Friday, July 23, 2021

अरावली में है फरीदाबाद की खूनी झील (Death Valley of Faridabad)

यात्रा के इस लेख में मैं आपको फरीदाबाद की एक ऐसी झील के बारे में बताऊँगा जो अरावली पर्वत के बीच पहाड़ों के अवैध खनन से बनी है ! सैकड़ों फुट गहरी इस झील का पानी नीले रंग का दिखाई देता है और यही आकर्षण युवाओं को अपनी ओर आने को बाध्य करता है ! घूमने-फिरने आने वाले बहुत से लोग नहाने के लिए इस झील में उतरते है और पानी के नीचे खड़ी चट्टानों के बीच या गहरी खाई में फँसकर अपनी जान गंवा देते है ! प्रशासन ने अपने स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए कई मुहिम चलाए, जगह-2 बोर्ड लगाकर लोगों को इधर ना जाने की हिदायतें भी दी, स्थानीय लोग भी लोगों को झील में उतरने से मना करते है लेकिन फिर भी बहुत से युवा इधर जाने से नहीं चूकते ! हालत ये है कि हर 5-6 महीने में इस झील में किसी के डूबकर मरने की खबर अखबार की सुर्खियां बन ही जाती है, हालांकि, इस झील में डूबकर मरने वाले लोगों की संख्या का कोई पुख्ता आंकड़ा तो नहीं है लेकिन फिर भी स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक सैकड़ों लोग इस झील की भेंट चढ़ चुके है, इसलिए इसे डेथ वैली के नाम से भी जाना जाता है ! वैसे अलग-2 घटनाओं में लोगों के डूबने का कारण भी अलग-2 ही रहता है, कोई फोटो खींचते हुए फिसलकर झील में गिर गया तो कोई अपने साथी को बचाने के चक्कर में अपनी जान गंवा बैठा, कुछ लोग नशा करके भी झील में नहाने उतरते है जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है !

death valley faridabad
डेथ वैली का एक नजारा

Monday, July 19, 2021

फरीदाबाद का त्रिवेणी हनुमान मंदिर (Highest Statue of Lord Hanuman)

रविवार, 11 जुलाई 2021

यात्रा के इस लेख में मैं आपको फरीदाबाद के त्रिवेणी हनुमान मंदिर लेकर चलूँगा, वैसे तो फरीदाबाद में घूमने के लिए काफी जगहें है जैसे सूरजकुंड झील, नाहर सिंह पैलेस, रानी की छतरी, नाहर सिंह स्टेडियम, हरि पर्बत, परसोन मंदिर, रोज़ गार्डन, टाउन पार्क, साईं मंदिर, शनि मंदिर, सूरजकुंड क्राफ्ट मेला, डेथ वैली और भी बहुत कुछ, ये लिस्ट बहुत लंबी है ! लेकिन फरीदाबाद-गुड़गाँव मार्ग पर स्थित त्रिवेणी हनुमान मंदिर पिछले कुछ वर्षों में फरीदाबाद के एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल के रूप में तेजी से उभरा है ! हालांकि, यहाँ स्थित ये मंदिर काफी पुराना है लेकिन मंदिर के पास 2 साल पहले बनकर तैयार हुई हनुमान जी की मूर्ति के बाद ये मंदिर लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि हनुमान जी की बैठी हुई मुद्रा में ये भारत की सबसे बड़ी प्रतिमा है इसकी ऊंचाई 108 फुट है ! इस प्रतिमा का निर्माण कार्य 2011 में शुरू हुआ था और 9 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद 2019 में ये बनकर तैयार हुई ! हालांकि, इस बीच कुछ समय निर्माण कार्य बंद भी रहा, लेकिन अंतत जब ये बनकर तैयार हुआ तो फरीदाबाद में आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गया है ! फरीदाबाद के अलावा दिल्ली, गुड़गाँव और अन्य शहरों से भी लोग इसे देखने के लिए आते है ! हालांकि, मैं कई वर्षों तक रोजाना अपने ऑफिस जाते हुए इस मंदिर के सामने से निकला, लेकिन तब निर्माण कार्य चल रहा था तो मेरा यहाँ कभी रुकना नहीं हुआ, और अब मौका मिला तो मैं अपने घर से कई किलोमीटर चलकर सिर्फ ये मंदिर देखने के लिए इस मार्ग पर गया !

Triveni Hanuman Temple
त्रिवेणी हनुमान मंदिर में बनी प्रतिमा

Thursday, July 15, 2021

पूर्वाञ्चल सड़क यात्रा - ग़ाज़ीपुर से दिल्ली (Poorvanchal Road Trip – Ghazipur to Delhi)

शनिवार, 27 मार्च 2021

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

यात्रा के इस लेख में हम अपनी पूर्वाञ्चल से वापसी की यात्रा का वर्णन करेंगे, पूर्वाञ्चल जाते हुए हमें जो रास्ते खराब मिले थे वापिस आते हुए हमने उन्हें नहीं लिया ! बल्कि दूसरे वैकल्पिक रास्तों से होकर हमने अपना सफर शुरू किया, इस लेख में आपको इन्हीं रास्तों से संबंधित जानकारी दी जाएगी, ताकि अगर आपको कभी इस क्षेत्र में यात्रा करनी हो तो आप अपने लिए सही रास्ते का चुनाव कर सके ! चलिए, बिना देर किए हम अपनी यात्रा की शुरुआत करते है, ग़ाज़ीपुर में एक सप्ताह बिताने के बाद हमारी वापसी 27 मार्च को थी, वापसी में भी हमने अपना सफर सुबह 5 बजे शुरू किया, यात्रा के लिए सारी तैयारियां पिछली रात को ही कर ली थी ! घर से चले तो अभी अंधेरा ही था, चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था, घर से निकलकर कुछ देर बाद हम मजुई चौराहे से बाएं मुड़कर बहरियाबाद जाने वाले मार्ग पर चल रहे थे, सुबह-2 इक्का-दुक्का लोग सड़क पर टहलते हुए दिखाई दिए ! कल शाम को हम इसी मार्ग से हथियाराम मठ आए थे, बहरियाबाद से रायपुर जाने वाले मार्ग पर कुछ दूर चलकर हम अपने बाएं मुड़ गए, कुछ गांवों से निकलने के बाद हम नौरसिया होते हुए लालगंज-तरवाँ मार्ग पर पहुँच गए, ये मार्ग पलहना होते हुए लालगंज के बाहर मसीरपुर बाजार में जाकर आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पर जाकर मिल जाता है ! बहरियाबाद से नौरसिया के बीच थोड़ा खराब रास्ता मिला, बाकि सब ठीक था ! मसीरपुर बाजार से दाएं मुड़कर हम आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पर 18 किलोमीटर चले, इस मार्ग पर सड़क विस्तारीकरण का काम जोरों पर है जिसके तहत इस राजमार्ग को अब 4 लेन का बनाया जा रहा है, इसलिए जगह-2 निर्माण सामग्री बिखरी हुई है और बीच-2 में रास्ता भी खराब है !

agra lucknow expressway
लखनऊ आगरा एक्स्प्रेस-वे 

Monday, July 12, 2021

ग़ाज़ीपुर का प्रसिद्ध हथियाराम मठ (A Visit to Hathiyaram Math, Ghazipur)

शुक्रवार, 26 मार्च 2021

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

यात्रा के इस लेख में आज मैं आपको ग़ाज़ीपुर के प्रसिद्ध हथियाराम मठ लेकर चलूँगा, जो देश के मशहूर सिद्धपीठों में गिना जाता है ! यहाँ जाने की कोई पूर्व योजना नहीं थी बस एकदम से विचार बना, और हम घूमने निकल पड़े, दरअसल हुआ कुछ यूं कि शाम को चाय पीते हुए बातों ही बातों में घर के आस-पास घूमने वाली जगहों की चर्चा हुई, और हथियाराम मठ का जिक्र भी हुआ ! फिर क्या था, चाय खत्म करके गाड़ी उठाई और हथियाराम मठ जाने के लिए निकल पड़े, घर से चले तो शाम के साढ़े पाँच बज रहे थे ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि घर से इस मठ की दूरी लगभग 19 किलोमीटर है, घर से निकलकर सादात-जखनियाँ मार्ग से होते हुए हम मजुई चौराहे पर पहुंचे, यहाँ से बाएं मुड़कर बहरियाबाद के लिए निकल पड़े, दूरी 9 किलोमीटर है लेकिन बढ़िया मार्ग बना है तो 15 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगता, रास्ते में कुछ रिहायशी इलाके भी है लेकिन ये मार्ग अक्सर खाली ही रहता है ! बहरियाबाद एक बड़ा कस्बा है मुख्य मार्ग बाजार से होकर निकलता है इसलिए थोड़ा भीड़-भाड़ मिल जाती है इस बाजार में आपको खान-पान के कई विकल्प मिल जाएंगे, मुख्य मार्ग तिराहे पर जाकर खत्म होता है जहां एक पुलिस चौकी भी है ! यहाँ से बाएं जाने वाला मार्ग सैदपुर को चला जाता है, जो आगे जाकर वाराणसी-गोरखपुर मार्ग में मिल जाता है जबकि यहाँ से दाएं जाने वाला मार्ग रायपुर होता हुआ चिरैयाकोट को चला जाता है ! इसी मार्ग पर बहरियाबाद से 4 किलोमीटर आगे चलकर रायपुर में हथियाराम मठ जाने का रास्ता अलग होता है, रायपुर से इस मठ की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है !

हथियाराम मठ का प्रवेश द्वार

Thursday, July 8, 2021

मार्कन्डेय महादेव मंदिर की यात्रा (A Trip to Markandey Mahadev Temple, Kaithi)

शुक्रवार, 26 मार्च 2021

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

यात्रा के इस लेख में मैं आपको बनारस-ग़ाज़ीपुर मार्ग पर कैथी गाँव में स्थित मार्कन्डेय महादेव मंदिर के दर्शन करवाऊँगा, जो पूर्वाञ्चल का एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है ! तो हुआ कुछ यूं कि इस यात्रा पर जाने का विचार कल शाम को ही बन गया था इसलिए आज मैं छुट्टी पर था ! सुबह जल्दी उठकर सभी लोग समय से नहा-धोकर तैयार हुए और 8 बजे हम गाड़ी लेकर कैथी के लिए निकल पड़े, जो यहाँ से लगभग 30 किलोमीटर दूर है ! सादात से सैदपुर तक 2 लेन सड़क है, पहले ये मार्ग काफी संकरा मार्ग था लेकिन अब इसका विस्तार करके इसे थोड़ा चौड़ा कर दिया गया है, इस मार्ग पर यातायात के साधन बहुत ज्यादा नहीं है इसलिए अधिकतर निजी गाड़ियां ही दिखाई देती है ! सैदपुर में आकर ये मार्ग वाराणसी-गोरखपुर राजमार्ग में मिल जाता है, जो एक 4 लेन राजमार्ग है, पहले ये भी 2 लेन मार्ग था लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका विस्तारीकरण किया गया है, जिसके तहत इसे अब 4 लेन किया जा रहा है, अधिकतर जगह काम खत्म हो चुका है लेकिन टोल नाके के अलावा कुछ अन्य जगहों पर अभी काम जारी है ! गोमती नदी को पार करने के बाद कुछ दूर चलकर हम राजमार्ग को छोड़कर एक सहायक मार्ग पर चल दिए, ये मार्ग एक रिहायशी कस्बे से होता हुआ मार्कन्डेय महादेव मंदिर की ओर जाता है ! घर से यहाँ पहुँचने में हमें लगभग आधे घंटे का समय लगा और यहाँ से मंदिर पहुँचने में लगभग 10 मिनट ! मंदिर के पास पार्किंग की व्यवस्था भी है, जहां मात्र 20 रुपए का मामूली शुल्क देकर आप गाड़ी खड़ी कर सकते है ! 

मार्कन्डेय महादेव मंदिर का प्रवेश द्वार

Monday, July 5, 2021

ग़ाज़ीपुर के सादात में स्थानीय भ्रमण (Local Sight Seen in Sadat)

मंगलवार, 23 मार्च 2021

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

वैसे देखा जाए तो पर्यटन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के पूर्वाञ्चल में अपार संभावनाएं है यहाँ घूमने-फिरने की जगहें तो बहुत है लेकिन पर्यटकों की श्रेणी में बस कुछ चुनिंदा शहर ही है जिसमें वाराणसी, गोरखपुर और मिर्जापुर प्रमुख है ! पर्यटन की दृष्टि से पूर्वाञ्चल में घूमने के लिए अनेकों स्थान है, लेकिन जानकारी के अभाव और उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा उन स्थानों का सही ढंग से प्रचार-प्रसार ना कर पाना कहीं ना कहीं इसके लिए जिम्मेदार है ! इनमें से कुछ दर्शनीय स्थलों के बारे में हम इस यात्रा सीरीज में आगे बात करेंगे, लेकिन उससे पहले मैं आपको पूर्वाञ्चल से संबंधित कुछ जानकारी दे देता हूँ, वैसे तो मिर्जापुर वेब सीरीज देखने के बाद शायद ही कोई ऐसा होगा जिसके लिए पूर्वाञ्चल नाम नया हो ! बोली और रहन-सहन के आधार पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों को सम्मिलित करके एक अलग राज्य बनाने की मांग काफी समय से उठती रही है इसी क्षेत्र को पूर्वाञ्चल के नाम से जाना जाता है ! पूर्वाञ्चल में आने वाले शहरों में वाराणसी, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, ग़ाज़ीपुर, गोरखपुर, कुशीनगर, बलिया, भदोही, देवरिया, आजमगढ़, मऊ, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थ नगर और संत कबीर नगर शामिल है ! वैसे तो इनमें से हर शहर में घूमने के लिए कुछ न कुछ है लेकिन 2-3 शहरों को छोड़कर बाकि जगहें ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है ! वैसे अब तो पूर्वाञ्चल एक्स्प्रेस वे भी कुछ समय में शुरू होने जा रहा है जो लखनऊ से निकलकर पूर्वाञ्चल के अधिकतर शहरों से निकलता हुआ ग़ाज़ीपुर तक जाएगा ! मैं अलग-2 समय पर पूर्वाञ्चल के इन शहरों में जाता रहा हूँ और यात्रा की इस सीरीज में मैं आपको धीरे-2 इन शहरों के प्रसिद्ध स्थानों की सैर करवाऊँगा !

महावीर मंदिर के अंदर का एक दृश्य

Friday, July 2, 2021

पूर्वाञ्चल सड़क यात्रा – दिल्ली से ग़ाज़ीपुर (Poorvanchal Road Trip – Delhi to Ghazipur)

शुक्रवार, 19 मार्च 2021

पिछले साल कोरोना के कारण जब से देशभर में लॉकडाउन लगा, यात्राओं पर तो जैसे ग्रहण सा लग गया, साल भर कहीं भी घूमने जाना नहीं हो पाया ! घूमने के नाम पर सिर्फ फरीदाबाद से पलवल आना-जाना लगा रहा और ज्यादा कुछ हुआ तो घर के आस-पास किसी पार्क या नर्सरी का चक्कर लगा आए, लेकिन पूरे साल किसी भी लंबी यात्रा पर जाने का संयोग नहीं बना ! पूर्वाञ्चल रोड ट्रिप की योजना अचानक ही बनी, दरअसल, हुआ कुछ यूं कि मार्च में बच्चों की परीक्षाएं खत्म होने के बाद बच्चे कहीं घूमने जाने की जिद करने लगे ! कोरोना भी थोड़ा नियंत्रण में आने लगा था इसलिए सरकार ने भी लोगों के आवागमन पर लगी पाबंदियाँ हटा दी थी ! हमारा भीड़-भाड़ वाली किसी जगह पर जाने का मन नहीं था, इसलिए बच्चों के ननिहाल जाने का विचार हुआ, सोचा घूमने के साथ परिवार के लोगों से मुलाकात भी हो जाएगी ! अब योजना अचानक से बनी थी तो ट्रेन में कन्फर्म टिकट नहीं मिली और आखिरी समय में निजी गाड़ी से जाना निश्चित हुआ, इस नई गाड़ी पर ये हमारी पहली रोड ट्रिप थी ! दिन निर्धारित होते ही यात्रा की तैयारियां भी शुरू हो गई, वैसे तैयारी के लिए ज्यादा कुछ नहीं करना था बस कुछ कपड़े और जरूरत का बाकि सामान रखना था, जिसमें ज्यादा समय नहीं लगा, थोड़ी बहुत खरीददारी करनी थी, वो भी निबटा ली ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि इस लेख का मुख्य उद्देश्य पूर्वाञ्चल तक जाने के रास्ते और सड़क की जानकारी देना है, इसलिए जैसे-2 हम आगे बढ़ते जाएंगे, रास्तों के बारे में विस्तार से बताते चलेंगे, तो चलिए, यात्रा की शुरुआत करते है !

लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग पर लिया एक चित्र

Tuesday, June 29, 2021

अकबर का मकबरा - सिकंदरा (Tomb of Akbar, Sikandara)

रविवार, 01 अप्रैल 2018 

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

यात्रा के पिछले लेख में आप कीठम झील का भ्रमण कर चुके है, अब आगे, झील का भ्रमण करके बाहर आया तो मैं आगरा जाने वाले मार्ग पर चल दिया ! मेरा अगला पड़ाव आगरा के सिकंदरा में स्थित अकबर का मकबरा था, सूर सरोवर पक्षी विहार से सिकंदरा की दूरी महज 12 किलोमीटर है जिसे तय करने में मुझे 15-20 मिनट का समय ही लगा ! मुख्य मार्ग पर चलते हुए हमारे बाईं ओर सड़क किनारे स्थित इस मकबरे का प्रवेश द्वार दिखाई देने लगता है, थोड़ा आगे बढ़ने पर पार्किंग स्टैंड है, बगल में ही टिकट घर भी है ! सिकंदरा आगरा के व्यस्त इलाकों में आता है, वैसे तो यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए पुलिसकर्मी यहाँ हमेशा तैनात रहते है लेकिन फिर भी कभी-2 यहाँ भयंकर जाम लग जाता है ! अपनी स्कूटी पार्किंग में खड़ी करके मैंने टिकट खिड़की से जाकर मकबरे स्थल पर जाने के लिए एक प्रवेश टिकट लिया ! रविवार होने के बावजूद ना तो आज पार्किंग में भीड़ थी और ना ही टिकट खिड़की पर, जहां पार्किंग में गिनती की गाड़ियां दिखाई दे रही थी वहीँ टिकट खिड़की पर भी इक्का-दुक्का लोग ही खड़े थे ! मकबरे स्थल पर जाने का प्रवेश शुल्क 10 रुपए है और इतना ही शुल्क मुझे पार्किंग में स्कूटी के लिए देना पड़ा ! टिकट खिड़की से हटा तो दोपहर के साढ़े ग्यारह बज रहे थे, धूप तेज थी इसलिए मैं तेजी से प्रवेश द्वार की ओर चल दिया ! टिकट घर से मकबरे के प्रवेश द्वार तक जाने के लिए पक्का मार्ग बना है जिसके दोनों तरफ बड़े-2 कई मैदान है, जहां रंग-बिरंगे फूलों के अलावा अन्य पेड़-पौधे भी लगाए गए है !

सड़क किनारे से दिखाई देता अकबर के मकबरे का प्रवेश द्वार