Thursday, July 14, 2016

सारनाथ का थाई मंदिर और चौखंडी स्तूप (Tourist Attractions in Sarnath, Thai Temple and Chaukhandi Stoop)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

मेरा पिछला लेख तो आप पढ़ ही चुके होंगे जिसमें मैं चाइना मंदिर घूमने के बाद म्यूज़ीयम पहुँचा और म्यूज़ीयम में ना जाकर इसके सामने बनी एक झोपड़ीनुमा इमारत में चल दिया ! अब आगे, तो जिस इमारत को मैं चर्च समझ कर अंदर चला आया था असल में वो सारनाथ में स्थित थाई मंदिर है ! इस मंदिर का प्रवेश द्वार शानदार बना है, प्रवेश द्वार से लेकर मंदिर के मुख्य भवन की आकृति में थाईलैंड संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है ! एक खुले मैदान के बीचों-बीच बना ये मंदिर बहुत सुंदर लगता है, मंदिर परिसर में मुख्य भवन के अलावा भी कई मूर्तियाँ और आकृतियाँ बनी हुई है ! थाई मंदिर के मुख्य भवन के ऊपरी भाग में महात्मा बुद्ध के चित्र बने हुए है इन चित्रों में उन्हें अलग-2 क्रिया-कलाप करते हुए दिखाया गया है ! पहला चित्र उनके बाल रूप को दर्शाता है तो दूसरे चित्र में महात्मा बुद्ध ध्यान लगाते हुए दिखाई देते है, अगले चित्र में वो अपने शिष्यों को ज्ञान दे रहे है, तो एक अन्य चित्र में उन्हें विश्राम करते हुए भी दिखाया गया है !

थाई मंदिर का एक दृश्य

Sunday, July 10, 2016

सारनाथ का चाइना मंदिर (China Temple, Sarnath)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

मूलगंध कूटी विहार से निकलकर बाईं ओर जाने पर एक चौराहा आता है, चौराहे से सीधे जाने पर सड़क के बाईं ओर ही चाइना मंदिर है ! साड़ी उद्योग देखने के बाद हम एक सहायक मार्ग से होते हुए 5 मिनट का सफ़र तय करके चौराहे पर पहुँचे ! इस चौराहे से 2 मिनट की पद यात्रा करने के बाद ही हम चाइना मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक सामने खड़े थे ! इस मंदिर में पिछले मंदिर की अपेक्षा ज़्यादा लोग थे ! मंदिर के प्रवेश द्वार के किनारे दो विशाल स्तंभ है, इस मंदिर की दीवारें लाल और पीले रंग से रंगी गई है और मंदिर की छत को झोपड़ीनुमा आकृति दी गई है ! जाहिर सी बात है चीनी वास्तुकारों ने इस मंदिर की रूप-रेखा तैयार की होगी ! मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद एक खुला बरामदा है, जो काफ़ी बड़ा है ! थोड़ी आगे बढ़ने पर एक हाल है जिसमें महात्मा बुद्ध के जीवन से संबंधित बहुत से चित्र और अन्य जानकारियों को प्रदर्शनी की तरह लगाया गया है ! यहाँ एक बड़े चार्ट पर दर्शाया गया है कि पूरे विश्व में महात्मा बुद्ध की विशाल मूर्तियाँ कहाँ-2 पर है ! हालाँकि, इस चार्ट पर धूल तो काफ़ी जम गई है लेकिन बहुत उपयोगी जानकारी दी गई है !


चाइना मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगी सुंदर लाइट

Wednesday, July 6, 2016

धूमेख स्तूप, बोधिवृक्ष और मूलगंध कूटी विहार (Tourist Attractions in Sarnath, Dhumekh Stoop, Mulgandh Kuti Vihar Temple)

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें !

शनिवार, 7 मई 2016

पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह मैं नई दिल्ली से वाराणसी का सफ़र तय करके सारनाथ पहुँचा, अब आगे ! ऑटो से उतरते ही मैं मूलगंध कूटी विहार के प्रवेश द्वार पर खड़ा होकर फोटो खींचने लगा, कि तभी किसी की आवाज़ सुनकर मेरी एकाग्रता टूटी ! मुड़कर देखा तो एक व्यक्ति मेरे पीछे खड़ा था, मेरे मुड़ते ही वो बोला, सर गाइड कर लो, आपको अच्छे से मंदिर घुमा दूँगा ! फोटो खींचते-2 ही मैने पूछा अच्छे से घूमना क्या होता है भाई, मेरी आँखें भी सलामत है और पैर भी, मैं अपने आप ज़्यादा अच्छे से घूम सकता हूँ ! अब ये मंदिर पहाड़ी पर तो है नहीं कि तुम मुझे अपनी पीठ पर बिठा कर ले जाओगे ! दरअसल, मेरे हाथ में कैमरा और पीठ पर बैग देखकर वो ये सोचकर चला आया था कि शहर से आए इस मुसाफिर से सुबह-2 कुछ पैसे ही कमा लिए जाएँ ! मेरे मना करने के बावजूद भी वो व्यक्ति मेरे आगे-पीछे घूमता रहा, अंत में मैने उसे अपने साथ चलने को कह ही दिया ! पूछने पर वो बोला कि आपको मंदिर परिसर में 5 पॉइंट घुमा दूँगा और बदले में केवल 30 रुपए लूँगा ! 

मूलगंध कूटी विहार मंदिर का एक दृश्य

Saturday, July 2, 2016

दिल्ली से वाराणसी की रेल यात्रा (A train trip to Varanasi from Delhi)

शुक्रवार, 6 मई 2016

बात है मई के प्रथम सप्ताह की, जब मुझे एक निजी काम के सिलसिले में बनारस जाने का मौका मिला ! अब क्योंकि ये यात्रा घुमककड़ी के लिए तो थी नही, इसलिए काम से इतर मेरे पास घूमने के लिए बहुत ही सीमित समय था ! मैने सोचा क्यों ना समय का सदुपयोग करते हुए इस बार सारनाथ घूम लेता हूँ, गंगा आरती को अगली बार के लिए छोड़ दिया ! वैसे, सारनाथ में घूमने के लिए काफ़ी जगहें है जैसे चौखंडी स्तूप, जापानी मंदिर, नेपाली मंदिर, मुलगंध कुटी विहार, चाइना मंदिर और भी बहुत कुछ ! सारनाथ के बारे में मैने अपने घुमक्कड़ मित्रों और इंटरनेट के माध्यम से काफ़ी कुछ पढ़ रखा था इसलिए यहाँ घूमने का बड़ा मन था ! मैने सोचा कि इस यात्रा के दौरान जितना घूम सकूँगा घूमूंगा और जो रह जाएगा उसे अगली बार के लिए छोड़ दूँगा, वैसे भी वाराणसी में ससुराल होने के कारण साल में यहाँ एक बार तो आना होता ही है ! इस यात्रा के लिए मेरा नई दिल्ली से मंडुवाडीह तक का शिवगंगा एक्सप्रेस से आरक्षण था, ये गाड़ी इस लाइन पर चलने वाली सबसे बढ़िया गाड़ियों में गिनी जाती है ! शाम 6:55 पर चलकर सुबह 7 बजे मंडुवाडीह उतार देती है, और फिर यहाँ से वाराणसी रह ही कितना जाता है, स्टेशन के बाहर निकलते ही आपको आसानी से वाराणसी कैंट जाने के लिए ऑटो मिल जाएँगे !

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का एक दृश्य