Sunday, April 30, 2017

जंगल के बीचों-बीच स्थित है ताड़केश्वर महादेव मंदिर (A Trip to Tarkeshwar Mahadev Temple)

रविवार, 26 मार्च 2017

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ज़हरिखाल में रात को अच्छी-ख़ासी ठंड थी, गनीमत थी कि कमरे में कंबल रखे थे ! सुबह अलार्म बजने पर सोकर उठे, खिड़की से बाहर झाँककर देखा तो अभी अंधेरा ही था ! एक नज़र सड़क के उस पार होटल के बोर्ड पर भी दौड़ाई जहाँ पिछले साल तेंदुआ आया था, शुक्र है अभी वहाँ कोई नहीं था ! फोन चार्जिंग में लगाने के बाद सब बारी-2 से नित्य क्रम में लग गए, थोड़ी देर में रोशनी हुई तो मैं और शशांक नीचे सड़क पर टहलने आ गए ! 10-15 मिनट बाद वापिस ऊपर गए और अगले एक घंटे में हम दोनों नहा-धोकर तैयार हो चुके थे ! हितेश देरी से सोकर उठा था इसलिए अभी तैयार होने में लगा था ! हम दोनों खाली बैठे थे तो बरामदे में आकर वहीं रखी एक गुलेल से दूर दिखाई दे रहे एक खंबे पर निशाना लगाने लगे ! फिर चाय पीकर होटल का बिल चुकाने के बाद सवा सात बजे तक हम तीनों होटल से निकलकर लैंसडाउन के लिए प्रस्थान कर चुके थे ! ज़हरिखाल से लैंसडाउन में प्रवेश करते ही 100 रुपए का प्रवेश शुल्क अदा किया, ये शुल्क प्रतिदिन देना होता है, मतलब एक दिन में अगर आपने एक बार शुल्क दे दिया तो आप दिनभर अनगिनत बार आ-जा सकते हो, लेकिन अगले दिन आपको फिर से ये शुल्क अदा करना होगा !
ताड़केश्वर महादेव मंदिर का प्रवेश द्वार (Tarkeshwar Mahadev Temple, Lansdowne)

Wednesday, April 26, 2017

पौडी - लैंसडाउन मार्ग पर है खूबसूरत नज़ारे (A Road Trip from Devprayag to Lansdowne)

रविवार, 26 मार्च 2017

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देवप्रयाग से चले तो हमारे पास दो विकल्प थे, या तो हम टिहरी जाकर डैम देखते या फिर यहाँ से पौडी होते हुए लैंसडाउन चले जाते ! हमने सोच-समझकर दूसरा विकल्प चुना, इसकी मुख्य वजह थी कि लैंसडाउन जाते हुए हम कई जगहें देख सकते थे जबकि टिहरी में डैम के अलावा बाकी जगहें थोड़ी दूर है ! फिर एक वजह ये भी थी कि मैने पौडी से अदवानी होते हुए सतपुली जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाले घने जॅंगल के बारे में काफ़ी सुन रखा था ! बीनू भाई के ब्लॉग पर इस जगह के बारे में पढ़ा भी था और जंगल की फोटो भी देखी थी, बस तभी से मन में इस जगह को देखने की इच्छा थी ! अपने दोनों साथियों को इस बारे में पहले ही बता दिया था कि इस मार्ग पर नज़ारों के अलावा ज़्यादा कुछ देखने को नहीं मिलेगा ! इस पर उन्होनें कहा था कि तीनों दोस्त साथ में सफ़र कर रहे है इससे ज़्यादा हमें और कुछ नहीं चाहिए ! जहाँ ठीक लगे, ले चल यार, तूने जगह चुनी है तो बढ़िया ही चुनी होगी, बस फिर क्या था दोस्तों का साथ मिला तो हम भी चल दिए एक नए मार्ग पर कुछ नज़ारों की तलाश में !


गग्वारस्यूं घाटी का विहंगम दृश्य (A View of Gagwarsyun Valley)

Saturday, April 22, 2017

देवप्रयाग में है भागीरथी और अलकनंदा का संगम (Confluence of Alaknanda and Bhagirathi Rivers - DevPrayag)

रविवार, 26 मार्च 2017

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हम कुछ समय नदी के किनारे बैठकर बिताना चाहते थे पहले गोवा बीच जाने का विचार था लेकिन फिर सोचा जब आज ही देवप्रयाग निकलना है तो क्यों ना चलकर शिवपुरी में बैठा जाए ! इसलिए राफ्टिंग के बाद हमने अपनी गाड़ी उठाई और शिवपुरी के लिए निकल पड़े, शिवपुरी से थोड़ी पहले सड़क पर काफ़ी जाम लगा था ! हमने भी अपनी गाड़ी सड़क के किनारे खाली जगह देख कर खड़ी कर दी और एक ढाबे पर खाना खाने के लिए जाकर बैठ गए ! अगले पौने घंटे में खाना खाकर यहाँ से फारिक हुए, अब तक रोड पर लगा जाम भी खुल चुका था ! थोड़ी दूर जाकर हमने अपनी गाड़ी खड़ी की और नदी किनारे जाने के लिए पैदल चल दिए ! सड़क से नीचे उतरकर झाड़ियों को पार करने के बाद नदी किनारे कुछ टेंट लगे हुए थे, जहाँ कुछ लोग वॉलीबाल खेल रहे थे ! हम उन्हें अनदेखा करते हुए नदी की ओर चल दिए, जहाँ से हमने राफ्टिंग शुरू की थी वो जगह यहाँ से थोड़ी ही दूर थी ! आधा घंटा नदी किनारे बैठ कर गप्पे मारते रहे, शाम के सवा छह बज रहे थे, सूर्यास्त भी होने को था ! शाकिब को अपने घर निकलना था और हमें भी देवप्रयाग के लिए प्रस्थान करना था !


देवप्रयाग के पास का एक चित्र

Tuesday, April 18, 2017

रोमांचक खेलों का केंद्र है ऋषिकेश (Adventure Games in Rishikesh)

शनिवार, 25 मार्च 2017

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ऋषिकेश - उत्तराखंड
आज हम ऋषिकेश घूमने के अलावा गंगा नदी में राफ्टिंग भी करने वाले थे, आगे बढ़ने से पहले कुछ जानकारी इस जगह के बारे में दे देता हूँ ! ऋषिकेशउत्तराखंड के देहरादून जिले में हिमालय की तलहटी में स्थित है ! ये शहर धर्म के साथ-2 रोमांच के लिए भी सारी दुनिया में मशहूर है फिर चाहे वो रिवर राफ्टिंग हो, बंजी जंपिंग या कोई और रोमांचक खेल, ऋषिकेश में सब कुछ होता है ! ऋषिकेश को गढ़वाल का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है, क्योंकि चाहे हिमालय में स्थित चारों धाम हो या पहाड़ों की ऊँचाई पर बसे अन्य कोई दुर्गम स्थान, अधिकतर जगहों पर जाने के लिए रास्ता ऋषिकेश से होकर ही निकलता है ! ऋषिकेश तीन तरफ से हरिद्वार, पौडी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल से घिरा हुआ है ! यहाँ आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या भी कम नहीं है हर साल यहाँ हज़ारों की तादात में विदेशी लोग आते है ! कुछ लोग तो यहाँ के रोमांच की दुनिया का मज़ा लेने आते है जबकि अन्य लोग आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए ऋषिकेश का रुख़ करते है !


ऋषिकेश में स्थित मरीन ड्राइव

Friday, April 14, 2017

दिल्ली से ऋषिकेश की सड़क यात्रा (A Road Trip to Rishikesh from Delhi)

शुक्रवार, 24 मार्च 2017

आज मैं आपको ले चल रहा हूँ एक नए सफ़र पर, उत्तराखंड के इस सफ़र पर हमें यात्रा करते हुए बहुत मज़ा आया, उम्मीद है यात्रा लेख पढ़कर आपको भी आनंद आएगा ! यात्रा की शुरुआत करते है लक्ष्मी नगर से, जहाँ मैं और शशांक अपने-2 दफ़्तर से लौटकर आ चुके थे और यहाँ शशांक के फ्लैट पर बैठकर इस सफ़र पर जाने के लिए अपने एक अन्य साथी हितेश के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे ! समय रात के साढ़े 10 बज रहे थे लेकिन हितेश की अभी कोई खोज-खबर नहीं थी ! शाम को जब उस से बात हुई थी तो उसने कहा था कि वो अपने दफ़्तर से 9 बजे के आस-पास निकल लेगा, इस हिसाब से तो अब तक उसे आ जाना चाहिए था ! रात के समय गुड़गाँव से दिल्ली आने में समय ही कितना लगता है, फिर सोचा, हो सकता है किसी काम में फँस गया हो और निकलने में देर हो गई हो ! फिर भी उसे एक फोन तो कर ही देना था, अब उसका फोन नहीं लग रहा, पता नहीं कहाँ पहुँचा होगा, दफ़्तर से निकला भी होगा या नहीं ! मन में यही उधेड़-बुन चल रही थी, कि तभी शशांक ने एक बार फिर से उसे फोन लगाया, इस बार घंटी बजी, उसने फोन भी उठाया और बोला कि उसे दफ़्तर से निकलने में देर हो गई है हमारे पास वो 11 बजे तक ही पहुँच पाएगा !



khatauli
दिल्ली-हरिद्वार राजमार्ग पर खतौली के पास (Somewhere on Delhi-Haridwar National Highway 334)

Monday, April 10, 2017

रामनगर फ़ोर्ट और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (A Visit to Ramnagar Fort and BHU)

रविवार, 14 अगस्त 2016

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लंबे सफ़र की थकान के कारण रात को बढ़िया नींद आई और सुबह समय से सोकर उठे ! हमारा कमरा होटल की दूसरी मंज़िल पर था, कमरे की खिड़की गैलरी में खुल रही थी इसलिए बाहर के मौसम के बारे में कुछ भी नहीं पता चल रहा था ! बिस्तर से उठकर दोनों नित्य क्रम में लग गए, बाथरूम कमरे के बाहर गैलरी में था ! थोड़ी देर में बारी-2 से हम दोनों नहा धोकर तैयार हो गए ! आज शाम को ही हमारी वापसी की ट्रेन थी, मतलब घूमने ले लिए आज का पूरा दिन अभी भी हमारे था ! वापिस जाने से पहले हम रामनगर किला और बीएचयू घूम लेना चाहते थे, तो कार्यक्रम कुछ इस तरह था कि पहले चलकर रामनगर का किला देख लेते है दोपहर तक वापिस आकर बीएचयू चले जाएँगे और फिर शाम होते-2 मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन पहुँच जाएँगे ! होटल के काउंटर पर जाकर देखा तो कोई नहीं था, आवाज़ लगाई, एक कर्मचारी बगल वाले कमरे से निकलकर आया ! मैने कहा, दो चाय मिलेगी, वो बोला बाज़ार से दूध लाना पड़ेगा, आधा घंटा लगेगा ! इतना समय नहीं है हमारे पास, ऐसा कर हमारा हिसाब कर दे, हम अभी निकल रहे है !


बनारस में गंगा किनारे स्थित रामनगर किले का एक दृश्य

Thursday, April 6, 2017

परमहंस आश्रम, सिद्धनाथ दरी और चुनार के किले का भ्रमण (Visit to Siddhnath Dari, ParamHans Aashram and Chunar Fort)

शनिवार, 13 अगस्त 2016

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पिछले लेख में आपने लखनिया दरी और जरगो बाँध के बारे में पढ़ा, जरगो बाँध से चलकर हम परमहंस आश्रम के सामने पहुँच चुके थे ! ये आश्रम मिर्ज़ापुर के सक्तेषगढ़ में पड़ता है और आस-पास के इलाक़ों में इस आश्रम का बहुत नाम है ! मुख्य मार्ग को छोड़कर हम आश्रम की ओर जाने वाले मार्ग पर चल दिए, आश्रम के प्रवेश द्वार से कुछ दूरी पर सड़क के किनारे गाड़ियाँ खड़ी करने की व्यवस्था है ! चंद्रेश भाई ने बताया यहाँ साल में एक बार मेला लगता है तब देश-विदेश से यहाँ हज़ारों लोग दर्शन के लिए आते है, मेले के दौरान तो यहाँ पैर रखने तक की जगह भी नहीं मिलती ! अपनी बाइक यहाँ खड़ी करके हम बगल में ही लगे एक नल पर हाथ-पैर धोने लगे ! हमारे अलावा कुछ अन्य लोग भी इस समय आश्रम में जाने की तैयारी कर रहे थे, ये लोग जीप से आए थे जिस पर पर बिहार का नंबर था ! इसके अलावा भी अलग-2 शहरों के रेजिस्ट्रेशन नंबर के वाहन आश्रम के बाहर खड़े थे ! ये आश्रम स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज को समर्पित है, यथार्थ गीता जोकि भगवान कृष्ण द्वारा रचित भगवत गीता का सरल रूप है की रचना इन्होनें ही की थी ! 


सिद्धनाथ दरी का एक दृश्य

Sunday, April 2, 2017

लखनिया दरी और जरगो बाँध भ्रमण (Visit to Lakhaniya Daari and Jargo Dam)

शनिवार, 13 अगस्त 2016

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम नई दिल्ली से रात को चलकर सुबह मंडुवाडीह पहुँचे, फिर मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन से निकलकर 2-3 ऑटो बदलकर नारायणपुर पहुँचे ! अब आगे, नारायणपुर में ऑटो से उतरकर हम दोनों एक तिराहे पर खड़े हो गए, चंद्रेश भाई को फोन करके बता दिया कि हम कहाँ खड़े है ! बगल में ही एक बाज़ार था जहाँ से हमने कुछ केले और बिस्कुट के पैकेट ले लिए ! लखनिया दरी के पास पता नहीं कुछ मिलेगा या नहीं ! थोड़ी देर बाद चंद्रेश भाई अपने एक मित्र के साथ हमारे पास पहुँचे, हम चारों बड़ी गर्मजोशी से मिले ! कुछ देर बातें करने के बाद चारों लोग बाइक पर सवार होकर अपनी मंज़िल की ओर निकल पड़े ! चंद्रेश भाई ने मुझसे पूछा, पहले कहाँ चले ? मैं बोला, देखनी तो सब जगहें है, आप अपनी सहूलियत के हिसाब से देख लो ! वो बोले, चलिए आपको पहले लखनिया दरी ही ले चलते है वापसी में जरगो बाँध ले चलेंगे, हमें कौन सी सवारी बदलनी है, बाइक तो है ही अपने पास ! हालाँकि, हमारी ये पहली मुलाकात थी, लेकिन सफ़र के दौरान एक बार भी ऐसा महसूस नहीं हुआ ! हमेशा यही लगा जैसे हम सब एक दूसरे को बरसों से जानते हो, वैसे मुलाकात पहली थी तो क्या हुआ, फ़ेसबुक के माध्यम से तो हम दोनों एक-दूसरे को काफ़ी समय से जानते ही थे !


लखनिया दरी जाते हुए रास्ते में लिया एक चित्र