Friday, April 14, 2017

दिल्ली से ऋषिकेश की सड़क यात्रा (A Road Trip to Rishikesh from Delhi)

शुक्रवार, 24 मार्च 2017

आज मैं आपको ले चल रहा हूँ एक नए सफ़र पर, उत्तराखंड के इस सफ़र पर हमें यात्रा करते हुए बहुत मज़ा आया, उम्मीद है यात्रा लेख पढ़कर आपको भी आनंद आएगा ! यात्रा की शुरुआत करते है लक्ष्मी नगर से, जहाँ मैं और शशांक अपने-2 दफ़्तर से लौटकर आ चुके थे और यहाँ शशांक के फ्लैट पर बैठकर इस सफ़र पर जाने के लिए अपने एक अन्य साथी हितेश के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे ! समय रात के साढ़े 10 बज रहे थे लेकिन हितेश की अभी कोई खोज-खबर नहीं थी ! शाम को जब उस से बात हुई थी तो उसने कहा था कि वो अपने दफ़्तर से 9 बजे के आस-पास निकल लेगा, इस हिसाब से तो अब तक उसे आ जाना चाहिए था ! रात के समय गुड़गाँव से दिल्ली आने में समय ही कितना लगता है, फिर सोचा, हो सकता है किसी काम में फँस गया हो और निकलने में देर हो गई हो ! फिर भी उसे एक फोन तो कर ही देना था, अब उसका फोन नहीं लग रहा, पता नहीं कहाँ पहुँचा होगा, दफ़्तर से निकला भी होगा या नहीं ! मन में यही उधेड़-बुन चल रही थी, कि तभी शशांक ने एक बार फिर से उसे फोन लगाया, इस बार घंटी बजी, उसने फोन भी उठाया और बोला कि उसे दफ़्तर से निकलने में देर हो गई है हमारे पास वो 11 बजे तक ही पहुँच पाएगा !



khatauli
दिल्ली-हरिद्वार राजमार्ग पर खतौली के पास (Somewhere on Delhi-Haridwar National Highway 334)

चलो, बात हो गई तो हमें भी तसल्ली हुई कि वो आ तो रहा है, फोन काटने के बाद हम अपना सामान समेटने लगे ताकि निकलते समय जल्दबाज़ी में कुछ छूट ना जाए ! चलिए, थोड़ा पीछे चलते है, जब इस यात्रा पर जाने की योजना बनी, वैसे इस यात्रा के लिए कोई ख़ास योजना नहीं बनाई थी ! फिर भी 4 दिन पहले ही इस यात्रा को लेकर चर्चा चली थी जब मेरे दोनों जिगरी दोस्त शशांक और हितेश किसी यात्रा पर जाने का मन बना रहे थे ! मुझे जब पता चला कि उनका मन ऋषिकेश जाकर रिवर राफ्टिंग का है, तो बड़ा सुकून मिला, बिल्कुल ऐसा लगा जैसे बिन माँगे मन की मुराद पूरी हो गई हो ! दरअसल, राफ्टिंग के बारे में सुना तो कई लोगों से था लेकिन अभी तक करने का मौका नहीं मिला था ! सोचा, चलो इस बार मौका मिला है तो मैं भी रिवर राफ्टिंग कर ही लेता हूँ ! सर्व-सहमति से जब यात्रा का दिन निर्धारित हो गया तो हम सब अपने-2 काम में व्यस्त हो गए ! कुछ महीने पहले एक मित्र ने मुझसे कहा था कि यार तुम घूमते तो बहुत हो लेकिन अब तक राफ्टिंग भी नहीं की तो क्या घूमे 

उसकी ये बात मुझे जॅंच गई और मैने सोच लिया था कि घूमना-फिरना तो चलता ही रहेगा लेकिन इस साल राफ्टिंग ज़रूर करनी है ! धीरे-2 सप्ताह बीत गया और आज हम इस यात्रा पर जाने के लिए तैयार थे ! इस यात्रा पर जाने के लिए हमने अपने साथ बहुत ज़्यादा सामान नहीं लिया था, बस दो जोड़ी कपड़े और कुछ ज़रूरी सामान लेकर ही निकल रहे थे ! सवा 11 बज रहे थे जब हितेश का फोन आया कि भाई मैं लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन के सामने पहुँच गया हूँ, तुम लोग भी जल्दी आ जाओ ! उसके फोन रखते ही हमने अपना बैग उठाया और जूते पहनकर तेज कदमों से मेट्रो स्टेशन की ओर चल दिए, शशांक के घर से मेट्रो स्टेशन ज़्यादा दूर तो नहीं था लेकिन फिर भी हमें वहाँ पहुँचने में 10 मिनट लग ही गए ! हितेश मेट्रो स्टेशन के पास पटेल हॉस्पिटल के सामने खड़ा हमारी प्रतीक्षा कर रहा था, हमने अपना सामान गाड़ी में रखा और बिना देरी किए इस यात्रा के लिए निकल पड़े ! 


चलिए, आगे बढ़ने से पहले आपका परिचय इस यात्रा पर जाने वाले सभी लोगों से करवा देता हूँ ! मेरे अलावा मेरा पुराना घुमक्कड़ मित्र शशांक था जो इस से पहले मेरे साथ धर्मशाला, डलहौजी, मैकलॉडगंज, उदयपुर, और आगरा की यात्रा कर चुका था ! हितेश भी हमारे साथ कई यात्राओं पर जा चुका है जबकि हमारा चौथा साथी शाकिब पहली बार हमारे साथ किसी यात्रा पर जा रहा था ! हितेश गुड़गाँव में एक पाँच सितारा होटल में काम करता है जबकि, शाकिब, शशांक के साथ ही नोयडा में एक निजी कंपनी में कार्यरत है ! शाकिब का घर ऋषिकेश में ही है और वो ऋषिकेश शाम को ही निकल रहा था तो शशांक ने कहा अकेले क्या परेशान होगा, हमारे साथ ही चल दियो ! चलिए, आगे बढ़ते है, इस यात्रा पर जाने से पहले मेरे मन में उत्तर प्रदेश को लेकर जो धारणाएँ थी वो सब टूट गई ! इससे पहले भी मैं उत्तराखंड घूमने जाता रहा हूँ और हर बार उत्तर प्रदेश से होकर ही निकलना होता है, फिर सफ़र चाहे सड़क मार्ग से हो या रेल मार्ग से, रात के सफ़र के मेरे अनुभव बहुत ज़्यादा बढ़िया नहीं रहे ! 


सड़क मार्ग से तो जितनी बार भी मेरठ वाले मार्ग से गया हूँ, हर बार मुझे राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माण कार्य की वजह से जाम ही मिला है ! चकराता जाते समय तो रास्ते में एक सुनसान जगह पर गाड़ी भी पन्चर हो गई थी, बड़ी मुश्किल से एक पन्चर वाला मिला था ! तब जिस तरह के हालात का हमने सामना किया था उसके बाद से मैं इस मार्ग पर रात का सफ़र करने से परहेज करने लगा था ! लेकिन आज जब शाकिब ने कहा कि हालात अब काफ़ी सुधार गए है और वो हर सप्ताह इसी मार्ग से अपने घर जाता है, तो हम रात को सफ़र करने के लिए तैयार हो गए ! हम लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन से चलकर अक्षरधाम के सामने से होते हुए अपनी बाईं ओर मुड़कर राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर पहुँच चुके थे ! इस मार्ग पर चलते हुए शिप्रा माल को पार करने के बाद हम मोहन नगर लिंक रोड पर मुड़ गए और रेल विहार को पार करने के बाद गुरुद्वारा रोड पर दाएँ मुड़ गए ! इस मार्ग पर आगे जाकर बाएँ मुड़कर कुछ दूर तक हिंडन नदी के साथ-2 चलने के बाद हम जी टी रोड पर पहुँच गए ! 


जी टी रोड पर यू टर्न लेकर थोड़ी दूर चलने के बाद ही हम बाएँ मुड़े तो राष्ट्रीय राजमार्ग 34 पर पहुँच चुके थे ! ये मार्ग मुरादनगर, मोदी नगर को पार करता हुआ मेरठ-मुज़्ज़फरनगर बाइपास से होता हुआ सीधा रुड़की को चला जाता है, फिर रुड़की से हरिद्वार होते हुए यही मार्ग ऋषिकेश निकल जाता है ! मैं पहले भी इस मार्ग से आया था लेकिन तब इस मार्ग पर बहुत गड्ढे थे और जगह-2 सड़क निर्माण (फ्लाइओवर) का काम चल रहा था, लेकिन इस बार तो इस मार्ग का नक्शा ही बदल गया था ! अब शानदार 4 लेन का हाइवे बन चुका है जिसपर गाड़ियाँ सरपट दौड़ती है ! अक्सर समाचारों में इस मार्ग पर होने वाली लूटपाट की खबरें सुना करते थे, पुलिस वाले भी अपना काम-धाम छोड़कर गायब रहते थे ! अब इसे योगी सरकार का दबदबा कहे, समय की माँग, या उत्तर प्रदेश का विकास, पुलिस वाले अपना काम मुस्तेदी से करते हुए दिखे ! जैसे-2 हम इस मार्ग पर आगे बढ़ते रहे, हर 4-5 किलोमीटर पर सड़क के दोनों ओर खड़ी पुलिस की गाड़ियाँ दिखाई दे रही थी ! 


कुछ जगहों पर तो संदिग्ध गाड़ियों को रोक कर तलाशी भी ली जा रही थी, सच में, यू पी पुलिस को इतनी ईमानदारी से काम करते देख बड़ा सुकून मिला, अच्छा है, देर आए दुरुस्त आए ! अब से भी अगर हालत बेहतर हो जाए और यू पी पुलिस के प्रति लोगों का नज़रिया बदल जाए तभी जाकर प्रदेश की क़ानून व्यवस्था बदलेगी और प्रदेश का विकास होगा ! रास्ते में सड़क किनारे एक पेट्रोल पंप पर रुककर हमने अपनी गाड़ी में डीजल लिया और अपना सफ़र जारी रखा ! आगे बढ़े तो रास्ते में एक खराब मारुति 800 दिखाई दी, जिसे पुलिस जिप्सी कवर देती हुई किसी सुरक्षित ठिकाने पर ले जा रही थी ! गाड़ी में एक परिवार बैठा था, सुरक्षा की दृष्टि से ये काफ़ी महत्वपूर्ण बात है ! वैसे इस यात्रा के बाद मैं आगे कभी उत्तराखंड जाने के लिए बेझिझक इस मार्ग से रात को भी निकल सकता हूँ ! मेरठ पार करने के बाद इस मार्ग पर पहला और आख़िरी टोल प्लाज़ा आया, 75 रुपए का शुल्क अदा करके हम आगे बढ़े ! घर से हम सब बिना खाए ही चले थे, सोचा था जब हितेश भी आ जाएगा तो रास्ते में ही कुछ खा लेंगे ! 


लेकिन बातों-2 में काफ़ी सफ़र तय कर लिया और खाने का ध्यान ही नहीं रहा ! शाम को दफ़्तर से आते समय ही जूस पिया था, अब बहुत तेज भूख लगने लगी थी ! मैं बोला, यार हितेश कहीं गाड़ी रोक ले, तेरे चक्कर में हम सब भूखे बैठे है, तू तो खा आया होगा ! तभी हम में से कोई बोला, खतौली बाइपास से थोड़ी पहले चीतल नाम का एक रेस्टोरेंट है, बहुत नाम सुना है इस होटल का, वहीं रुककर खाना खाएँगे ! जैसे दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर सुखदेव ढाबे का नाम है वैसे ही इस मार्ग पर इस होटल का काफ़ी नाम है ! मैं बोला, ठीक है, जैसे इतनी दूर आ गए है, वैसे थोड़ी देर और इंतजार कर लेते है ! मेरठ बाइपास पार करने के थोड़ी देर बाद सड़क के बाईं ओर चीतल रेस्टोरेंट भी आ गया, लेकिन ये तो बंद पड़ा था ! इस तरह के व्यस्त राजमार्गों पर तो रात भर होटल खुले ही रहते है क्या हुआ जो रात के पौने दो बज रहे है ! फिर ये क्यों बंद है, कोई बात नहीं, होगा कोई ज़रूरी काम जो आज जल्दी बंद हो गया है, या शायद अपनी किस्मत में आज यहाँ का खाना नहीं था ! 


यहाँ से आगे बढ़े तो खतौली बाइपास पार करने के बाद एक साथ कई ढाबे दिखाई दिए, हमने अपनी गाड़ी इनमें से एक ढाबे पर जाकर खड़ी कर दी ! दस मिनट हो गए, कोई ऑर्डर लेने नहीं आया, दो बार आवाज़ भी लगाई, लेकिन कोई नतीजा नहीं ! लगता है आज इस ढाबे वाले ने कुछ ज़्यादा ही कमाई कर ली है, हम भी वहाँ से उठकर अगले ढाबे पर जा बैठे ! खाने का ऑर्डर देकर वहीं एक मेज के किनारे लगी कुर्सियों पर बैठ गए ! समय पौने दो बज रहे थे, मैं हितेश से बोला, जब तक खाना आएगा, गाड़ी को यहाँ लाकर खड़ी कर दे ! पता चला कि उस ढाबे पर खाना नहीं खाया तो गाड़ी खड़ी करने की वजह से कुछ दिक्कत करने लगे ! हितेश गाड़ी लेने गया तो पहला ढाबे वाला मिन्नतें करने लगा कि सर आप यहाँ से चले क्यों गए, ऑर्डर लेने के लिए लड़का आने ही वाला था और भी ना जाने क्या-2 ! ये सब देखकर मैं भी वहाँ गया और हमने होटल वाले से कहा कि जो हो गया, उसे छोड़ ! 


अब हमने वहाँ ऑर्डर दे दिया है, तेरी मिन्नतों का अब कुछ असर होने वाला नहीं है ! खैर, गाड़ी खड़ी करके वापिस खाने की मेज पर पहुँचे ! हमारे आते ही खाना भी आ गया, सबको बहुत तेज भूख लगी थी इसलिए बिना देर किए सब खाना खाने में लग गए ! भूख लगी हो तो कैसा भी खाना हो, ठीक ही लगता है, वैसे यहाँ के खाने में मिर्ची काफ़ी तेज थी, नतीजन, खाना खाते-2 ही सबके पसीने निकल गए ! आधे घंटे में खाना खाकर यहाँ से फारिक हुए, तो 2-4 फोटो लेने के बाद आगे बढ़ गए, मुज़्ज़फरनगर पार करने के बाद अपनी दाईं ओर जाते रुड़की वाले मार्ग पर हो लिए ! यहाँ से एक रास्ता देवबन होता हुआ देहरादून को जाता है ! मुज़्ज़फरनगर के बाद थोड़ा खराब रास्ता मिला लेकिन ज़्यादा दिक्कत नहीं हुई ! रुड़की में प्रवेश करने के थोड़ी देर बाद हम यहाँ के आई आई टी कॉलेज के सामने पहुँचे, यहाँ एक तिराहा है जहाँ से सीधे जाने वाला मार्ग हरिद्वार होता हुआ ऋषिकेश चला जाता है जबकि यहाँ से बाएँ जाने वाला मार्ग छुटमुलपुर होते हुए देहरादून को चला जाता है ! हम सीधे चलते रहे, थोड़ी देर बाद हम हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ के सामने से होकर निकले, यहाँ भी मार्ग थोड़ा खराब मिला और थोड़ा जाम भी मिला ! 

यहाँ से हरिद्वार ज़्यादा दूर नहीं रह जाता, थोड़ी देर बाद हम हर की पौडी को पार करते हुए ऋषिकेश की तरफ निकल गए ! सुबह सवा पाँच बजे हम ऋषिकेश पहुँचे, यहाँ सड़क किनारे लोग सुबह की सैर के लिए निकल चुके थे, हमें जगह-2 लोग व्यायाम करते दिखे ! गाड़ी के शीशे खोलकर हमने भी यहाँ की शुद्ध हवा को अंदर आने का न्योता दिया ! सच में, यहाँ की ताज़ी हवा की बात ही अलग है, इस ताज़ी हवा के लिए हम दिल्ली और इसके आस-पास के इलाक़ों में रहने वाले लोग तरस जाते है ! फिर बरबस ही पहाड़ों की ओर खिंचे चले आते है ! जब हम शाकिब के घर पहुँचे तो हल्का-2 उजाला होने लगा था, पूरे रास्ते हितेश ही गाड़ी चला कर लाया था और आगे का सफ़र तय करने से पहले थोड़ा आराम ज़रूरी था ! इसलिए गाड़ी खड़ी करके हम आराम करने के लिए घर के अंदर चल दिए ! शाकिब ने अपने घर फोन करके पहले ही बता दिया था इसलिए हम सबके आराम करने के लिए पहले से ही व्यवस्था थी ! बिस्तर पर लेटते ही नींद आ गई, और जब आँख खुली तो सुबह के 8 बज रहे थे !

M.G. Road
एम जी रोड मेट्रो स्टेशन के पास लिया एक चित्र (M.G. Road Metro Station, Gurugram)


e-rickshaw
एम जी रोड मेट्रो स्टेशन के पास खड़े ई-रिक्शे (E-Rickshaw near M.G. Road Metro Station)


दिल्ली हरिद्वार राजमार्ग पर टोल प्लाज़ा - (Toll at Delhi-Haridwar National Highway)


रात्रि भोजन के लिए यहीं रुके थे









क्यों जाएँ (Why to go Rishikesh): अगर आप रोमांच के शौकीन है तो ऋषिकेश आपके लिए सर्वोत्तम स्थान है यहाँ आप कई रोमांचक खेलों जैसे बंजी जंपिंग (Bungee Jumping), रिवर राफ्टिंग (River Rafting), कैंपिंग और बोन फायर (Camping and Bonfire), पहाड़ों पर साइकलिंग (Mountain Biking), फ्लाइयिंग फॉक्स (Flying Fox), क्लिफ जंपिंग (Cliff Jumping), बॉडी सर्फिंग (Body Surfing), ट्रेकिंग (Trekking), रेपलिंग (Rappelling), राक क्लाइंबिंग (Rock Climbing), काइकिंग (Kayaking), पेरासैलिंग और पेराग्लाइडिंग  (Parasailing and Paragliding) का मज़ा ले सकते है !

कब जाएँ (Best time to go Rishikesh): वैसे तो आप ऋषिकेश साल भर किसी भी महीने में जा सकते है लेकिन मार्च से जून का महीना ऋषिकेश जाने के लिए सबसे बढ़िया है !


कैसे जाएँ (How to reach Rishikesh): दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी महज 242 किलोमीटर है, ये दोनों शहर यातायात के कई माध्यमों से जुड़े हुए है ! ऋषिकेश जाने के लिए आप दिल्ली से हरिद्वार जाने वाली कोई भी ट्रेन पकड़ सकते है, हरिद्वार से ऋषिकेश 20-21 किलोमीटर दूर है जिसे आप जीप या बस से तय कर सकते है ! अगर आप सड़क मार्ग से जाना चाहते है तो दिल्ली से ऋषिकेश के लिए वोल्वो और बसें चलती रहती है, आप टैक्सी या निजी वाहन से भी ऋषिकेश जा सकते है !


कहाँ रुके (Where to stay in Rishikesh): हरिद्वार और ऋषिकेश में रुकने के लिए 500 रुपए से शुरू होकर 4000 रुपए तक सैकड़ों होटल है, इसके अलावा बहुत सी धर्मशालाएँ और आश्रम भी है, जिनका किराया होटल की अपेक्षा काफ़ी कम रहता है ! आप अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी भी होटल में रुक सकते है !


कहाँ खाएँ (Where to eat in Rishikesh): दिल्ली से ऋषिकेश जाते हुए खतौली के पास पड़ने वाला ग्रांड चीतल रेस्टोरेंट इस मार्ग पर पड़ने वाला काफ़ी चर्चित रेस्टोरेंट है, आप खाने के लिए यहाँ रुक सकते है ! इसके अलावा इस मार्ग पर अन्य कई बड़े रेस्टोरेंट और छोटे होटल भी है !


क्या देखें (Places to see in Rishikesh): अगर आप ऋषिकेश जा रहे है तो त्रिवेणी घाट पर शाम 7 बजे गंगा आरती देखने ना भूलें, घंटे भर चलने वाली इस आरती से आपके मन को बड़ा सुकून मिलेगा ! इसके अलावा आप गंगा आरती के लिए हर की पौडी का रुख़ भी कर सकते है लेकिन वहाँ त्रिवेणी घाट की अपेक्षा भीड़ थोड़ी अधिक रहती है ! दोनों ही जगहों पर पार्किंग की उचित व्यवस्था है त्रिवेणी घाट के तो बगल में ही पार्किंग है जबकि हर की पौडी पर जाने के लिए आपको पार्किंग स्थल से थोड़ा पैदल चलना पड़ेगा !

सड़क मार्ग (Best route from Delhi to Rishikesh): दिल्ली से ऋषिकेश जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 334 सर्वोत्तम मार्ग है, दिल्ली से हरिद्वार तक शानदार 4 लेन मार्ग है जबकि हरिद्वार से आगे 2 लेन मार्ग है ! हरिद्वार में कई जगहों पर फ्लाइओवर का निर्माण कार्य चल रहा है जिसके कारण आपको थोड़ा जाम का सामना करना पड़ सकता है ! इस यात्रा में आपको 5 से 6 घंटे का समय लग सकता है ! 


टोल शुल्क (Toll plaza at Delhi Rishikesh Highway): इस राजमार्ग पर एक ही टोल प्लाज़ा है जहाँ आपको 4 पहिया वाहन के लिए एक तरफ के 75 रुपए खर्च करने होंगे ! हरिद्वार से थोड़ी पहले एक अन्य टोल प्लाज़ा बनाने का काम जारी है !


अगले भाग में जारी...

ऋषिकेश-लैंसडाउन यात्रा
  1. दिल्ली से ऋषिकेश की सड़क यात्रा (A Road Trip to Rishikesh from Delhi)
  2. रोमांचक खेलों का केंद्र है ऋषिकेश (Adventure Games in Rishikesh)
  3. देवप्रयाग में है भागीरथी और अलकनंदा का संगम (Confluence of Alaknanda and Bhagirathi Rivers - DevPrayag)
  4. पौडी - लैंसडाउन मार्ग पर है खूबसूरत नज़ारे (A Road Trip from Devprayag to Lansdowne)
  5. जंगल के बीचों-बीच स्थित है ताड़केश्वर महादेव मंदिर (A Trip to Tarkeshwar Mahadev Temple)

10 comments:

  1. बढ़िया दोस्तों के साथ सफ़र करने का मजा ही अलग है

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    1. धन्यवाद प्रतीक जी !

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  2. बढ़िया प्रदीप भाई लगे रहो

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    1. धन्यवाद विनोद भाई !

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  3. लेख अच्छा लगा.. दोस्तो संग घुमना हमेशा अच्छा लगता है। अगले भाग का इंतजार रहेगा।

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    1. धन्यवाद सचिन भाई !

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  4. बढ़िया यात्रा

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    1. धन्यवाद प्रजापति जी !

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  5. हमेशा की तरह सरल भाषा में लिखा वृतांत ।जोरदार यात्रा शुरू 👍

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