Wednesday, August 1, 2018

कालाढूंगी का कॉर्बेट वाटर फाल (Corbett Water Fall in Kaladungi)

वीरवार, 01 मार्च 2018

हमारा रानीखेत जाने का विचार एकदम से ही बना था, हुआ कुछ यूं कि शादी की सालगिरह के अवसर पर परिवार संग किसी यात्रा पर जाने का मन हुआ ! वैसे भी किसी पारिवारिक यात्रा पर गए हुए काफी समय हो गया था और फिर सालगिरह से अच्छा मौका क्या हो सकता था ? इसी बहाने परिवार संग शहर की भीड़-भाड़ से दूर पहाड़ों पर सुकून के कुछ पल बिताने का मौका भी मिल जायेगा, और रोजमर्रा की दिनचर्या से भी कुछ राहत मिल जाएगी ! मार्च के प्रथम सप्ताह में होली के अवसर पर छुट्टी के 3 दिन मिल रहे थे, 1 दिन की छुट्टी लेकर 4 दिन के लिए किसी लम्बी यात्रा पर जाया जा सकता था ! बस फिर क्या था, एक छुट्टी लेकर रानीखेत जाने की यात्रा की योजना बना ली, सोचा, इस बार की होली पहाड़ों पर ही मनाई जाए ! निर्धारित दिन हम समय से तैयार होकर सुबह सवा 5 बजे अपनी गाडी लेकर इस यात्रा के लिए घर से निकल पड़े ! रास्ते में एक जगह रूककर गाडी में पेट्रोल और सीएनजी की टंकी भी भरवा ली, सुबह का समय होने के कारण नोयडा तक खाली मार्ग मिला, नतीजन पौने 7 बजे तक हम नोयडा पार करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर जा चढ़े,! इस मार्ग पर आए 3 साल से अधिक का समय हो गया था, मुझे उम्मीद थी कि इतनी सुबह यहाँ ज्यादा जाम नहीं मिलेगा, लेकिन मेरा अंदाजा गलत था !
कालाढूंगी का कॉर्बेट वाटर फाल 

डासना टोल पार करते ही सड़क पर जगह-2 निर्माण कार्य चल रहा था, कहीं निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी थी तो कहीं मार्ग डाईवर्जन के बोर्ड लगे थे ! जैसे-2 हम आगे बढ़ते गए, मार्ग पर चल रहा यातायात धीमा होने लगा और एक जगह जाकर तो ये थम गया ! शुरुआत में मुझे लगा कुछ दूर का जाम होगा लेकिन ये जाम पिलखुआ से शुरू होकर हापुड़ तक मिला, नतीजन, एक से डेढ़ घंटे का समय इस जाम की भेंट चढ़ गया ! हापुड़ जाकर जाम से निकले तो कुछ दूर चलने के बाद गढ़गंगा के टोल नाके पर फिर से वही हालात, गाडी के साथ-2 दिमाग का पारा भी चढ़ने लगा ! वैसे, अगर किसी को अव्यवस्था का जीवंत उदहारण देखना हो तो इस टोल नाके पर चले आओ, निश्चित तौर पर आप निराश नहीं होंगे ! यहाँ 4-5 टोल गेट बने है और कभी ना ख़त्म होने वाली गाड़ियों का लम्बा काफिला, कभी-2 तो ऐसा लगता है जैसे सारे जहाँ की गाड़ियाँ यहीं आकर ठहर गई हो ! इन टोल नाकों पर को पहले पार करने की जिद में हर कोई एक-दूसरे  से आगे बढ़ना चाहता है ! इसी जद्दोजेहद में कई गाड़ियाँ आपस में रगड़ खा रही है, और लोग एक-दूसरे से झगड़ भी रहे है लेकिन टोल प्लाजा वालों को इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता !
नैनीताल जाते हुए टोल प्लाजा का एक दृश्य 

गजरौला में रूककर पेट पूजा की 
वो तो किस्मत अच्छी थी कि हमारी गाडी रगड़ते-2 बची, वरना संभावना तो पूरी बन गई थी, गाडी का नुकसान तो होता ही बिना बात के आपसी तू-तू, मैं-मैं भी होती ! समझ नहीं आता कि लोग भीड़-भाड़ से बचने के लिए टोल के पैसे दे रहे है या भीड़-भाड़ में घुसने के लिए ! खैर, टोल पार करने के बाद भी जाम से राहत नहीं मिली, और हम धीरे-2 आगे बढ़ते रहे ! गंगा नदी पार करते हुए गजरौला पहुंचे, यहाँ भी जगह-2 निर्माण कार्य चल रहा था लेकिन यातायात के हालात सामान्य थे ! गजरौला में खाने-पीने के अच्छे विकल्प है, इसलिए इस मार्ग पर जाने वाले अधिकतर लोग भोजन करने के लिए यहाँ रुकते है ! पौने दस बजे हम भी बीकानेरवाला के सामने जाकर रुके, पार्किंग में एक खाली जगह देखकर गाडी खड़ी की और हम सब अन्दर दाखिल हुए ! गरमा-गर्म छोले भठूरे और राज कचौरी से नाश्ता किया, फिर मुंह मीठा करने के लिए आईसक्रीम खाकर घंटे भर में फारिक हुए और अपना आगे का सफ़र जारी रखा ! यहाँ से कुछ दूर चलने पर जोया टोल प्लाजा आया, पिछले दोनों टोल प्लाजा के मुकाबले यहाँ थोड़ी राहत थी, और इस टोल से आगे खाली मार्ग मिला ! 

मुरादाबाद पहुंचकर हम मुख्य शहर में ना घुसकर बाइपास से होते हुए कुछ दूर जाने के बाद मुख्य मार्ग को छोड़कर अपनी दाईं तरफ अन्दर की ओर जा रहे एक मार्ग पर मुड गए ! ये मुरादाबाद-काशीपुर मार्ग है, इस मार्ग पर 2 किलोमीटर चलने के बाद हम काशीपुर तिराहे से दाएं मुड़कर काशीपुर मार्ग पर चलते रहे ! लगभग 7 किलोमीटर चलने के बाद एक चौराहे पर हम इस मार्ग को छोड़कर अपनी दाईं ओर मुड गए ! ये मार्ग बाजपुर-कालाढूंगी होता हुआ नैनीताल को चला जाता है, शानदार मार्ग बना है, गाडी आराम से 80-90 की रफ़्तार से दौड़ती है ! हम कई रिहायशी इलाकों से होते हुए आगे बढे, त्योहार की वजह से कुछ इलाकों में यातायात धीमा भी मिला, लेकिन ज्यादा परेशानी नहीं हुई ! पिछली बार नैनीताल जाते हुए मैंने रुद्रप्रयाग-हल्द्वानी वाला मार्ग लिया था, इसलिए आज मुझे ये कालाढूंगी वाला मार्ग देखना था ! होली की वजह से इस मार्ग पर पड़ने वाले बाज़ार सजे हुए थे, दुकानें रंग-बिरंगी पिचकारियों और अन्य सामानों से भरी हुई थी ! हम टांडा पार करते हुए बाजपुर पहुंचे, यहाँ से आगे वन्य क्षेत्र शुरू हो जाता है, जहाँ चारों तरफ ऊंचे-2 पेड़ और जंगल के बीच से निकलता हुआ मार्ग, बड़ा शानदार दृश्य प्रस्तुत करते है !
कालाढूंगी के जंगल का एक दृश्य 
मार्च का महीना होने के कारण अधिकतर पेड़ों के पत्ते सूखकर गिरने शुरू हो गए है, जंगल में चारों तरफ पत्ते बिखरे पड़े थे, वैसे, जुलाई-अगस्त में यहाँ बढ़िया हरियाली रहती होगी ! इस जंगल से गुजरते हुए भी गाड़ियाँ 80-90 की रफ़्तार से दौड़ते हुए निकल रही थी, बाहर जगह-2 सड़क किनारे खड़े बंदरों के झुण्ड को देखकर बच्चे खूब भी शोर मचा रहे थे ! ये बन्दर जंगल के बीच से गुजरती हर गाडी को उम्मीद की नज़र से देखते है ! सड़क किनारे जगह-2 निर्देश लगे होने के बावजूद भी इक्का-दुक्का गाडी वाले लोग खाने-पीने का सामान इन जानवरों को डाल देते है ! बाजपुर से 23 किलोमीटर चलने के बाद एक तिराहा आता है, जहाँ एक पुलिस चेक पोस्ट भी है, सीधा जाने वाला मार्ग कॉर्बेट म्यूजियम होता हुआ नैनीताल को चला जाता है जबकि इस चेक पोस्ट के पास वाले तिराहे से बाएं मुड़कर कुछ दूर चलने पर सड़क के दाईं ओर कॉर्बेट वाटर फाल का प्रवेश द्वार है ! चलिए, सबसे पहले इस वाटर फॉल को ही देखते है, हमने अपनी गाडी इसी मार्ग पर मोड़ दी ! ये एक इको पार्क है, झरना इसी पार्क में 2 किलोमीटर अन्दर जाकर है, पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक बहुत बड़ा पीपल का पेड़ है ! प्रवेश द्वार को इस पीपल के पेड़ की जड़ों से ही सजाकर बढ़िया रूप दिया गया है !
कॉर्बेट वाटर फाल जाने का प्रवेश द्वार

प्रवेश द्वार के सामने एक दृश्य

कॉर्बेट वाटर फाल के प्रवेश द्वार पर एक चित्र
द्वार के पास एक हाथी भी बना है, जो यहाँ आने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है ! गाडी सड़क के किनारे खड़ी करके हम मुख्य प्रवेश द्वार के सामने पहुंचे, लेकिन होली के उपलक्ष्य में आज और कल ये पार्क बंद रहने वाला था, इसकी जानकारी मुख्य प्रवेश द्वार पर एक नोटिस के माध्यम से दी गई थी ! द्वार पर लगे इस नोटिस को देखकर बड़ी निराशा हुई, ऐसी निराशा तो शायद कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर लगे अपने परीक्षा परिणाम को देखकर भी नहीं हुई थी ! मन में विचार आया कि इस झरने को वापसी में देख्नेगे, प्रवेश द्वार के पास खड़े होकर परिवार संग कुछ फोटो खींचने के बाद हम वापिस जाने के लिए मुड़े ही थे कि एक नव-विवाहित जोड़े को प्रवेश द्वार के बगल से बने रास्ते से अन्दर जाते देखा ! मुख्य प्रवेश द्वार से कुछ दूर अन्दर जाने पर दाईं ओर बच्चों के मनोरंजन के लिए एक उद्यान में कुछ वन्य जीवों की आकृतियाँ बनाई गई है, ये युगल उसी उद्यान में जाकर रुका ! हमने भी सोचा इतनी उम्मीद से झरना देखने आए है तो इस छोटे से उद्यान को तो देख ही लेते है ! इसलिए प्रवेश द्वार के बगल से होते हुए हम भी बच्चों सहित इस उद्यान में पहुंचे, यहाँ एक गोलाकार घास के मैदान में हिरण, बारहसिंघा, जंगली सुअर, मगरमच्छ, घड़ियाल, और पेड़ पर बैठे एक तेंदुए की आकृतियां बनाई गई है !
कॉर्बेट वाटर फाल के प्रवेश द्वार पर बना टिकट घर

प्रवेश द्वार से दिखाई देता अन्दर का एक दृश्य

पार्क के अन्दर बना एक उद्यान
इस मैदान के चारों तरफ पानी की चौड़ी नाली है और नाली के साथ-2 रेलिंग लगी है ! कुछ समय यहाँ बिताने के बाद हम मैदान से निकलकर मुख्य मार्ग पर आ गए, यहाँ से एक मार्ग जंगल के अन्दर जाता है, इसी मार्ग पर आगे जाकर कॉर्बेट वाटर फाल है जिसकी दूरी यहाँ से लगभग 2 किलोमीटर है ! झरने तक जाने का मार्ग घने जंगल से होकर निकलता है, इस मार्ग पर गाड़ियाँ भी काफी अन्दर तक जाती है, जहाँ जाकर गाड़ियाँ रूकती है वहां से झरने की दूरी मात्र 150-200 मीटर रह जाती है ! आज पार्क बंद होने के कारण गाड़ियाँ अन्दर नहीं जा सकती थी, हम खड़े होकर इसी उधेड़-बुन में थे कि अन्दर जाया जाए या नहीं ! अंत में हमने वापिस जाने का निर्णय लिया, हम प्रवेश द्वार तक पहुंचे ही थे कि हमने देखा वो युगल अन्दर झरने की ओर जाने वाले मार्ग पर जा रहे थे ! हमें निर्णय लेने में 10 सेकंड से भी कम का समय लगा और हम भी झरने की ओर जाने वाले मार्ग पर चल दिए ! इस मार्ग के शुरुआत में तो एक-दो इमारतें बनी है, लेकिन थोडा आगे बढ़ने पर घना जंगल शुरू हो जाता है, एक जगह तो जंगल में आग भी सुलग रही थी ! हम लोगों के अलावा दूर-2 तक कोई नहीं था, शुरुआत में तो हम दोनों युगल साथ-2 चल रहे थे लेकिन कुछ देर में हम काफी आगे निकल गए !
वाटर फाल जाने का मार्ग 

वाटर फाल जाने का मार्ग 

मार्ग से दिखाई देता जंगल 
शायद उन लोगों को सिर्फ ये पार्क ही देखना था इसलिए वो तसल्ली से रुक-2 कर फोटो खींच रहे थे ! बच्चों के साथ पैदल चलना काफी टेढ़ा काम है, बच्चे कभी इधर भागते कभी उधर, उन्हें पकड़ने के चक्कर में हमारी भी अच्छी-खासी कसरत हो गई ! धीरे-2 हम काफी अन्दर तक पहुँच गए, शायद डेढ़ किलोमीटर चल चुके होंगे, यहाँ मोबाइल के सिग्नल नहीं आ रहे थे और झरने का भी कुछ संकेत नहीं मिल रहा था ! हमने मन में निश्चय कर लिया था कि अगले पांच मिनट चलने के बाद भी अगर झरना दिखाई नहीं दिया तो वापिस हो लेंगे ! चलते-2 5 मिनट बीत गए, 10 भी बीत गए, लेकिन झरना दिखाई नहीं दिया, मन में यही विचार आ रहा था कि 5 मिनट और चलकर देख लेते है ! हम लगातार चलते रहे और आखिरकार थोड़ी देर बाद उस स्थान पर पहुँच ही गए जहाँ जाकर गाड़ियों का मार्ग ख़त्म हो जाता है ! यहाँ भी कुछ इमारतें थी, हमने ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन शायद कैंटीन और शौचालय था ! यहाँ से थोडा आगे बढे तो हमें कुछ दूरी पर एक लकड़ी का पुल दिखाई दिया, पुल के नीचे पत्थर लगाकर पानी रोका गया था ! पुल के किनारों पर लोहे की रेलिंग लगी थी और बीच में लकड़ियों के फट्टे लगे थे, जिससे होते हुए हम उस पार पहुंचे !
सड़क से दिखाई देता जंगल का एक दृश्य

जंगल की जानकारी दर्शाता एक बोर्ड

जंगल में जानकारी दर्शाता एक बोर्ड 

झरने तक जाने के लिए बना एक पुल

पुल से दिखाई देता एक दृश्य

इसी पुल से होकर झरने तक जाना है 
यहाँ से ऊंचे-नीचे रास्ते शुरू हो गए, कुछ सीढ़ियों पर चढ़े तो कुछ से उतरते हुए आखिरकार हम झरने तक पहुँच ही गए ! झरने को देखने से ही सफ़र की सारी थकान दूर हो गई, ये झरना घने पेड़ों से घिरा हुआ था, सूरज की रोशनी भी यहाँ बड़ी मुश्किल से पहुँच रही थी ! लोगों को झरने के नीचे जाने से रोकने के लिए लोहे की जालियां लगाईं गई थी, लेकिन यहाँ बने एक चबूतरे पर खड़े होकर आप थोड़ी दूर से ही इस झरने का दीदार कर सकते है ! बारिश के दिनों में इस झरने का जलस्तर काफी बढ़ जाता है जिसकी जानकारी रास्ते में एक बोर्ड पर अंकित थी ! हम कुछ देर झरने की ख़ूबसूरती को निहारते रहे और फिर कुछ फोटो खींचने के बाद यहाँ से वापसी की राह पकड़ी ! वैसे अगर आज ये पार्क खुला होता तो हम कुछ और समय यहाँ रुकते, लेकिन अभी हम अकेले ही थे और हमें अभी नैनीताल जाते हुए रास्ते में पड़ने वाली अन्य जगहें भी देखनी थी ! झरने और इसके आस-पास जगह-2 कैमरे लगाए गए है ताकि झरने के आस-पास होने वाली गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके ! झरने से वापिस आते हुए पुल पार करने के बाद कुछ दूरी पर हमें वो युगल भी दिखाई दिया, यहाँ भी ये लोग फोटो खींचने में लगे थे !
झरने से बहकर आता पानी

झरने का एक दृश्य

झरने से बहकर आता पानी 
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि झरने के आस-पास के जंगलों में घूमने पर मनाही है, ये जिम कॉर्बेट वन्य जीव उद्यान से सटा हुआ क्षेत्र है ! इसलिए मेरा मानना है कि वन्य जीव अक्सर पानी पीने के लिए इस झरने पर आते होंगे, जंगल में मुख्य मार्ग को छोड़कर अन्दर आना खतरनाक हो सकता है ! वापसी में हम तेज क़दमों से बाहर की ओर आते रहे, इस दौरान हमें जंगल में एक व्यक्ति घूमता हुआ दिखाई दिया जो हमसे कुछ दूरी पर था ! शायद उसने हमें देखा नहीं, या देखकर अनदेखा कर दिया, वजह जो भी हो, हम बिना रुके आगे बढ़ गए, 25-30 मिनट में हम प्रवेश द्वार के सामने पहुंच चुके थे !  यहाँ ज्यादा समय गँवाए बिना हम प्रवेश द्वार के बगल से होते हुए अपनी गाडी में सवार हुए और नैनीताल जाने के लिए निकल पड़े ! यात्रा के इस लेख पर फिल्हाल यहीं विराम लगाता हूँ अगले लेख में आपको नैनीताल की सैर कराऊंगा !
प्रवेश द्वार के पास का एक दृश्य

प्रवेश द्वार के पास का एक दृश्य

कॉर्बेट म्यूजियम के पास तिराहा 
इस मार्ग पर पड़ने वाले टोल का शुल्क नीचे दिए गए है !
डासना – 30 रूपए
गढ़गंगा – 60 रूपए
जोया – 45 रूपए

क्यों जाएँ (Why to go Kaladungi): अगर आपको जंगल में घूमना और प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण जगह पर जाना अच्छा लगता है तो निश्चित तौर पर आप नैनीताल के कालाढूंगी में आकर निराश नहीं होंगे ! 

कब जाएँ (Best time to go Kaladungi): आप नैनीताल साल के किसी भी महीने में जा सकते है यहाँ हर मौसम में प्रकृति का अलग ही रूप देखने को मिलता है ! गर्मियों की छुट्टियों में यहाँ ज्यादा भीड़ रहती है इसलिए इस समय ना ही जाए तो बेहतर होगा !

कैसे जाएँ (How to reach Kaladungi): दिल्ली से कालाढूंगी की दूरी महज 298 किलोमीटर है जिसे तय करने में आपको लगभग 6-7 घंटे का समय लगेगा ! दिल्ली से कालाढूंगी जाने के लिए सबसे बढ़िया मार्ग मुरादाबाद-बाजपुर होते हुए है ! दिल्ली से रामपुर तक शानदार 4 लेन राजमार्ग बना है और रामपुर से आगे 2 लेन राजमार्ग है ! आप कालाढूंगी ट्रेन से भी जा सकते है, यहाँ जाने के लिए सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जो देश के अन्य शहरों से जुड़ा है ! काठगोदाम से कालाढूंगी महज 28 किलोमीटर दूर है जिसे आप टैक्सी या बस के माध्यम से तय कर सकते है ! काठगोदाम से आगे पहाड़ी मार्ग शुरू हो जाता है ! 

कहाँ रुके (Where to stay near Kaladungi
): कालाढूंगी नैनीताल के पास ही है और नैनीताल उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है यहाँ रुकने के लिए बहुत होटल है ! आप अपनी सुविधा अनुसार 800 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक का होटल ले सकते है ! नौकूचियाताल झील के किनारे क्लब महिंद्रा का शानदार होटल भी है ! 


क्या देखें (Places to see near Kaladungi): कालाढूंगी के अलावा इसके आस-पास घूमने के लिए नैनीताल में जगहों की कमी नहीं है नैनी झील, नौकूचियाताल, भीमताल, सातताल, खुरपा ताल, नैना देवी का मंदिर, चिड़ियाघर, नैना पीक, कैंची धाम, टिफिन टॉप, नैनीताल रोपवे, माल रोड, और ईको केव यहाँ की प्रसिद्ध जगहें है ! इसके अलावा आप नैनीताल से 45 किलोमीटर दूर मुक्तेश्वर का रुख़ भी कर सकते है !


अगले भाग में जारी...


नैनीताल-रानीखेत यात्रा
  1. कालाढूंगी का कॉर्बेट वाटर फाल (Corbett Water Fall in Kaladungi)

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