Wednesday, October 18, 2017

उत्तराखंड का एक खूबसूरत शहर मसूरी – Mussoorie, A Beautiful City of Uttrakhand

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम दिल्ली से चलकर देहरादून में स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर और गुच्चुपानी गुफा देखने के बाद मसूरी जाने वाले मार्ग पर चल दिए । अब आगे, वैसे तो आपने मसूरी के बारे में पढ़ा ही होगा, बहुत से लोग तो घूम भी चुके होंगे । चलिए, आगे बढ़ने से पहले उत्तराखंड में स्थित इस शहर के बारे में थोड़ी जानकारी दे देता हूं । उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित यह हिल स्टेशन देहरादून से महज 35 किलोमीटर दूर है । समुद्र तल से 1880 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह पर्वतीय शहर दिल्ली से मात्र 290 किलोमीटर दूर है, यही वजह है कि मसूरी सप्ताहिक अवकाश पर दिल्ली और इसके आस पास से आने वाले पर्यटकों से भरा रहता है । ऐसे में यहां की भीड़-भाड़ को देखकर कभी-कभी तो माल रोड पर घूमते हुए ऐसा प्रतीत होता है जैसे आप दिल्ली के किसी व्यस्त इलाके में घूम रहे हो । लेकिन मसूरी के बढ़िया मौसम और इसके आस-पास फैले प्राकृतिक नजारों की मौजूदगी आपको एक सुखद अहसास देती है यही वजह है कि किसी भी मौसम मैं यहां आने वाले पर्यटकों की गिनती कभी कम नहीं होती ।

a view from hotel diamond
हमारे होटल की खिड़की से दिखाई देता एक दृश्य (A view from our Hotel)

Sunday, July 16, 2017

देहरादून का टपकेश्वर महादेव मंदिर और रॉबर्स केव (गुच्चुपानी) – Robbers Cave and Tapkeshwar Mahadev Temple of Dehradun

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017 

हमारा मसूरी जाने का विचार एकदम से ही बना था, दरअसल, हुआ कुछ यूँ कि पिछले महीने ऋषिकेश जाने से पहले मेरा विचार एक पारिवारिक यात्रा पर जाने का ही था लेकिन जब शौर्य की परिक्षाएँ ख़त्म होने के बाद स्कूल शुरू हो गए तो पारिवारिक यात्रा ख़तरे में पड़ गई ! इस बीच मुझे कुछ दोस्तों के ऋषिकेश जाने के बारे में पता चला तो आनन-फानन में मैं भी उनके साथ घूमने के लिए ऋषिकेश निकल गया ! ऋषिकेश से आए हुए तीन सप्ताह भी नहीं बीते थे कि एकाएक इस यात्रा का संयोग बन पड़ा, इस तीन दिवसीय यात्रा में हम देहरादून, मसूरी, धनोल्टी, चम्बा और ऋषिकेश होते हुए हरिद्वार आने वाले थे ! मसूरी और धनोल्टी तो मैं पहले भी जा चुका हूँ, लेकिन परिवार के साथ इन जगहों पर पहली बार ही जाना हो रहा था ! इस यात्रा में घूमने वाली अधिकतर जगहें मैं पहले से देख चुका था इसलिए यात्रा में कुछ नयापन लाने के लिए मेरा विचार कुछ नई जगहें तलाशना था ! आगरा में रहने वाले मेरे एक मित्र रितेश गुप्ता पिछले वर्ष चकराता गए थे, बातचीत के दौरान उन्होनें देहरादून में घूमने की कुछ जगहों का ज़िक्र किया तो मैने भी इन जगहों को अपनी यात्रा में शामिल कर लिया !

टपकेश्वर महादेव मंदिर का प्रवेश द्वार

Friday, June 23, 2017

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की सैर - दूसरी कड़ी (A Visit to Historical Monument of Delhi, Red Fort)

शुक्रवार, 26 मई 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप दिल्ली भ्रमण के दौरान लाल किला परिसर में मौजूद "वॉर मेमोरियल संग्रहालय (War Memorial Museum), ऐतिहासिक बावली (Baoli in Red Fort, Delhi) और दीवान-ए-आम (Diwan E Aam)" देख चुके है ! अब आगे, दीवान-ए-आम के पीछे एक बड़ा बगीचा है और बगीचे के उस पार है "रंग महल" (Rang Mahal) ! राजकीय आवासों में सबसे बड़े इस महल का प्रयोग मुगल काल में "शाही हरम" (Shahi Haram) के रूप में होता था, शाहजहाँ के राज में इसे "इम्तियाज़ महल" (Imtiyaz Mahal) के नाम से जाना जाता था ! प्यालीदार मेहराबों से युक्त ये महल 6 कक्षों में विभाजित था, इस महल के उत्तरी और दक्षिणी भाग को "शीशमहल" (Sheesh Mahal) के नाम से जाना जाता था ! शीशमहल की दीवारों और छतों के उपर शीशे के छोटे-2 सैकड़ों टुकड़े लगे हुए थे जो इनपर पड़ने वाले प्रकाश को परावर्तित कर एक मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करते थे ! इस महल के बीच में एक जल धारा भी बहती थी जिसे "नहर-ए-बहिश्त" यानि "स्वर्ग की जलधारा" कहते थे ! 
दीवान-ए-खास की एक झलक (A View of Diwan E Khas)

Monday, June 19, 2017

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की सैर - पहली कड़ी (A Visit to Historical Monument of Delhi, Red Fort)

शुक्रवार, 26 मई 2017

अगर आप दिल्ली भ्रमण पर निकले है और "लाल क़िला" (Red Fort) नहीं घूमे तो क्या खाक दिल्ली घूमे ? लाल किला घूमे बिना आपका दिल्ली भ्रमण अधूरा है, और हो भी क्यों ना, आख़िर दिल्ली का इतिहास जो जुड़ा है इस किले से ! दिल्ली भ्रमण पर चलते हुए आज मैं भी आपको इसी किले की सैर कराने लेकर चल रहा हूँ ! चलिए, शुरुआत करते है इस किले के इतिहास से, जिसका निर्माण पाँचवे मुगल बादशाह "शाहजहाँ" (Shahjahan) ने करवाया था ! वही शाहजहाँ जिन्हें "आगरा" में "ताजमहल" (TajMahal) के निर्माण के लिए जाना जाता है और जिसके शासनकाल में मुगल साम्राज्‍य अपनी समृद्धि के चरम पर था ! 1628 में गद्दी संभालने के बाद शाहजहाँ का मकसद अपने दादा अकबर की तरह अपनी सत्ता का विस्तार करना था, अपने शासनकाल के दौरान सन 1638 में शाहजहाँ ने अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय किया ! दरअसल, शाहजहाँ आगरा की बढ़ती भीड़-भाड़ से परेशान थे, उन्हें ये बिल्कुल पसंद नहीं थी ! इसी सिलसिले में शाहजहाँ ने "शाहजहानाबाद" नाम का एक शहर बसाया जिसे बाद में "पुरानी दिल्ली" के नाम से जाना गया !
दिल्ली के लाल किले की एक झलक (A View of Red Fort, Delhi)

Thursday, June 15, 2017

हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध और महाराणा प्रताप संग्रहालय (The Battle of Haldighati and Maharana Pratap Museum)

रविवार, 20 नवंबर 2016 

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यात्रा के पिछले लेख में आपने कुम्भलगढ़ के विश्वप्रसिद्ध किले के बारे में पढ़ा, किला देखने के बाद हम सब यहाँ से निकलकर अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव "हल्दीघाटी" की ओर चल दिए ! अब आगे, जब हम किले से चले थे तो दोपहर के 11:30 बज रहे थे, बढ़िया धूप खिली थी, यहाँ से हल्दीघाटी जाने के 3 मार्ग है, भगवान जाने, हमारे ड्राइवर को पता नहीं था, या वो दूसरे मार्ग खराब थे, वो हमें "बरवाडा" वाले लंबे मार्ग से लेकर गया ! हालाँकि, हमने गाड़ी किलोमीटर के हिसाब से आरक्षित नहीं करवाई थी लेकिन फिर भी वो हमें जिस मार्ग से लेकर गया उससे हल्दीघाटी की दूरी 68 किलोमीटर थी जबकि एक अन्य मार्ग से "कोशीवाड़ा" होते हुए ये दूरी महज 52 किलोमीटर थी ! खैर, जिस मार्ग से हम जा रहे थे, उसके किनारे दोनों ओर दूर-2 तक फैली ऊसर ज़मीन दिखाई दे रही थी और बीच में ये सड़क थी ! इस मार्ग पर जाते हुए रास्ते में कहीं कोई गाँव पड़ जाता तो कुछ लोग दिखाई दे जाते, और गाँव पार होते ही फिर वही सन्नाटा ! ऐसे ही चलते हुए हम एक गाँव के पास जाकर रुके, यहाँ हमने रास्ते में खाने-पीने का कुछ सामान लेने के लिए गाड़ी रोकी !


संग्रहालय के बाहर बनी एक प्रतिमा