Tuesday, December 19, 2017

केदारनाथ से वापसी भी कम रोमांचक नहीं (A Trek from Kedarnath to Gaurikund)

शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने केदारनाथ धाम में होने वाली संध्या आरती के बारे में पढ़ा, आरती समाप्त होने के बाद खाना खाकर हम आराम करने के लिए अपने होटल में आ गए ! अब आगे, खाना खाकर होटल से चले तो ठण्ड काफी बढ़ चुकी थी, होटल तक पहुँचते-2 सभी लोग सिकुड़ चुके थे ! एक तो ठण्ड और दूसरा दिनभर लम्बा सफ़र करके अच्छी थकान हो गई थी, इसलिए सोने के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी ! आधी रात को ठण्ड के कारण मेरी नींद खुल गई, मैंने महसूस किया जैसे-2 रात बढती जा रही थी, मौसम भी ठंडा होता जा रहा था, हालत ये थी कि रजाई में भी ठिठुरन हो रही थी ! गनीमत थी कि कमरे में अतिरिक्त रजाइयाँ रखी थी, शायद होटल वाले को पहले से ही अंदाजा था इसलिए ये अतिरिक्त रजाइयाँ पहले से ही रख दी थी, ठण्ड बढ़ी तो हमने 2-2 रजाइयाँ ओढ़ ली ! इसके बाद बढ़िया नींद आई और ठण्ड के कारण दोबारा नींद नहीं खुली ! रात को सोते समय हमने सुबह का अलार्म लगा दिया था ताकि समय से उठकर वापसी की राह पकड़ सकें ! सुबह अलार्म बजने पर जब मेरी नींद खुली तो पिताजी पहले ही उठ चुके थे, देवेन्द्र की भी नींद खुल चुकी थी और वो प्राणायाम करने में लगा था !


बर्फ से ढकी पहाड़ियों का एक दृश्य (A view of snow covered Mountains)

Monday, December 11, 2017

केदारनाथ धाम की संध्या आरती (Evening Prayer in Kedarnath)

शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

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पिछले लेख में आपने केदार घाटी में स्थित भैरवनाथ मंदिर के बारे में पढ़ा ! अब आगे, चाय पीने के बाद घूमते हुए हम मंदिर परिसर में पहुंचे ! मंदिर में इस समय आरती की तैयारियां चल रही थी, जो शाम साढ़े छह बजे शुरू होती है, अभी साढ़े पांच बज रहे थे, इसलिए हम टहलते हुए मंदिर के पीछे चल दिए ! मंदिर के ठीक पीछे हमने भीम शिला देखी, इस शिला के बारे में तो आप जानते ही होंगे, अगर नहीं जानते तो आपको बता दूं कि यही वो शिला है जिसने 2013 में केदारनाथ में आई त्रादसी के समय केदारनाथ मंदिर की रक्षा की थी ! स्थानीय लोग बताते है कि प्रलय से पहले यहाँ ये शिला नहीं थी, लेकिन 2013 में जब चोराबारी ताल के रास्ते प्रलय आई तो पता नहीं कहाँ से 25-30 फीट चौड़ा ये पत्थर मंदिर के ठीक पीछे आकर कुछ इस तरह रुक गया कि ऊपर से बहकर आ रहा मलवा इस पत्थर से टकराकर दाएं-बाएं मुड गया ! इस मलवे में बहुत सारा कीचड और बड़े-2 पत्थर बहकर आए थे जिसने केदार घाटी में भयंकर प्रलय मचाया था ! इस प्रलय में मंदिर तो पानी में डूब गया, लेकिन भीम शिला ने मुख्य इमारत को मलवे की वजह से कोई हानि नहीं होने दी !


केदारनाथ मंदिर में की गई सजावट

Tuesday, December 5, 2017

केदार घाटी में स्थित भैरवनाथ मंदिर (Bhairavnath Temple in Kedar Valley)

शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप केदारनाथ के दर्शन कर ही चुके है, अब आगे, दर्शन करने के बाद सभी लोगों को तेज भूख लगी थी, आखिरकार सुबह से हमने खाया ही क्या था ! हल्का-फुल्का खाते हुए ही हमने केदारनाथ की चढ़ाई चढ़ी थी ! रात्रि में रुकने का इंतजाम तो हम कर ही चुके थे, उस होटल में इस समय खाने की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए भोजन करने के लिए हम मंदिर के सामने एक होटल में जाकर रुके ! होटल क्या था, जलपान गृह था, जहाँ आपको चाय, पकोड़े, बिस्कुट, नमकीन और हल्का-फुल्का भोजन मिल जायेगा ! थोड़ी देर इन्तजार करने के बाद हमारा खाना आ गया, खाने का स्वाद तो पूछो ही मत, बस पेट भरने के लिए कुछ खाना था तो खा लिया, वरना खाना ज्यादा स्वादिष्ट नहीं था ! हमने दाल मंगाई थी, जो दाल परोसी गई, उसमें इतनी तेज मिर्च थी कि जैसे सारे होटल की मिर्च उस दाल में ही डाल दी हो ! खैर, दूसरी दाल आई, ये पहले से थोड़ी बेहतर थी, सबने भरपेट भोजन किया, इसी दुकान के बाहर मिठाइयों में लड्डू खूब सजा रखे थे ! छोटे-2 रंगीन लड्डू थे, पूछने पर पता चला 5 रूपए प्रति पीस, ऐसे ही मन भर गया, तो आगे बढ़ गए ! 


भैरवनाथ मंदिर का एक दृश्य (A View of Bhairavnath Temple)