनों इमारतें अपनी सुंदरता की वजह से अक्सर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच ही लेती है ! परिवर्तन चौक से निकलते समय मैं भी इन इमारतों की सुंदरता से बच नहीं सका और पहली नज़र पड़ते ही इन इमारतों को देखने की इच्छा होने लगी ! मोटरसाइकल चला रहे उदय को जब मैने अपनी इच्छा से अवगत कराया तो उसने मोटरसाइकल इन इमारतों के मुख्य द्वार की ओर मोड़ दी ! इस मैदान के प्रवेश द्वार के सामने पहुँचे तो पता चला कि मोटरसाइकल अंदर ले जाने की व्यवस्था नहीं है, और हमें बाहर भी कोई पार्किंग नहीं दिखाई दी !

shadat ali khan mosque
नवाब शादत अली ख़ान का मकबरा

Tuesday, February 2, 2016

लखनऊ के अलीगंज का प्राचीन हनुमान मंदिर (Ancient Temple of Lord Hanuman in Aliganj, Lucknow)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

लखनऊ भ्रमण के दौरान एक दिन जब मैं अलीगंज में स्थित हनुमान मंदिर के सामने से निकला तो सोचा भगवान के दर्शन ही कर लूँ ! वैसे भी बिना दर्शन किए तो यहाँ से आगे बढ़ने का सवाल ही नहीं था, क्योंकि लखनऊ आने से पहले इस मंदिर के बारे में मैने काफ़ी पढ़ और सुन रखा था ! इसलिए इस मंदिर को भी घूमने जाने वाली जगहों की लिस्ट में स्थान दे ही रखा था ! हनुमान जी का ये मंदिर बड़े मंगल उत्सव के लिए पूरे लखनऊ में प्रसिद्ध है ! बड़ा मंगल उत्सव ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार को यहाँ लखनऊ में मनाया जाता है, इस दिन यहाँ एक बड़े मेले का आयोजन होता है ! मेले में आने वाले लोगों की संख्या भी हज़ारों में होती है ! लखनऊ के अधिकतर नवाबों की भगवान हनुमान में खूब आस्था थी इसका प्रमाण इसी बात से मिलता है कि वे लोग इस मेले के आयोजन से लेकर पूजा-पाठ तक में भरपूर सहयोग देते थे ! मंदिर के प्रति नवाबों की आस्था ये दर्शाती है कि नवाब किसी एक धर्म तक सीमित नहीं थे, अपने समय में उन्होनें हर धर्म को बराबरी का दर्जा दिया !


hanuman temple aliganj
लखनऊ के अलीगंज का हनुमान मंदिर (Hanuman Temple of Aliganj, Lucknow)