Saturday, February 21, 2015

इंडिया गेट, चिड़ियाघर, और पुराना किला (Visit to Delhi Zoo and India Gate)

शनिवार, 5 जुलाई 2014

आज सुबह जब मैं सोकर उठा तो एकदम खाली था, बीवी मायके जा चुकी थी इसलिए मेरे पास समय की कोई कमी नहीं थी ! रविवार होने के कारण दफ़्तर जाने की मारा-मारी भी नहीं थी, जुलाई का महीना चल रहा था और गर्मी भी पूरे चरम पर थी ! बाकी दिनों में तो दफ़्तर के वातानुकूलित माहौल में दिन आराम से गुजर जाता था, पर बिजली कटौती के बीच घर पर समय गुज़ारना तो जैसे जंग लड़ना था ! ऐसे मौसम में अगर कोई दोपहरी में बाहर घूमने की बात करे तो शायद लोग उसे पागल ही कहेंगे ! मैने बिस्तर में बैठे-2 ही सोचा कि क्यों ना आज थोड़ा पागलपन ही कर लिया जाए, और दिल्ली भ्रमण पर निकला जाए ! पहले तो सोचा कि अकेले ही घूमने जाया जाए फिर मन में विचार आया कि एक से भले दो, तो क्यों ना किसी दोस्त को साथ ले लिया जाए ! फोन उठाकर तुरंत अपने एक मित्र प्रमोद जोशी जोकि अभी गुड़गाँव में कार्यरत है, को फोन लगा दिया ! 
india gate
India Gate

Friday, February 13, 2015

अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है दमदमा झील (Damdama Lake in Aravali Hills)

शनिवार, 27 दिसंबर 2014

ये साल भी ख़त्म होने को है और इसके साथ ही इस वर्ष की बची हुई छुट्टियाँ भी ! इन छुट्टियों को व्यर्थ ना जाने देने के मकसद से इन दिनों दफ़्तर में काफ़ी कम लोग दिखाई दे रहे है, कोई अवकाश लेकर परिवार संग कहीं घूमने गया है तो कोई घर पर ही समय बिता रहा है ! आख़िर ऐसा हो भी क्यों ना, इस समय समस्त उत्तर भारत में भयंकर सर्दी जो पड़ रही है ! मेरे विचार में तो दो किस्म के लोग होते है पहली श्रेणी में वो लोग आते है जो मौसम की परवाह किए बिना घूमने का आनंद लेते है वो ऐसे खराब मौसम में भी कहीं ना कहीं घूमने निकल ही जाते है, दूसरी श्रेणी में वो लोग आते है जो मौसम चुन कर ही घूमना पसंद करते है और ऐसे लोग इस कड़ाके की ठंड में परिवार संग घर पर ही रहना पसंद करते है ! अब मुझे नहीं पता कि मैं किस श्रेणी में आता हूँ, पर मैं अपने आपको पहली श्रेणी का प्राणी मानता हूँ ! वर्ष 2014 के दिसंबर माह में क्रिसमस वाले सप्ताह में और फिर नये वर्ष वाले सप्ताह में भी लंबी छुट्टियों का योग बन रहा है ! 
palwal sohna road
पलवल सोहना मार्ग (Palwal Sohna Road)

Monday, February 9, 2015

लैंसडाउन से दिल्ली की सड़क यात्रा (A Road Trip from Lansdowne to Delhi)

रविवार, 20 जुलाई 2014

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लैंसडाउन पहुँचने तक की यात्रा का वर्णन मैं अपने पिछले लेख में कर चुका हूँ ! हालाँकि रात को खूब अच्छी नींद आई पर सुबह जल्दी उठ जाने की आदत की वजह से 5 बजे मेरी नींद अपने आप ही खुल गई, उठकर देखा तो अभी बाहर अंधेरा था और बारिश भी हो रही थी ! काफ़ी देर तक तो मैं बिस्तर पर ही लेटा रहा और फिर से सोने की बहुत कोशिश की लेकिन मुझे फिर नींद नहीं आई ! उसके बाद मैं अपने बिस्तर से उठा और टेलिविज़न चालू करके समाचार देखने लगा ! जब बाहर उजाला होने लगा तो मैने फिर से अपने कमरे की खिड़की से झाँक कर देखा, बाहर अभी भी बारिश हो रही थी और चारों ओर घना कोहरा छाया हुआ था ! ऐसा मौसम देख कर एक बार तो लगा कि आज तो कहीं घूमना नहीं हो पाएगा, पर थोड़ी देर बाद जब गेस्ट हाउस के मालिक अनुराग जी टहलते हुए बाहर बरामदे में आए तो उनसे बात करने पर पता चला कि यहाँ पिछले दिन भी सुबह के वक़्त ऐसा ही मौसम था जोकि सुबह 9 बजे तक खुल गया था ! बारिश के दिनों में पहाड़ों पर अक्सर मौसम हर घंटे बदलता रहता है, एक पल बारिश तो अगले ही पल धूप निकल आती है !

hotel in jehrikhal
कमरे से दिखाई देता एक दृश्य (A view from our Room)

Thursday, February 5, 2015

बारिश में देखने लायक होती है लैंसडाउन की ख़ूबसूरती (Beautiful Views on the Way to Lansdowne)

शनिवार, 19 जुलाई 2014

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अब तक आपने पढ़ा कि किस तरह हम लोग राह में आने वाली मुश्किलों को पार करके नजीबाबाद पहुँचे ! यहाँ खाना खाने के लिए एक होटल में प्रवेश किया, होटल बाहर से देखने पर तो बहुत अच्छा लग रहा था पर अंदर जाकर हमें एहसास हुआ, नाम बड़ा और दर्शन छोटे ! होटल में साफ सफाई की व्यवस्था कुछ ख़ास नहीं थी ! यहाँ हमने आलू-प्याज के पराठे और दही का नाश्ता किया, हालाँकि पराठे कुछ ख़ास नहीं थे, पर एक पराठा खाने के बाद जब तक मना करते, तब तक प्लेट में दूसरा पराठा भी आ चुका था ! होटल वाले का भुगतान करने के बाद हमने आगे का सफ़र जारी रखा ! बाद में जब मैने कहा कि यार उस पानी से भरे हुए मार्ग की फोटो नहीं खींच पाए, तो दोनों ने कहा कि चल वापसी में फिर से इसी मार्ग से आ जाएँगे और तेरी ये इच्छा भी पूरी कर देंगे ! रास्ते में काफ़ी देर तक इसी बात पर चर्चा चलती रही ! नजीबाबाद से कोटद्वार की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है, और ये रास्ता दोनों ओर घने पेड़ों से घिरा हुआ बहुत सुंदर लगता है !

lunch in najibabad
नजीजाबाद में नाश्ते के समय लिया गया एक चित्र (Breakfast somewhere in Najijabad)

Sunday, February 1, 2015

दिल्ली से लैंसडाउन का एक यादगार सफ़र (A Road Trip from Delhi to Lansdowne)

शनिवार, 19 जुलाई 2014

जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में एकदम से लैंसडाउन जाने का विचार बना और हम तीन मित्र जयंत, जीतू, और मैं इस यात्रा के लिए ज़्यादा कुछ सोचे बिना ही निकल लिए ! दरअसल, इस यात्रा पर जाने की योजना तो एक बार पहले भी जून के तीसरे सप्ताह में बनी थी, जब हम 4 दोस्तों ने इस यात्रा पर जाने का विचार बनाया था पर अंतिम समय में 2 दोस्तों के अचानक से मना कर देने से हमने इस यात्रा को ठंडे बस्ते में डाल दिया था ! इसलिए जुलाई में इस यात्रा का फिर से विचार आने पर हम लोगों ने ज़्यादा सोच विचार करना मुनासिब नहीं समझा और आनन-फानन में इस यात्रा के लिए निकल पड़े ! हुआ कुछ यूँ कि मेरे दो मित्र जयंत और जतिन (जीतू) इस यात्रा पर जा रहे थे और उन्होनें अंतिम समय में मुझे अपनी इस यात्रा की जानकारी दी, मैने बिना देर किए इस यात्रा के लिए हामी भर दी ! बीवी इन दिनों मायके गई हुई थी, इसलिए यात्रा पर जाने के लिए ज़्यादा सोच विचार करने की ज़रूरत ही नहीं थी, वरना तो ना जाने कितने सवाल-जवाब होते और अंत में परिणाम वही सिफ़र ही निकलता !

NH 24
राष्ट्रीय राजमार्ग 24 (National Highway 24)