Friday, May 31, 2019

नैनीताल में स्थानीय भ्रमण (Sight Seen in Nainital)

शुक्रवार, 02 मार्च 2018

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यात्रा के पिछले लेख में आप नैनी झील में नौकायान का आनंद लेने के बाद माँ नैना देवी के दर्शन भी कर चुके है, हालांकि, अँधेरा होने के कारण मंदिर से झील का दृश्य तो ठीक से दिखाई नहीं दिया लेकिन इस मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया था ! अब आगे, दरअसल अगले दिन होली का त्योहार होने के कारण नैना देवी के मंदिर में इतनी सजावट की गई थी, पूरे मंदिर परिसर को फूलों और लाइटों से सजाया गया था ! यहाँ आधा घंटा बिताने के बाद जब हम बाहर आए तो अच्छी-खासी रात हो चुकी थी ! इस मंदिर के सामने एक छोटा बाज़ार है, जहाँ खान-पान से लेकर कपडे, खिलोने और अन्य वस्तुएं आसानी से मिल जाती है ! हम बाज़ार में ये सोचकर घूमने लगे कि अगर साज-सज्जा या ज़रूरत का कोई अन्य सामान मिल जायेगा तो खरीद लेंगे, लेकिन बात नहीं बनी ! कुछ दुकानें बंद हो चुकी थी और जो खुली थी वहां अधिकतर वही वस्तुएं थी जो किसी भी बाज़ार में आसानी से मिल जाती है तो फिर यहाँ से लादकर क्यों ले जाना ! वैसे, मल्लीताल का पार्किंग स्थल भी यहाँ से ज्यादा दूर नहीं है, इस पार्किंग के सामने ही एक गुरुद्वारा भी है, जहाँ इस समय लोगों का जमावड़ा लगा था शायद लोग इसके बंद होने से पहले दर्शन कर लेना चाहते थे !
नैना मंदिर से दिखाई देता नैनी झील का एक दृश्य 

Sunday, April 28, 2019

जैसलमेर से बीकानेर की रेल यात्रा (A Train Trip from Jaisalmer to Bikaner)

मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप जैसलमेर का स्थानीय भ्रमण कर चुके है, दिनभर कुलधरा, खाभा फोर्टसम और जैसलकोट होटल में घूमने के बाद अँधेरा होते-2 हम जैसलमेर पहुँच गए ! यहाँ रात 9 बजे तक हम जैसलमेर के किले में घूमते रहे, जिसका वर्णन मैं अपनी यात्रा के पिछले लेख में कर चुका हूँ ! रात्रि भोजन के बाद देर रात हम जैसलमेर रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहाँ से आधी रात को बीकानेर के लिए हमारी ट्रेन थी ! अब आगे, हमारी ट्रेन लीलण एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर जैसलमेर से चली, इस बीच लगभग सभी सीटों पर यात्री आ चुके थे ! रात के 12 बज रहे थे इसलिए हम बिना देर किए अपनी-2 सीट पर सोने चल दिए, वैसे भी दिनभर सफ़र करके हमें अच्छी-खासी थकान हो गई थी, इसलिए ट्रेन में होने के बावजूद बढ़िया नींद आई ! हालांकि, सर्दी ने भी अपना खूब जोर दिखाया और ट्रेन की खिड़की बंद होने के बाद भी इसमें से रातभर हवा आती रही ! आलम ये था कि सुबह नींद खुली तो भयंकर ठण्ड लग रही थी या यूं कह सकते है कि सुबह नींद ही ठण्ड लगने के कारण खुली, लेटे-2 मोबाइल निकालकर समय देखा तो 5 बजने वाले थे ! मैंने कई जोड़े गर्म कपडे पहन रखे थे, एक कम्बल भी ओढ़ रखा था लेकिन फिर भी ठण्ड से गलन हो रही थी !

बीकानेर का जूनागढ़ किला

Tuesday, January 29, 2019

खुर्पाताल होते हुए नैनीताल – (Kaladungi to Nainital via Khurpatal)

वीरवार, 01 मार्च 2018

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यात्रा के पिछले लेख में आप कालाढूंगी के घने जंगल में स्थित कॉर्बेट वाटर फाल के बारे में पढ़ चुके है, अब आगे, वाटर फाल देखने के बाद हम नैनीताल जाने के लिए निकल पड़े ! थोडा आगे बढ़ने पर वापिस उस चेक पोस्ट वाले तिराहे पर पहुंचे, जहाँ से दाएं मुड़ने पर बाजपुर आता है जबकि नैनीताल जाने के लिए बाएं मुड़ना था, हम नैनीताल वाले मार्ग पर मुड गए ! थोड़ी दूर जाने पर ये मार्ग घूमकर दाईं ओर चला जाता है जहाँ कुछ दूरी पर फिर से एक तिराहा है, इस तिराहे से एक मार्ग तो कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी को चला जाता है जबकि दूसरा मार्ग खुर्पाताल होते हुए नैनीताल को जाता है ! इस तिराहे के पास ही सड़क किनारे मशहूर शिकारी जिम कॉर्बेट का म्यूजियम बना है, मुझे यकीन है कि जिम कॉर्बेट के बारे में तो आप जानते ही होंगे, फिर भी विस्तृत जानकारी के लिए आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते है ! गाडी सड़क के किनारे खड़ी करके हम म्यूजियम के प्रवेश द्वार पर पहुंचे तो पता चला कि होली के अवसर पर ये म्यूजियम भी 2 दिन के लिए बंद है ! अब यहाँ रूककर समय व्यर्थ करने में कोई समझदारी नहीं थी इसलिए बिना देर किए हम नैनीताल की ओर जाने वाले मार्ग पर चल दिए !
नैनीताल जाते हुए रास्ते में मनसा देवी का मंदिर

Wednesday, August 1, 2018

कालाढूंगी का कॉर्बेट वाटर फाल (Corbett Water Fall in Kaladungi)

वीरवार, 01 मार्च 2018

हमारा रानीखेत जाने का विचार एकदम से ही बना था, हुआ कुछ यूं कि शादी की सालगिरह के अवसर पर परिवार संग किसी यात्रा पर जाने का मन हुआ ! वैसे भी किसी पारिवारिक यात्रा पर गए हुए काफी समय हो गया था और फिर सालगिरह से अच्छा मौका क्या हो सकता था ? इसी बहाने परिवार संग शहर की भीड़-भाड़ से दूर पहाड़ों पर सुकून के कुछ पल बिताने का मौका भी मिल जायेगा, और रोजमर्रा की दिनचर्या से भी कुछ राहत मिल जाएगी ! मार्च के प्रथम सप्ताह में होली के अवसर पर छुट्टी के 3 दिन मिल रहे थे, 1 दिन की छुट्टी लेकर 4 दिन के लिए किसी लम्बी यात्रा पर जाया जा सकता था ! बस फिर क्या था, एक छुट्टी लेकर रानीखेत जाने की यात्रा की योजना बना ली, सोचा, इस बार की होली पहाड़ों पर ही मनाई जाए ! निर्धारित दिन हम समय से तैयार होकर सुबह सवा 5 बजे अपनी गाडी लेकर इस यात्रा के लिए घर से निकल पड़े ! रास्ते में एक जगह रूककर गाडी में पेट्रोल और सीएनजी की टंकी भी भरवा ली, सुबह का समय होने के कारण नोयडा तक खाली मार्ग मिला, नतीजन पौने 7 बजे तक हम नोयडा पार करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर जा चढ़े,! इस मार्ग पर आए 3 साल से अधिक का समय हो गया था, मुझे उम्मीद थी कि इतनी सुबह यहाँ ज्यादा जाम नहीं मिलेगा, लेकिन मेरा अंदाजा गलत था !
कालाढूंगी का कॉर्बेट वाटर फाल 

Monday, June 11, 2018

हुमायूँ के मक़बरे की सैर (A visit to Humayun’s Tomb, New Delhi)

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दिल्ली भ्रमण करता हुआ आज मैं आपको ले चल रहा हूँ निज़ामुद्दीन दरगाह के पास स्थित हुमायूँ के मक़बरे की सैर पर ! हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस मक़बरे तक जाने के लिए आप रेलवे स्टेशन से उतरकर ऑटो या बस पकड़ सकते है, रिक्शे की सवारी का लुत्फ़ लेने के लिए आपको थोड़ी दूर पैदल चलना पड़ेगा, ई-रिक्शे की सवारी का आनंद लेने का मन हो तो वो भी आपको स्टेशन के पास ही मिल जायेंगे ! वैसे स्टेशन से इस मक़बरे की दूरी ज़्यादा नहीं है इसलिए अगर मौसम अच्छा हो तो आप ये यात्रा पैदल भी कर सकते है, लेकिन गर्मी ज्यादा हो तो पैदल ना ही जाएँ ! मैं भी ट्रेन से उतरने के बाद स्टेशन से बाहर निकला और कुछ घुमावदार रास्तों से होता हुआ पैदल ही मक़बरे की ओर जाने वाले मार्ग पर चल दिया ! इस बीच रास्ते में एक चौराहे के पास नीली गुम्बद भी है, जो एक ऐतिहासिक मुगलकालीन इमारत है, इस गुम्बद के चारों तरफ रेलिंग लगाईं गई है और अन्दर जाने पर पाबन्दी है ! मैं भी दूर से ही इस नीली गुम्बद की कुछ फोटो लेने के बाद आगे बढ़ गया, 15-20 मिनट बाद मैं मक़बरे के सामने पहुंचा !

हुमायूँ के मकबरे का एक दृश्य

Wednesday, May 23, 2018

जैसलमेर दुर्ग के मंदिर और अन्य दर्शनीय स्थल (Local Sight Seen in Jaisalmer)

मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप जैसलमेर के कुछ पांच सितारा होटलों के बारे में पढ़ चुके है, सम से वापिस आकर हमने बाइक वापिस की और सोनार किले के अखय पोल के सामने पहुँच गए ! अखय पोल इस दुर्ग का वही प्रवेश द्वार है जिससे होते हुए कल हमने सोनार किले का भ्रमण किया था, अब आगे, रात के समय किले के प्रवेश द्वार को कृत्रिम रोशनी से सजाया गया था जो देखने में बहुत सुन्दर लग रही थी ! मुख्य द्वार से होते हुए हम किला परिसर में दाखिल हुए, थोडा अन्दर जाते ही बाईं तरफ बने पार्किंग क्षेत्र को पार करके आगे ऊँचाई पर इसी तरफ एक मंदिर स्थित है कल हम ये मंदिर नहीं देख पाए थे लेकिन आज हमारे पास पर्याप्त समय था तो इस मंदिर में दर्शन के लिए चल दिए ! चढ़ाई भरे मार्ग से होते हुए कुछ ही देर में हम मंदिर के सामने खड़े थे, मंदिर के बाहरी प्रवेश द्वार के पास जूते उतारकर हम मंदिर परिसर में दाखिल हुए ! मुख्य भवन के सामने एक खुला बरामदा है जहाँ बैठकर लोग भक्ति में ध्यान लगाते है, भगवान् श्रीकृष्ण को समर्पित इस मंदिर के मुख्य भवन में द्वारकाधीश की प्रतिमा स्थापित है, यहाँ द्वारकाधीश को दाढ़ी-मूंछ वाले रूप में दिखाया गया है ! 

जैसलमेर दुर्ग के अन्दर मंदिर का एक दृश्य