Saturday, March 19, 2016

जयपुर का सिटी पैलेस और हवा महल (City Palace and Hawa Mahal of Jaipur)

शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

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खाना खा-पीकर रात को होटल पहुँचने के बाद आराम करने के लिए अपने कमरे में चल दिए, मन में शंका तो थी कि कहीं पुलिस वाले ने गाड़ी का नंबर ना नोट कर लिया हो ! लेकिन जैसे-2 नींद आने लगी, ये शंका भी चली गई, सुबह नींद खुली तो सबसे पहले होटल के बाहर जाकर अपनी गाड़ी देखी ! भाई, राजस्थान पुलिस अकादमी के सामने होटल था, क्या पता ढूँढते-2 यहाँ पहुँच ही गए हो ! खैर, गाड़ी अपनी जगह पर खड़ी थी, वापिस अपने कमरे में जाकर नहाने-धोने में लग गए, आज हमें जयपुर का सिटी पैलेस और हवा महल जो घूमना था ! पिछले दो दिनों में मैं जयपुर के काफ़ी रास्तों पर घूम चुका था इसलिए मुझे अब यहाँ के रास्तों का थोड़ा-बहुत अंदाज़ा हो गया था ! तैयार होने के बाद हल्का नाश्ता करके हम अपनी गाड़ी लेकर सिटी पैलेस की ओर चल दिए ! आज भी हम उसी मार्ग से जाने वाले थे जिससे कल आमेर गए थे ! आज इस होटल में भी हमारा आख़िरी दिन था इसलिए सिटी पैलेस के लिए निकलने से पहले ही होटल वाले का भुगतान भी कर दिया ! सारा सामान गाड़ी में रखकर सवा नौ बजे तक हम सिटी पैलेस के लिए निकल लिए, हमारा विचार घूमने के बाद दोपहर बाद या शाम को नए होटल में जाने का था ! जयपुर में हम घूमने वाली जगहों के हिसाब से अलग-2 होटलों में रुके थे, बाबा हवेली जयपुर में स्थित तीनों किलों से पास पड़ता है, जबकि हमारा दूसरा होटल जयपुर के मध्य में था जहाँ से अन्य दर्शनीय स्थल पास में थे !


जयपुर का सिटी पैलेस

Wednesday, March 16, 2016

नाहरगढ दुर्ग और जयपुर के बाज़ार (Nahargarh Fort and Jaipur Markets)

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

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ज़यगढ़ का किला देखकर जब हम बाहर निकले तो नाहरगढ़ जाने से पहले किले के बाहर खड़े एक फेरी वाले से राजस्थानी मटका कुल्फी का स्वाद चखा ! यहाँ से नाहरगढ़ का किला लगभग 7 किलोमीटर दूर है और किले तक जाने का रास्ता खूबसूरत दृश्यों से भरा पड़ा है ! कुल्फी ख़त्म करने के साथ ही हमने नाहरगढ़ के लिए प्रस्थान कर दिया, इस पहाड़ी मार्ग से जाते हुए दोनों ओर जंगल है ! सड़क के किनारे फैले इन जंगलों में थोड़ी अंदर जाने पर जंगली जानवर भी मिल जाते है, रात के समय तो ये जानवर इस मार्ग पर भी आ जाते है ! इसलिए रात में इस मार्ग पर आवागमन कम ही रहता है, स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार अंधेरा होने पर इस मार्ग पर लूट-पाट भी हो जाती है ! इस मार्ग पर चलते हुए रास्ते में एक जगह हमें सड़क के किनारे कई मोर दिखाई दिए, इनकी फोटो खींचने के लिए मैने अपनी गाड़ी सड़क के किनारे खड़ी कर दी ! लेकिन मोर भी कहाँ रुकने वाले थे, गाड़ी रुकते ही वो भी जॅंगल में भाग गए, बड़ी मुश्किल से एक-दो मोर कैमरे की पकड़ में आए ! थोड़ी देर यहाँ रुकने के बाद हम फिर से आगे बढ़ गए, वैसे फोटोग्राफी के लिए ये बढ़िया जगह है !

नाहरगढ़ किले से दिखाई देता जयपुर शहर

Sunday, March 13, 2016

जयगढ़ किले में बिताया एक दिन (A Day in Jaigarh Fort, Jaipur)

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

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मेरी इस यात्रा में अब तक आप बिरला मंदिर और आमेर का किला देख चुके है, किले से बाहर आकर हम अपनी गाड़ी में सवार हुए और गाँव की गलियों से घूमते हुए आमेर से जयपुर जाने वाले मार्ग पर पहुँच गए ! जैसे-2 दिन चढ़ता जा रहा था गर्मी भी बढ़ती जा रही थी, फ़रवरी के महीने में ही ये हाल है तो आने वाले समय में जयपुर की क्या हालत होगी? इस गर्मी के बीच भी यहाँ आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ ही रही थी, ये जयपुर के प्रति लोगों का प्यार ही है जो किसी मौसम की भी परवाह नहीं करता ! हम अभी आमेर से जयपुर जाने वाले मार्ग पर थोड़ी दूर ही चले थे कि सड़क के बाईं ओर हमें एक रेस्टोरेंट दिखाई दिया ! रेस्टोरेंट देखते ही अपने आप भूख भी लगने लगी, फिर क्या था? सड़क किनारे गाड़ी खड़ी करके रेस्टोरेंट में पेट पूजा करने चल दिए ! ऑर्डर देने के 15 मिनट बाद ही हमारे लिए खाना परोस दिया गया, यहाँ का खाना स्वादिष्ट था इसलिए सबने पेट भरकर खाया ! रेस्टोरेंट से निकलते समय हमने माज़ा और पानी की बोतलें भी ले ली, जयपुर जाने वाले मार्ग पर कुछ दूर जाने के बाद हम अपनी दाईं ओर मुड़ गए ! ये रास्ता थोड़ी आगे जाकर फिर से दो हिस्सों में बँट जाता है, जिसमें से दाएँ जाने वाला मार्ग जयगढ़ और बाएँ जाने वाला रास्ता नाहरगढ़ किले तक जाता है !

जयगढ़ किले की दीवार 

Thursday, March 10, 2016

आमेर के किले में बिताए कुछ पल (A Memorable Day in Amer Fort, Jaipur)

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

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अगले दिन सुबह जब सोकर उठे तो मैं शौर्य को लेकर अपने होटल की छत पर सुबह के नज़ारों का आनंद लेने पहुँच गया ! होटल की छत से दूर पहाड़ी पर जयगढ़ का किला दिखाई दे रहा था, लेकिन हल्की-2 धुन्ध होने के कारण किला साफ नहीं दिखाई दिया ! थोड़ी देर बाद हम दोनों वापिस अपने कमरे में आ गए और घूमने जाने के लिए तैयार होने लगे ! कल शाम को तो सिर्फ़ बिरला मंदिर ही देख पाए थे, इसलिए आज ज़्यादा से ज़्यादा जगहें देखना चाहते थे, कम से कम तीनों किलों को देखने का विचार था ! जयपुर में ही मेरा एक मित्र मोहित चौहान भी रहता है, कल शाम को जब उस से फोन पर बात की तो वो भी हमारे साथ घूमने जाने के लिए तैयार हो गया ! तय हुआ कि सुबह 9 बजे वो हमारे होटल आ जाएगा और फिर हम सब एक साथ घूमने निकल पड़ेंगे ! हम साढ़े आठ बजे तक तैयार हो चुके थे, नाश्ते के लिए जाने से पहले मोहित को फोन किया तो पता चला कि वो अभी सोकर उठा है और तैयार होकर यहाँ आने में ही उसे एक घंटे का समय लग जाएगा ! फोन रखने के बाद हम नाश्ता करने के लिए अपने होटल के डाइनिंग हाल में आ गए, आलू-प्याज के पराठे से सुबह का नाश्ता किया !

आमेर पैलेस का दीवान-ए-आम (Diwan-E-Aam of Amer Palace)

Monday, March 7, 2016

दिल्ली से जयपुर की सड़क यात्रा (A Road Trip to Jaipur)

वीरवार, 25 फ़रवरी 2016

तुंगनाथ की यात्रा से वापिस आने के बाद ज़्यादा दिन नहीं हुए थी कि तभी अगली यात्रा पर जाने का विचार बनने लगा ! चोटिल पैर ठीक होने में 10-12 दिन का समय लगा, इस दौरान दिमाग़ में यही चलता रहा कि अगली यात्रा कहाँ की होगी ! इस बार परिवार संग यात्रा पर जाने का मन था, वैसे भी फ़रवरी में शादी की सालगिरह आ रही थी इसी बहाने अगर कहीं घूमने को मिल जाए तो क्या कहने ? पारिवारिक यात्रा पर जाने की योजना पर मैने काम करना शुरू कर दिया, काफ़ी खोज-बीन के बाद उत्तराखंड में स्थित कौसानी जाने का विचार बना ! इसलिए कौसानी और इसके आस-पास की जगहों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी ! इस यात्रा पर मैं नैनीताल से होता हुए रानीखेत, कौसानी, और मुक्तेश्वर जाने वाला था, जैसे-2 यात्रा का दिन पास आने लगा, एक मित्र ने सलाह दी कि छोटे बच्चों के साथ ठंड के मौसम में पहाड़ी पर जाना ठीक नहीं रहेगा ! इस बात से प्रभावित होकर मुझे भी लगा कि घूमने के चक्कर में परिवार की सेहत से समझौता ठीक नहीं है ! इसलिए मैने अब जयपुर जाने का विचार बना लिया और आनन-फानन में ही जयपुर में रुकने के लिए एक होटल में कमरा भी आरक्षित करवा लिया !

जयपुर का बिरला मंदिर (Birla Mandir in Jaipur)

Thursday, March 3, 2016

ऊखीमठ से रुद्रप्रयाग होते हुए दिल्ली वापसी (Ukimath to New Delhi via Rudrprayag)

सोमवार, 25 जनवरी 2016

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देवरिया ताल से वापिस आने के बाद हमने होटल हिमांशु में दोपहर का भोजन किया और होटल वाले से ही कह दिया कि हमारे ऋषिकेश जाने के लिए एक टैक्सी का इंतज़ाम करवा दे ! उसने अपने एक परिचित को फोन लगाया तो वो सिर्फ़ ऊखीमठ तक जाने के लिए ही तैयार हुआ ! सारी गाँव से ऊखीमठ जाने के लिए 500 रुपए में सौदा तय हुआ, सारा सामान लेकर जब हम ऊखीमठ के लिए रवाना हुए तो पौने पाँच बजने वाले थे ! सारी से ऊखीमठ के 15 किलोमीटर के इस सफ़र को तय करने में हमें पौने घंटे लग गए ! ऊखीमठ के मुख्य चौराहे पर जब साढ़े पाँच बजे जीप से उतरे तो यहाँ कई जीप वाले खड़े थे, हम यहाँ से ऋषिकेश या रुद्रप्रयाग जाने के लिए कोई जीप या बस ढूँढने लगे ! पूछताछ पर पता चला कि ऋषिकेश के लिए यहाँ से सुबह 6 बजे एक बस चलती है, फिर पूरे दिन यहाँ से ऋषिकेश के लिए कुछ नहीं मिलता !दिन में यहाँ से रुद्रप्रयाग के लिए शैयर्ड जीपें चलती है लेकिन इस समय यहाँ से शैयर्ड में कुछ भी नहीं मिलने वाला ! इसलिए अगर इस समय हमें रुद्रप्रयाग या ऋषिकेश जाना है तो टैक्सी बुक करवानी पड़ेगी ! 2-3 जीप वालों से जब किराए का पता किया तो ऋषिकेश के लिए 5 हज़ार और रुद्रप्रयाग के लिए 2200 रुपए माँग रहे थे ! काफ़ी मोल-भाव करके एक टैक्सी वाला 1500 रुपए में रुद्रप्रयाग जाने के लिए तैयार हुआ !


रुद्रप्रयाग में अलकनंदा-मंदाकिनी का संगम (Alaknanda and Mandakini in Rudrprayag)