Friday, November 27, 2015

श्रीनगर यात्रा - उड़ान भरने से पहले का सफ़र (Pre-Departure Journey)

सोच रहा हूँ इस यात्रा वृतांत की शुरुआत कैसे करूँ ? चलिए अपने पुराने अंदाज़ में ही शुरू करता हूँ ! हर बार की तरह इस यात्रा पर जाने की योजना भी काफ़ी पहले ही बन गई थी ! बात इसी साल जून की है जब अलग-2 कंपनियाँ प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए हवाई यात्राओं पर विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देने में लगी थी ! ऐसी ही एक योजना के तहत पिछली बार मेरे कई मित्रों ने अलग-2 गंतव्यों के लिए हवाई टिकटें आरक्षित करवाई थी ! अब तक मैं यही सोचता था कि पता नहीं ये टिकटें सही होती भी है या इनमें कुछ झोल-झाल होता है और यात्रा के समय कुछ अतिरिक्त शुल्क देना होता है ! पर दोस्तों से मिली जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत मिलने वाले टिकट काफ़ी सस्ते होते है, विमान कंपनिया खाली सीटों को भरने के लिए ऐसा करती है ! इनका मत होता है कि विमान में बची सीटों को खाली ले जाने से अच्छा है उन्हें सस्ते दाम पर बेच देना !

हवाई अड्डे जाते हुए रास्ते में लिया एक चित्र (Airport Link Metro)


इस तरह इन्हें भी मुनाफ़ा हो जाता है और यात्रियों को भी काफ़ी सुविधा हो जाती है ! भगवान की कृपा से मुझे अभी तक हवाई यात्रा करने के सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ था इसलिए इस बार मैने भी सोच रखा था कि अबकी बार ऐसी कोई योजना आई तो मैं भी कहीं घूमने जाने की अपनी हवाई टिकट करवा ही लूँगा ! पर कहाँ की, ये सुनिश्चित करना अपने आप में एक बड़ा सवाल था, अपनी खोजबीन के दौरान मैं इस योजना में मिलने वाले टिकटों के बारे में काफ़ी खंगाल चुका था ! मेरा विचार किसी ऐसी जगह की हवाई यात्रा करने का था जहाँ ट्रेन से या तो जाया ही ना जा सके या फिर कोई ऐसी जगह जहाँ ट्रेन से जाने में 2-3 दिन लगते हो ! इस समय दक्षिण भारत के कुछ स्थान मेरी सूची में सबसे उपर थे जिसमें गोआ और ऊटी प्रमुख थे ! अब तक की खोजबीन के दौरान मैं इस बात से अच्छी तरह वाकिफ़ हो चुका था कि गोआ और ऊटी मेरे अलावा अन्य पर्यटकों की श्रेणी में भी उच्च स्थान पर ही आते है इसलिए योजना के तहत इन जगहों की हवाई टिकटें मिलना अपने आप में कोई जंग जीतने वाली बात थी !

ऐसी किसी भी परिस्थिति से निबटने के लिए मैने दो योजनाओं पर काम करना शुरू किया ! पहली योजना के तहत मैं गोआ, ऊटी या फिर बागड़ोगरा की टिकटें लेने वाला था पर इस योजना के विफल होने के डर से मैने एक अन्य योजना भी बना रखी थी जिसके तहत में श्रीनगर या उदयपुर की टिकटें आरक्षित करवाता ! धीरे-2 दिन बीतते रहे और मैं अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त रहा, इस दौरान सस्ती टिकटों वाली एक-दो योजनाएँ आई भी और चली भी गई, पर मुझे काफ़ी बाद में पता चलता और मुझे कहीं की भी टिकट नहीं मिली ! फिर एक रविवार को सुबह जब मुझे एक मित्र अतुल अग्रवाल ने सस्ती टिकटों के बाबत जानकारी दी तो मैने बिना देरी किए अपने आने-जाने के लिए श्रीनगर की टिकटें आरक्षित करवा ली ! ये टिकटें आरक्षित करवाने से पहले मैने अपने एक-दो मित्रों से इस यात्रा पर साथ चलने के लिए पूछा भी पर किसी ने भी सहमति नहीं दी इसलिए सिर्फ़ अपनी ही टिकट करवाई ! 

अभी जून का अंतिम सप्ताह चल रहा था और इस यात्रा के लिए मैने अक्तूबर की टिकटें आरक्षित करवाई थी ! इस तरह देखा जाए तो इस यात्रा पर जाने में अभी 3 महीने से भी अधिक का समय था ! श्रीनगर की डल झील और हाउसबोट के बारे में यार-दोस्तों से काफ़ी सुन रखा था, मेरे कुछ मित्र पिछले वर्ष नवंबर में श्रीनगर गए थे और उस दौरान उन्होने वहाँ बर्फ़बारी का भी जमकर लुत्फ़ उठाया था ! हालाँकि अक्तूबर में तो श्रीनगर में बर्फ़बारी देखने को नहीं मिलती, पर वहाँ घूमने के लिए ये माह भी काफ़ी अच्छा है ! शुरुआत में मैने सोचा था कि इस बार इन सस्ती टिकटों के माध्यम से श्रीनगर घूम लेता हूँ अगर अनुभव बहुत अच्छा नहीं भी रहा तो इस हवाई यात्रा का आनंद तो ले ही लूँगा ! इस यात्रा के लिए अभी से तैयारियाँ करने का तो सवाल ही नहीं था, सोचा आधा सितंबर बीतने के बाद तैयारियाँ शुरू करूँगा ! क्या पता इस दौरान किसी अन्य यात्रा पर जाने का संयोग भी बन जाए !

पर ये क्या, जैसे-2 यात्रा का दिन पास आता जा रहा था, श्रीनगर में फैल रही अशांति की खबरों से मेरी ये यात्रा खटाई में पड़ती दिखाई दे रही थी ! यही सोच कर मैने श्रीनगर में अपने रुकने के लिए होटल भी आरक्षित नहीं करवाया ! मैने सोच लिया था कि अगर अगले कुछ दिनों में घाटी का माहौल ठीक नही हुआ तो इस यात्रा को स्थगित कर दूँगा ! वैसे अब तक तो मैं अकेला ही इस यात्रा पर जाने वाला था पर टिकटें आरक्षित करवाने के कुछ दिन बाद हितेश ने भी इस यात्रा पर मेरे साथ चलने के लिए अपनी इच्छा दिखाई ! इसलिए कुछ दिनों बाद जुलाई के अंतिम सप्ताह में ऐसी ही एक योजना के तहत मैने उसके लिए भी श्रीनगर की टिकटें आरक्षित करवा दी, हालाँकि हितेश की टिकटें मेरी टिकटों से थोड़ा महँगी थी ! इस तरह एक बार फिर मेरा ये तन्हा सफ़र तन्हा होते-2 रह गया ! 

समय ने हमारा साथ दिया और घाटी का माहौल ज़्यादा नहीं बिगड़ा, कुछ दिन पहले तक जहाँ घाटी में फैली अशांति समाचार चैनलों की सुर्खियाँ बटोर रही थी वही यात्रा का दिन पास आते-2 वहाँ के हालात सामान्य हो गए ! इसलिए यात्रा पर जाने से दो दिन पहले हमने वहाँ रहने के लिए पहले दो दिन एक हाउसबोट में और अगले दो दिन एक अन्य होटल में कमरा आरक्षित करवा लिया ! हालाँकि, हाउसबोट में रहने का हमारा अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा, जबकि होटल में रुकना एक सुखद अनुभव था ! वो अलग बात है कि यात्रा सीजन ना होने के कारण हमें होटल और हाउसबोट आधे दामों में मिल गए ! वैसे दो दिन हाउसबोट और दो दिन होटल में रुकने का सुझाव मेरा ही था वरना हितेश का बस चलता तो वो शायद चारों दिन उसी हाउसबोट में रुकने का इंतज़ाम करवा देता !

निर्धारित दिन हम दोनों इस यात्रा पर जाने के लिए सुबह 8 बजे अपने घर से निकल लिए ! हम ठीक समय पर पलवल बस अड्डे पहुँचे जहाँ बल्लभगढ़ जाने वाली एक हरियाणा परिवहन की बस तैयार खड़ी थी ! इसी बस में सवार होकर हम दोनों अगले आधे घंटे में बल्लभगढ़ पहुँच गए ! बस से उतरते ही एक ऑटो में सवार होकर एस्कोर्ट्स मुजेसर मेट्रो स्टेशन के लिए चल दिए ! वैसे, दिल्ली मेट्रो के फरीदाबाद तक आ जाने से हमें काफ़ी सुविधा हो गई है, हालाँकि, हम लोगों के लिए दिल्ली जाने का सबसे सस्ता और टिकाऊ साधन अब भी लोकल ट्रेन ही है, जो कम समय और धन में ही दिल्ली पहुँचा देती है ! पर इन दिनों पलवल-दिल्ली रेलमार्ग पर इंटरलॉकिंग का काम चल रहा था जिस कारण इस मार्ग पर गिनती की सवारी गाड़ियाँ ही चलाई जा रही थी ! अच्छा हुआ जो यहाँ मेट्रो सेवा बहाल हो चुकी है वरना बस से दिल्ली जाने में तो हमारा तेल निकल जाता ! 

बल्लभगढ़ से मेट्रो स्टेशन तक ऑटो से पहुँचने का किराया प्रति व्यक्ति 10 रुपए लगा ! यहाँ स्टेशन के बाहर ऑटो से उतरे और पैदलगामी पुल पार करके मेट्रो परिसर में प्रवेश किया ! हम दोनों के पास मेट्रो कार्ड थे इसलिए टोकन लेने के लिए कतार में नहीं लगना पड़ा, वरना थोड़ा समय यहाँ भी बर्बाद होता ! वैसे यहाँ से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने के लिए 27 रुपए का टोकन लगता है, कार्ड होने से हमें इस यात्रा पर 10 प्रतिशत की छूट भी मिल गई ! यहाँ अपना सारा सामान चेक करवाने के बाद मशीन में मेट्रो कार्ड दिखाकर हम दोनों केन्द्रीय सचिवालय जाने वाली मेट्रो के लिए प्लॅटफॉर्म पर पहुँच गए ! ये इस लाइन का पहला स्टेशन था इसलिए हमें आसानी से सीटें मिल गई ! यहाँ से मेट्रो में सवार होकर दिल्ली के लिए प्रस्थान किया और लगभग अगले एक घंटे में हम दोनों नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पहुँच गए ! 

इस दौरान हमने केन्द्रीय सचिवालय में एक मेट्रो बदली, फरीदाबाद से आने वाली मेट्रो केंद्रीय सचिवालय तक ही थी, इसलिए यहाँ हम गुड़गाँव से दिल्ली जाने वाली दूसरी मेट्रो में सवार होकर नई दिल्ली पहुँच गए ! नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से इंदिरा गाँधी हवाई अड्डा जाने के लिए दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन है, ये मेट्रो किसी अन्य मेट्रो की अपेक्षा काफ़ी तेज चलती है और इस मार्ग पर स्टेशन भी काफ़ी कम है ! इस मार्ग पर पड़ने वाले स्टेशन है नई दिल्ली, शिवाजी स्टेडियम, धौला कुआँ, दिल्ली एरोसिटी, इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट और द्वारका सेक्टर 21 ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि उपर बताई गई हवाई अड्डे तक जाने वाली मेट्रो में सुविधाओं के एवज में किराया भी काफ़ी अधिक है ! नई दिल्ली से दिल्ली एरोसिटी जाने का हमारा किराया 40 रुपए लगा, जबकि इंदिरा गाँधी हवाई अड्डे तक इस मेट्रो का किराया 50 रुपए है !

हमारा मेट्रो कार्ड इस मार्ग पर भी मान्य था, हालाँकि यहाँ किराए में छूट नहीं मिली जबकि फरीदाबाद से दिल्ली आते हुए मिली थी ! वैसे दिल्ली मेट्रो ने अभी पिछले महीने ही इस मार्ग पर चलने वाली मेट्रो के किराए में 50 प्रतिशत तक कटोती की है, इसका मतलब है कि पहले यहाँ का किराया वर्तमान किराए से दुगुना यानी 80 रुपए रहा होगा ! खैर, ये मार्ग नई दिल्ली से शुरू होकर धौला कुआँ, दिल्ली एयरपोर्ट होते हुए द्वारका सेक्टर 21 तक जाता है ! यात्रियों की संख्या को देखते हुए इस मार्ग पर मेट्रो 15-15 मिनट के अंतराल पर चलती है ! ये भी हो सकता है जब भीड़ ज़्यादा रहती हो तो ट्रेनों के बीच का ये समय अंतराल कम हो जाता हो ! हालाँकि, इस मेट्रो में ज़्यादातर यात्री एयरपोर्ट जाने वाले ही होते है, अधिक यात्री ना होने की वजह से दिल्ली मेट्रो ने इस रूट पर किरायों में अच्छी-ख़ासी कटौती की है ताकि द्वारका जाने वाले यात्री भी जल्दी पहुँचने के लिए दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन को छोड़कर एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का प्रयोग करे ! 

वैसे किराए में 50 प्रतिशत कटौती होने के बाद भी इस मार्ग से द्वारका जाने का किराया ब्लू लाइन वाली मेट्रो से अभी भी दुगुना है जिस कारण द्वारका जाने वाली गिनती की सवारियाँ ही इस मार्ग का प्रयोग करती है ! नई दिल्ली से इस मेट्रो में सवार होकर हम दोनों अगले 15 मिनट में दिल्ली एरोसिटी मेट्रो स्टेशन पहुँच गए ! घरेलू हवाई अड्डे (डोमेस्टिक एयरपोर्ट) जाने के लिए आपको दिल्ली एरोसिटी उतरना होता है, यहाँ मेट्रो स्टेशन के बाहर से ही हवाई अड्डे तक जाने के लिए दिल्ली मेट्रो की फीडर बस सेवा उपलब्ध है, जो यात्रियों के हिसाब से नियमित अंतराल पर चलती रहती है !  मेट्रो से उतरकर हम दोनों फटाफट स्टेशन से बाहर की ओर चल दिए, बाहर निकलते हुए स्टेशन परिसर में ही हमने एक स्टूल पर बैठ कर टिकट बेचते हुए एक महिला अधिकारी को देखा ! वो महिला टिकट देते हुए बीच-2 में बोल रही थी एयरपोर्ट जाने के लिए फीडर बस बाहर तैयार खड़ी है, जो यात्री एयरपोर्ट जाना चाहते है वो यहाँ से टिकट लेकर बस में चढ़ जाइए ! 

हम दोनों ने भी 30 रुपए प्रति सवारी के हिसाब से 60 रुपए देकर अपने लिए दो टिकटें ले ली और मेट्रो स्टेशन से बाहर की तरफ चल दिए ! स्टेशन से बाहर निकलने पर देखा कि फीडर बस यात्रिओं के आने की प्रतीक्षा में तैयार खड़ी है, हम दोनों जल्दी से इस बस में चढ़े और अपनी-2 सीट पर कब्जा कर लिया ! हालाँकि, बस में पहले से ही कुछ यात्री सवार थे पर हम दोनों के लिए आसानी से सीटें मिल गई ! थोड़ी देर बाद जब बस में सभी सीटों पर यात्री आ गए, तो हमारी बस चल दी ! स्टेशन परिसर से बाहर आ रहे अन्य यात्री हमारी बस के पीछे खड़ी दूसरी फीडर बस में सवार होने लगे, ये सब मैने अपने बस की खिड़की से उस दौरान देखा जब हमारी बस मुड़कर मुख्य मार्ग पर आ रही थी ! ये अच्छी बात थी, कि सीटों के हिसाब से ही बस में गिनती के यात्रियों को ही चढ़ाया गया था वरना दिल्ली में तो चाहे एसी वाली लाल बस हो या बिना एसी वाली हरी, सारी बसों में सीटों से दुगुने-तिगुने यात्री भरे होते है ! 

फीडर बस में एसी भी था और ये बसें भी काफ़ी बड़ी थी जिसमें आरामदायक सीटें थी, इसलिए यहाँ 30 रुपए देना नहीं अखरता ! वैसे दिल्ली एरोसिटी मेट्रो स्टेशन से टर्मिनल 1डी की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है, पर इस मार्ग पर भी काफ़ी भीड़ रहती है ! बस चलने के बाद घुमावदार रास्तों से होते हुए अगले 20 मिनट में हम सब हवाई अड्डे के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने पहुँच गए ! यहाँ बस से उतरने के बाद हमने वहाँ लगी एक कतार देखी, कतार में आगे जाकर देखा तो यात्री अपना टिकट दिखाकर अंदर एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश कर रहे थे ! हमने भी अपने बैग से यात्रा टिकटें निकालकर वहाँ मौजूद अधिकारी को दिखाई और अंदर प्रवेश किया ! परिसर के अंदर की रौनक तो देखते ही बन रही थी, यहाँ एक तरफ तो यात्रियों के बैठने की व्यवस्था थी जबकि दूसरी ओर अलग-2 विमान कंपनियों की टिकट खिड़कियाँ थी ! यहाँ आपको अपनी आरक्षण पर्ची (जो आपको टिकट आरक्षित करते समय कंप्यूटर से प्राप्त होती है) दिखाकर बोर्डिंग पास लेना होता है, इस दौरान आपको अपना सारा सामान भी यहीं जमा करवाना होता है ! 

जानकारी के लिए बता दूँ कि इस यात्रा के दौरान हमें अपने साथ 15 किलो तक सामान ले जाने की छूट थी ! 15 किलो से अधिक सामान ले जाने की स्थिति में हमें कुछ अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता ! इस 15 किलो सामान के अलावा हमें अपने साथ एक कैबिन बैग ले जाने की भी छूट थी जिसका जिसका भार 7 किलो तक हो सकता था ! टिकट खिड़कियों से थोड़ा आगे बढ़ने पर ही विमान तक जाने के लिए चेक पॉइंट बने हुए थे ! टिकट खिड़कियों और यात्रियों के बैठने के लिए बने प्रतीक्षालय के बीच आने-जाने ले लिए एक गलियारा था ! जबकि प्रतीक्षालय में ही बीच-2 में कुछ स्नैक्स पॉइंट भी थे जहाँ तरह-2 का खाने-पीने का सामान मौजूद था ! क्योंकि हम दोनों की टिकटें अलग-2 विमानों की थी, हितेश जिस विमान से यात्रा करने वाला था वो पहले उड़ान भरने वाला था, जबकि मेरा विमान बाद में उड़ान भरता ! इसलिए हम पहले उसका बोर्डिंग पास लेने के लिए इंडिगो एयरलाइन्स की कतार में लग गए !

हितेश इंडिगो के विमान से यात्रा कर रहा था जबकि मैं गो एयर से, यहाँ एयरपोर्ट परिसर में ए से शुरू होकर एच तक टिकट खिड़कियाँ बनी हुई है ! इन टिकट खिड़कियों पर अलग-2 विमानों के बोर्डिंग पास जारी किए जाते है ! मतलब हर विमान कंपनी की अलग टिकट खिड़की है, और पहली टिकट खिड़की ही इंडिगो की थी ! यहाँ जब हमने हितेश की आरक्षण पर्ची दिखाई तो वहाँ बैठी एक महिला अधिकारी ने उस टिकट पर हितेश के लिए बोर्डिंग पास जारी कर दिया ! फिर वहीं लगे एक स्वचालित भार तौलने की मशीन पर हमें अपना सामान रखने के लिए कहा ! हितेश ने जब अपना बैग वहाँ रखा तो वजन आया 4 किलो, महिला अधिकारी ने पहले तो हैरत से हमें देखा, फिर पूछा और सामान नहीं है क्या ? इस पर हितेश बोला, वहाँ घूमने जा रहे है बसने नहीं, ये सुनकर महिला अधिकारी मुस्कुरा दी ! सामान का वजन करने के बाद महिला ने कंप्यूटर से दो पर्ची जारी की जिसमें से एक पर्ची उसने हितेश के बैग पर लगाकर बैग को एक स्वचालित मशीन पर रख दिया, जिससे घूमता हुआ बैग थोड़ी देर में अंदर चला गया ! 

जबकि दूसरी पर्ची उसने हितेश के बोर्डिंग पास पर चिपकाकर बोर्डिंग पास हितेश को दे दिया ! दरअसल, ये पर्ची इसलिए लगाई जाती है कि गंतव्य पर पहुँचने के बाद आप अपने सामान की पहचान सामान पर लगी इस पर्ची को देखकर कर सके ! हितेश को मिले बोर्डिंग पास पर अंकित जानकारी के मुताबिक विमान के उड़ने से आधा घंटा पहले उसे विमान में जाने के लिए लाइन में लगना था, जिसे यहाँ की भाषा में बोर्डिंग समय कहते है ! दरअसल, विमान में बैठने से पहले यात्रियों को एक गहन तलाशी से गुज़रना होता है और ये सुरक्षा की दृष्टि से ज़रूरी भी है ! इसलिए विमान के प्रस्थान से आधे घंटे पहले यात्रियों का प्रवेश शुरू कर दिया जाता है ! हितेश का बोर्डिंग पास लेने के बाद हमने गो-एयर की टिकट खिड़की पर जाकर इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए मेरा बोर्डिंग पास भी ले लिया और फिर हम दोनों प्रतीक्षालय में जाकर बैठ गए !

feeder bas
फीडर बस की टिकट (Entry Paas of Feeder Bus)
delhi airport
हवाई अड्डे का एक दृश्य (A view on Delhi Airport)
delhi airport
हवाई अड्डे पर हितेश
boarding paas
यात्रा के लिए जारी किया गया बोर्डिंग पास (My Boarding Paas)
boarding paas
ऐसी ही एक पर्ची मेरे बैग पर भी लगा दी
terminal 1D
हवाई अड्डे पर प्रतीक्षालय में 


क्यों जाएँ (Why to go Srinagar): अगर आप श्रीनगर की डल झील में नौकायान के अलावा हाउसबोट में कुछ दिन बिताना चाहते है तो कश्मीर जाइए ! यहाँ घूमने के लिए पहाड़, झील, प्राकृतिक नज़ारे, बगीचे, नदियाँ सब कुछ है ! ऐसे ही इसे "धरती का स्वर्ग" नहीं कहा जाता, जो भी एक बार यहाँ आता है, वो यहाँ की खूबसूरती की तारीफ़ किए बिना नहीं रह पाता !

कब जाएँ (Best time to go Srinagar): वैसे तो आप साल के किसी भी महीने में श्रीनगर जा सकते है लेकिन यहाँ आने का सबसे बढ़िया समय अप्रैल से अक्तूबर का है सर्दियों में तो यहाँ कड़ाके की ठंड पड़ती है कई बार तो डल झील भी जम जाती है !  

कैसे जाएँ (How to reach Srinagar): दिल्ली से श्रीनगर की दूरी 808 किलोमीटर है जिसे तय करने में आपको लगभग 15-16 घंटे का समय लगेगा ! श्रीनगर देश के अन्य शहरों से सड़क और हवाई मार्ग से अच्छे से जुड़ा है जबकि यहाँ का नज़दीकी रेलवे स्टेशन उधमपुर है ! वैसे तो बारामूला से बनिहाल तक भी रेलवे लाइन है लेकिन इस मार्ग पर लोकल ट्रेन ही चलती है ! बारामूला से बनिहाल जाते हुए रास्ते में श्रीनगर भी पड़ता है ! उधमपुर से श्रीनगर तक आप बस या टैक्सी से भी आ सकते है, इन दोनों जगहों के बीच की कुल दूरी 204 किलोमीटर है और पूरा पहाड़ी मार्ग है जिसे तय करने में लगभग 5 घंटे का समय लगता है !

कहाँ रुके (Where to stay in Srinagar): श्रीनगर एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है यहाँ रुकने के लिए बहुत होटल है ! आप अपनी सुविधा अनुसार 800 रुपए से लेकर 2000 रुपए तक का होटल ले सकते है ! लेकिन अगर आप श्रीनगर में है तो कम से कम 1 दिन तो हाउसबोट में ज़रूर रुके ! डल झील में बने हाउसबोट में रुकने का अनुभव आपको ज़िंदगी भर याद रहेगा !

कहाँ खाएँ (Eating option in Srinagar): श्रीनगर में अच्छा-ख़ासा बाज़ार है, यहाँ आपको अपने स्वाद अनुसार खाने-पीने का हर सामान मिल जाएगा !

क्या देखें (Places to see in Srinagar): 
श्रीनगर और इसके आस-पास घूमने की कई जगहें है जिसमें से शंकराचार्य हिल, ट्यूलिप गार्डन, डल झील, सोनमर्ग, बेताब वैली, निशात गार्डन, मुगल गार्डन, शालीमार बाग, गुलमर्ग, परी महल, पहलगाम, खीर भवानी मंदिर और चश्मेशाही प्रमुख है !

अगले भाग में जारी...

श्रीनगर यात्रा

5 comments:

  1. बढ़िया लिखा है प्रदीप ��

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    1. धन्यवाद पाहवा जी !

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  2. बढ़िया लिखा है प्रदीप ��

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  3. आगाज अच्छा है आगे हम भी तुम्हारे साथ है

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