Thursday, July 30, 2015

लाखामंडल से मसूरी की सड़क यात्रा (A Road Trip to Mussoorie)

रविवार, 27 दिसंबर 2009 

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम पहाड़ी की तलहटी में स्थित टाइगर फॉल में स्नान करके वापसी ख़तरनाक चढ़ाई करके अपनी गाड़ी पर पहुँचे ! अब आगे, टाइगर फॉल से वापिस आने के बाद मन काफ़ी रोमांचित हो गया था, सब यही कह रहे थे कि रास्ते में ऐसी एक-दो जगहें और देखने को मिल जाए तो ये मज़ा दुगुना हो जाएगा ! इसी दौरान जयंत बोला कि इसी मार्ग पर यहाँ से 50 किलोमीटर दूर एक जगह है लाखामंडल ! इस जगह के बारे में चकराता के स्थानीय लोगों ने जयंत को बताया था कि लाखामंडल में भी घूमने लायक कुछ जगहें है ! इस बार हम सब जयंत को बड़े ध्यान से सुन रहे थे, उसकी बात ख़त्म होते ही हम सब एक ही स्वर में बोले, ठीक है भाई, लाखामंडल भी घूमते हुए चलेंगे ! अपने पाठकों की जानकारी के लिए बता दूँ कि लाखामंडल एक प्राचीन शिव मंदिर के लिए प्रसिद्द है, जहाँ हर वर्ष हज़ारों श्रद्धालु आते है ! कुछ लोग तो ये भी कहते है कि पांडवों ने अपना कुछ समय यहाँ लाखामंडल में भी व्यतीत किया था ! 

map lakhamandal
लाखामंडल में मानचित्र

Monday, July 27, 2015

टाइगर फॉल में दोस्तों संग मस्ती (A Perfect Destination - Tiger Fall)

रविवार, 27 दिसंबर 2009 

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम रोमांच से भरे एक सफ़र को तय करके देवबन पहुँचे और कुछ समय वहाँ बिताने के बाद वापिस अपने होटल आ गए ! अब आगे, रात को बढ़िया नींद आई तो सुबह समय से सोकर उठे, उठने के बाद भी काफ़ी देर तक कंबल में ही बैठे रहे ! यहाँ चकराता में इतनी जबरदस्त ठंड पड़ रही थी कि बिस्तर से निकलने की हिम्मत किसी की भी नहीं हो रही थी ! वैसे, कल रात खूब अच्छी नींद आने का कारण ये था कि आज का कमरा कल वाले कमरे से काफ़ी बड़ा और बिस्तर भी काफ़ी नरम था ! दरअसल, कल दोपहर को जब एक नवविवाहित जोड़े ने ये कमरा खाली किया तो होटल वाले को अपना फ़ायदा दिखा, अभी उसके पास यही एक कमरा खाली था, और हमने दो कमरे लिए हुए हुए थे ! अब अगर हम चारों वो दो कमरे छोड़ कर एक ही कमरे में आ जाते तो होटल वाले के पास एक की जगह दो कमरे खाली हो जाते ! हमें भी कोई आपत्ति नहीं थी, इसलिए दो छोटे कमरों से अच्छा एक बड़े कमरे में रहना ज़्यादा उचित लगा ! 

view from hotel chakrata
होटल की छत से दिखाई देता एक दृश्य (A view from our Hotel in Chakrata)

Thursday, July 23, 2015

देवबन के घने जंगल की रोमांचक यात्रा (Road Trip to Deoban, Chakrata)

शनिवार, 26 दिसंबर 2009 

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यात्रा के पिछले लेख में आपने चकराता के स्थानीय भ्रमण के बारे में पढ़ा ! अब आगे, सुबह 8 बजे जब मैं सोकर उठा, देखा तो जयंत पहले ही उठ चुका था, वो बोला चल यार छत पर चलकर सूर्योदय के नज़ारे देखते है ! ठंड बहुत थी, बिस्तर से निकलने का मन तो नहीं हो रहा था, पर फिर भी हिम्मत करके बाहर निकलकर हम दोनों कमरे से बाहर चल दिए ! छत पर जाने से पहले बगल वाले कमरे में जाकर देखा तो दरवाजा खुला हुआ था और हमारे दोनों साथी अभी भी सो रहे थे ! हमारे जाने की आहट सुनकर वो दोनों भी जाग गए और फिर हम चारों छत पर सुबह के नज़ारे देखने चल दिए ! आज मौसम साफ लग रहा था इसलिए दूर तक फैले सुंदर नज़ारे देखे जा सकते थे, वैसे ठंड भी खूब तेज लग रही थी ! ठंड के मारे पूरा शरीर कंपकपा रहा था, हालत ये थी कि जैकेट की जेब से हाथ बाहर निकालने का मन भी नहीं हो रहा था, कान बरफ जैसे ठंडे हो गए थे, और ठंड के कारण ऐसा लग रहा था कि पैरों में उंगलियाँ ही ना हो ! 

view from hotel
होटल की छत से सूर्योदय (A view of sunrise from our Hotel, Chakrata)

Monday, July 20, 2015

चकराता के जंगल में बिताई एक शाम (A Beautiful Evening in Chakrata)

शुक्रवार, 25 दिसंबर, 2009 

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम गुड़गाँव से एक लंबी यात्रा करके चकराता पहुँचे ! अब आगे, वैसे हमने अपनी यात्रा शुरू करने से पहले इंटरनेट से चकराता में अपने रुकने के लिए होटल तो ढूँढे थे, पर इंटरनेट से ढूँढने पर चकराता में हमें गिनती के ही होटल मिले थे और उनमें से किसी में भी कोई कमरा खाली नहीं था ! काफ़ी माथापच्ची के बाद भी जब चकराता में रुकने के लिए कोई होटल नहीं मिला तो हमने सोचा कि कोई बात नहीं, हम चकराता पहुँच कर कोई होटल ढूँढ लेंगे, क्योंकि बहुत से ऐसे छोटे-बड़े होटल भी होते है जिनकी जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं होती ! इंटरनेट पर तो ज़्यादातर नामचीन होटल ही दिखाई देते है, या फिर ऐसे होटल जो पैसे खर्च करके अपनी वेबसाइट बनवाते है ! इसलिए चकराता पहुँचने के बाद हमारा सबसे पहला काम अपने लिए एक होटल ढूँढना था, ताकि थोड़ा आराम करने के बाद नहा- धोकर चकराता घूम सके ! 

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हमारे होटल का कमरा

Thursday, July 16, 2015

चकराता का एक यादगार सफ़र (A Memorable Trip to Chakrata)

वीरवार, 24 दिसंबर 2009 

दिसंबर 2009 की एक दोपहर थी, जब में अपने दफ़्तर में बैठा खाना खाने की तैयारी में था, दिन काफ़ी व्यस्त चल रहे थे, दफ़्तर के लिए सुबह 6 बजे घर से निकलकर रात को 10 बजे घर में वापसी होती थी, रोजाना इस दिनचर्या से परेशान हो चुका था ! उस दौरान अर्थव्यवस्था ठीक ना होने के कारण नौकरियों की भी खूब मारा मारी थी, इन दिनों मैं संविदा पर एक कंपनी के माध्यम से दिल्ली हवाई अड्डे पर कार्यरत था ! दोपहर का खाना खाने के लिए अभी बैग से निकाला ही था कि तभी मेरा फोन बजा, उठाकर देखा तो ये जयंत था, कुशल-क्षेम पूछने के बाद वो बोला, कहीं घूमने चलेगा क्या ? जब मैने जगह के बारे में पूछा तो वो बोला, जगह का अभी सोचा नहीं है पर अगर 3-4 दोस्त हो गए, तो जगह भी सोच लेंगे ! इस साल मार्च में शिर्डी से आने के बाद मेरी कोई यात्रा नहीं हुई थी, इसलिए अपने दोस्तों को बोल रखा था अगर किसी का कहीं घूमने जाने का विचार बने तो मुझे भी ज़रूर बताना, मौका मिला तो मैं भी साथ चल दूँगा ! 

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गाड़ी का टायर बदलने के दौरान लिया एक चित्र (Somewhere in Meerut)

Monday, July 13, 2015

झीलों के शहर उदयपुर में आख़िरी शाम (One Day in Beautiful Jaismand Lake)

शनिवार, 31 दिसम्बर 2011

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आज उदयपुर में हमारा आख़िरी दिन था, शाम 7 बजे हमें दिल्ली जाने के लिए ट्रेन पकड़नी थी ! सुबह जब सोकर उठे तो चाय के दौरान हमारी माउंट आबू की यात्रा पर चर्चा होने लगी, शशांक की मौसी ने पूछा माउंट आबू में सब जगहें घूम लिए, हमने हाँ में सिर हिलाया ! फिर जब उन्होनें पूछा कि दिलवाड़ा मंदिर कैसा लगा, तो मैं और शशांक एक दूसरे को देखने लगे ! हमने उम्मीद नहीं की थी कि माउंट आबू से वापसी के बाद इस तरह के प्रश्न भी पूछे जाएँगे ! खैर, दिलवाड़ा मंदिर तो हम घूम कर ही नहीं आए थे इसलिए कह दिया वो तो हमने देखा ही नहीं ! बड़े अचरज से शशांक की मौसी ने कहा, जो सबसे बढ़िया जगह थी वो तुमने देखी ही नहीं तो तुमने क्या खाक माउंट आबू देखा? फिर इस बात पर चर्चा होने लगी कि जिस मंदिर को देखने के लिए लोग देश-विदेश से आते है, माउंट आबू जाकर तुम वो ही जगह नहीं घूम कर आए ! दिलवाड़ा मंदिर नहीं देखना था तो फिर तुम गए क्या करने थे माउंट आबू ! हमने जो-2 जगहें देखी थी सब गिनवा दी, इस पर वो बोली, जो सबसे ज़रूरी चीज़ थी वो ही तुम छोड़ आए और बोल रहे हो माउंट आबू घूम कर आए है !

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पीछे दिखाई देती जयसमंद झील (A glimpse of Jaismand Lake, Udaipur)

Thursday, July 9, 2015

वन्य जीव उद्यान में रोमांच से भरा एक दिन (A Day Full of Thrill in Wildlife Sanctuary)

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम उदयपुर से बस यात्रा करके माउंट आबू पहुँचे ! कल दिन भर हम गुरु शिखर, सनसेट पॉइंट और कुछ अन्य जगहें भी घूम चुके है ! अब आगे, जो बंदूक हमने माउंट आबू के माल रोड से खरीदी थी उसे लेकर वापिस होटल आ गए और निशाना लगाने का अभ्यास करने लगे ! रात को निशाना लगाते हुए कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला, सुबह सोकर उठे तो काफ़ी ठंड थी ! हमारे कमरे में खिड़की ना होने के कारण हमें तो पता भी नहीं चल रहा था कि बाहर मौसम के क्या हालात थे ! अपने बेड के सिरहाने स्टूल पर रखी घड़ी उठाकर समय देखा तो सुबह के 7 बजने वाले थे, आज तो ठंड के साथ-2 आलस भी अपने चरम पर थी, इसलिए बिस्तर से बाहर निकलने का मन ही नहीं हुआ ! फिर अचानक से जाने क्या हुआ कि हिम्मत करके बिस्तर से बाहर निकला और बाथरूम की ओर चल दिया ! मुँह धोने के लिए जैसे ही टूटी खोलकर पानी हाथ में लिया, मेरी हिम्मत जवाब दे गई, ऐसा लगा जैसे हाथ में पिघली हुई बरफ ले ली हो, वापस आकर फिर से बिस्तर में लेट गया !

way to nakki lake
नक्की झील जाते हुए (On the way to Nakki Lake)

Sunday, July 5, 2015

उदयपुर से माउंट आबू की बस यात्रा (Road Trip to Mount Abu)

वीरवार, 29 दिसंबर 2011

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यात्रा के पिछले लेख में आप सिटी पैलेस और उदयपुर का चिड़ियाघर देख चुके है अब आगे, उदयपुर भ्रमण के बाद अगले दिन घूमने के लिए हमें माउंट आबू जाना था, यहाँ जाने वाली बस की जानकारी हम पिछली शाम को ही ले आए थे ! उदयपुर से माउंट आबू के लिए सुबह हर आधे घंटे में बस चलती है, हम सुबह 7 बजे वाली बस से जाने वाले थे ताकि समय से माउंट आबू पहुँच सके ! सुबह समय से सोकर उठे और जल्दी से नित्य-क्रम से निबट कर अपने साथ ले जाने के लिए एक बैग तैयार किया ! हम माउंट आबू में एक रात रुकने वाले थे इसलिए साथ ले जाने का सामान थोड़ा ज़्यादा हो गया था, गरम कपड़े जो रख लिए थे ! इन दिनों भारतीय क्रिकेट टीम आस्ट्रेलिया दौरे पर थी, इसलिए सुबह 5 बजे मैच देखने के यहाँ घर के कुछ सदस्य उठ जाते थे, इन्होनें ही हमें उदयपुर बस स्टैंड तक छोड़ दिया ! बस स्टैंड पर पहुँचने के बाद हम दोनों एक स्थानीय अधिकारी से माउंट आबू जाने वाली बस के बारे में पूछकर वहीं एक पत्थर की सीट पर बैठ कर बस के डिपो से बाहर आने का इंतज़ार करने लगे !

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छोटी नक्की झील (A view of Mini Nakki Lake, Mount Abu)

Wednesday, July 1, 2015

उदयपुर की शान - सिटी पैलैस (City Palace of Udaipur)

बुधवार, 28 दिसंबर 2011 

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यात्रा के पिछले लेख में मैं आपको पिछोला झील और रोपवे का भ्रमण करवा चुका हूँ अब आगे, रोपवे से वापस आने के बाद हम दोनों ऑटो में बैठ कर अपनी अगली मंज़िल की ओर चल दिए ! पूछने पर ऑटो वाले ने बताया कि वो हमें चिड़ियाघर लेकर जा रहा है ! मैने सोचा यार चिड़ियाघर तो हमने अपने दिल्ली में ही देख रखा है, फिर यहाँ चिड़ियाघर में जाकर क्यों समय बर्बाद करना, जितना समय हम चिड़ियाघर में बिताएँगे उतने समय में तो किसी नई जगह को घूम लेंगे ! इस पर शशांक बोला, अगर हम ऐसे ही अगर मना करते रहे तो ये तो अंत में कह देगा कि मैने 12 जगहें दिखाने को कहा था अब आपका मन ही नहीं है तो इसमें मैं क्या कर सकता हूँ ! बात तो ये सही थी इसलिए मैं चुप ही रहा और हम दोनों ऑटो में बैठकर चिड़ियाघर के लिए चल दिए ! थोड़ी देर बाद हम दोनों चिड़ियाघर के मुख्य दरवाजे पर पहुँच गए, ऑटो से उतरकर हमने चिड़ियाघर में प्रवेश किया ! चिड़ियाघर की टिकट खिड़की पर पहुँचकर 10 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से हमने दो टिकट खरीदे और अंदर चले गए ! 

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सिटी पैलेस के अंदर (Entrance of City Palace)