Wednesday, May 13, 2015

आगरा के ताजमहल की एक सड़क यात्रा (A Road Trip to City of Taj, Agra)

रविवार, 30 जून 2013

बात शनिवार, 29 जून 2013 के शाम की है जब मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ शाम को एक मैदान में टहल रहा था ! बातचीत के दौरान अचानक हितेश बोला, यार कल आगरा घूमने चलें क्या ? मैने कहा, रहने दे यार, 2 सप्ताह पहले भी तुम लोगों ने आगरा जाने की योजना बनाई थी, लेकिन अंतिम समय में सबने मना कर दिया !

हितेश: यार वो विपुल की वजह से मना हुआ था, बाकी सब लोग तो तैयार थे ! 

हाँ, तो तुम्हें क्या लगता है इस बार विपुल हाँ कर देगा ? 

हितेश: नहीं, इस बार हम विपुल को लेकर ही नहीं जा रहे ना ! 

विपुल, जोकि वहीं बैठा हुआ सब कुछ सुन रहा था, अचानक बोल पड़ा, “यार मैं आगरा जाने के लिए आज रात एक बार फिर अपने घर पर बात करूँगा" ! 

शशांक: बात क्या करनी है, तेरी तरफ से तो हम ना ही मान कर चल रहे है ! 

आगरा जाने के लिए बाकी तीनों लोग हितेश, शशांक और मेरी तरफ से हामी होने के बाद हम लोग कुछ देर बातें करते रहे और फिर अपने-2 घर वापस आ गए !
way to agra
Delhi Agra Highway (आगरा जाते हुए रास्ते में लिया एक चित्र)

योजना के मुताबिक, हम लोग मेरी रिट्ज़ लेकर रविवार सुबह 6 बजे घर से आगरा के लिए निकलने वाले थे, ताकि समय से ताजमहल पहुँच सके ! सोमवार को छुट्टी तो थी नहीं, इसलिए हमें रविवार की रात तक ही वापस आना था ताकि मैं सोमवार सुबह समय से दफ़्तर जा सकूँ ! यार दोस्तों से पता चला था कि ताजमहल देखने के लिए टिकट लेने के बाद अंदर जाने के लिए बहुत लंबी कतार लगती है ! हम लोग अपना समय कतार में खड़े होकर नहीं बिताना चाहते थे इसलिए सुबह समय से निकलने की योजना बनाई थी ! घर पहुँच कर मैं आगरा के बारे में जानकारी एकत्रित कर रहा था कि तभी मेरा फोन घनघनया ! फोन उठाकर देखा तो ये विपुल था, कहने लगा मैं भी तुम लोगों के साथ चलूँगा ! पूछने पर उसने बताया कि उसने अपने घर वालों को बड़ी मुश्किल से मनाया है ! खैर, ये बताने के बाद ही उसने फोन काट दिया ! क्योंकि हम लोग आगरा जाने के लिए घर से सुबह जल्दी निकलने वाले थे, इसलिए अपने साथ आगरा ले जाने का सारा समान मैने रात को ही एक बैग में रख लिया ! 

रात को सोने से पहले सुबह 4:30 बजे का अलार्म भी लगा दिया और फिर अपने बिस्तर पर लेटा हुआ मैं आगरा के बारे में ही सोचता रहा ! रात को कब नींद आ गई पता ही नहीं चला और सुबह अलार्म बजने के साथ जब मेरी नींद खुली तो एक पल की देरी किए बिना मैं फटाफट बिस्तर से उठकर नित्य-क्रम में लगा गया ! जब मैं घर से निकला तो 5 बजकर 50 मिनट हो रहे थे, शशांक तो मेरे घर के बाहर ही आ गया था ! 5 मिनट में ही हम राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुँच गए, सुबह-2 सड़क बिल्कुल खाली थी और हमें कहीं भी कोई भीड़ या जाम नहीं मिला ! राजमार्ग पर हमारी गाड़ी के आगे-पीछे कुछ ट्रक ज़रूर चल रहे थे ! पलवल से आगरा जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग एकदम शानदार है, हाँ बीच-2 में कहीं पर गड्ढे ज़रूर है, पर यहाँ सड़क में गड्ढे होना आम बात है ! अब सड़क इतनी अच्छी हो और उस पर कोई टोल ना हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता ! पहला टोल पलवल से आगरा की ओर 15 किलोमीटर दूर है, टोल का मूल्य सुनकर सबको झटका लगा 

एक तरफ का 85 रुपये और दोनों तरफ का 125 रुपये ! हालाँकि, आगरा जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत अच्छी है पर इतनी भी अच्छी नहीं कि 125 रुपये के टोल को जायज़ कहा जाए ! कम से कम मेरे नज़रिए से तो इसे जायज़ नहीं कहा जाएगा ! टोल पार करने के बाद हमने रफ़्तार पकड़ ली, खाली सड़क होने का हमें भरपूर फ़ायदा मिला और बिना किसी जाम में फँसे हम आगरा की ओर बढ़े जा रहे थे ! मथुरा से आगे निकल कर हमने खाना खाने के लिए सड़क के किनारे खाली जगह देख कर अपनी गाड़ी रोक दी ! अब इतनी सुबह खाने-पीने के लिए किसी ढाबे पर रुकने का मतलब था समय की बर्बादी, और इतनी सुबह तो शायद ही किसी ढाबे पर खाना मिलता, अभी तो लोग सोकर भी नहीं उठे होंगे ! वैसे भी खाने-पीने का सामान तो हम लोग अपने घर से लेकर ही आए थे, जिसे हम कहीं भी बैठकर खा सकते थे, अपनी गाड़ी में भी ! पर जो मज़ा सुबह की ताज़ी हवा में बैठकर खाने में है वो शायद किसी दूसरी जगह ना मिले ! 

जहाँ हमने गाड़ी रोकी थी वहीं पर एक चाय का खोखा (छोटी दुकान) था जो इस समय बंद था ! उस दुकान के बाहर ही एक लकड़ी की मेज थी, शशांक बोला, लो जी बैठने का भी इंतज़ाम हो गया ! इस मेज पर बैठ कर ही हमने नाश्ता किया, पर कुछ भी कहो खाने में खूब मज़ा आया ! नाश्ते में हमारे पास पराठे के अलावा मैगी था, पराठे हमने वहीं ख़त्म कर लिए, और मैगी को बाद में खाने के लिए रख लिया ! पेट पूजा के बाद तो जैसे सबके शरीर में नई जान आ गई ! मथुरा से आगे बढ़ने पर फिर से टोल का एक बोर्ड दिखाई दिया, यहाँ गाड़ियों की लाइन लगी थी, हालाँकि, गाड़ियाँ ज़्यादा नहीं थी लेकिन टोल कर्मी धीमे काम कर रहे थे ! टोल गेट पर पहुँच कर देखा तो यहाँ भी 85 और 125 रुपये की पर्ची काटी जा रही थी ! मैने सोचा इतने का तो पेट्रोल नहीं लगेगा आगरा जाने में जितना टोल वाले ले लेंगे ! मैं गाड़ी में बैठे बाकी लोगों से बोला, ये तो अन्याय है यार, एक तो ये टोल इतने पास-2 टोल है और दूसरा इनका मूल्य इतना ज़्यादा है ! 

खैर, अब टोल चुकाए बिना तो जा नहीं सकते थे, इसलिए दुखी मन से ही सही, टोल पर बैठे कर्मचारी को 125 रुपये निकाल कर दिए और आगे बढ़ गए ! आगरा में प्रवेश करने के बाद हम लोग एक मोड़ से मुख्य सड़क को छोड़ कर एक सहायक सड़क पर आ गए ! ये मार्ग ताजमहल तक जाता है, दिन में तो यहाँ काफ़ी भीड़ रहती है पर अभी ये मार्ग खाली था ! ताज महल से थोड़ा पहले कुछ पुलिस वालों ने हमें रोक लिया और गाड़ी के कागज देखने लगे ! कागज पूरे थे इसलिए परेशानी वाली कोई बात ही नहीं थी, यहाँ से चले तो 8.30 बजते-2 हम लोग ताजमहल के पार्किंग स्थल में पहुँच गए थे ! यहाँ गाड़ी खड़ी करके हमने गाड़ी में से अपनी ज़रूरत का समान लिया और ताज महल जाने के लिए चल दिए ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि पार्किंग स्थल से ताज महल की दूरी लगभग 500-600 मीटर होगी ! पार्किंग स्थल से ताजमहल तक जाने के लिए वैसे तो बैटरी से चलने वाली बसें भी चलती है, पर हम लोगों ने ये दूरी पैदल ही तय की ! 

10-15 मिनट की यात्रा करके हम सब ताजमहल के मुख्य द्वार के सामने खड़े थे ! हितेश टिकट खिड़की पर जाकर हम सबके लिए टिकट लेने लगा और हम तीनों जाकर अंदर जाने वाली लाइन में खड़े हो गए ! ताजमहल के अंदर जाने के लिए वैसे तो काफ़ी लंबी लाइन लगती है पर अभी ज़्यादा समय नहीं हुआ था इसलिए भीड़ भी ज़्यादा नहीं थी ! हितेश टिकट लेकर आया और हम सब फटाफट ताजमहल परिसर में दाखिल हो गए ! ताजमहल परिसर में पहुँचने पर बीच में तो मुख्य सड़क है और दोनों तरफ लाल पत्थरों से बने बरामदे है ! थोड़ी देर वहाँ के नज़ारों का आनंद लिया, थोड़े फोटो खींचे, और फिर मुख्य दरवाजे की ओर चल दिए ! मुख्य दरवाजा इतना विशाल है कि हम लोग बनाने वाले कारीगर की तारीफ़ किए बिना नहीं रह सके ! इस दरवाजे से देखने पर सामने ताजमहल का जो विहंगम दृश्य दिखाई देता है उसे शब्दों में बयाँ कर पाना मुश्किल है ! 

यहाँ से दो रास्ते ताजमहल की ओर जाते है, हम लोग अपनी बाईं ओर वाले रास्ते पर चल दिए ! इस रास्ते पर थोड़ा आगे बढ़ने पर एक रास्ता आपके बाईं ओर ताजमहल संग्रहालय तक जाता है, हम इस रास्ते को अनदेखा करके सीधा ताजमहल की ओर चल दिए ! ताजमहल जाते हुए रास्ते में एक चबूतरा है और उसके साथ ही पानी का एक छोटा सा कुंड है ! इस चबूतरे से ताजमहल काफ़ी नज़दीक दिखाई देता है, इसलिए सभी लोग यहाँ उठ-बैठ कर फोटो खिंचवा रहे थे ! हम लोगों ने भी इस चबूतरे पर बैठ कर कुछ फोटो लिए ! यहाँ से आगे बढ़े तो ताजमहल के नीचे वाले गलियारे में पहुँच गए, जहाँ ताजमहल जाने के दो रास्ते है ! बाईं ओर वाला रास्ता विदेशी पर्यटकों और गणमान्य लोगों के लिए है, हम जैसे साधारण पर्यटकों के लिए दाईं ओर से जाने वाला रास्ता है ! अब हम तो ठहरे आम नागरिक, बिना कुछ सवाल जवाब किए कहाँ मानने वाले थे, वहाँ खड़े एक सिपाही से प्रश्नों का सिलसिला शुरू कर दिया ! 2-3 प्रश्नों के जवाब तो उसने सरलता से दिए उसके बाद वो झल्ला पड़ा ! 

हमें लगा इससे उलझने में कोई भलाई नहीं है इसलिए हम सब अपनी दाईं ओर चल दिए ! इस रास्ते पर आगे चलकर जूते-चप्पल रखने की व्यवस्था भी है ! ताजमहल के मुख्य भाग में जूते-चप्पल पहन कर जाना प्रतिबंधित है, पहले मैं सोचता था कि ये मंदिर तो है नहीं, फिर जूते-चप्पल पहन कर जाने पर क्यों मनाही है ! फिर बाद में पता चला कि जूते-चप्पल से ताजमहल के संगमरमर घिस कर अपनी चमक खो सकते है ! इसलिए या तो आपको अपने जूते-चप्पल ताजमहल परिसर के पास ही बने जूताघर में रखने होंगे या फिर यहाँ आते हुए आपको रास्ते में ही नरम कपड़े के खोल मिल जाएँगे ! इन्हें आप अपने जूतों पर पहन सकते है, ताकि संगमरमर पर आपके जूतों के निशान ना पड़े ! आप लोगों की जानकारी के लिए बता दूँ कि ताजमहल के चारों और लोगों के चलने के लिए चौड़ा गलियारा बना हुआ है, ताजमहल के पीछे यमुना नदी भी बहती है ! 

हम लोगों ने अपने जूते बाहर जमा किए और इन गलियारों का चक्कर लगते हुए ताजमहल के अंदर दाखिल हो गए ! ताजमहल में लगे झरोखों से देखने पर मुख्य द्वार तक का नज़ारा साफ दिखाई देता है ! काफ़ी देर घूम लेने के बाद हम लोग बाहर आकर गलियारे में एक चबूतरे पर बैठ गए ! जून का महीना, मतलब कड़कड़ाती धूप, और इस तेज धूप में चलने की हिम्मत किसी की भी नहीं हो रही थी ! हम लोग तो ताजमहल के साथ-2 लाल-किला और बुलंद दरवाजा भी देखने की योजना बनाकर आए थे ! पर गर्मी की वजह से अब और ज़्यादा चलने की हिम्मत नहीं हो रही थी, फिर हमने सोचा यहाँ बैठने से अच्छा है कि चल कर वॉटर पार्क में मस्ती की जाए ! ताजमहल आते हुए हमने आगरा से 15 किलोमीटर पहले एक वॉटर पार्क देखा था, हमारा विचार इसी वॉटर पार्क में जाने का था फिर थोड़ी देर में वॉटर पार्क जाने की इच्छा लिए हमने वापसी की राह पकड़ ली ! 

बाहर निकलते हुए हम लोगों की नज़र ताजमहल संग्रहालय पर पड़ी तो हमने सोचा क्यों ना यहाँ भी घूम लिया जाए ! ताजमहल संग्रहालय में हमें काफ़ी रोचक और उपयोगी जानकारी मिली, जिनमें से प्रमुख थी ताजमहल बनाने में ईस्तमाल हुए पत्थर ! ये पत्थर दुनिया के अलग-2 हिस्सों से मंगाए गए थे और हर पत्थर की अपनी एक अलग विशेषता है ! ताजमहल संग्रहालय भ्रमण करने के बाद हम लोग पार्किंग स्थल पर पहुँचे, अपनी गाड़ी उठाई और खाते-पीते हुए वापस मथुरा की ओर चल दिए ! गाड़ी की सीएनजी भी ख़त्म होने के कगार पर थी इसलिए आगरा से निकलते समय गाड़ी में सीएनजी भरवा ली ! अगर आप में से किसी सज्जन को गाड़ी में सीएनजी की ज़रूरत पड़ जाए तो आगरा से मथुरा की ओर आते हुए आपकी बाईं ओर एक सीएनजी स्टेशन है और दूसरा स्टेशन मथुरा से दिल्ली आते हुए छटीकरा से 4-5 किलोमीटर पहले है ! 

जून 2013 में आगरा में सीएनजी का मूल्य 52 रुपए किलो और मथुरा में 70 रुपए किलो था ! गाड़ी में सीएनजी लेकर हटे तो दोपहर के 12 बजकर 35 मिनट हो रहे थे, आगरा से लगभग 15 किलोमीटर चलने के बाद हमें सड़क के दाईं ओर डाल्फिन वॉटर पार्क का बोर्ड दिखाई दिया ! हम लोग राजमार्ग से उतरकर वॉटर पार्क की ओर चल दिए, गाड़ी पार्किंग में लगाई और वॉटर पार्क के मुख्य द्वार पर पहुँच गए ! आप लोगों की जानकारी के लिए बता दूँ कि यहाँ का प्रवेश शुल्क 350 रुपए प्रति व्यक्ति है, और मदिरा का सेवन करके अंदर जाना प्रतिबंधित है ! ये जानकारी हमें वॉटर पार्क के प्रवेश द्वार पर चेकिंग के दौरान लगी, काफ़ी लोगों को अंदर नहीं जाने दिया गया जो मदिरा का सेवन करके आए थे ! रविवार का दिन होने के कारण यहाँ बहुत भीड़ थी ! वॉटर पार्क में जल क्रीड़ा करने के परिधान हम अपने साथ लाए थे, वरना इसके लिए भी पैसे खर्च करने पड़ते ! 

खैर, हम लोगों ने पानी में जाकर खूब मस्ती की और शाम को 6 बजे वहाँ से बाहर निकले ! यहाँ से निकलने के बाद बहुत थकान हो गई थी और भूख भी बहुत तेज लगी थी ! हमने सोचा रास्ते में कहीं रुक कर कुछ खा लिया जाए, पर जेब में हाथ डाले तो सिर्फ़ 100 रुपये निकले ! हमारे पास जितनी भी नगदी थी वो सब घूमने फिरने में खर्च हो गए थे अब तो कार्ड का सहारा था ! रास्ते में कोई एटीएम भी नहीं दिखा था इसलिए नगदी नहीं निकाल पाए थे ! खैर, मथुरा के पास एक मॉल में इस उम्मीद से घुसे की वहाँ से कुछ खाने पीने का समान ले लेंगे और कार्ड से बिल का भुगतान कर देंगे ! अंदर गए तो हमें 2 एटीएम भी दिखाई दिए जिनमें से एक तो खराब हालत में था और दूसरे पर इतनी भीड़ थी जैसे वहाँ मुफ़्त में पैसे बाँटें जा रहे हो ! 

फिर एक दुकान पर खाने पीने का सामान लिया और भुगतान के लिए अपना क्रेडिट कार्ड दे दिया ! गनीमत थी कि वहाँ कार्ड से भुगतान हो गया, वरना आज तो भूखे ही घर जाना पड़ता ! सारा सामान लेकर वहाँ से बाहर निकले और आकर अपनी गाड़ी में बैठकर पलवल के लिए अपना सफ़र जारी रखा ! वापसी में टोल पर काफ़ी जाम होने की वजह से हम लोगों को घर पहुँचते-2 पौने दस बज गए ! रास्ते में ही घर फोन करके बता दिया था कि खाना घर पर ही खाएँगे ! पलवल पहुँच कर सभी लोग अपने-2 घर चले गए, मैने रात्रि का भोजन किया और आराम करने के लिए अपने बिस्तर पर चला गया !
car trip
Way to Agra
breakfast on highway
नाश्ते की तैयारी (Ready for Breakfast)
near mathura

NH 2
चल बेटा सेल्फी ले ले रे (Selfie Time)
agra tempo
बिजली से चलने वाले ऑटो (Electronic Rickshaw)
short route tajmahal
ताजमहल जाने का पैदल मार्ग (On the way to TajMahal)
taj mahal
ताजमहल के बाहर (Entrance Taj Mahal)
entery in taj mahal
प्रवेश टिकट दिखाते हुए हितेश (Entry Pass TajMahal)
in tajmahal
शशांक और विपुल
taj mahal

entry to taj
ताजमहल का प्रवेश द्वार (TajMahal Main Entrance)
taj mahal
ताजमहल की पहली झलक (First View of TajMahal)
view of taj

greenry in taj
ताजमहल के अंदर मैदान (A Groud in TajMahal Area)
waah taj

walk near taj

bacside of taj
ताजमहल के पीछे बहती यमुना (River Yamuna Near TajMahal)
ताजमहल के एक झरोखे में से दिखाई देता नज़ारा
mosque

mosque in taj

taj museum
ताज संग्रहालय जाते हुए (Way to Taj Museum)

taj mahal ground



क्यों जाएँ (Why to go Agra): अगर आपको ऐतिहासिक इमारतें देखने का शौक है और साप्ताहिक अवकाश पर दिल्ली के पास कहीं घूमने जाने का विचार बना रहे है तो आगरा आपके लिए एक बढ़िया विकल्प है ! 

कब जाएँ (Best time to go Agra): वैसे तो आप साल के किसी भी महीने में आगरा जा सकते है लेकिन गर्मी के मौसम में यहाँ दिल्ली जैसी ही गर्मी पड़ती है और तपती दोपहरी में आगरा के ऐतिहासिक इमारतों के पत्थर खूब जलते है, कुछ इमारतों में तो नंगे पैर भी चलना पड़ता है ! गर्मी के मौसम में किले घूमने में भी परेशानी ही होती है ! बेहतर रहेगा आप यहाँ ठंडे मौसम में ही घूमने आए, सितंबर से फ़रवरी यहाँ आने के लिए बढ़िया मौसम है !

कैसे जाएँ (How to reach Agra): आप दिल्ली से आगरा सड़क या रेल किसी भी मार्ग से जा सकते है दिल्ली से आगरा के लिए नियमित अंतराल पर ट्रेने चलती रहती है ! जबकि अगर आप सड़क मार्ग से भी आगरा जा सकते है यमुना एक्सप्रेस वे शानदार राजमार्ग है ! जहाँ ट्रेन से जाने में आपको 3-4 घंटे का समय लगेगा वहीं आप एक्सप्रेस वे से ढाई से तीन घंटे में आगरा पहुँच जाओगे ! इस एक्सप्रेस वे पर रफ़्तार की वजह से अमूमन दुर्घटनाएँ होती रहती है इसलिए इस मार्ग पर चलते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतें !

कहाँ रुके (Where to stay in Agra): आगरा उत्तर प्रदेश का एक प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र है दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताज महल को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों सैलानी आते है ! इसलिए आगरा में रुकने के लिए होटलों की भी कोई कमी नहीं है आपको यहाँ 600 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक के होटल मिल जाएँगे !

क्या देखें (Places to see in Agra): आगरा में देखने के लिए जगहों की भी कोई कमी नहीं है लोग यहाँ ताज महल के अलावा लाल किला, सिकंदरा, महताब बाग, ताज नेचर वॉक, जामा मस्जिद, बुलंद दरवाजा और फतेहपुरी सीकरी घूमने आते है ! दिल्ली से आगरा आते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर आगरा से 20 किलोमीटर पहले कीठम लेक नामक एक झील है ये भी देखने के लिए एक शानदार जगह है ! इसी मार्ग पर आगे चलने पर डॉल्फिन वॉटर पार्क है यहाँ भी कुछ समय आप बिता सकते है जबकि थोड़ी ओर आगे बढ़ने पर गुरु का ताल नाम का एक गुरुद्वारा भी है ! ये सभी जगहें शानदार है, जो आपकी इस यात्रा को यादगार बना देंगी !

समाप्त...

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