Monday, February 26, 2018

जोधपुर के महाराजा का निवास स्थल है उम्मेद भवन (Umaid Bhawan Palace, The Residence of King of Marwar)

रविवार, 24 दिसंबर 2017

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जोधपुर यात्रा के पिछले लेख में आपने जसवंत थड़ा के बारे में पढ़ा, दिनभर घूमने के बाद रात को अपने होटल की छत पर बंगाली परिवार से बातचीत के बाद हम अपने कमरे में सोने आ गए ! अब आगे, कल दिनभर की थकान के कारण रात को बिस्तर पर जाते ही नींद आ गई, रात को थोडा ठंडा मौसम होने के बावजूद बढ़िया नींद आई और सुबह समय से सोकर उठे ! आज घूमने वाली सारी जगहें शहर से थोडा दूर थी इसलिए हमारा विचार सबसे पहले किराए पर एक मोटरसाइकिल लेने का था ताकि सुगम यात्रा सुनिश्चित कर सके ! सुबह ये समय यहाँ भी ठंडा मौसम था, लेकिन दिन में यहाँ तापमान सामान्य था ! बिस्तर से उठने के बाद हम बारी-2 से समय से नहा-धोकर तैयार हो गए और अपने बैग में खाने-पीने का कुछ सामान लेकर पैदल ही स्टेशन की ओर जाने वाले मार्ग पर चल दिए ! मैंने कल स्टेशन से होटल जाते हुए किराये पर मिलने वाली मोटरसाइकिल की दुकान देखी थी ! हमने सोच लिया था कि अगर किराए पर बाइक मिली तो ठीक वरना ऑटो से ही घूम लेंगे ! रास्ते में एक-दो दुकानों से किराए पर मिलने वाली बाइकों से सम्बंधित जानकारी भी लेनी चाही, लेकिन इस बाबत किसी से कोई सहायता नहीं मिली ! आखिरकार हम स्टेशन वाली रोड पर पहुँच गए, स्टेशन से करीब 200 मीटर पहले हमें अपनी बाईं ओर किराए पर बाइक का एक विज्ञापन दिखाई दिया !



उम्मेद भवन पैलेस का एक दृश्य

Wednesday, February 21, 2018

मारवाड़ का ताजमहल है जसवंत थड़ा (Jaswant Thada, A Monument of Rajpoot Kings)

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप मेहरानगढ़ दुर्ग के महल देख चुके है, किले से निकलने से पहले मैंने आपको चामुंडा देवी के दर्शन भी करवा दिए ! अब आगे, किले से घूमकर निकले तो शाम के साढ़े चार बज रहे थे, मेरी जानकारी के अनुसार जसवंत थड़ा में शाम 5 बजे तक ही प्रवेश मिलता है ! अब यहाँ से निकलकर जसवंत थड़ा पहुँचते-2 ही 15-20 मिनट लग जायेंगे, इसलिए हमारा विचार इसे कल ही देखने का था, लेकिन किले में मौजूद एक सुरक्षा कर्मचारी से पूछने पर पता चला कि शाम साढ़े पांच बजे तक इसमें प्रवेश किया जा सकता है ! ये सुनकर हम किले से निकलकर तेज क़दमों से जसवंत थड़ा की ओर जाने वाले मार्ग पर चल पड़े, एक विचार ऑटो में जाने का भी हुआ लेकिन आस-पास कोई खाली ऑटो ना होने के कारण ये विचार त्याग दिया ! 10-15 मिनट की पद यात्रा करके हम मुख्य मार्ग को छोड़कर जसवंत थड़ा जाने वाले मार्ग पर पहुँच गए, मेहरानगढ़ किले से निकलते ही रास्ते में हमें सड़क किनारे एक तालाब भी दिखाई दिया, लेकिन इसका पानी बहुत गन्दा था इसलिए हमने इसकी फोटो भी नहीं ली ! मुख्य मार्ग से जसवंत थड़ा जाने वाले मार्ग पर मुड़ते ही सड़क के दाईं ओर एक पहाड़ी पर हमें घोड़े पर सवार राव जोधा की मूर्ति दिखाई दी !


जसवंत थड़ा का एक दृश्य

Saturday, February 17, 2018

मेहरानगढ़ दुर्ग के महल (A Visit to Palaces of Mehrangarh Fort, Jodhpur)

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप मेहरानगढ़ के संग्रहालय में स्थित हाथी-हौदे, पालकियां और हुक्के देख चुके है, अब आगे, तस्वीर स्टूडियों से बाहर आने के बाद अगला नंबर था “दौलत खाना” देखने का, लेकिन अन्दर जाने से पहले हम कुछ देर श्रृंगार चौकी के पास बने चबूतरे के किनारे बैठ कर महल की दीवारों पर की गई कारीगरी नक्काशीदार जालियों को जी भरकर देखना चाहते थे ! सूर्य की रोशनी जब इन जालियों की ज्यामितीय नक्काशी के बीच से निकल कर आती है तो बहुत सुन्दर लगती है ! यहाँ खाली बैठे रहना भी एक सुखद एहसास देता है, मन करता है यहाँ घंटो बैठकर यूँ ही इन नक्काशियों को देखते रहे, वैसे ये जालियां पर्दा प्रथा की परंपरा को भी कायम रखती है ! आप देख सकते है कि यहाँ खड़े होकर जालियों के उस पार देखना संभव नहीं है लेकिन जालियों के उस पार से बाहर देखना बहुत आसान है ! राजपरिवार की महिलाएं सामने आए बिना इन जालियों के पीछे से ही नीचे बरामदे में होने वाली कार्यवाही देखा करती थी ! महल की खिडकियों के ऊपर बने ये झरोखे झोपड़ियों की छत से प्रभावित थे, ये जाली और झरोखे, राजपूत वास्तुकला का हिस्सा है, कुछ समय बैठने के बाद हम दौलतखाना देखने के लिए उठ गए !


दौलतखाने में रखी एक पालकी 

Tuesday, February 13, 2018

जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग की सैर (A Visit to Mehrangarh Fort, Jodhpur)

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने मेहरानगढ़ किले के इतिहास के बारे में पढ़ा, टिकट लेने के बाद हम जयपोल द्वार से होते हुए किले के अन्दर प्रवेश कर चुके है ! अब आगे, किले के बाहरी द्वार पर बने तोप के गोलों के निशानों के बारे में थोड़ी जानकारी तो मैं आपको पिछले लेख में दे ही चुका हूँ ! ये गोले उन्नीसवीं सदी के शुरू में हुए एक लम्बे युद्ध के दौरान दागे गए थे ! जब तत्कालीन मारवाड़ शासक की अचानक मृत्यु हो गई, तो रीति के अनुसार उनकी होने वाली मंगेतर उदयपुर की राजकुमारी का विवाह राज्य के नए उत्तराधिकारी महाराजा मानसिंह से होना था ! लेकिन उदयपुर के महाराणा इस रीति से सहमत नहीं थे और उन्होंने राजकुमारी का विवाह जयपुर के महाराजा से तय कर दिया ! इस निर्णय से राठौर वंश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची, परिणामस्वरूप गुस्से में आकर जयपुर की तरफ बढ़ते विवाह के उपहारों से भरे कारवां पर मानसिंह ने हमला कर दिया और युद्ध प्रारंभ हो गया ! इस युद्ध में मानसिंह पराजित हुए और मेहरानगढ़ लौट आए, अगले 6 महीने तक जयपुर की सेना ने इस किले के चारों तरफ घेरा डाले रखा, स्थिति बहुत गंभीर थी, भोजन और पानी की किल्लत भी हुई ! लेकिन अपने पूरे काल में मेहरानगढ़ के किले पर कोई भी बलपूर्वक जीत हासिल नहीं कर सका !

मेहरानगढ़ के संग्रहालय में रखा एक हाथी-हौदा 

Saturday, February 10, 2018

जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग का इतिहास (History of Mehrangarh Fort, Jodhpur)

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने दिल्ली से जोधपुर पहुँचने तक की यात्रा के बारे में पढ़ा, जोधपुर में कमरा लेने के बाद एक बैग में खाने-पीने का कुछ सामान लेकर हम मेहरानगढ़ किला देखने निकल पड़े ! अब आगे, होटल से निकलने के बाद हम जोधपुर के त्रिपोलिया बाज़ार से होते हुए किले की ओर बढ रहे थे, कुछ दूर तक तो रास्ता समतल था लेकिन जैसे-2 हम किले के करीब पहुँचते गए, हल्की-2 चढ़ाई आती गई और अंत में तो एकदम खड़ी चढ़ाई आ गई ! इस मार्ग पर चलते हुए हमें कई सैलानी मिले, कुछ स्थानीय थे तो कुछ विदेशी, इनमें से कुछ लोग किले की ओर जा रहे थे तो कुछ किला देखकर वापिस आ रहे थे ! किले से थोड़ी पहले हम फोटो खींचने के लिए एक ऊंची जगह पर रुके, यहाँ से दूर तक फैला जोधपुर शहर दिखाई दे रहा था ! आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि जोधपुर में अधिकतर घरों का रंग नीला है जिस कारण इसे नीली नगरी भी कहा जाता है ! हालांकि, जहाँ खड़े होकर हम फोटो खींच रहे थे वहां से ये नीला शहर नहीं दिखाई देता, शहर का ये नया हिस्सा बाद में बसा है जबकि नीला शहर पुराना जोधपुर है जो किले के पीछे स्थित है ! ये जोधपुर के प्राचीन इलाकों में से एक है और इसे ब्रहमनगरी के नाम से भी जाना जाता है, इस नीले शहर का वर्णन मैं किले के भ्रमण के दौरान करूँगा !


मेहरानगढ़ किले के अन्दर का एक दृश्य