Friday, June 25, 2021

आगरा का सूर सरोवर पक्षी विहार और कीठम झील (Soor Sarovar Bird Sanctuary and Keetham Lake, Agra)

रविवार, 01 अप्रैल 2018 

आज के इस लेख में मैं आपको मथुरा-आगरा के बीच में पड़ने वाले सूर सरोवर पक्षी विहार और कीठम झील की सैर करवाऊँगा, मुझे इस स्थान की जानकारी आगरा में रहने वाले मेरे मित्र रितेश गुप्ता से मिली थी ! 2-3 साल पहले आगरा से वापिस आते हुए एक बार इस सरोवर के बगल में स्थित डॉलफिन वाटर पार्क में हम कई घंटे रुके भी थे लेकिन जानकारी के अभाव में इस झील को देखना नसीब नहीं हो पाया था ! इस बात का मलाल काफी समय तक रहा इसलिए जब इस साल यहाँ जाने का मौका मिला तो मैं किसी भी हाल में ये मौका हाथ से नहीं देना जाने चाहता था ! बात 1 अप्रैल 2018 की है, गर्मी की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन फिर भी सुबह के मौसम में अभी इतनी ठंडक थी कि कहीं घूमने जाया जा सके ! रविवार का दिन होने के कारण मैं घर पर ही था, मौसम भी अच्छा था इसलिए आज मेरे पास इस झील को देखने जाने का एक सुनहरा मौका था ! नई स्कूटी लिए अभी महीना भी नहीं हुआ था, और पिछले कई दिनों से मन में विचार चल रहा था कि स्कूटी लेकर किसी सड़क यात्रा पर चला जाए, एक ऐसी यात्रा जिसमें सुबह घर से निकलकर दिनभर घूमकर शाम तक वापिस आया जा सके ! इसी बहाने स्कूटी की घुमक्कड़ी तो हो ही जाएगी, दुपहिया चलाने की अपनी शारीरिक क्षमता का आकलन भी हो जायेगा !

आगरा स्थित कीठम झील का एक दृश्य

घूमने जाने की जगह पहले ही निर्धारित हो चुकी थी इसलिए यात्रा वाले दिन मैं समय से नहा-धोकर तैयार हो गया और सुबह 7 बजे स्कूटी लेकर घर से निकल पड़ा ! घर से निकलते ही सबसे पहले मैं एक पेट्रोल पम्प पर जाकर रुका, यहाँ स्कूटी की टंकी फुल करवाने के बाद अगले कुछ ही मिनटों में मैं राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर पहुँच चुका था ! सुबह का समय होने के कारण सड़कों पर ज्यादा भीड़ नहीं थी और स्कूटी 60-70 की गति से दौड़ रही थी, मौसम में हल्की-2 ठंडक थी, इसलिए दुपहिया की सवारी का भरपूर आनंद आ रहा था ! आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि राष्ट्रीय राजमार्ग 2 दिल्ली से आगरा जाने वाला पुराना मार्ग है और कुछ वर्ष पहले तक दिल्ली से आगरा जाने का यही एकमात्र मार्ग था ! लेकिन अब यमुना एक्सप्रेस वे बन जाने से दिल्ली-नोयडा से आगरा जाने वाले अधिकतर वाहन इसी एक्सप्रेस वे से चले जाते है ! हालांकि, पहले ये सड़क इतनी बढ़िया नहीं थी जिसका जिक्र मैंने अपनी पिछली कई यात्राओं में किया भी है लेकिन फिल्हाल यहाँ सड़क विस्तारीकरण का काम चल रहा है जिसके तहत इस 4 लेन राजमार्ग को 6 लेन में बदला जा रहा है ! दिल्ली से मथुरा तक इस राजमार्ग पर पड़ने वाले अधिकतर चौराहों पर या तो फ्लाईओवर बन चुके है या निर्माणाधीन है !

मथुरा से पहले एक चित्र

रास्ते में लिया एक चित्र

मथुरा के पास नामयोग साधना मंदिर का एक दृश्य

जब ये बनकर तैयार हो जायेंगे तो इस मार्ग पर चलने वाले यात्रियों को कुछ हद तक तो यातायात की समस्या से निजात मिल जाएगी ! इस बीच स्कूटी की स्पीड की सूई बीच-2 में 60-70 से बढ़कर 80-85 के बीच भी पहुँच जा रही थी ! मैं तेजी से होडल की तरफ बढ़ रहा था, घर से 20 किलोमीटर चलने के बाद इस मार्ग का पहला टोल प्लाजा आया, यहाँ काफी भीड़-भाड़ थी लेकिन दुपहिया वाहनों के निकलने के लिए पर्याप्त जगह थी ! इस टोल पर गाड़ियों का एक तरफ का प्रवेश शुल्क 100 रूपए है जबकि दुपहिया वाहनों का प्रवेश निशुल्क है ! होडल पहुँचने में मुझे आधे घंटे से भी कम समय लगा, होडल से आगे बढ़ने पर कोसी है यहाँ से कोकिलावन के लिए रास्ता अलग हो जाता है, वैसे ये स्थान शनिदेव के मंदिर के लिए प्रसिद्द है, शनिवार के दिन तो यहाँ भक्तो का हुजूम उमड़ता है ! मुझे आज यहाँ नहीं जाना था इसलिए मैं सीधा ही चलता रहा, इस मार्ग पर पड़ने वाला अगला क़स्बा छाता है जो एक औद्योगिक क्षेत्र है यहाँ छोटे-बड़े कई उद्योग है ! छाता पार करने के बाद मैं सड़क किनारे स्थित एक कचोरी की दुकान पर जाकर रुका, यहाँ गर्मा-गर्म कचोरियाँ बनाई जा रही थी, जिसे देखकर मुंह में पानी आ गया ! वैसे अगर आप मथुरा घूमने आए हो और यहाँ के मशहूर पेड़ो और कचोरियों का स्वाद चखे बिना निकल गए तो ये बेमानी होगा !

भगवान् श्री कृष्ण की ये नगरी अपने मंदिरों और खान-पान के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्द है, फिर चाहे वो यहाँ की मिठाइयां हो, कचोरियाँ या केसर वाला दूध, सबका अलग ही स्वाद है ! कचोरी की एक प्लेट लेकर मैं दुकान के बाहर पड़ी एक कुर्सी पर बैठ गया, खाना तो मैं घर से खाकर ही निकला था इसलिए ज्यादा भूख नहीं थी फिर भी कचोरियों का स्वाद तो लेना ही था ! कचोरी खाकर यहाँ से चला तो एक बार फिर से मैं राष्ट्रीय राजमार्ग पर चढ़ गया और जिस फ्लाईओवर पर मैं इस समय चल रहा था उसके ठीक नीचे से वृन्दावन जाने का मार्ग गुजर रहा था ! कुछ ही देर में मथुरा भी पार हो गया और फिर से टोल प्लाजा आया लेकिन दुपहिया वाहनों को यहाँ भी कुछ नहीं देना था ! हालांकि, गाड़ियों वाली लाइन में अच्छी-खासी भीड़ थी, लेकिन दुपहिया वाहनों को कहीं तो फायदा मिलता ही है ! टोल पार करने के बाद मैं तेजी से आगरा की ओर बढ़ चला, इस बीच सड़क के बाईं ओर एक फ्लाईओवर ऊपर जा रहा था, जिसपर ग्वालियर की दूरी लिखी थी ये आगरा बाईपास था जो धोलपुर होता हुआ ग्वालियर को चला जाता है ! मैं इस फ्लाईओवर के नीचे से निकलकर सीधा ही चलता रहा, थोड़ी दूर चलने पर सड़क किनारे बाईं ओर कीठम सूर सरोवर पक्षी विहार का एक बोर्ड दिखाई दिया !

सूर सरोवर पक्षी विहार और कीठम झील का प्रवेश द्वार

पक्षी विहार में अंदर जाने का मार्ग 

प्रवेश द्वार के पास लिखी कुछ जानकारियाँ 

मुख्य प्रवेश द्वार से सीधा अन्दर जाता एक मार्ग दिखाई दे रहा था, द्वार के पास ही उद्यान में जाने का टिकट घर है ! आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि इस उद्यान में जाने का 20 रूपए का एक मामूली शुल्क लगता है जिसका टिकट यहीं प्रवेश द्वार पर बने कार्यलय से मिलता है ! इसके अलावा अगर आपको अन्दर कीठम झील में नौकायान का आनंद लेना है तो उसके लिए भी आपको यहीं से टिकट लेनी होगी ! गेट के पास स्थित बोर्ड पर अंकित जानकारी के अनुसार यहाँ 2 सीटर और 4 सीटर पेडल बोट के अलावा मोटर बोट की सुविधा भी है लेकिन मुझे तो अन्दर पेडल बोट ही दिखाई दी ! वैसे नौकायान के लिए सवारी पूरी ना होने की स्थिति में आप नौका में निर्धारित सीटों के अनुसार किराया देकर अकेले भी नौकायान का आनंद ले सकते है ! ये उद्यान पक्षी प्रेमियों के लिए तो स्वर्ग समान है यहाँ आपको कई दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी देखने को मिल जायेंगे, इसके अलावा इस उद्यान में एक भालू संरक्षण केंद्र भी स्थापित किया गया है जहाँ आस-पास से पकडे गए भालुओं को उपचार और संरक्षण के लिए लाया जाता है और फिर ठीक हो जाने पर उन्हें यहाँ से दूर ले जाकर घने जंगलों में छोड़ दिया जाता है ! इस भालू संरक्षण केंद्र में जाने के लिए भी अलग से 20 रूपए का प्रवेश शुल्क लगता है, वैसे तो इस उद्यान में अन्दर जो भी क्रिया-कलाप है उन सबका टिकट यहीं प्रवेश द्वार पर ही मिलता है, लेकिन भालू संरक्षण केंद्र का टिकट आप अन्दर से भी ले सकते है !

झील की तरफ जाने का मार्ग

सूर सरोवर उद्यान में जाने का मार्ग

मुख्य प्रवेश द्वार से अन्दर जाने पर शुरुआत में सड़क किनारे कंटीले पेड़ लगे है लेकिन जैसे-2 अंदर चलते जाएंगे, जंगल भी घना होता जाएगा ! लगभग 2 किलोमीटर चलने के बाद सड़क किनारे बाईं ओर कीठम झील दिखाई देने लगती है, पेड़ों के बीच से दिखाई देती झील किसी का भी मन मोह लेती है, मन करता है झील किनारे बैठकर घंटो इसकी ख़ूबसूरती को निहारते रहो ! इस उद्यान में बंदरों का खूब आतंक है सड़क पर चलते हुए आपको ये बन्दर उछल-कूद करते दिख जायेंगे ! इसलिए अलावा कीठम झील के किनारे आपको अलग-2 प्रजातियों के पक्षी भी देखने को मिलेंगे, अगर आपको पक्षियों की जानकारी है तो आप यहाँ आकर निराश नहीं होंगे ! सड़क किनारे रूककर मैंने कुछ देर इस झील के प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद लिया और फिर आगे बढ़ने पर मुझे अपनी दाईं ओर भालू संरक्षण केंद्र का प्रवेश द्वार दिखाई दिया, यहाँ दिनभर भालुओं को लाने वाली गाडी का आवागमन लगा रहता है ! भालू संरक्षण केंद्र के इस प्रवेश द्वार पर कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके ! प्रवेश द्वार के बाहर ही एक कैंटीन भी है जहाँ आपको खान-पान की अधिकतर वस्तुएं मिल जाएँगी ! भालू संरक्षण केंद्र में जाने से पहले मैं उद्यान में जाने वाले मार्ग पर आगे तक जाकर एक चक्कर लगा आया, ये मार्ग झील के किनारे-2 चलता है और आगे जाकर इस मार्ग पर कई जगहों से झील का शानदार दृश्य दिखाई देता है !

सूर सरोवर उद्यान में लिया एक चित्र

झील किनारे जानकारी देता एक बोर्ड

मार्ग से दिखाई देता कीठम झील का एक दृश्य

भालू संरक्षण केंद्र के बाहर का एक दृश्य

भालू संरक्षण केंद्र के सामने

जंगल में एक बोर्ड पर अंकित जानकारी के अनुसार 713 हेक्टेयर में फैले इस उद्यान की स्थापना 1991 में की गई थी ! इस उद्यान को 2 हिस्सों में बांटा गया है जिसमें से कीठम झील वाला भाग 403 हेक्टेयर में फैला है जबकि सूरदास वन 310 हेक्टेयर में फैला है ! झील में जगह-2 वाच टावर बनाए गए है जहाँ बैठकर वन विभाग के कर्मचारी इस घने वन के अलग-2 क्षेत्रों का जायजा लेते है ! मुख्य मार्ग से अन्दर जाने पर एक मार्ग दाईं ओर चला जाता है, इस मार्ग पर आगे जाकर सूर कुटी है जबकि इस कुटी के आस-पास फैला सारा जंगल सूरदास वन के नाम से जाना जाता है ! यहाँ भी जंगली जानवरों का आवागमन लगा ही रहता है इसलिए अगर आप कभी यहाँ आए तो सुरक्षा का विशेष ध्यान रखे और खुले जंगल में ज्यादा अन्दर ना जाएँ ! प्री-वेडिंग शूट के लिए भी ये उद्यान काफी लोकप्रिय है, शादी के सीजन में यहाँ रोजाना 2-3 जोड़े तो प्री-वेडिंग शूट के लिए आ ही जाते है ! जिस समय मैं इस उद्यान में भ्रमण कर रहा था एक जोड़े की प्री-वेडिंग शूट चल रही थी जबकि एक अन्य जोड़े को मैंने वापसी में देखा जो अपने साजो-सामान के साथ अन्दर जा रहे थे ! वैसे ये उद्यान प्रेमी-युगलों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है, इन प्रेमी-युगलों में अधिकतर स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी ही होते है जो साथ में समय बिताते हुए इस उद्यान में जगह-2 दिखाई दे जायेंगे !

झील किनारे पक्षी की जानकारी देता एक बोर्ड

पक्षी विहार के अंदर का एक दृश्य

पक्षी की जानकारी देता एक अन्य बोर्ड

पक्षी विहार का मानचित्र

पक्षी विहार के अंदर का एक दृश्य

पक्षी विहार के अंदर का एक दृश्य

झील के अंदर का एक दृश्य

स्कूटी एक कच्चे मार्ग से उतारकर मैं झील की ओर जाने वाले एक अन्य मार्ग पर चल दिया, कुछ दुपहिया चालक इसी मार्ग से अन्दर जा रहे थे शायद ये लोग अक्सर यहाँ आते होंगे तभी इन्हें अन्दर जाने वाले इन रास्तों का पता है ! कुछ दूर जाने पर ये रास्ता कंटीली झाड़ियों के बीच से होकर निकलता है जहाँ वैसे तो रास्ते का पता नहीं चलता लेकिन वाहनों की आवाजाही से बने टायरों के निशान से रास्ते का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है ! झील के किनारे थोडा पहले जाकर ये मार्ग ख़त्म हो जाता है, यहाँ स्कूटी खड़ी करके मैं कुछ कदम चलकर झील किनारे पहुंचा, यहाँ से इस झील का जो नज़ारा दिखाई देता है वो वाकई काबिले तारीफ़ है ! यहाँ से आस-पास बने कुछ वाच टावर भी दिखाई देते है, जिनपर चढ़ने के लिए सीढ़ियाँ लगी है ! यहाँ के शांत वातावरण में बैठकर कुछ देर के लिए तो मानसिक थकान से राहत मिल ही जाती है, झील के किनारे कुछ देर बिताने के बाद मैं जंगल से बाहर आकर भालू संरक्षण केंद्र के पास पहुंचा ! प्रवेश टिकट लेकर मैं भालू संरक्षण केंद्र में दाखिल हुआ, प्रवेश द्वार पर ही मेरे साथ एक गार्ड को अन्दर भेज दिया गया, जो मुझे भालू संरक्षण केंद्र तक लेकर जाने वाला था ! पैदल चलते हुए वो मुझे हिदायतें देता रहा, कि यहाँ घूमते हुए क्या-2 सावधानियाँ बरतनी है, क्या करना है और क्या नहीं करना, वगेरह-2 ! वो बोला, अगर जंगल में कोई जानवर दिखाई दे तो शोर नहीं मचाना है, किसी जानवर को पत्थर नहीं मारना है और भी कई हिदायतें उसने मुझे दी !

भालू संरक्षण केंद्र में जाते हुए

भालू संरक्षण केंद्र में जाते हुए

भालू संरक्षण केंद्र का एक दृश्य

आखिरकार भालू दिख ही गए

मैं उसकी हाँ में हाँ मिलाता रहा, अंत में जब वो चुप हो गया तो मैं बोला, यहाँ कोई जानवर दिखाई भी देगा या मुझे ऐसे ही अन्दर ले जा रहे हो ! ये सुनकर उसने मुझे गुस्से भरी निगाहों से देखा और बोला, बाकि जानवरों का तो पता नहीं लेकिन भालू ज़रूर दिखाई देगा ! इतने में ही मुझे जंगल में विचरण करता एक बारहसिंघा दिखाई दिया, जो पलक झपकते ही आँखों से ओझल हो गया, बन्दर तो अन्दर प्रवेश करते ही दिखाई दे दिए थे ! मैंने इस जंगल में एक सांप भी देखा, लेकिन असली मजा तो तब आया जब लोहे की जाली से बने एक मचान पर जाकर मैंने भालू देखे, एक खुले क्षेत्र में 2 भालू टहल रहे थे, इतने करीब से मैंने भालू पहली बार देखे थे ! एक भालू चींटो के बिल से निकाल कर बड़े वाले चींटे खा रहा था तो वहीँ उसका साथी धूप का आनंद ले रहा था, मन तो करता है यहाँ घंटों बैठ कर भालुओं की हरकतों को देखते रहो लेकिन यहाँ संरक्षण केंद्र में समय की बंदिशों को देखते हुए कुछ समय बिताने के बाद मैंने वापसी की राह पकड़ी ! वापिस आते हुए मैं सूर कुटी की ओर भी गया, लेकिन वहां लोगों का निवास था इसलिए मैं बाहर से ही कुछ फोटो लेकर आ गया ! 15 मिनट बाद मैं पक्षी विहार से बाहर आकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अपने अगले पड़ाव सिकंदरा की ओर बढ़ रहा था जो यहाँ से ज्यादा दूर नहीं था ! तो दोस्तों, कीठम झील के इस लेख पर फिल्हाल यहीं विराम लगाता हूँ, अगले लेख में आपसे फिर मुलाकात होगी जहाँ मैं आपको सिकंदरा का भ्रमण करवाऊंगा !

जंगल में से झील किनारे जाने का मार्ग 

जंगल में से झील किनारे जाने का मार्ग 

जंगल में से झील किनारे जाने का मार्ग 

झील का एक और दृश्य

झील किनारे से लिया एक चित्र

झील से वापिस आते हुए

सूर कुटी पार्क जाने का मार्ग

झील से वापिस आते हुए


सूर कुटी विहार में लिया एक चित्र

सूर कुटी विहार से वापिस आते हुए 

सूर कुटी विहार से बाहर आते हुए 

क्यों जाएँ (Why to go Agra): अगर आपको ऐतिहासिक इमारतें देखने का शौक है और साप्ताहिक अवकाश पर दिल्ली के पास कहीं घूमने जाने का विचार बना रहे है तो आगरा आपके लिए एक बढ़िया विकल्प है ! 

कब जाएँ (Best time to go Agra): वैसे तो आप साल के किसी भी महीने में आगरा जा सकते है लेकिन गर्मी के मौसम में यहाँ दिल्ली जैसी ही गर्मी पड़ती है और तपती दोपहरी में आगरा के ऐतिहासिक इमारतों के पत्थर खूब जलते है, कुछ इमारतों में तो नंगे पैर भी चलना पड़ता है ! गर्मी के मौसम में किले घूमने में भी परेशानी ही होती है ! बेहतर रहेगा आप यहाँ ठंडे मौसम में ही घूमने आए, सितंबर से फ़रवरी यहाँ आने के लिए बढ़िया मौसम है !

कैसे जाएँ (How to reach Agra): आप दिल्ली से आगरा सड़क या रेल किसी भी मार्ग से जा सकते है दिल्ली से आगरा के लिए नियमित अंतराल पर ट्रेने चलती रहती है ! जबकि अगर आप सड़क मार्ग से भी आगरा जा सकते है यमुना एक्सप्रेस वे शानदार राजमार्ग है ! जहाँ ट्रेन से जाने में आपको 3-4 घंटे का समय लगेगा वहीं आप एक्सप्रेस वे से ढाई से तीन घंटे में आगरा पहुँच जाओगे ! इस एक्सप्रेस वे पर रफ़्तार की वजह से अमूमन दुर्घटनाएँ होती रहती है इसलिए इस मार्ग पर चलते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतें !

कहाँ रुके (Where to stay in Agra): आगरा उत्तर प्रदेश का एक प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र है दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताज महल को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों सैलानी आते है ! इसलिए आगरा में रुकने के लिए होटलों की भी कोई कमी नहीं है आपको यहाँ 600 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक के होटल मिल जाएँगे !


क्या देखें (Places to see in Agra): आगरा में देखने के लिए जगहों की भी कोई कमी नहीं है लोग यहाँ ताज महल के अलावा लाल किला, सिकंदरा, महताब बाग, ताज नेचर वॉक, जामा मस्जिद, बुलंद दरवाजा और फतेहपुरी सीकरी घूमने आते है ! दिल्ली से आगरा आते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर आगरा से 20 किलोमीटर पहले कीठम लेक नामक एक झील है ये भी देखने के लिए एक शानदार जगह है ! इसी मार्ग पर आगे चलने पर डॉल्फिन वॉटर पार्क है यहाँ भी कुछ समय आप बिता सकते है जबकि थोड़ी ओर आगे बढ़ने पर गुरु का ताल नाम का एक गुरुद्वारा भी है ! ये सभी जगहें शानदार है, जो आपकी इस यात्रा को यादगार बना देंगी !

अगले भाग में जारी...

आगरा यात्रा
  1. आगरा का सूर सरोवर पक्षी विहार और कीठम झील (Soor Sarovar Bird Sanctuary and Keetham Lake, Agra)
  2. अकबर का मकबरा - सिकंदरा (Tomb of Akbar, Sikandara) 
  3. आगरा के ताजमहल की एक सड़क यात्रा  (A Road Trip to City of Taj, Agra)

No comments:

Post a Comment