Monday, December 11, 2017

केदारनाथ धाम की संध्या आरती (Evening Prayer in Kedarnath)

शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

पिछले लेख में आपने केदार घाटी में स्थित भैरवनाथ मंदिर के बारे में पढ़ा ! अब आगे, चाय पीने के बाद घूमते हुए हम मंदिर परिसर में पहुंचे ! मंदिर में इस समय आरती की तैयारियां चल रही थी, जो शाम साढ़े छह बजे शुरू होती है, अभी साढ़े पांच बज रहे थे, इसलिए हम टहलते हुए मंदिर के पीछे चल दिए ! मंदिर के ठीक पीछे हमने भीम शिला देखी, इस शिला के बारे में तो आप जानते ही होंगे, अगर नहीं जानते तो आपको बता दूं कि यही वो शिला है जिसने 2013 में केदारनाथ में आई त्रादसी के समय केदारनाथ मंदिर की रक्षा की थी ! स्थानीय लोग बताते है कि प्रलय से पहले यहाँ ये शिला नहीं थी, लेकिन 2013 में जब चोराबारी ताल के रास्ते प्रलय आई तो पता नहीं कहाँ से 25-30 फीट चौड़ा ये पत्थर मंदिर के ठीक पीछे आकर कुछ इस तरह रुक गया कि ऊपर से बहकर आ रहा मलवा इस पत्थर से टकराकर दाएं-बाएं मुड गया ! इस मलवे में बहुत सारा कीचड और बड़े-2 पत्थर बहकर आए थे जिसने केदार घाटी में भयंकर प्रलय मचाया था ! इस प्रलय में मंदिर तो पानी में डूब गया, लेकिन भीम शिला ने मुख्य इमारत को मलवे की वजह से कोई हानि नहीं होने दी !


केदारनाथ मंदिर में की गई सजावट

Tuesday, December 5, 2017

केदार घाटी में स्थित भैरवनाथ मंदिर (Bhairavnath Temple in Kedar Valley)

शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

यात्रा के पिछले लेख में आप केदारनाथ के दर्शन कर ही चुके है, अब आगे, दर्शन करने के बाद सभी लोगों को तेज भूख लगी थी, आखिरकार सुबह से हमने खाया ही क्या था ! हल्का-फुल्का खाते हुए ही हमने केदारनाथ की चढ़ाई चढ़ी थी ! रात्रि में रुकने का इंतजाम तो हम कर ही चुके थे, उस होटल में इस समय खाने की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए भोजन करने के लिए हम मंदिर के सामने एक होटल में जाकर रुके ! होटल क्या था, जलपान गृह था, जहाँ आपको चाय, पकोड़े, बिस्कुट, नमकीन और हल्का-फुल्का भोजन मिल जायेगा ! थोड़ी देर इन्तजार करने के बाद हमारा खाना आ गया, खाने का स्वाद तो पूछो ही मत, बस पेट भरने के लिए कुछ खाना था तो खा लिया, वरना खाना ज्यादा स्वादिष्ट नहीं था ! हमने दाल मंगाई थी, जो दाल परोसी गई, उसमें इतनी तेज मिर्च थी कि जैसे सारे होटल की मिर्च उस दाल में ही डाल दी हो ! खैर, दूसरी दाल आई, ये पहले से थोड़ी बेहतर थी, सबने भरपेट भोजन किया, इसी दुकान के बाहर मिठाइयों में लड्डू खूब सजा रखे थे ! छोटे-2 रंगीन लड्डू थे, पूछने पर पता चला 5 रूपए प्रति पीस, ऐसे ही मन भर गया, तो आगे बढ़ गए ! 


भैरवनाथ मंदिर का एक दृश्य (A View of Bhairavnath Temple)

Thursday, November 30, 2017

रामबाड़ा से केदारनाथ की पैदल यात्रा (A Trek from Rambada to Kedarnath)

शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

पिछले लेख में आप गौरीकुंड से रामबाड़ा पहुँचने तक की यात्रा के बारे में पढ़ चुके है, अब आगे, रामबाड़ा तक चलने में हमें कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन यहाँ से आगे बढे तो काफी खड़ी चढ़ाई थी ! थोड़ी दूर चलने के बाद हर मोड़ पर हमारी हिम्मत जवाब दे रही थी इसलिए हम 50-60 मीटर चलने के बाद रुक जाते, खड़े-2 थोड़ी देर आराम करते, फिर आगे बढ़ते ! ये सिलसिला अनवरत जारी रहा, इस बीच देवेन्द्र ये कहकर हमारी हिम्मत बंधा रहा था कि थोड़ी आगे जाने पर समतल मार्ग आ जायेगा, फिर ज्यादा परेशानी नहीं होगी ! सुबह जब हम सोनप्रयाग से चले थे तो मेरा विचार था कि देर शाम या रात तक हम केदारनाथ जाकर वापिस आ जायेंगे, लेकिन अब चढ़ाई करते हुए लगने लगा था कि आज वापसी करना शायद संभव ना हो ! जैसे-2 हम ऊँचाई पर पहुँचते जा रहे थे, आस-पास दिखाई देने वाले नजारों की ख़ूबसूरती भी बढती जा रही थी लेकिन थकान के कारण हालत ऐसी हो गई थी कि जेब से मोबाइल निकालकर फोटो खींचने तक की हिम्मत नहीं हो रही थी ! लेकिन इसी बीच देवेन्द्र शॉर्टकट मार्ग से होता हुआ हर दृश्य को अपने कैमरे में कैद करता हुआ तेजी से आगे बढ़ रहा था !

kedarnath temple
केदारनाथ मंदिर का एक दृश्य (A View of Kedarnath Temple)

Saturday, November 18, 2017

गौरीकुंड से रामबाड़ा की पैदल यात्रा (A Trek from Gaurikund to Rambada)

शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

दिनभर लम्बा सफ़र तय करके अच्छी थकान हो गई थी, इसलिए बिस्तर पर जाते ही नींद आ गई ! यहाँ बढ़िया ठण्ड थी गनीमत थी कि कमरे में गर्म कम्बल रखे थे ! रात को जितनी देर भी सोये, बढ़िया नींद आई, सोने से पहले ही हमने सुबह 4 बजे का अलार्म लगा दिया था ! अलार्म बजने से पहले ही नींद खुल गई, उठकर अलार्म बंद किया और बारी-2 से नहाने-धोने में लग गए ! मैं तो ब्रश करते हुए ही नीचे जाकर होटल वाले को 2 बाल्टी गरम पानी देने का कह आया था ! सुबह सोनप्रयाग से केदारनाथ जाने वाले यात्रियों की अच्छी भीड़ रहती है इसलिए यहाँ के होटलों के नीचे बनी खान-पान की दुकानें भी सुबह 4 बजे ही खुल जाती है ! मैं ब्रश करने के बाद गरम पानी के आने का इन्तजार करता रहा, इस बीच देवेन्द्र और मेरे पिताजी बारी-2 से ठन्डे पानी से स्नान कर चुके थे ! मैं गरम पानी लेने दोबारा नीचे गया, यहाँ आकर देखा कि गरम पानी के नाम पर तो यहाँ लूट मचा रखी है, 1 बाल्टी गरम पानी में ये लोग 2 बाल्टी ठंडा पानी मिलाकर, 3 बाल्टी पानी बना देते है और तीन लोगों को दे देते है ! पानी ऐसा कि आप एक बूंद भी ठंडा पानी ना मिला सकें, होटल वाले ने मुझे कुछ देर इन्तजार करने को कहा !


केदारनाथ जाते हुए रास्ते में लिया एक चित्र

Sunday, November 12, 2017

रुद्रप्रयाग से अगस्त्यमुनि मंदिर होते हुए सोनप्रयाग (A Road Trip from Rudrprayag to Sonprayag)

वीरवार, 12 अक्तूबर 2017

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

रुद्रप्रयाग से चले तो दोपहर के 3 बज रहे थे, आधे घंटे का सफ़र तय करके हम अगस्त्यमुनि मंदिर (Augustyamuni Temple) पहुंचे, समुद्रतल से 1000 मीटर की ऊँचाई पर मन्दाकिनी नदी के किनारे सड़क के दूसरी ओर स्थित ये मंदिर रुद्रप्रयाग से 19 किलोमीटर दूर है ! इस मंदिर को प्रसिद्द हिन्दू मुनि अगस्त्य ऋषि का घर माना जाता है, अगस्त्य ऋषि एक दक्षिण भारतीय मुनि थे जो जंगलों में विचरण करते हुए उत्तराखंड आए और सिला ग्राम में रहकर उन्होंने अनेक वर्षों तक तपस्या की ! इस दौरान उन्होंने यहाँ एक शिव मंदिर भी बनवाया जो बाद में अगस्त्येश्वर महादेव मंदिर (Augstyashwar Mahadev Temple) के नाम से प्रसिद्द हुआ ! प्रारंभ में तो ये मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में बना हुआ था, लेकिन बाद में जब इस मंदिर का पुनरुद्धार हुआ तो इसे वर्तमान स्वरुप दिया गया ! मंदिर के मुख्य भवन में अगस्त्य मुनि का कुंड और उनके शिष्य भोगाजित की प्रतिमा स्थित है ! ये सब जानकारी मंदिर परिसर में एक दीवार पर अंकित थी ! साल में एक दिन यहाँ मेला भी लगता है तब देश-विदेश से हज़ारों श्रद्धालु इस मेले में शामिल होने के लिए आते है, बैसाखी का त्यौहार भी यहाँ बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है !
अगस्त्यमुनि मंदिर का एक दृश्य (A View of Augstyamuni Temple)

Wednesday, November 8, 2017

रुद्रप्रयाग में है कोटेश्वर महादेव मंदिर (Koteshwar Mahadev Temple in Rudrprayag)

वीरवार, 12 अक्तूबर 2017

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

भगवान् शिव को समर्पित कोटेश्वर महादेव मंदिर (Koteshwar Mahadev Temple) रुद्रप्रयाग से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ! चार धाम की यात्रा पर निकले अधिकतर श्रद्धालु इस मंदिर को देखते हुए ही आगे बढ़ते है, गुफा के रूप में मौजूद ये मंदिर अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है ! कहते है कि केदारनाथ की ओर प्रस्थान करते हुए भगवान् शिव ने इस मंदिर के पास मौजूद गुफा में रूककर कुछ समय प्रार्थना की थी, गुफा में मौजूद सैकड़ों प्राकृतिक शिवलिंग इस बात को प्रमाणित करते है ! महाशिवरात्रि पर इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है ! इस गुफा के अलावा मंदिर के आस-पास माँ पार्वती, श्री गणेश जी, हनुमान जी, और माँ दुर्गा की जो मूर्तियाँ है, वो भी प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई है ! कहा जाता है कि भगवान् शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए इस मंदिर के पास मौजूद गुफा में रहकर कुछ समय बिताया था ! भस्मासुर ने शिवजी की आराधना करके ये वरदान प्राप्त किया था कि जिसके सिर पर भी वो हाथ रख देगा, वो उसी क्षण भस्म हो जायेगा ! भस्मासुर भी बड़ा तेज था, इस वरदान को आजमाने के लिए उसने भगवान् शिव को ही चुना !

koteshwar mahadev temple
कोटेश्वर महादेव मंदिर से दिखाई देता एक दृश्य (A view from Koteshwar Mahadev Temple)

Saturday, November 4, 2017

रुद्रप्रयाग में है अलकनंदा और मन्दाकिनी का संगम (Confluence of Alaknanda and Mandakini Rivers - RudrPrayag)

वीरवार, 12 अक्तूबर 2017

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

केदारनाथ यात्रा के पिछले लेख में आप रुद्रप्रयाग आते हुए माँ धारी देवी (Dhari Devi Temple) के दर्शन कर चुके है, गाडी लेकर हम कल्यासौड़ से चले तो 20 किलोमीटर चलने के बाद रुद्रप्रयाग पहुंचे ! रुद्रप्रयाग भी एक अच्छा और बड़ा शहर है, ये काफी ढलान पर बसा है, गाडी चलाते हुए या पैदल चलते हुए आपको इस बात का आभास हो जाता है ! शहर में प्रवेश करते ही मार्ग काफी संकरा और ढलान भरा हो जाता है, ढलान वाले मार्ग से होते हुए हम रुद्रप्रयाग के मुख्य बाज़ार में पहुँच गए ! बाज़ार के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा पीपल का पेड़ है जिसके नीचे एक छोटा मंदिर और एक मोटरसाइकिल स्टैंड भी है ! इस पीपल के पेड़ के पास ही रुद्रप्रयाग से केदारनाथ और बद्रीनाथ मार्ग पर जाने वाली बसें भी खड़ी होती है, अपनी चोपता यात्रा के दौरान बस का इन्तजार करते हुए हमने इस बाज़ार में काफी समय बिताया था ! यहाँ अच्छा-ख़ासा बाज़ार है, आपको अपनी ज़रूरत का लगभग सभी सामान इस बाज़ार में मिल जायेगा, आज हम यहाँ बिना रुके आगे बढ़ गए ! थोड़ी आगे बढ़ने पर मुख्य मार्ग दो भागों में विभाजित हो जाता है, बाईं ओर जाती सड़क पर आगे जाकर एक लोहे का पुल बना है पुल पार करने के बाद ये मार्ग केदारनाथ चला जाता है !

rudrprayag
रुद्रप्रयाग में संगम का एक दृश्य (A view of sangam in Rudrprayag)