Tuesday, April 18, 2017

ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग (River Rafting in Rishikesh)

शनिवार, 25 मार्च 2017

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ऋषिकेश - उत्तराखंड
आज हम ऋषिकेश घूमने के अलावा गंगा नदी में राफ्टिंग भी करने वाले थे, आगे बढ़ने से पहले कुछ जानकारी इस जगह के बारे में दे देता हूँ ! ऋषिकेशउत्तराखंड के देहरादून जिले में हिमालय की तलहटी में स्थित है ! ये शहर धर्म के साथ-2 रोमांच के लिए भी सारी दुनिया में मशहूर है फिर चाहे वो रिवर राफ्टिंग हो, बंजी जंपिंग या कोई और रोमांचक खेल, ऋषिकेश में सब कुछ होता है ! ऋषिकेश को गढ़वाल का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है, क्योंकि चाहे हिमालय में स्थित चारों धाम हो या पहाड़ों की ऊँचाई पर बसे अन्य कोई दुर्गम स्थान, अधिकतर जगहों पर जाने के लिए रास्ता ऋषिकेश से होकर ही निकलता है ! ऋषिकेश तीन तरफ से हरिद्वार, पौडी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल से घिरा हुआ है ! यहाँ आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या भी कम नहीं है हर साल यहाँ हज़ारों की तादात में विदेशी लोग आते है ! कुछ लोग तो यहाँ के रोमांच की दुनिया का मज़ा लेने आते है जबकि अन्य लोग आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए ऋषिकेश का रुख़ करते है !


ऋषिकेश में स्थित मरीन ड्राइव
हम सब सुबह 5 बजे ऋषिकेश पहुँचते ही आकर सो गए थे, ढाई-तीन घंटे बाद सोकर उठे तो ब्रश करने के बाद हल्का नाश्ता लिया और आज घूमने जाने वाली जगहों पर चर्चा करने लगे ! रफ्टिंग तो करनी ही थी इसलिए नहाने का मन किसी का भी नहीं था, फिर गाड़ी उठाई और ऋषिकेश में ही बैराज के पास स्थित एक जगह देखने चल दिए ! इस जगह को लोग मरीन ड्राइव के नाम से जानते है, स्थानीय लोग तो यहाँ आते ही रहते है लेकिन बाहर से आने वाले गिनती के लोगों को ही इस जगह की जानकारी है ! 10 मिनट का सफ़र तय करके हम मरीन ड्राइव पहुँचे, सुबह-2 का समय था इसलिए यहाँ इक्का-दुक्का लोग ही थे ! इस जगह की खूबसूरती को देखकर अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं था कि शाम के समय यहाँ खूब रौनक रहती होगी ! प्रेमी युगलों, और नव-विवाहितों के लिए ये एक आदर्श जगह है, बाहों में बाहें डाल कर यहाँ अपने प्रियतम के साथ घंटो घूमते रहो, या फिर नदी किनारे बैठकर घंटे बातें करते रहो ! नदी किनारे पैदल चलने वालों के लिए यहाँ एक पक्का मार्ग बना है और इस मार्ग के किनारे-2 खूबसूरत पेड़-पौधे लगे है ! पतझड़ ऋतु होने के कारण इस समय कुछ पेड़ों पर से तो पत्ते भी नदारद थे ! 

यहाँ खड़े होकर कुछ देर फोटो खींचने के बाद हम नदी पर बने बैराज पर जाकर बैठ गए, थोड़ी देर यहाँ समय बिताने के बाद हम वापिस अपनी गाड़ी लेकर बैराज पर बने पुल से होते हुए नदी के दूसरी तरफ चले गए ! पुल पार करते ही सामने राजाजी वन्य जीव उद्यान का प्रवेश द्वार है, जहाँ 12 रुपए का शुल्क अदा कर हम जंगल के अंदर जा रहे मार्ग पर निकल पड़े ! ये मार्ग राम और लक्ष्मण झूले की और जाता है जबकि इसी मार्ग से होते हुए एक अन्य मार्ग नीलकंठ महादेव मंदिर की ओर भी चला जाता है ! घने जॅंगल के बीच में से जाते इस मार्ग पर आते-जाते कभी-2 वन्य जीव भी दिख जाते है, वैसे हमें तो वानर और लंगूर के अलावा कुछ नहीं दिखा ! 6-7 किलोमीटर जाने के बाद दाईं तरफ जाता नीलकंठ महादेव मंदिर जाने का मार्ग अलग हो जाता है जबकि बाईं ओर वाला मार्ग वाला मार्ग राम झूला और लक्ष्मण झूला होते हुए आगे जाकर देवप्रयाग जाने वाले मार्ग पर मिल जाता है ! थोड़ा आगे बढ़े तो एक तिराहा आया, यहाँ से बाईं ओर जाने वाला मार्ग राम झूला को चला जाता है जबकि दाईं ओर जाने पर लक्ष्मण झूला है ! 

लक्ष्मण झूला से पहले एक टैक्सी स्टैंड भी है जहाँ से लोग नीलकंठ महादेव जाने के लिए किराए पर टैक्सी/जीप लेते है ! वैसे यहाँ से थोड़ी-2 देरी पर नीलकंठ मंदिर जाने के लिए शेयर्ड जीप भी चलते रहते है ! टैक्सी स्टैंड से थोड़ी आगे जाने पर एक गोल-चक्कर है यहाँ भगवान शिव की एक प्रतिमा लगी है ! इस गोल चक्कर से बाईं ओर लक्ष्मण झूला है जबकि सामने एक मंदिर है, गोल चक्कर से थोड़ी आगे जाने पर नदी किनारे एक बीच बना है इसे गोवा बीच कहते है ! इस बीच पर अक्सर विदेशी लोग पड़े रहते है, आम लोगों के यहाँ जाने पर पाबंदी तो नहीं है लेकिन स्थानीय पुलिस या सुरक्षाकर्मी नियमित अंतराल पर यहाँ चक्कर लगाते रहते है ! हमने गोल चक्कर से थोड़ा आगे बढ़कर अपनी गाड़ी खड़ी कर दी और पैदल ही लक्ष्मण झूला देखने चल दिए ! लक्ष्मण झूले पर दुपहिया वाहन या पैदल यात्री ही जा सकते है, चार-पहिया वाहनों को ले जाने लायक ये मार्ग नहीं है ! इस झूले पर आने-जाने वाले लोगों का ताँता सा लगा रहता है और रहे भी क्यों ना, पुल ही तो है जो नदी के दोनों किनारों पर बसे इलाक़ों को आपस में जोड़ता है, इसलिए ये पुल हमेशा व्यस्त रहता है 

पुल पर खड़े होकर आस-पास की कुछ फोटो खींचने के बाद हम पुल के उस पार जाकर बैठ गए, इस बीच हितेश और शाकिब राफ्टिंग के बारे में जानकारी लेने में लगे रहे ! पुल के दोनों ओर अच्छा-ख़ासा बाज़ार है, जहाँ आपको खाने-पीने से लेकर कपड़े और अन्य सामान बड़ी आसानी से मिल जाएगा ! हम जहाँ बैठे थे वहाँ सामने ही एक रेस्तराँ था जहाँ कुछ विदेशी लोग बैठ कर बातें कर रहे थे ! हम यहाँ बैठकर आस-पास की सभी गतिविधियाँ देख रहे थे, कुछ लोग यहाँ नशे का व्यापार भी करते है, विदेशी लोग इनके सबसे बड़े खरीददार होते है ! समय काटने के लिए हमने बगल में ही खड़े एक फेरी वाले से खाने के लिए नमकीन ले लिए, एक बात तो है कि यहाँ बैठकर आप कभी बोर नहीं हो सकते, फिर चाहे घंटो तक यहाँ बैठे रहो ! थोड़ी देर बाद जब हमारे दोनों साथी राफ्टिंग का पता करके आ गए तो हम पुल पार करके वापिस इस तरफ आ गए जहाँ हमारी गाड़ी खड़ी थी ! 2-3 राफ्टिंग कराने वालों से बात की थी, कोई रफ्टिंग करवाने के 500 रुपए माँग रहा था तो कोई 600 रुपए ! 

एक राफ्टिंग वाले से राफ्टिंग और कैंपिंग का मिलाकर 1600 रुपए प्रति व्यक्ति में बात चल रही थी जिसमें रात को नदी किनारे बने कैंप में रुकना और तीनों समय का खाना शामिल था ! लेकिन हमें तो राफ्टिंग के बाद आज शाम को ही आगे देवप्रयाग के लिए निकलना था इसलिए हमने सिर्फ़ राफ्टिंग के लिए सौदा तय किया ! बाद में हमने 400 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से शिवपुरी से लक्ष्मण झूला तक राफ्टिंग का सौदा तय किया, ये राफ्टिंग वाला टैक्सी स्टैंड के सामने ही था ! अग्रिम भुगतान करने के बाद हमने राफ्टिंग वाले को एक फार्म भरकर दिया, और वापिस अपनी गाड़ी की ओर चल दिए, ताकि अपने जूते और अन्य सामान गाड़ी में रख सके ! गाड़ी की ओर जाते हुए रास्ते में बाज़ार से ख़रीदकर कुछ फल खाए और गन्ने का जूस भी पिया ! लगभग आधे घंटे बाद तय समय पर हम वापिस उस राफ्टिंग वाले के पास पहुँचे, जहाँ से हम अपनी राफ्ट लेकर एक सूमो में सवार होकर शिवपुरी के लिए निकल पड़े ! राफ्ट जीप की छत पर रखी हुई थी और राफ्ट पर हमारे साथ जाने के लिए हमारा कैप्टन दीपक नेगी और उसके अन्य साथी भी थे ! 

आधे घंटे का सफ़र तय करके हम शिवपुरी पहुँचे, यहाँ दीपक और उसके साथी राफ्ट को जीप से उतारकर नदी के किनारे लेकर चल दिए ! हम लोग पेडल, हेल्मेट और बाकी का सामान लेकर चल रहे थे ! सड़क से नदी के किनारे तक जाने का मार्ग ऊबड़-खाबड़ था, इस रास्ते से उतरकर हम नदी के किनारे एक रेतीले मैदान में पहुँच गए ! बारिश के दिनों में गंगा नदी इस रेतीले मैदान को भी अपनी चपेट में ले लेती है ! राफ्ट को पानी में उतारकर सभी लोग उसमें सवार हो गए, लेकिन राफ्टिंग शुरू करने से पहले हमारे कैप्टन ने सबको कुछ दिशा निर्देश दिए ! दीपक ने कहा कि अगर राफ्टिंग के दौरान सुरक्षित रहना है तो इन निर्देशों का पालन करना ज़रूरी है, बाकि आपकी यात्रा रोमांचक होगी, इस बात की गारंटी मैं लेता हूँ ! वाकई दीपक लाजवाब कैप्टन है, अगर आप भी ऋषिकेश राफ्टिंग करने जा रहे है तो दीपक के साथ राफ्टिंग पर जा सकते है उसका नंबर यहाँ दे रहा हूँ 7060143837 ! दीपक ने हमें पेडल चलाने से लेकर बोट में पैर लॉक करना और रेपिड के दौरान कैसे संभलना है सबकुछ बता दिया ! फिर हम सबको अपने-2 स्थान पर बैठने का कहकर राफ्ट को मुख्य धारा में ले चला !

थोड़ी दूर चलते ही हमारा सामना पहले रेपिड से हुआ, इस दौरान गंगा की तेज लहरे हमारे राफ्ट से टकरा कर हम सबको भिगो गई, सब रोमांच से भरकर चिल्लाने लगे ! दीपक कोई भी रेपिड आने से पहले हम सबको उस रेपिड से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी के साथ ज़रूरी दिशा-निर्देश भी दे देता था ! जिस तरीके से दीपक हमें निर्देश दे रहा था वो वाकई क़ाबिले तारीफ़ था ! बीच में एक-दो रेपिड में तो मुझे ऐसा लगा जैसे हम किसी चट्टान से टकरा ही जाएँगे, लेकिन हमारे कप्तान के कुशल नेतृत्व ने सब कुछ संभाल लिया ! दीपक का सामना रोजाना विदेशी लोगों से होता रहता है जिसकी झलक उसके बोलने के तरीके में साफ देखी जा सकती थी ! इस रेपिड से निकलने के बाद पानी से मेरा डर कुछ हद तक कम हो गया था लेकिन पूरा डर भगाने के लिए अभी एक परीक्षा बाकी थी ! अगले रेपिड की तीव्रता अधिक थी, पानी की लहरें काफ़ी ऊँची उठी, लेकिन हम सब इन लहरों का सामना करने के लिए तैयार है ! इसके बाद तो जो भी रेपिड आए, हमने उन सबका भरपूर आनंद लिया ! 

रेपिड को पार करने के बाद जब जल-धारा शांत हो गई, तो दीपक ने कहा, अब जिस-2 को नदी में कूदना है कूद सकते हो ! उसके ये कहते ही हितेश और शशांक पानी में कूद गए, उनके कूदने के बाद मैं कहाँ रुकने वाला था, झट से पानी में कूदकर राफ्ट के किनारे लगी रस्सी पकड़ ली ! शुरू में तो हम तीनों ही राफ्ट के किनारे वाली रस्सी पकड़ कर पानी में रुके रहे, लेकिन थोड़ी देर बाद तीनों रस्सी छोड़कर नदी में राफ्ट से भी काफ़ी आगे चले गए ! लाइफ जैकेट के सहारे तैरते हुए हम तीनों आगे बढ़े जा रहे थे, रास्ते में हमने कुछ विदेशी जोड़ों को नदी के किनारे अठखेलियाँ करते हुए भी देखा ! फिर हमने नदी के किनारे एक जगह देखी, जहाँ एक बड़े से पत्थर के ऊपर चढ़कर लोग नदी में छलाँग लगा रहे थे, नदी से देखने पर तो पत्थर की ऊँचाई ज़्यादा नहीं लग रही थी, लेकिन इस पत्थर के ऊपर चढ़ने के बाद मैने बहुत से लोगों को यहाँ से वापिस जाते भी देखा ! तैरते हुए हम नदी की मुख्य धारा से इस किनारे पर पहुँचे और पत्थरों से होते हुए हम भी उस ऊँचे पत्थर पर पहुँच गए जहाँ से नदी में छलाँग लगानी थी ! 

एक बार तो हमारा हौंसला भी डगमगाया लेकिन फिर हिम्मत करके हम तीनों बारी-2 से इस पत्थर से नीचे नदी में कूद ही गए ! पत्थर से कूदते हुए जितनी देर हवा में रहते है उतनी देर ही डर लगता है एक बार पानी में जाने के बाद तो सारा डर ख़त्म हो जाता है ! वैसे भी हम तो काफ़ी दूर से पानी में तैरते हुए आ ही रहे थे इसलिए हमारा डर तो अब ख़त्म हो चुका था ! लेकिन फिर भी जितनी देर हवा में थे, दिल में अजीब सी सिहरन हो रही थी ! यहाँ खाने-पीने का सामान बेचने वाले बढ़िया चाँदी काटते है, खाने-पीने का कोई भी सामान दुगुने मूल्य पर बेचा जा रहा था ! एक बार तो लगता है कि ग़रीब लोग है इनकी आजीविका का साधन ही यही है फिर दूसरी ओर ये भी लगता है कि इसका मतलब ये तो नहीं कि कुछ भी सामान दुगुने मूल्य पर बेचा जाए ! इतनी महंगाई तो त्रिऊंड ट्रेक के दौरान ऊपर जाकर भी नहीं मिली थी ! खैर, अब तक हमारी राफ्ट भी यहाँ किनारे आकर खड़ी हो चुकी थी, ज़्यादा दिमाग़ ना खपाते हुए हम कुछ समय यहाँ बिताने के बाद हम वापिस जाकर अपनी राफ्ट में बैठ गए ! 


यहाँ से चले तो रास्ते में एक रेपिड और आया, फिर गोआ बीच पार करते हुए हम लक्ष्मण झूला के पास पहुँच गए ! अंतिम रेपिड पार करने के बाद लक्ष्मण झूले तक हम तीनों नदी में ही लाइफ जैकेट के सहारे तैरते रहे, सच में आज बहुत आनंद आया ! पहली बार राफ्टिंग करके बड़ा आनंद आया और अब तो ललक सी जग गई है, पता नहीं राफ्टिंग के चक्कर में ही दोबारा कब मुँह उठाकर ऋषिकेश चला आऊँ !लक्ष्मण झूला के पास नदी से बाहर आए तो पूरी तरह भीग चुके थे यहाँ दीपक और उसके अन्य साथियों को धन्यवाद देते हुए हम कपड़े बदलने के लिए अपनी गाड़ी की ओर चल दिए ! कपड़े बदलने के बाद अपनी गाड़ी उठाई और फिर से शिवपुरी की ओर चल दिए ताकि नदी भोजन करने के बाद सुकून के कुछ पल नदी के किनारे बिता सके !


मरीन ड्राइव के पास का एक दृश्य


मरीन ड्राइव के पास का एक दृश्य


मरीन ड्राइव के पास का एक दृश्य


राजाजी वन्य जीव उद्यान से होते हुए लक्ष्मण झूला जाते हुए


राजाजी वन्य जीव उद्यान से होते हुए लक्ष्मण झूला जाते हुए


लक्ष्मण झूला के पास शंकर जी की एक मूर्ति


लक्ष्मण झूले का एक दृश्य


लक्ष्मण झूले का एक दृश्य


लक्ष्मण झूले से दिखाई देती गंगा नदी


लक्ष्मण झूले से दिखाई देती गंगा नदी


नदी के किनारे से लिया एक चित्र




नदी के किनारे से लिया एक चित्र




नदी के किनारे बना एक घाट


राफ्ट को जीप में चढ़ाने की तैयारी करते हुए


राफ्ट को जीप से उतारते हुए


नदी के किनारे रेतीला मैदान


राफ्टिंग के लिए तैयार




पत्थर से नदी में छलाँग लगाने के लिए तैयार




हमारा कप्तान दीपक नेगी



कब जाएँ (Best time to go Rishikesh): वैसे तो बारिश को छोड़कर ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग के लिए आप किसी भी मौसम में जा सकते है लेकिन मार्च से जून का मौसम रिवर राफ्टिंग के लिए सबसे बढ़िया है !

ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग के रूट (River rafting routes in Rishikesh):

  1. कौड़ियाला से लक्ष्मण झूला (36 किलोमीटर रेपिड लेवल 1 से 4) 13 मेजर रेपिड  
  2. कौड़ियाला से मरीन ड्राइव (10 किलोमीटर रेपिड लेवल 3 और 4)
  3. मरीन ड्राइव से शिवपुरी (11 किलोमीटर रेपिड लेवल 2 और 3)
  4. शिवपुरी से ब्रह्मपुरी (11 किलोमीटर रेपिड लेवल 1 और 2)
  5. ब्रह्मपुरी से लक्ष्मण झूला (9 किलोमीटर रेपिड लेवल 1)
राफ्टिंग समय: हमने शिवपुरी से लक्ष्मण झूला तक राफ्टिंग के लिए 400 रुपए प्रति व्यक्ति दिए और हमें राफ्टिंग करने में लगभग 3 घंटे का समय लगा !

राफ्टिंग का खर्च - ऋषिकेश में राफ्टिंग के लिए आपको 400 रुपए से लेकर 1300 रुपए तक खर्च करने पड़ सकते है, ये खर्च इस बात पर निर्भर करता है आप कौन से रूट पर राफ्टिंग कर रहे है ! बाकि अगर आप राफ्टिंग के साथ कैंपिंग का पैकेज भी लेते है तो आपको सस्ता पड़ेगा ! शिवपुरी से लक्ष्मण झूला तक राफ्टिंग और कैंपिंग का खर्च लगभग 1500 रुपए प्रति व्यक्ति आएगा ! वैसे, राफ्टिंग के बाद नदी किनारे कैंप में रुकना बड़ा सुखद अनुभव रहता है रात में बोन फायर करते हुए मस्ती करना आपको ताउम्र याद रहेगा !

ऋषिकेश में आपको राफ्टिंग कराने के लिए बहुत सी एजेंसिया मिल जाएँगी, हमने जिस एजेंसी के माध्यम से राफ्टिंग की उसका नंबर यहाँ दे रहा हूँ, दीपक नेगी - 7060143837

कहाँ खाएँ: ऋषिकेश में अच्छा ख़ासा बाज़ार है और यहाँ खाने-पीने के बहुत विकल्प मौजूद है, कुछ बड़े रेस्टोरेंट भी है ! आप अपनी जेब और अपने स्वाद के हिसाब से कहीं भी खा सकते है !

स्पेशल टिप्स: शराब पीकर कभी भी राफ्टिंग ना करें, बहुत से लोग मस्ती करने के लिए ऐसा करते है, ये जोखिम भरा है जानलेवा हो सकता है !


अगले भाग में जारी...

ऋषिकेश लैंसडाउन यात्रा
  1. दिल्ली से ऋषिकेश की सड़क यात्रा (A Road Trip to Rishikesh)
  2. ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग (River Rafting in Rishikesh)
  3. देवप्रयाग – भागीरथी और अलकनंदा का संगम (A Morning in Devprayag)
  4. देवप्रयाग से पौडी होते हुए लैंसडाउन (A Road Trip from Devprayag to Lansdowne)
  5. दरवान सिंह म्यूज़ीयम और ताड़केश्वर महादेव मंदिर (A Visit to Darwan Singh Museum and Tarkeshwar Mahadev Temple)

10 comments:

  1. सिर्फ 400 मे राफ्टिंग।बढिया है।

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    1. हां जी, बढ़िया राफ्टिंग रही !

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  2. प्रदीप भाई आपकी यह पोस्ट पढकर मुझे अपनी राफ्टिंग याद आ गई, हमारे राफ्टिंग लीडर का नाम भी दीपक ही था। फोटो में गंगा जी की सुंदरता साफ दिखाई पड रही है। बैराज (मरीन ड्राईव) के फोटो भी अच्छे है।

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    1. सचिन भाई, हो सकता है ये वोही दीपक हो, मैने फोटो भी लगाई है, पहचान लो ! वैसे मरीन ड्राइव शानदार जगह मिली ऋषिकेश में !

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  3. ऋषिकेश में आपकी राफ्टिंग देख कर बहुत अच्छा लगा

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    1. देखकर ही इतना अच्छा लग रहा है तो उम्मीद है जब आप खुद राफ्टिंग का मज़ा लेंगे तो ये आनंद और ज़्यादा होगा !

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  4. एक अलग ही ढंग से ऋषिकेश का वर्णन। मरीन ड्राईव देखने लायक एकदम बॉम्बे की तरह बहुत अच्छा 👌राफ्टिंग के मध्य के भी फोटू होते तो मजा दुगना हो जाता ।

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    1. राफ्टिंग के मध्य कैमरा हमारे कैप्टन के पास था, उसने फोटो ज़्यादा अच्छे नहीं लिए, इसलिए मैने पोस्ट में शामिल नहीं किए !

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  5. वाह ! मजा आ गया ।
    राफ्टिंग ऋषिकेश में तो नही की, मगर ओरछा में कई बार कर चुका हूँ । बढ़िया वर्णन ।
    जय हो

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    1. पांडे जी, आपके वो ओरछा में बेतवा नदी में राफ्टिंग के फोटो भी देखे है मैने ! लेकिन कभी ऋषिकेश आना हो तो गंगा नदी में भी राफ्टिंग का मज़ा लीजिए !

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