Saturday, January 30, 2016

गोमती नदी के कुड़ीया घाट की सैर (Kudiya Ghaat of Gomti River, Lucknow)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

अपनी लखनऊ यात्रा से पहले मैने कुड़ीया घाट से संबंधित इंटरनेट पर जो फोटो देखे थे उनके आधार पर ही इस जगह को मैने लखनऊ में देखने वाली जगहों की अपनी सूची में डाल लिया था ! वैसे कई बार कुछ जगहों का दिखावा बहुत होता है पर असल में जाने पर वहाँ कुछ ख़ास नहीं मिलता ! कुड़ीया घाट पर जाने का अपना अनुभव मैं इस लेख के माध्यम से साझा कर रहा हूँ, इस घाट को लेकर मेरी प्रतिक्रिया मिली-जुली है ! लखनऊ भ्रमण के दौरान जब मैने अधिकतर जगहें घूम ली तो एक शाम को रेजीडेंसी घूमने के बाद थोड़ा समय निकाल कर कुड़ीया घाट पर बिताने के लिए चल दिया ! रेजीडेंसी से इस घाट की दूरी मुश्किल से 3 किलोमीटर है, जहाँ जाने में हमें 10 मिनट का समय लगा ! शहर की भीड़-भाड़ से होते हुए हम मुख्य मार्ग से अलग निकलकर इस घाट तक जाने वाले मार्ग पर चल दिए ! मेरे और उदय के अलावा आदिल भी हमारे साथ था, 2 मोटरसाइकिलों पर सवार होकर एक बड़े से प्रवेश द्वार से होते हुए हम कुड़ीया घाट की पार्किंग में पहुँचे !


boating in gomti
कुड़ीया घाट का एक दृश्य (A view of Kudiya Ghaat)

Wednesday, January 27, 2016

लखनऊ की रेजीडेंसी में बिताई एक शाम (An Evening in the Residency, Lucknow)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

रेजीडेंसी, नाम सुनकर ही किसी के लिए भी ये अनुमान लगाना मुश्किल नहीं होगा कि ये इमारत कभी किसी का निवास स्थान रही होगी, पर किसका ? ये सोचने वाली बात है ! अगर आपके मन में आ रहा है कि अवध के किसी नवाब का, तो आप ग़लत है ! दरअसल, ये इमारत लखनऊ में रहने वाले ब्रिटिश जनरल और उनके सहयोगियों का निवास स्थान थी ! ब्रिटिश जनरल उस समय अवध के नवाबों की अदालत में ब्रिटिश सरकार का प्रतिनिधित्व किया करते थे, यही कारण है कि लखनऊ के बीचों-बीच गोमती नदी के किनारे स्थित इस इमारत को ब्रिटिश रेजीडेंसी के नाम से भी जाना जाता है ! पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित घोषित हो चुकी इस इमारत का लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों में काफ़ी महत्वपूर्ण स्थान है ! असल में रेजीडेंसी कई ऐसी इमारतों का एक समूह है जो कभी इस परिसर में मौजूद थी, वर्तमान में इनमें से अधिकतर इमारतें तो खंडहर में तब्दील हो चुकी है लेकिन जो बची है उन्हें देखने आने वालों की तादात अभी कम नहीं हुई ! वैसे अपने दौर में रेजीडेंसी में खूब चहल-पहल हुआ करती थी !


lucknow residency
रेजीडेंसी का प्रवेश द्वार (Entrance of Residency)

Sunday, January 24, 2016

खूबसूरत रूमी दरवाजा और हुसैनाबाद क्लॉक टावर (History of Rumi Darwaja and Husainabad Clock Tower)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

रूमी दरवाजा


छोटे इमामबाड़े से बाहर आने के बाद हमने पार्किंग में खड़ी अपनी मोटरसाइकल ली और मुख्य सड़क पर चल दिए ! यहाँ मैं आपको एक जानकारी देना चाहूँगा कि लखनऊ में अधिकतर जगहों पर मोटरसाइकल की पार्किंग का शुल्क 10 रुपए था, एक-दो जगहों पर ये ज़रूर 20 रुपए था ! वैसे लखनऊ की भीड़-भाड़ वाली जगहों पर घूमने के लिए बाइक सबसे बढ़िया साधन है, जो भीड़-भाड़ और संकरी गलियों से भी आसानी से निकल जाती है ! अगर गाड़ी में घूमना हो तो अतिरिक्त समय लेकर चलना होगा क्योंकि यहाँ के मुख्य चौराहों पर अक्सर जाम लगा रहता है ! छोटा इमामबाड़ा आते समय रास्ते में हम रूमी दरवाजे से होकर आए थे, ये भी लखनऊ की खूबसूरत धरोहरों में से एक है ! चलिए, इस लेख के माध्यम से आप लोगों को रूमी दरवाजे के बारे में ही बता देता हूँ !



rumi darwaja
रूमी दरवाजे का एक दृश्य (A Glimpse of Rumi Darwaja)

Thursday, January 21, 2016

लखनऊ की शानदार शाही बावली और छोटा इमामबाड़ा (A visit to Shahi Baoli and Chota Imambara)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

भूल-भुलैया से बाहर आकर हम शाही बावली देखने के लिए चल दिए, इमामबाड़े के पास बने चबूतरे से नीचे उतरकर दोनों बावली के प्रवेश द्वार पर पहुँच गए ! यहाँ मौजूद एक अधिकारी को अपना टिकट दिखाकर हमने अंदर प्रवेश किया, सलीम अभी भी हमारे साथ ही चल रहा था ! आगे बढ़ने से पहले थोड़ी जानकारी इस बावली के बारे में दे देता हूँ ! शाही बावली का निर्माण भी अवध के नवाब आसिफ़-उद्-दौला ने ही करवाया था ! बावली के निर्माण से पहले यहाँ एक कुआँ खोदा गया, जिसका पानी बाद में बावली और इसके आस-पास की इमारतों के निर्माण कार्य में प्रयोग हुआ ! सबसे पहले बावली का निर्माण हुआ, फिर आसिफी मस्जिद का और आख़िर में बड़े इमामबाड़े का ! कुछ लोगों की धारणा थी कि बावली में मौजूद कुआँ नीचे-2 गोमती नदी से जुड़ा हुआ था, जिस कारण कुएँ में हमेशा पानी रहता था ! वैसे अगर कुआँ गहरा हो तो इसमें सदा ही पानी रहता है, हाँ, गोमती नदी के पास में ही होने के कारण रिस कर ज़रूर पानी आता होगा ! लेकिन कुएँ के गोमती नदी से जुड़े होने वाली बात की पुष्टि नहीं हुई !


shahi baoli
शाही बावली का एक दृश्य (A Glimpse of Shahi Baoli, Lucknow)

Monday, January 18, 2016

लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा और भूल-भुलैया (A visit to Bada Imambada and Bhool Bhullaiya)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे !

नहा-धोकर तैयार होने के बाद मैने नाश्ता किया और उदय के साथ एक मोटरसाइकल पर सवार होकर लखनऊ भ्रमण के लिए चल दिया ! तहज़ीब वाले इस शहर की आबो-हवा कुछ ऐसी है कि यहाँ आने के बाद आप भी इसके रंग में ही रंग जाते है ! लखनऊ भ्रमण से पहले थोड़ी जानकारी इस शहर के इतिहास के बारे में दे देता हूँ ! लखनऊ मुगल काल में अवध प्रदेश के अंतर्गत आता था, मुगल शासक हुमायूँ ने अवध के अधिकतर हिस्से को जीतकर अपनी सल्तनत में मिला लिया था ! मुगल काल में अवध का संचालन दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत होता था ! 1719 तक अवध प्रदेश मुगल सल्तनत का एक हिस्सा था जिसकी देखरेख मुगल सम्राट द्वारा चुने गए नवाब या नज़ीम के द्वारा की जाती थी ! समय के साथ जब मुगलों की ताक़त कम होने लगी तो उनके द्वारा स्थापित इन प्रदेशों के नवाब और नज़ीम मजबूत हो गए ! इस बीच अवध भी पहले से काफ़ी मजबूत और स्वतंत्र हो गया, फिर 1722 में शादत ख़ान अवध के पहले नवाब बने !

bada imambara
बड़ा इमामबाड़ा (A view from Bada Imambara, Lucknow)

Friday, January 15, 2016

लखनऊ की ट्रेन यात्रा (Train Journey to Lucknow)

मेरा लखनऊ जाने का विचार तो काफ़ी पहले अक्तूबर के तीसरे सप्ताह में ही बन गया था, लेकिन दशहरा, दीवाली और छठ का त्योहार होने के कारण रेल में टिकटों की खूब मारा-मारी चल रही थी ! ऐसे में मुझे लखनऊ आने-जाने के लिए कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल था, इसलिए अपनी इस यात्रा को मैने आगे के लिए टाल दिया ! दीवाली बीतने के बाद जब एक बार फिर से लखनऊ जाने का खुमार मुझपर चढ़ने लगा तो मैने नए साल पर इस यात्रा पर जाने के लिए अपनी टिकटें आरक्षित करवा ली ! वैसे भी बहुत दिनों से लखनऊ में रहने वाला मेरा भाई उदय प्रताप सिंह भी ज़ोर दे रहा था कि भैया अबकी बार घूमने के लिए लखनऊ आ जाओ ! वैसे इस यात्रा के लिए मुझे कोई ख़ास तैयारी तो करनी नहीं थी, घूमने वाली जगहों की क्रमबद्ध तरीके से एक लिस्ट बना ली ! धीरे-2 दिन बीतते गए और दिसंबर का महीना भी ख़त्म होने लगा ! अंत में 31 दिसंबर का वो दिन भी आ गया जब मुझे इस यात्रा के लिए निकलना था, इस यात्रा पर ले जाने का सामान मैं पिछली रात को ही एक बैग में रख चुका था !


lucknow railway station
लखनऊ रेलवे स्टेशन (A glimpse of Lucknow Railway Station)

Tuesday, January 12, 2016

माँ वैष्णो देवी धाम – वृंदावन (Maa Vaishno Devi Temple, Vrindavan)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे !

माता वैष्णो देवी का नाम आते ही सबका ध्यान जम्मू के कटरा में स्थित भवन की और चला जाता है, पर क्या आप जानते है कि मथुरा में भी माता वैष्णो देवी का एक मंदिर है ! गोविंद देव मंदिर से बाहर आकर मैने अपनी मोटरसाइकल उठाई और वृंदावन-मथुरा मार्ग से होता हुआ प्रेम मंदिर को पार करने के बाद माँ वैष्णो देवी के मंदिर पहुँच गया ! प्रेम मंदिर से निकलने के बाद इसी मार्ग पर थोड़ा आगे बढ़ने पर दूर से ही माँ शेरावाली की एक विशाल प्रतिमा मुख्य सड़क के बाईं ओर दिखाई देती है ! शेर पर सवार माँ शेरावाली की ये प्रतिमा माँ वैष्णो देवी के धाम में है और इस प्रतिमा में माँ के चरणों में हनुमान जी भी विराजमान है ! अगर इस मंदिर के इतिहास के बारे में बात करे तो मंदिर का निर्माण कार्य मई 2003 में शुरू हुआ था और अगले सात साल बाद मई 2010 में ये बनकर तैयार हुआ ! इस मंदिर का भी हिंदू धर्म में बहुत महत्व है, हर वर्ष लाखों भक्त यहाँ माता के दर्शन के लिए आते है !

vaishno devi vrindavan
माँ वैष्णो देवी मंदिर वृंदावन (Vaishno Devi Temple, Vrindavan)

Friday, January 8, 2016

हिंदू-मुस्लिम शिल्पकला का प्रतीक - गोविंद देव मंदिर (Beauty of Govind Dev Temple, Vrindavan)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे !

रंगनाथ मंदिर से बाहर आकर अपनी मोटरसाइकल पर सवार होकर जैसे ही मैं मथुरा-वृंदावन मार्ग पर जाने के लिए आगे बढ़ा, सड़क के दाईं ओर मुझे एक भव्य इमारत दिखाई दी ! पहली ही झलक में इस इमारत की तस्वीर मेरे दिमाग़ में ऐसी छप गई कि इसे देखने की इच्छा मेरे मन में हिलोरे लेने लगी ! इच्छा इतनी तीव्र थी कि चाहकर भी इस इमारत को देखने का मोह में त्याग ना सका ! फिर सड़क के किनारे ही एक उपयुक्त जगह देख कर मैने अपनी मोटरसाइकल खड़ी की और पैदल ही इस इमारत की ओर जाने वाले एक सहायक मार्ग पर चल दिया ! 20-25 कदम चलने के बाद मैं इमारत के ठीक सामने खड़ा था, यहाँ आकर मुझे आभास हुआ कि मोटरसाइकल यहाँ तक भी लाई जा सकती थी ! पर सोचा कोई बात नहीं, इस समय भी वो जहाँ भी खड़ी है, सुरक्षित है ! मंदिर के बाहर लगे एक सूचना पट्ट को पढ़कर पता चला कि ये भव्य इमारत असल में गोविंद देव मंदिर है !

govind dev temple
गोविंद देव मंदिर, वृंदावन (Govind Dev Temple, Vrindavan)

Tuesday, January 5, 2016

भगवान विष्णु को समर्पित रंगनाथ मंदिर (A Temple, Dedicated to Lord Vishnu)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

वृंदावन में स्थित रंगनाथ मंदिर को लोग रंगजी मंदिर के नाम से भी जानते है, इस मंदिर में आने का मेरा विचार तो सुबह प्रेम मंदिर जाने से पहले का ही था ! फिर सोचा कि रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों से देखता हुआ चलता हूँ ताकि बाद में कोई हड़बड़ी ना रहे ! पागल बाबा मंदिर से रंगनाथ मंदिर की दूरी मात्र साढ़े तीन किलोमीटर है, जिसे तय करने में वैसे तो 10 मिनट से भी कम का समय लगता है लेकिन अगर जाम में फँस गए तो फिर बताना मुश्किल है कि कितना समय लग जाए ! मथुरा-वृंदावन मार्ग से जाने पर मंदिर तक जाने का मार्ग सीधा और काफ़ी चौड़ा है इसलिए जाम कम ही लगता है ! मंदिर तक जाने के लिए वृंदावन का बस अड्डा पार करने के बाद आपको अपने बाईं ओर मुड़ना होता है ! रंगनाथ मंदिर के खुलने का समय सुबह साढ़े 5 बजे से लेकर साढ़े दस बजे तक और फिर शाम को 4 बजे से लेकर रात्रि के 9 बजे तक है ! मंदिर में प्रवेश करने के दो द्वार है और दोनों द्वार एक जैसे ही लगते है ! मुख्य द्वार के सामने एक खुला मैदान है, जहाँ पूजा सामग्री से लेकर अन्य वस्तुओं की कुछ दुकानें है ! यहाँ गाड़ी खड़ी करने की भी पर्याप्त व्यवस्था है, लेकिन इसके बदले में आपको कुछ शुल्क अदा करना होता है !

rangnath temple
रंगनाथ मंदिर का प्रवेश द्वार (Entrance of Rangnath Temple)

Saturday, January 2, 2016

वृंदावन का पागल बाबा मंदिर (Pagal Baba Temple of Vrindavan)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

अब तक आपने पढ़ा कि कैसे बिरला मंदिर देखने के बाद मैं श्री कृष्ण जन्मभूमि और द्वारकाधीश मंदिर देखे बिना बेरंग ही लौट आया ! अब आगे, द्वारकाधीश मंदिर से पागल बाबा के मंदिर तक की 8 किलोमीटर की दूरी तय करने में मुझे ज़्यादा समय नहीं लगा ! मैं 10-12 मिनट में ही पागल बाबा मंदिर के मुख्य द्वार के सामने पहुँच गया, इस मंदिर की खूबसूरती भी देखते ही बनती है, सफेद संगमरमर का बना ये मंदिर भी यहाँ आने वाले लोगों में काफ़ी लोकप्रिय है ! मथुरा से वृंदावन आने पर बिरला मंदिर से 4 किलोमीटर चलने पर सड़क के बाईं ओर ये मंदिर स्थित है, जबकि प्रेम मंदिर से आने पर पुल से उतरकर तिराहे से दाएँ मुड़कर आधा किलोमीटर दूर ये मंदिर है ! लोग दूर-2 से इस मंदिर में दर्शन के लिए आते है, मैने मंदिर के अंदर वाली दीवारों पर लोगों की लिखी हुई मन्नतें भी देखी जो इस मंदिर के महत्व को प्रमाणित करती है ! नौ मंज़िला इस मंदिर में भगवान को विभिन्न झाँकियों द्वारा उनके विराट रूप और क्रियाकलाप दर्शाएँ गए है ! इस मंदिर का निर्माण ब्रज के प्रमुख संत श्री लीलानंद जी ठाकुर (पागल बाबा) द्वारा करवाया गया है, और इस मंदिर की गिनती उत्तर भारत के कुछ विशाल मंदिरों में की जाती है !

Pagal Baba Temple Vrindavan