Monday, May 29, 2017

उदयपुर से माउंट आबू की सड़क यात्रा (A Road Trip from Udaipur to Mount Abu)

शनिवार, 19 नवंबर 2016 

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हमने उदयपुर में पहला दिन स्थानीय भ्रमण करते हुए बिताया, पहले दिन घूमते हुए हम उदयपुर की अधिकतर जगहें देख चुके थे जिसमें "सिटी पैलेस (City Palace), पिछोला झील (Lake Pichhola), रोपवे (Ropeway), सहेलियों की बाड़ी (Saheliyon ki Bari) और फ़तेह सागर झील (Fateh Sagar Lake)" शामिल थे ! दिन भर घूमकर और रात्रि भोजन करने के बाद आराम करने के लिए हम वापिस अपने होटल आ गए ! अब आगे, दिन भर घूमते हुए शाम को अच्छी-ख़ासी थकान हो गई थी इसलिए रात को बढ़िया नींद आई और सुबह समय से सोकर उठे ! आज उदयपुर में हमारा दूसरा दिन था, और सबका मन "माउंट आबू" (Mount Abu) जाने का था, वैसे ये विचार भी एकदम ही बना था, दिल्ली से तो यही सोचकर चले थे कि उदयपुर घूमने के बाद "हल्दीघाटी" (Haldighati) होते हुए "कुम्भलगढ़ का किला" (Kumbhalgarh Fort) घूम लेंगे ! वापसी में "चितौडगढ़ का किला" (Chittorgarh Fort) देखने के बाद दिल्ली की ट्रेन पकड़ कर वापिस आ जाएँगे ! लेकिन कल रात को एकदम से माउंट आबू जाने का विचार बन गया, इसलिए रात को ही इस यात्रा के हमारे एक साथी रवि ने गाड़ी का इंतज़ाम भी करवा दिया जो सुबह हमें अपने होटल से लेकर माउंट आबू घुमा देगी !

नक्की झील का एक दृश्य (A View of Nakki Lake, Mount Abu)

Thursday, May 25, 2017

उदयपुर का सिटी पैलेस, रोपवे और पिछोला झील (City Palace, Ropeway and Lake Pichola of Udaipur)

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम दिल्ली से उदयपुर पहुँचने के बाद स्थानीय भ्रमण पर निकल चुके है ! उदयपुर में घूमते हुए अब तक हम "फ़तेह सागह झील" (Fateh Sagar Lake) और "सहेलियों की बाड़ी" (Saheliyon ki Bari) देख चुके है और फिलहाल "सिटी पैलेस" (City Palace, Udaipur) के प्रवेश द्वार के पास खड़े है जहाँ दुष्यंत हम सबके लिए सिटी पैलेस में जाने की टिकटें लेने के लिए कतार में खड़ा है ! अब आगे, आज का पूरा दिन तो हम स्थानीय भ्रमण करते हुए ही बिताने वाले थे, दुष्यंत जब टिकट ले रहा था तो टिकट खिड़की पर एक मजेदार घटना घटी ! नोटबंदी के कारण पूरे देश में पुराने नोटों के लेन-देन पर रोक लग चुकी थी लेकिन टिकट खिड़की पर बैठे एक अधिकारी ने एक विदेशी पर्यटक को टिकट देने के बाद 500 रुपए के पुराने नोट थमा दिए ! मैं दूर खड़ा ये सब देख रहा था, विदेशी नागरिक पैसे लेकर टिकट खिड़की से हट ही रहा था कि तभी मैं झट से आगे बढ़ा और उस विदेशी नागरिक को बता दिया कि इन नोटों का चलन यहाँ 10 दिन पहले बंद हो चुका है इसलिए वो इन नोटों को ना ले ! मेरी बात सुनकर उसने वो नोट खिड़की पर बैठे अधिकारी को वापिस कर दिए !

पिछोला झील से दिखाई देता एक दृश्य

Friday, May 19, 2017

उदयपुर में पहला दिन – स्थानीय भ्रमण (Local Sight Seen in Udaipur)

वीरवार, 17 नवंबर 2016

काफ़ी सोच विचार करने के बाद भी समझ नहीं आ रहा कि इस यात्रा को कहाँ से शुरू करूँ, चलिए, यात्रा की योजना कैसे बनी इस बात से ही शुरुआत करते है यात्रा शुरू करने से पहले आपको बता दूँ कि इस बार मैं आपको राजस्थान के प्रसिद्ध शहर "उदयपुर" की घुमक्कडी पर लेकर चल रहा हूँ वैसे तो मैं एक बार पहले 2011 में भी उदयपुर जा चुका हूँ, तब मैं और शशांक दिसंबर के अंतिम सप्ताह में वहाँ गए थे और कई जगहें घूम कर आए थे लेकिन उदयपुर में इतना कुछ देखने को है कि एक बार में मैं सबकुछ नहीं देख पाया ! मेरी पिछली उदयपुर यात्रा को आप यहाँ क्लिक करके विस्तार से पढ़ सकते है ! उदयपुर से वापिस आने के बाद मन के किसी कोने में दबी हुई इच्छा थी कि मौका मिलेगा तो एक बार फिर से उदयपुर जाकर उन जगहों को ज़रूर देखूँगा ! ये दबी इच्छा पिछले साल जागृत हो उठी जब मेरे कुछ मित्रों ने उदयपुर यात्रा पर साथ चलने के लिए मुझसे पूछा ! हुआ कुछ यूँ कि रोजाना ऑफिस साथ चलने वाले कुछ मित्र उदयपुर जाने की योजना बना रहे थे, मेरे मना करने के बावजूद उन्होनें मुझे भी इस यात्रा में शामिल कर लिया !

उदयपुर में फ़तेह सागर झील का एक दृश्य  (A view of Fateh Sagar Lake, Udaipur)

Wednesday, May 10, 2017

हिमाचल का एक दर्शनीय स्थल - मशोबरा (Mashobra - A Beautiful Place in Himachal)

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इस यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम धर्मपुर के बाद एक नए मार्ग से होकर यहाँ शोघी पहुँचे थे ! हमारा कल का पूरा दिन तो सफ़र में ही बीता था, वो अलग बात है कि सफ़र के दौरान ही हमने बहुत से खूबसूरत नज़ारे देखे ! दिन भर के सफ़र की थकान के कारण रात को समय से नींद भी आ गई और सुबह समय से सोकर उठे ! अब आगे, नींद खुलते ही अपने कमरे की खिड़की का पर्दा हटाया तो बाहर घाटी का शानदार नज़ारा देखने को मिला ! हल्का-2 कोहरा और घाटी में तैरते बादल लाजवाब लग रहे थे, दिन की शुरुआत ही ऐसे नज़ारों से हो जाए तो क्या कहने ! होटल के रिशेप्शन पर फोन करके सबसे पहले हमने अपने लिए चाय मंगाई ! चाय की चुस्कियों के साथ पहाड़ों पर ऐसे नज़ारे देखना हमेशा ही सुखद एहसास रहता है ! यहाँ से घाटी में दूर बलखाती सड़क भी दिखाई दे रही थी, थोड़ी देर बैठकर एकटक इन नज़ारों को देखते रहे ! इतने में हमारी चाय भी आ गई, चाय पीते-2 आज दिन के कार्यक्रम पर चर्चा भी की, लेकिन कार्यक्रम कुछ था ही नहीं तो चर्चा क्या करते ? बस ऐसे ही गप्पे मारते रहे !
शोघी में होटल के पास लिया एक चित्र

Saturday, May 6, 2017

दिल्ली से शोघी की एक सड़क यात्रा (A Road Trip to Shoghi)

शनिवार, 16 जुलाई 2016

अभी पिछले महीने ही कुछ सहकर्मियों के साथ शिमला घूम कर आया था, तब हम शिमला और इसके आस-पास की जगहों जैसे कसौली, चैल, और कुफरी भी गए थे ! एक महीना भी नहीं गुजरा था कि एक बार फिर से यात्रा का संयोग बनने लगा, लेकिन इस बार पारिवारिक यात्रा पर जाने का विचार था ! हालाँकि, घूमने जाने की जगह अभी निश्चित नहीं थी बस ये था कि फिर से कोई पहाड़ी यात्रा ही करनी है ! खैर, यात्रा की जगह तो अंतिम दिन तक भी निश्चित नहीं हुई, वैसे कभी-2 बिना योजना के किए गए ऐसे सफ़र बड़े मजेदार होते है, जिसमें कोई नियम, कोई पाबंदी, या कोई मंज़िल निश्चित नहीं होती ! बस चलते-2 जो अच्छा लगा देख लिया, जहाँ मन किया रुक गए, और फिर जब मन करे, आगे बढ़ चलो ! हालाँकि, ऐसे सफ़र के अपने फ़ायदे-नुकसान भी होते है, लेकिन फिर भी अगर मौका मिले तो कभी ऐसी यात्रा भी करके देखिए, यकीन मानिए, ये सफ़र आपको ताउम्र याद रहेगा ! चलिए, वापिस अपनी यात्रा पर चलते है जहाँ हमें इस यात्रा के लिए थोड़ी-बहुत जो खरीददारी करनी थी वो कर ली, और निर्धारित दिन सुबह 5 बजे हम इस सफ़र पर निकल पड़े !



विरजेश्वर महादेव मंदिर का एक दृश्य