Friday, January 26, 2018

दिल्ली से जोधपुर की ट्रेन यात्रा (A Train Journey from Delhi to Jodhpur)

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017

केदारनाथ से वापिस आने के बाद 2 महीने बीतने को थे, इस बीच काम की व्यस्तता के कारण किसी भी यात्रा पर जाने का संयोग नहीं बना था, सर्दियों ने दस्तक दे दी थी और ये वर्ष भी अपनी समाप्ति की ओर था ! जब काम करते-2 मन ऊब गया तो आखिरकार दिसंबर के तीसरे सप्ताह में एकदम से घूमने जाने का कीड़ा जाग उठा ! लेकिन इस बार पहाड़ों पर जाने की इच्छा नहीं हो रही थी, इसलिए सोचा क्यों ना इस बार राजस्थान में ही कहीं घूम आऊँ ! क्रिसमस की छुट्टी की वजह से एक लम्बा सप्ताह मिल रहा था, इसलिए मैंने 2 अतिरिक्त छुट्टियाँ लेकर 5 दिवसीय यात्रा की योजना बना ली ! साल का अंत होने के कारण हर जगह अच्छी भीड़-भाड़ मिलने वाली थी, टिकट मिलने की उम्मीद भी ना के बराबर ही थी ! आनन-फानन में ट्रेन की टिकटें देखी तो स्लीपर में ही कन्फर्म टिकटें मिल रही थी ! वैसे राजस्थान वाले रूट पर टिकटों को लेकर ज्यादा मारामारी नहीं थी, वरना इस समय देश के किसी दूसरे हिस्से में कन्फर्म टिकटें मिलना काफी मुश्किल था ! मेरी इस 5 दिवसीय यात्रा पर देवेन्द्र भी मेरे साथ जा रहा था, और हम इस यात्रा में जोधपुर, जैसलमेर, और बीकानेर की यात्रा करने वाले थे ! इससे पहले देवेन्द्र और मैं केदारनाथ और शिमला की यात्रा पर भी साथ जा चुके है ! निर्धारित दिन हम अपने-2 दफ्तर से काम निबटा कर इस यात्रा के लिए निकल पड़े !


जोधपुर रेलवे स्टेशन के बाहर का एक दृश्य

Sunday, January 21, 2018

सालासर बालाजी – जहाँ दाढ़ी-मूछ वाले हनुमान जी विराजमान है (Temple of Lord Hanuman in Salasar Balaji)

शनिवार, 16 सितम्बर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने खाटूश्याम से सालासर पहुँचने तक की यात्रा के बारे में पढ़ा, अब आगे, सालासर पहुँचते-2 ही दोपहर हो गई थी और सबको तेज भूख लग रही थी । सुबह खाटूश्याम से चलते समय हल्का-फुल्का नाश्ता ही किया था, जो सालासर पहुँचने से पहले ही पच चुका था । धर्मशाला में थोड़ी देर आराम करने के बाद हम पेट पूजा करने के लिए यहाँ से थोड़ी दूर स्थित बाज़ार की ओर चल दिए, बाज़ार की जानकारी हमने पार्किंग से आते हुए वहां खड़े एक व्यक्ति से ले ली थी । धर्मशाला से निकले तो हम टहलते हुए मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर पहुँच गए, यहाँ अच्छा-ख़ासा बाज़ार था, बाज़ार के बीच में ही मंदिर का प्रवेश द्वार भी है ! बाज़ार में खान-पान की कई दुकानें थी, हम महालक्ष्मी भोजनालय पर जाकर रुके । यहाँ हमने 100 रूपए थाली के हिसाब से पहले एक थाली ली और भोजन का स्वाद चखा, खाना बढ़िया लगा तो सबके लिए थालियाँ मंगवा ली । दाल-चावल, रोटी-सब्जी, अचार, सलाद सब था इस थाली में और भरपेट था, खाना खाकर मजा आ गया, अब तो इतना खाना खा लिया था कि शायद रात को खाने की ज़रूरत भी ना पड़े ।

सालासर से वापिस आते हुए रास्ते में लिया एक चित्र

Wednesday, January 17, 2018

खाटूश्याम से सालासर बालाजी की सड़क यात्रा (A Road Trip from Khatu Shyam to Salasar Balaji)

शनिवार, 16 सितम्बर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने खाटूश्याम के बारे में पढ़ा, दर्शन करने के बाद हम खा-पीकर यहाँ से चले तो कुछ ही देर में मुख्य मार्ग को जोड़ने वाले तिराहे पर पहुँच गए ! रात को हम दाईं तरफ से आए थे और अब हमें बाईं ओर मुड़ना था, वैसे रास्ता इतना भी मुश्किल नहीं था लेकिन रात को अँधेरा होने की वजह से धर्मशाला ढूँढने में हमें थोड़ी परेशानी हुई थी ! अब यहाँ से सालासर जाते हुए हम रास्ते में पड़ने वाली अन्य जगहों के अलावा रेवासा झील भी देखना चाहते थे जो खाटूश्याम से मात्र 29 किलोमीटर दूर है हालांकि, ये झील मुख्य मार्ग से थोडा हटकर है ! झील के पास ही जीण माता का प्रसिद्द मंदिर भी है, गूगल मैप का सहारा लेकर हम इस झील की ओर जाने वाले मार्ग पर चल दिए ! खाटू से निकलकर हम रींगस मार्ग पर चल रहे थे, थोड़ी दूर जाने पर मुख्य मार्ग से एक रास्ता अलग हो रहा था, हम एक चरवाहे से पूछकर मुख्य मार्ग पर ही चलते रहे ! थोड़ी आगे बढ़ने पर सड़क के किनारे एक मंदिर दिखाई दिया, मंदिर की बाहरी दीवार इतनी ऊंची थी कि मुख्य ईमारत का कुछ अता-पता नहीं चल रहा था, बाहर से देखने पर मंदिर भी कुछ ख़ास नहीं लग रहा था लेकिन फिर भी जाने क्यों हम सबकी इच्छा इस मंदिर में जाने की हुई !


श्रीराम मंदिर के अन्दर का एक दृश्य 

Saturday, January 13, 2018

खाटूश्याम – कलयुग में कृष्ण के अवतार (Khatu Shyam Temple of Rajasthan)

शनिवार, 16 सितम्बर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा किस तरह हम गुडगाँव से निकलकर देर रात खाटूश्याम पहुंचे और सुबह जल्दी उठकर मंदिर में दर्शन के लिए चल दिए ! अब आगे, पूजा सामग्री लेकर हम बाहरी प्रवेश द्वार से होते हुए मंदिर परिसर में पहुंचे, यहाँ लोहे के पाइप की रेलिंग नहीं है ! इन रेलिंग रेलिंग को पार करते हुए हम मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर चल दिए, इस समय तो यहाँ ज्यादा भीड़ नहीं थी, गिनती के कुछ लोग ही मंदिर परिसर में थे ! जैसे-2 दिन चढ़ता जायेगा, यहाँ आने वाले श्रधालुओं की भीड़ भी बढती जाएगी, श्रधालुओं की संख्या बढ़ने पर ये रेलिंग ही भीड़ को नियंत्रित करती है ! लोग कतार में खड़े होकर इन रेलिंग से होते हुए मंदिर के मुख्य भवन में प्रवेश करते है, मुख्य भवन में जाने के लिए आपको कुछ सीढ़ियों से होकर जाना होता है ! इस मंदिर में श्याम के शीश की पूजा होती है, हर सुबह आरती से पहले श्याम का श्रृंगार होता है, और फिर आरती के बाद भोग लगाया जाता है ! इस सारी प्रक्रिया के दौरान मंदिर के द्वार तो खुले रहते है लेकिन मूर्ति के आगे एक पर्दा लगा दिया जाता है, भोग लगाने के बाद आम लोगों के दर्शन हेतु ये पर्दा हटा दिया जाता है ! जब हम मंदिर में पहुंचे तो श्रृंगार की तैयारी चल रही थी, इसलिए हम मुख्य भवन से 10 कदम दूर एक कतार में खड़े होकर प्रतीक्षा करने लगे !


कुंड के पास का एक दृश्य 

Sunday, January 7, 2018

गुडगाँव से खाटूश्याम की एक सड़क यात्रा (A Road Trip from Gurgaon to Khatu Shyam)

शुक्रवार, 15 सितम्बर 2017

खाटू श्याम की यात्रा पर जाने का मेरा विचार तो काफी समय से बन रहा था, लेकिन किसी ना किसी वजह से इस यात्रा पर जाने का दिन निर्धारित नहीं हो पा रहा था ! आखिरकार सितम्बर के महीने में वो दिन आ ही गया जब इस यात्रा पर जाने का संयोग बना !  सितम्बर के तीसरे सप्ताह में एक दिन लोकेश का फ़ोन आया, बातचीत के दौरान जब उसने पूछा, खाटू श्याम कब चलने का विचार है क्या ? मैं तो इस यात्रा पर जाने के लिए कबसे तैयार बैठा था, इसलिए मैंने कहा, चल यार इसी हफ्ते चलते है ! इस पर वो बोला, एक मित्र भी साथ चलने के लिए कह रहा था, मैं उससे बात करके शाम तक बताता हूँ ! दिनभर काम में व्यस्त रहने के बाद मुझे शाम तक इन्तजार भी नहीं करना पड़ा और ऑफिस से निकलने से पहले ही लोकेश का फ़ोन भी आ गया ! इस तरह शुक्रवार, 15 सितम्बर को इस यात्रा पर जाना निर्धारित हुआ, इस यात्रा पर हम 3 दिनों के लिए जा रहे थे ! शुक्रवार दोपहर बाद गुडगाँव से निकलकर, खाटू श्याम और सालासर बालाजी देखते हुए हम रविवार शाम तक घर वापिस आने वाले थे ! यात्रा में केवल 2 दिन ही शेष थे, लेकिन इस यात्रा के लिए हमें ज्यादा तैयारी नहीं करनी थी इसलिए परेशानी वाली कोई बात नहीं थी !


खाने के समय लिया एक चित्र

Monday, January 1, 2018

सोनप्रयाग का संगम स्थल और त्रियुगीनारायण मंदिर (TriyugiNarayan Temple in Sonprayag)

शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

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वासुकी गंगा और मन्दाकिनी नदी का संगम

यात्रा के पिछले लेख में आपने केदारनाथ से सोनप्रयाग वापसी के बारे में पढ़ा, अब आगे, होटल से अपने कपडे  लेकर हम सोनप्रयाग में बने घाट की ओर नहाने के लिए चल दिए ! होटल वाले ने हमसे कहा कि नदी का पानी काफी ठंडा रहता है इसलिए हम होटल में ही नहाकर घूमने के लिए घाट पर जाएँ ! लेकिन हमने ठान लिया था कि आज सोनप्रयाग में नहाकर ही वापिस जाना है इसलिए ठण्ड की परवाह किए बिना ही हम होटल से निकलकर घाट की ओर चल दिए ! सोनप्रयाग से गौरीकुंड जाने वाले मार्ग पर 100-150 मीटर चलने के बाद ही दाईं ओर संगम स्थल है, जिस दिन हम सोनप्रयाग आए थे तो यहाँ पहुँचते हुए ही अँधेरा हो गया था इसलिए हम संगम नहीं देख पाए थे ! आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि सोनप्रयाग में वासुकी ताल से आने वाली वासुकी गंगा और केदारनाथ से आने वाली मन्दाकिनी नदी का संगम होता है ! संगम स्थल मुख्य मार्ग से काफी नीचे है, जहाँ जाने के लिए कुछ सीढियाँ बनी है, और सीढियाँ ख़त्म होते ही झाड-झंझाड़ है ! इस समय नदी में पानी काफी कम था, इसलिए नदी के किनारे दूर तक बिखरे छोटे-बड़े पत्थर दिखाई दे रहे थे ! बारिश के समय जब जलस्तर बढ़ जाता है तो पानी नदी के किनारे तक आ जाता है !


सोनप्रयाग में घाट के पास का एक दृश्य (A view of Sangam in Sonprayag)