Saturday, April 7, 2018

जैसलमेर का बड़ा बाग (Bada Bagh of Jaisalmer)

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने जैसलमेर की गदीसर झील का भ्रमण किया, अब आगे, हम झील में नौकायान करके निकले तो शाम के पांच बजने वाले थे, भूरा राम के साथ गाडी में सवार होकर हम कुछ ही देर में हम यहाँ की भीड़-भाड़ से निकलकर एक खुले मार्ग पर पहुँच गए ! रास्ते में सड़क के किनारे पड़ने वाले होटलों में चहल-पहल शुरू हो चुकी थी, शाम के समय तो इन पांच-सितारा होटलों की रौनक देखते ही बनती है ! वास्तव में राजस्थान के पांच सितारा होटलों का कोई मुकाबला नहीं है, लम्बे-चौड़े क्षेत्र में फैले यहाँ के होटल किसी किले की तरह दिखाई देते है ! अँधेरा होते-2 इन होटलों में मद्दम रोशनी जगमगाने लगती है और यहाँ बजने वाला मधुर संगीत माहौल को रोमांटिक बना देता है, यहाँ सड़क के दोनों तरफ एक कतार में कई होटल है ! जिस मार्ग पर हम चल रहे थे ये मार्ग सम की ओर जाता है और शाम के समय इस मार्ग पर सम जाने वाले लोगों की भीड़ बढ़ जाती है, आज भी गाड़ियाँ हमारी गाडी के बगल तेजी से तेजी से सम के लिए निकल जा रही थी ! गनीमत थी कि हमें इस मार्ग पर ज्यादा दूर नहीं जाना था, थोडा आगे बढ़ने पर हम एक तिराहे पर पहुँच गए, यहाँ से सीधा जाने वाला मार्ग सम को निकल जाता है जबकि दाईं ओर जाने वाला मार्ग बड़ा बाग होते हुए लोंगेवाला को चला जाता है !
बड़ा बाग में बने छतरियां और स्मारक

हम लोंगेवाला जाने वाले मार्ग पर मुड गए, इस मार्ग पर कुछ दूर चलने के बाद एक मार्ग दाईं ओर अन्दर की ओर जाता है इसी मार्ग पर 1 किलोमीटर की दूरी पर बड़ा बाग है ! निजी गाडी से जाने पर आपको गाडी का प्रवेश शुल्क (शायद 100 रूपए) भी देना होता है, हालांकि, भूरा राम को स्थानीय होने का फायदा मिला और उसे ये शुल्क अदा नहीं करना पड़ा ! सड़क के दाईं ओर बनी पार्किंग में गाडी खड़ी करके हम आगे बढे, इस पार्किंग के सामने सड़क के उस पार घने पेड़ों का एक बगीचा था ! जबकि, इस मार्ग पर थोडा आगे बढ़ने पर सामने एक कतार में कई छतरियां बनी हुई है, मार्ग थोडा चढ़ाई भरा है, पीले पत्थर से बनी ये छतरियां सूरज की रोशनी पड़ने पर सुनहरे रंग में जगमगा उठती है ! जैसलमेर से सम जाते हुए सड़क किनारे दोनों ओर खुले मैदान में थोड़ी-2 दूरी पर पवन चक्कियां लगी हुई है, जिनसे बिजली बनाई जाती है ! दूर तक रेगिस्तान होने के कारण हवा के झोंके बड़ी तेजी से इन पवनचक्कियों पर पड़ते है और ये तेजी से चलते है, ऊंचे-2 खम्बो पर लगे ये पंखे देखने में बड़े सुन्दर लगते है ! राजस्थान के रेगिस्तान में आपको पवनचक्कियों की भरमार देखने को मिलेगी, वैसे बिजली बनाने का ये एक बढ़िया तरीका है !
बड़ा बाग जाते हुए रास्ते में सड़क किनारे लगी पवन चक्कियां

बड़ा बाग जाते हुए रास्ते में सड़क किनारे लगी पवन चक्कियां

बड़ा बाग में बनी छतरियों और स्मारकों का एक दृश्य

बड़ा बाग के पास लगी पवन चक्कियां

बड़ा बाग में बनी एक छतरी
इन पवनचक्कियों के नीचे खड़े होकर इनके पंखों की आवाज़ साफ़ सुनाई देती है, आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि जैसलमेर में देश का सबसे बड़ा विंड एनर्जी पार्क बन चुका है ! यहाँ सन 1998 से पवन ऊर्जा संयंत्र लगने शुरू हुए थे जो अभी तक जारी है, एक रिपोर्ट के मुताबिक जैसलमेर जिले में पवन ऊर्जा संयंत्रों से लगभग 3100 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है जो रोजाना बढ़ ही रहा है ! 5 मिनट की पद यात्रा करके हम बड़ा बाग परिसर में पहुँच गए, यहाँ भारतीय नागरिकों को 50 रूपए जबकि विदेशी पर्यटकों को 100 रूपए का प्रवेश शुल्क देना होता है ! प्रवेश टिकट लेकर एक अस्थायी प्रवेश द्वार से होते हुए हम इन छतरियों के पास पहुँच गए ! बड़ा बाग शाही स्मारकों और छतरियों का एक समूह है जो एक ऊंचे क्षेत्र में फैला है और अपनी छतरियों के लिए ये दुनिया भर में प्रसिद्द है ! बड़ा बाग में बनी इन छतरियों का निर्माण भाटी शासकों ने अपने पूर्वजों के लिए करवाया गया था, इन छतरियों के बीच राजा महारावल जैत सिंह का स्मारक सबसे प्राचीन है ! अधिकतर छतरियों के स्तंभों और ऊपरी भाग में बढ़िया चित्रकारी की गई है, एक कतार में बने ये स्मारक और छतरियां देखने में बड़े आकर्षक लगते है, कुछ स्मारकों के ऊपरी भाग क्षतिग्रस्त है, जो यहाँ आए एक भूकंप का परिणाम है !
बड़ा बाग में एक क्षतिग्रस्त छतरी

बड़ा बाग में बनी छतरियों का एक दृश्य

पार्किंग से आगे बढ़ने पर दिखाई देता बड़ा बाग

पहाड़ी से दिखाई देता बड़ा बाग

पता नहीं मैं किस बात से परेशान था
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार 17वीं शताब्दी में महाराजा जय सिंह द्वितीय ने यहाँ एक बाँध बनवाकर एक झील का निर्माण करवाया ! पानी मिला तो इस रेगिस्तान में भी हरियाली आ गई, फिर जय सिंह द्वितीय की मृत्यु के बाद उनके पुत्र लुनकरण ने झील के बगल में ही एक बगीचे का निर्माण करवाया ! लुनकरण ने इस बगीचे से थोड़ी दूर स्थित एक पहाड़ी पर अपने पिता की स्मृति में एक समाधिस्थल बनवाया जिसे राजस्थान में छतरी कहा जाता है ! इसके बाद से भाटी राजाओं की छतरियां यहाँ बनाई जाने लगी, यहाँ अंतिम स्मारक महाराजा जवाहर सिंह का बनवाया गया था, जो निर्माणाधीन अवस्था में ही था लेकिन आजादी के बाद इसका काम रोक दिया गया ! सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जब सूर्य की किरणें इन छतरियों पर पड़ती है तो ये छतरियां सुनहरे रंग में चमक उठती है तब यहाँ का नज़ारा देखने लायक होता है ! इन छतरियों का आकर्षण बॉलीवुड को भी यहाँ खींच लाया जिसके परिणामस्वरूप यहाँ कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है जिसमें "हम दिल दे चुके सनम", "ढाई अक्षर प्रेम के" और "टशन" शामिल है !
बड़ा बाग से दिखाई देती पवन चक्कियां

पहाड़ी से दिखाई देता बड़ा बाग

बड़ा बाग में बैठने के लिए बनी पत्थर की एक सीट

बड़ा बाग परिसर का एक दृश्य

बड़ा बाग में बनी कुछ छतरियां

थोड़ी दूरी पर हरियाली भी दिखाई दे रही थी

बड़ा बाग परिसर से दिखाई देती पवन चक्कियां

बड़ा बाग में बनी छतरियों का एक दृश्य

बड़ा बाग परिसर का एक दृश्य

पहाड़ी से दिखाई देता एक दृश्य

एक स्मारक की छत पर बनी चित्रकारी
इन स्मारकों के बीच कुछ पूजनीय स्थल भी बनाये गए है जगह-2 पत्थर की मूर्तियाँ रखी गई है जो मेरे अनुमान से संभवत भाटी शासकों के इष्ट देवताओं की होंगी ! यहाँ से देखने पर पहाड़ी के दूसरी ओर काफी दूरी में फैला एक हरा-भरा मैदान भी है जो रेगिस्तान में आँखों को बड़ा सुकून देता है ! यहाँ हमें आसमान में उड़ते चील और गिद्ध भी काफी संख्या में दिखाई दिए ! कुछ समय यहाँ बिताने के बाद हमने वापसी की राह पकड़ी, अभी हमें लोद्रवा के जैन मंदिर देखने भी जाना था ! 5 मिनट की पद यात्रा करके हम अपनी गाडी तक पहुंचे और बिना समय गँवाए अपने अगले पड़ाव लोद्रवा के जैन मंदिरों की ओर चल दिए ! लोद्रवा के जैन मंदिर अपनी सुन्दर नक्काशी के लिए काफी प्रसिद्द है, इस मंदिर का वर्णन मैं यात्रा के अगले लेख में करूँगा !
बड़ा बाग में बनी इष्ट देवता की एक मूर्ति

देवेन्द्र

बड़ा बाग़ में भाई खूब पोज़ दे रहा था

पहाड़ी से दिखाई देता बड़ा बाग

दूसरे एंगल से लिया बड़ा बाग का एक दृश्य

पार्किंग के पास से बड़ा बाग का एक दृश्य

आज यहाँ ज्यादा लोग नहीं आए थे

सूर्य की रोशनी में दिखाई देता सुनहरा बड़ा बाग

बड़ा बाग में बनी छतरियां

बड़ा बाग में बनी छतरियां

लोद्रवा की ओर जाने वाल मार्ग
क्यों जाएँ (Why to go Jaisalmer): अगर आपको ऐतिहासिक इमारतें और किले देखना अच्छा लगता है, भारत में रहकर रेगिस्तान घूमना चाहते है तो निश्चित तौर पर राजस्थान में जैसलमेर का रुख कर सकते है !

कब जाएँ (Best time to go Jaisalmer): जैसलमेर जाने के लिए नवम्बर से फरवरी का महीना सबसे उत्तम है इस समय उत्तर भारत में तो कड़ाके की ठण्ड और बर्फ़बारी हो रही होती है लेकिन राजस्थान का मौसम बढ़िया रहता है ! इसलिए अधिकतर सैलानी राजस्थान का ही रुख करते है, गर्मी के मौसम में तो यहाँ बुरा हाल रहता है !

कैसे जाएँ (How to reach Jaisalmer): जैसलमेर देश के अलग-2 शहरों से रेल और सड़क मार्ग से जुड़ा है, देश की राजधानी दिल्ली से इसकी दूरी लगभग 980 किलोमीटर है जिसे आप ट्रेन से आसानी से तय कर सकते है ! दिल्ली से जैसलमेर के लिए कई ट्रेनें चलती है और इस दूरी को तय करने में लगभग 18 घंटे का समय लगता है ! अगर आप सड़क मार्ग से आना चाहे तो ये दूरी घटकर 815 किलोमीटर रह जाती है, सड़क मार्ग से भी देश के अलग-2 शहरों से बसें चलती है, आप निजी गाडी से भी जैसलमेर जा सकते है ! 

कहाँ रुके (Where to stay near 
Jaisalmer): जैसलमेर में रुकने के लिए कई विकल्प है, यहाँ 1000 रूपए से शुरू होकर 10000 रूपए तक के होटल आपको मिल जायेंगे ! आप अपनी सुविधा अनुसार होटल चुन सकते है ! खाने-पीने की सुविधा भी हर होटल में मिल जाती है, आप अपने स्वादानुसार भोजन ले सकते है !


क्या देखें (Places to see near 
Jaisalmer): जैसलमेर में देखने के लिए बहुत जगहें है जिसमें जैसलमेर का प्रसिद्द सोनार किला, पटवों की हवेली, सलीम सिंह की हवेली, नाथमल की हवेली, बड़ा बाग, गदीसर झील, जैन मंदिर, कुलधरा गाँव, सम, और साबा फोर्ट प्रमुख है ! इनमें से अधिकतर जगहें मुख्य शहर में ही है केवल कुलधरा, साबा फोर्ट, और सम शहर से थोडा दूरी पर है ! जैसलमेर का सदर बाज़ार यहाँ के मुख्य बाजारों में से एक है, जहाँ से आप अपने साथ ले जाने के लिए राजस्थानी परिधान, और सजावट का सामान खरीद सकते है !


अगले भाग में जारी...

जैसलमेर यात्रा

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