Sunday, February 14, 2016

लखनऊ का कुकरैल वन - घड़ियाल पुनर्वास केंद्र (Kukrail Reserve Forest – A Picnic Spot in Lucknow)

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लखनऊ में स्थित कुकरैल वन के बारे में शायद गिनती के लोगों को ही जानकारी होगी, अगर आप भी उन लोगों में से एक है तो आप इस जगह से अच्छी तरफ वाकिफ़ होंगे ! जिन्हें जानकारी नहीं है उन्हें बता दूँ कि मुख्य शहर की भीड़-भाड़ से दूर इंदिरा नगर में स्थित ये घड़ियाल केंद्र यहाँ आने वाले लोगों को खूब पसंद आता है ! अधिकतर लोग यहाँ छुट्टी वाले दिन परिवार संग फ़ुर्सत के कुछ पल बिताने आते है ! बच्चे भी यहाँ आकर काफ़ी रोमांचित हो जाते है और अच्छी यादों के साथ-2 घड़ियालों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी भी अपने साथ ले जाते है ! लखनऊ भ्रमण के बाद दिल्ली वापसी से पहले मुझे भी कुकरैल वन जाने का अवसर मिला ! दरअसल, दिल्ली वापसी की मेरी ट्रेन रात्रि 10 बजे की थी, और बुआजी के घर से इस वन की दूरी भी ज़्यादा नहीं थी ! शाम के समय जब उदय ने कहा कि चलो भैया आपको कुकरैल वन भी घुमा लाता हूँ तो मैं जाने के लिए फटाफट तैयार हो गया ! कैमरे की बैटरी ख़त्म हो चुकी थी इसलिए अपना मोबाइल लेकर ही कुकरैल वन देखने चल दिया ! अगले 10 मिनट में हम दोनों मोटरसाइकल लेकर कुकरैल वन जाने वाले मार्ग पर थे !

kukrail van
कुकरैल वन का प्रवेश द्वार (Entrance to Kukrail Van, Lucknow)

कुकरैल वन तक जाने का मार्ग एक घने जंगल से होकर गुज़रता है, 10-15 मिनट का सफ़र करने के बाद हम कुकरैल वन के मुख्य द्वार के सामने वाली पार्किंग में पहुँच गए ! यहाँ 20 रुपए का पार्किंग शुल्क अदा करने के बाद हमने कुकरैल वन में प्रवेश किया, वन में जाने का अलग से कोई टिकट नहीं लगा और अंदर कैमरा ले जाने की भी मनाही नहीं है ! इस घड़ियाल पुनर्वास केंद्र की स्थापना सन 1975 में हुई और इसका संचालन उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा किया जाता है ! इस वन को स्थापित करने की ज़रूरत तब महसूस हुई जब समस्त भारतवर्ष में घड़ियालों की संख्या तेज़ी से घटने लगी, लोग घड़ियालों की खाल के लिए उन्हें मारने लगे ! ख़ालों की तस्करी भी अपने चरम पर थी, एक समय ऐसा भी आया जब समस्त उत्तर प्रदेश में घड़ियालों की कुल संख्या 300 रह गई ! दरअसल, उत्तर प्रदेश की कुछ नदियों जैसे गंगा, घाघरा, शारदा और अन्य सहायक नदियों में घड़ियाल पाए जाते है ! घड़ियालों की घटती संख्या चिंता का विषय थी और तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हें बचाने के लिए प्रदेश में इस वन को स्थापित किया ! 

इस वन में घड़ियालों के प्रजनन के अलावा इनके अंडे प्रदेश की विभिन्न नदियों के किनारों से भी एकत्रित किए गए ! बाद में विमोचन के बाद इन घड़ियालों को वापिस नदियों में छोड़ दिया गया ! कुकरैइल वन सुबह 9 बजे खुलकर शाम को 5 बजे बंद हो जाता है, अगर आप अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या से राहत पाने के लिए इस वन का रुख़ करते है तो निश्चित तौर पर निराश नहीं होंगे ! यहाँ आपके लिए बहुत कुछ है, खूबसूरत हरे-भरे नज़ारे, शांत वातावरण और घड़ियालों को करीब से जानने का एक सुनहरा मौका भी ! यहाँ आते हुए अगर आप अपने साथ खेलने-कूदने का कुछ सामान लाते है तो आप एक अच्छा दिन यहाँ गुज़ार सकते है ! ये जंगल अपने प्राकृतिक रूप में है, यहाँ आप घड़ियालों के अलावा विभिन्न प्रकार के पक्षियों, कछुओं और अन्य जीवों को भी देख सकते है ! वन में प्रवेश करने के बाद एक सड़क वन के अंदर तक जाती है, इस सड़क के बाईं ओर गुलाब की खेती की गई है जबकि दाईं ओर एक खुला मैदान है ! मैदान में जगह-2 पेड़ लगे हुए है, लोगों के टहलने के लिए मार्ग भी बना है और बच्चों के झूलने के लिए कई झूले लगे है ! 

मुख्य मार्ग पर थोड़ा और आगे बढ़ने पर बाईं ओर एक कच्चा मार्ग है जो आगे जाकर एक नहर तक जाता है ! ये नहर कुक रैलवन और पिकनिक स्पॉट नाम के एक दूसरे पार्क को अलग करती है ! नहर के इस पार कुकरैल वन है और उस पार पिकनिक स्पॉट, जोकि अपनी अवैध गतिविधियों के लिए जाना जाता है ! मुख्य मार्ग पर आगे चलने पर सड़क के बाईं ओर ही जॅंगल का गेस्ट हाउस भी है, जहाँ रुकने और खाने-पीने की भी पर्याप्त व्यवस्था है ! पता नहीं इस गेस्ट हाउस में आम नागरिकों के रुकने की व्यवस्था है या नहीं, लेकिन किसी बड़े अधिकारी के यहाँ आने पर उन्हें इसी गेस्ट हाउस में ठहराया जाता है ! जब हम इस पार्क में थे, उस दिन भी एक सरकारी अधिकारी की गाड़ी इस पार्क में आकर रुकी और वो उतरकर गेस्ट हाउस की तरफ ही गए ! अधिकारी के आने का एक फ़ायदा तो हमें भी मिल गया कि घड़ियालों के आवास के चारों ओर लगी जाली को भी खोल दिया गया ताकि सब नज़दीक से घड़ियालों को देख सके ! वन परिसर में बने मार्ग पर चलते हुए जब हम इस गेस्ट हाउस को पार करके काफ़ी दूर पहुँच गए तो कुक रैलवन का मुख्य प्रवेश द्वार आ गया ! 

यहाँ अंदर जाने के लिए एक घड़ियाल के आकार का प्रवेश द्वार बना है ! यहाँ लगे एक बोर्ड से मुझे ये जानकारी भी मिली कि ये वन 10 हेक्टेयर यानि लगभग 25 एकड़ में फैला है ! हमने बिना देरी किए अंदर प्रवेश किया, शाम हो रही थी और हमें डर था कि कहीं पार्क बंद ना हो जाए इसलिए हम घड़ियालों को पहले देख लेना चाहते थे ! हमने सोच रखा था कि पहले घड़ियाल देख लेंगे उसके बाद आराम से पार्क घूमते रहेंगे ! लेकिन भला हो उन अधिकारियों का जो इस समय वन भ्रमण पर आए थे उनके कारण ही पार्क देर तक खुला रहा और घड़ियालों को भी पास से देखने का मौका मिला ! ये घड़ियाल अभी काफ़ी छोटे थे, अगर व्यस्क होते तो इनके पास जाने की ज़ुर्रत शायद ही कोई करता ! इन घड़ियालों के लिए छोटे-2 पानी के कुंड बनाए गए थे और उसके आस-पास ही ये सब आराम कर रहे थे ! यहाँ से निकलकर जब में वन के दूसरे भाग में जाने लगा तो राह में जगह-2 सूचना पट्ट लगे हुए थे ! इनपर लिखी जानकारी से मुझे इस वन और घड़ियालों के जीवन चक्र से संबंधित काफ़ी जानकारी मिली ! 

ऐसी ही एक जानकारी के अनुसार इस वन की स्थापना तो 1975 में हो गई थी लेकिन इस वन में घड़ियालों का विमोचन सन 1979 से शुरू हुआ ! 1979 से 2012 तक इस वन से 5098 घड़ियाल विमोचित किए गए और 238 घड़ियाल अन्य देशी-विदेशी संस्थाओं को दिए गए ! विमोचन के समय घड़ियालों की आयु 3 वर्ष से अधिक होती है और विमोचन के दौरान घड़ियालों की लंबाई 1.2 मीटर से लेकर 1.6 मीटर तक होता है जबकि इनका वजन 3.5 किलोग्राम से लेकर 6 किलोग्राम तक हो सकता है ! घड़ियालों के अलावा इस वन में कछुए और कुछ अन्य जीव भी रखे गए है, समय कम होने के कारण हम कछुओं को तो नहीं देख पाए ! टहलते हुए हम दोनों वन के अंदर रेस्क्यू स्टोर तक पहुँच गए, यहाँ निर्माण कार्य चल रहा था ! यहाँ आते हुए मार्ग में किनारे एक तालाब था जिसमें 3-4 वयस्क मगरमच्छ दिखाई दिए थे, मोबाइल के कैमरे में उनकी फोटो साफ नहीं आई ! 

यहाँ से निकलकर हम दोनों वन से बाहर जाने वाले मार्ग पर चल दिए ! हल्का-2 अंधेरा होने लगा था और पार्क के भी बंद होने का समय हो गया था ! पार्किंग तक आते-2 तेज हवाओं से मौसम काफ़ी ठंडा हो गया था, अपनी मोटरसाइकल लेकर हम दोनों घर की ओर चल दिए ! रात्रि में समय से लखनऊ स्टेशन पहुँचकर अपनी ट्रेन पकड़ी और अगली सुबह दिल्ली होते हुए अपने घर पहुँच गया ! इसी के साथ ये सफ़र ख़त्म होता है, उम्मीद है आपको मेरे साथ लखनऊ घूम कर मज़ा आया होगा !

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पार्किंग के पास वाला प्रवेश द्वार
कुकरैल वन का प्रवेश द्वार
वन स्थापना वर्ष और क्षेत्रफल दर्शाता एक बोर्ड
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कुकरैल वन का प्रवेश द्वार
कुकरैल वन परिसर का एक दृश्य
कुकरैल वन में विमोचित घड़ियाल 
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कुकरैल वन में विमोचित घड़ियाल 
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कुकरैल वन में विमोचित घड़ियाल 
घड़ियालों का जीवन चक्र
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कुकरैल वन में विमोचित घड़ियाल 
विमोचन प्रक्रिया संबंधित जानकारी
कुकरैल वन में घड़ियालों के विमोचन की संख्या दर्शाता एक बोर्ड 
कछुए का जीवन चक्र दर्शाता एक बोर्ड (Life Cycle of a Tortoise)
कछुए की जानकारी देता एक और बोर्ड
कुकरैल वन में बना रेस्क्यू स्टोर
क्यों जाएँ (Why to go Lucknow): वैसे नवाबों का शहर लखनऊ किसी पहचान का मोहताज नहीं है, इस शहर के बारे में वैसे तो आपने भी सुन ही रखा होगा ! अगर आप प्राचीन इमारतें जैसे इमामबाड़े, भूल-भुलैया, अंबेडकर पार्क, या फिर जनेश्वर मिश्र पार्क घूमने के साथ-2 लखनवी टुंडे कबाब और अन्य शाही व्यंजनों का स्वाद लेना चाहते है तो बेझिझक लखनऊ चले आइए !

कब जाएँ (Best time to go Lucknow
): आप साल के किसी भी महीने में लखनऊ जा सकते है ! गर्मियों के महीनों यहाँ भी खूब गर्मी पड़ती है जबकि दिसंबर-जनवरी के महीने में यहाँ बढ़िया ठंड रहती है !

कैसे जाएँ (How to reach Lucknow): 
दिल्ली से लखनऊ जाने का सबसे बढ़िया और सस्ता साधन भारतीय रेल है दिल्ली से दिनभर लखनऊ के लिए ट्रेनें चलती रहती है किसी भी रात्रि ट्रेन से 8-9 घंटे का सफ़र करके आप प्रात: आराम से लखनऊ पहुँच सकते है ! दिल्ली से लखनऊ जाने का सड़क मार्ग भी शानदार बना है 550 किलोमीटर की इस दूरी को तय करने में भी आपको 7-8 घंटे का समय लग जाएगा !

कहाँ रुके (Where to stay in Lucknow): लखनऊ एक पर्यटन स्थल है इसलिए यहाँ रुकने के लिए होटलों की कमी नहीं है आप अपनी सुविधा के अनुसार चारबाग रेलवे स्टेशन के आस-पास या शहर के अन्य इलाक़ों में स्थित किसी भी होटक में रुक सकते है ! आपको 500 रुपए से शुरू होकर 4000 रुपए तक के होटल मिल जाएँगे !


क्या देखें (Places to see in Lucknow
): लखनऊ में घूमने के लिए बहुत जगहें है जिनमें से छोटा इमामबाड़ा, बड़ा इमामबाड़ा, भूल-भुलैया, आसिफी मस्जिद, शाही बावली, रूमी दरवाजा, हुसैनबाद क्लॉक टॉवर, रेजीडेंसी, कौड़िया घाट, शादत अली ख़ान का मकबरा, अंबेडकर पार्क, जनेश्वर मिश्र पार्क, कुकरेल वन और अमीनाबाद प्रमुख है ! इसके अलावा भी लखनऊ में घूमने की बहुत जगहें है 2-3 दिन में आप इन सभी जगहों को देख सकते है !

क्या खरीदे (Things to buy from Lucknow): लखनऊ घूमने आए है तो यादगार के तौर पर भी कुछ ना कुछ ले जाने का मन होगा ! खरीददारी के लिए भी लखनऊ एक बढ़िया शहर है लखनवी कुर्ते और सूट अपने चिकन वर्क के लिए दुनिया भर में मशहूर है ! खाने-पीने के लिए आप अमीनाबाद बाज़ार का रुख़ कर सकते है, यहाँ के टुंडे कबाब का स्वाद आपको ज़िंदगी भर याद रहेगा ! लखनऊ की गुलाब रेवड़ी भी काफ़ी प्रसिद्ध है, रेलवे स्टेशन के बाहर दुकानों पर ये आसानी से मिल जाएगी !

समाप्त...

लखनऊ यात्रा
  1. लखनऊ की ट्रेन यात्रा (Train Journey to Lucknow)
  2. लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा और भूल-भुलैया (A visit to Bada Imambada and Bhool Bhullaiya)
  3. लखनऊ की शानदार शाही बावली और छोटा इमामबाड़ा (A visit to Shahi Baoli and Chota Imambara)
  4. खूबसूरत रूमी दरवाजा और हुसैनाबाद क्लॉक टावर (History of Rumi Darwaja and Husainabad Clock Tower)
  5. लखनऊ की रेजीडेंसी में बिताई एक शाम (An Evening in the Residency, Lucknow)
  6. गोमती नदी के कुड़ीया घाट की सैर (Kudiya Ghaat of Gomti River, Lucknow)
  7. लखनऊ के अलीगंज का प्राचीन हनुमान मंदिर (Ancient Temple of Lord Hanuman in Aliganj, Lucknow)
  8. नवाब शादत अली ख़ान और बेगम मुर्शीदज़ादी का मकबरा (Tomb of Saadat Ali Khan and Begam Murshid Zadi)
  9. लखनऊ का खूबसूरत जनेश्वर मिश्र पार्क (The Beauty of Janeshwar Mishr Park, Lucknow)
  10. लखनऊ का अंबेडकर पार्क - सामाजिक परिवर्तन स्थल (A Visit to Ambedkar Park, Lucknow)
  11. लखनऊ का कुकरैल वन - घड़ियाल पुनर्वास केंद्र (Kukrail Reserve Forest – A Picnic Spot in Lucknow)

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