Wednesday, December 30, 2015

श्रीकृष्ण जन्मभूमि और द्वारकाधीश मंदिर (Shri Krishna Janmbhoomi and Dwarkadheesh Temple, Mathura)

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बिरला मंदिर के बाहर पेट-पूजा करते हुए सोच रहा था कि अभी पागल बाबा का मंदिर तो खुला नहीं होगा ! इसलिए क्यों ना पहले श्री कृष्ण जन्मभूमि और द्वारकाधीश मंदिर देख लेता हूँ फिर रंगनाथ मंदिर जाते हुए रास्ते में थोड़ी देर रुककर पागल बाबा का मंदिर भी देख लूँगा ! ऐसा करने से मुझे दो फ़ायदे थे, एक तो कृष्ण जन्मभूमि देखने के लिए मुझे दोबारा वापिस नहीं जाना पड़ता क्योंकि ये दोनों स्थान बाकी मंदिरों से हटकर मथुरा की ओर थे ! दूसरा रंगनाथ मंदिर से वापसी करते हुए अगर समय बचा तो माँ वैष्णो देवी के मंदिर के दर्शन भी हो जाएँगे ! पेट-पूजा करके अपनी मोटरसाइकल उठाई और मथुरा-वृंदावन मार्ग पर मथुरा की तरफ चल दिया ! इस मार्ग पर डेढ़ किलोमीटर चलकर एक तिराहा आता है, कृष्ण जन्मभूमि जाने के लिए आपको इस तिराहे से दाएँ मुड़कर डेढ़ किलोमीटर सीधे चलना होता है, मैं इसी मार्ग पर हो लिया ! फिर एक पुलिस चौकी से आगे बढ़ते ही एक तिराहे से दाएँ मुड़कर मैं एक रिहायशी इलाक़े में पहुँच गया, यहाँ से बमुश्किल 5 मिनट की दूरी पर ही कृष्ण जन्मभूमि है !

krishna janmbhoomi
कृष्ण जन्मभूमि का प्रवेश द्वार (Shri Krishna Janmbhoomi Entrance)

Sunday, December 27, 2015

वृंदावन का खूबसूरत बिरला मंदिर (Birla Temple of Vrindavan)

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मेरे पिछले लेखों के माध्यम से आपने प्रेम मंदिर और जयपुर मंदिर के दर्शन किए थे ! जयपुर मंदिर से निकलकर मैं थोड़ी देर में ही मथुरा-वृंदावन मार्ग पर पहुँच गया, ये मार्ग मंदिर से 60 मीटर की दूरी पर है और मंदिर के बाहरी द्वार से दिखाई भी देता है ! इस मार्ग पर पहुँचते ही मैं अपनी दाईं ओर मुड़कर मथुरा की ओर चल दिया, बाईं ओर जाने वाला मार्ग वृंदावन जाता है इसी मार्ग पर रंगनाथ मंदिर भी है ! मथुरा की ओर जाने वाले मार्ग पर थोड़ी दूर जाने पर सड़क के बार्ईं तरफ ही पागल बाबा का मंदिर है, ऊँचा होने के कारण काफ़ी दूर से ही ये मंदिर दिखाई देता है ! फिर इसी मार्ग पर और आगे बढ़ने पर सड़क के दाईं ओर ही बिरला मंदिर भी आता है ! प्रेम मंदिर से आने पर आपको पुल से उतरकर तिराहे से दाएँ मुड़ना होता है, इस तिराहे से बिरला मंदिर की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है जबकि जयपुर मंदिर यहाँ से 6 किलोमीटर दूर है ! 

temple entrance
मंदिर का प्रवेश द्वार (Main Entrance of Birla Temple)

Thursday, December 24, 2015

वृंदावन के जयपुर मंदिर की एक झलक (A View of Jaipur Temple in Vrindavan)

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मेरे पिछले लेख के माध्यम से आपने प्रेम मंदिर के दर्शन किए, प्रेम मंदिर से निकलने के बाद मैं जयपुर मंदिर जाने के लिए चल दिया ! वैसे तो 2-3 महीने में मेरा एक चक्कर वृंदावन का लग ही जाता है, और हर बार वृंदावन आने पर कई बार मैं इस मंदिर के सामने से गुजरा भी हूँ, पर कभी इस मंदिर में जाने का अवसर नहीं मिला ! हर बार कुछ ना कुछ बहाना रहता ही है इन मंदिरों को ना देख पाने का ! आप लोगों की जानकारी के लिए बता दूँ कि जयपुर मंदिर मथुरा-वृंदावन मार्ग पर मथुरा से 10 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क के बाईं ओर स्थित है ! मुख्य सड़क से बाईं ओर जाने वाले एक मार्ग पर 60 मीटर के आस-पास चलने पर आप इस मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुँच जाओगे ! मंदिर तक जाने के लिए पक्का मार्ग बना है, और गाड़ी खड़ी करने के लिए भी यहाँ पर्याप्त व्यवस्था है ! मंदिर के सामने ही एक खुला मैदान है जहाँ हमेशा एक-दो बसें खड़ी ही रहती है ! प्रेम मंदिर से इस मंदिर की दूरी लगभग 3 किलोमीटर है और मुझे ये दूरी तय करने में 8 से 10 मिनट का समय लगा ! मंदिर के खुलने का समय सुबह 6 बजे से रात को 8 बजे तक है !

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जयपुर मंदिर वृंदावन (Main Entrance of Jaipur Temple)

Monday, December 21, 2015

वृंदावन के प्रेम मंदिर में बिताए कुछ पल (An Hour Spent in Prem Mandir, Vrindavan)

एक रविवार सुबह अपनी मोटरसाइकल उठाई और अकेला ही मथुरा घूमने के लिए चल दिया ! दरअसल, शनिवार को एक दो मित्रों से इस यात्रा पर साथ चलने के लिए पूछा भी था पर कोई भी साथ चलने के लिए सहमत नहीं हुआ इसलिए मैने किसी पर ज़्यादा ज़ोर भी नहीं दिया ! सुबह 8 बजे जब घर से निकला तो हल्की-2 धूप थी, आधा नवंबर बीत जाने के कारण मौसम में हल्की-2 ठंडक हो गई थी, फिर भी उतनी ठंड नही थी जितनी होनी चाहिए ! अपने शहर से बाहर निकलकर जैसे ही खाली सड़क मिली, तो मोटरसाइकल की रफ़्तार अपने आप बढ़ने लगी ! वैसे तो पूरे रास्ते मैने 65 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार बनाए रखी, फिर भी जहाँ कहीं भी बहुत अच्छी सड़क मिल जाती, तो रफ़्तार की सुई 70 को भी छू ले रही थी ! पलवल से मथुरा जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 2 है जिसका अभी विस्तारीकरण चल रहा है, आने वाले समय मैं ये 4 लाइन का राजमार्ग बढ़कर 6 लाइन का बन जाएगा ! पलवल से मथुरा तक विस्तारीकरण का अधिकतर काम तो पूरा हो गया है, बीच-2 में कुछ ऊपरगामी पुल है जो निर्माणाधीन है !

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प्रवेश द्वार से दिखाई देता प्रेम मंदिर (A view of Prem Mandir)

Thursday, December 17, 2015

श्रीनगर से दिल्ली वापसी (Return Journey to Delhi)

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वापसी का सफ़र भी श्रीनगर जाने से कम रोमांचक नहीं था, हुआ कुछ यूँ कि वापसी में भी मेरी और हितेश की अलग-2 विमानों में टिकटें थी ! हितेश का विमान सुबह 10:30 बजे उड़ान भरने वाला था जबकि मेरा विमान दोपहर पौने चार बजे उड़ान भर रहा था ! दोनों विमानों के उड़ान समय में 5 घंटे का अंतर होने के कारण हम दोनों का एक साथ हवाई अड्डे पर जाना मुमकिन नहीं था ! 5 घंटे हवाई अड्डे पर बैठ कर इंतजार करने से अच्छा है कि यहाँ होटल में ही रुककर आराम किया जाए ! एक-दो घंटो की बात होती तो अलग बात थी, पर 5 घंटे बहुत लंबा समय होता है ! अंत में ये निश्चय किया गया कि हितेश सुबह जल्दी उठकर हवाई अड्डे के लिए निकल जाएगा और मैं आराम से दोपहर को यहाँ से चलूँगा ! योजना के मुताबिक हितेश समय से सोकर उठा और सुबह साढ़े सात बजे तक नहा-धोकर तैयार हो गया ! नाश्ता करने बैठता तो देर हो जाती, इसलिए खाने-पीने का थोड़ा सामान उसने अपने साथ रख लिया !

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श्रीनगर की कुछ यादें - डल झील (Dal Lake in Srinagar)

Monday, December 14, 2015

श्रीनगर स्थानीय भ्रमण (Local Sight Seen of Srinagar)

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आज सुबह सोकर उठे तो ब्रश करके नहाने से पहले अपने होटल से बाहर निकलकर नाव की ओर चल दिए ! यहाँ से सूर्योदय का शानदार नज़ारा दिखाई दे रहा था, हमने थोड़ी देर यहीं बैठकर कुछ फोटो खींचे और डल झील में जाती हुई नावों को देखते रहे ! इस समय नावों में बैठकर कुछ बच्चे अपने स्कूल जा रहे थे तो कुछ अन्य नाव वाले अपनी दुकानदारी सजाने में लगे थे ! मैं अपने पिछले लेख में आपको बता चुका हूँ कि यहाँ डल झील में फेरी वाले नावों के माध्यम से ही ज़रूरत का सारा सामान बेचते रहते है ! इस झील में भाँति-2 की नावें थी, छोटी-बड़ी, रंग-बिरंगी नावों को डल झील में तैरते हुए देखना बहुत अच्छा लगता है, कभी-2 तो मन करता है घंटो बैठ कर इन नावों को ऐसे ही देखते रहो ! फिर हमने आवाज़ लगाकर बिलाल को बुलाया और उससे घाट के उस पार चलने को कहा ! इतना सुनते ही वो अपनी नाव का चप्पू लेकर आ गया और हमें लेकर घाट की ओर चल दिया !

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घाट के पास लिया एक चित्र

Friday, December 11, 2015

सेब के बगीचों में बिताए कुछ पल (An Hour in Apple Orchard)

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बेताब-वैली तो हम दोनों जा नहीं पाए, लेकिन पहाड़ी पर चढ़ना और फिर पहलगाम में इस खड्ड के किनारे पानी में पैर डालकर बैठना अपने आप में एक सुखद अनुभव था ! चलिए बेताब वैली इस बार ना तो अगली बार ही सही, हमारे पास कोई तो बहाना होना चाहिए यहाँ दोबारा आने के लिए ! वैसे पहलगाम आते हुए हम जिस मार्ग से आए थे वापसी में उस मार्ग से नहीं गए ! हमारा ड्राइवर बहुत अनुभवी था और यहाँ पिछले कई सालों से टैक्सी चला रहा है, उसने बताया कि यात्रा सीजन में वो यहाँ यात्रियों को लेकर अक्सर आता है ! हर बार वो आता एक मार्ग से है और जाता दूसरे मार्ग से है ताकि सभी यात्री इस यात्रा के दौरान दोनों रास्तों के नज़ारों का आनंद ले सके ! हमने कहा सही कह रहे हो, आख़िर आदमी यहाँ घूमने ही आया है तो क्यों ना दोनों रास्तो का आनंद लिया जाए ! वापिस आते हुए थोड़ी दूर तक तो हम उसी मार्ग पर चलते रहे जिस से सुबह यहाँ आए थे, फिर रास्ते में एक तिराहे से दाएँ मुड़कर एक पहाड़ी के साथ-2 हो लिए !

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फल से लदे सेब के पेड़ (Apple Tree in Srinagar)

Tuesday, December 8, 2015

श्रीनगर से पहलगाम की सड़क यात्रा (A Road Trip to Pehalgam)

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आज श्रीनगर में हमारी पहली सुबह थी, रुकने के लिए हितेश ने जिस हाउसबोट में हमारे लिए कमरा आरक्षित करवाया था सुख-सुविधाओं और साफ-सफाई के लिहाज से हमें वो अच्छा नहीं लगा ! हालाँकि, हम चाहते तो किसी दूसरे हाउसबोट में भी जा सकते थे पर यहाँ हम अग्रिम भुगतान कर चुके थे और दूसरे होटल में जाने का मतलब था पैसे की बर्बादी ! इस हाउसबोट में हमने दो दिन रुकने के लिए कमरा आरक्षित करवाया था, इसलिए हमारे पास यहाँ रुकने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था ! एक दिन तो हम यहाँ गुज़ार ही चुके थे, फिर आज दिनभर हम बाहर ही गुजारने वाले थे इसलिए बस आज की रात ही इस हाउसबोट में काटनी थी ! अगर मैं ये यात्रा परिवार संग कर रहा होता तो पहली बात तो रुकने के लिए मैं ऐसे हाउसबोट में कमरा आरक्षित करवाता ही नहीं ! अगर ग़लती से करवा भी लेता, तो यहाँ के हालात देख कर निश्चित तौर पर मैं कोई दूसरा हाउसबोट या होटल ढूँढ लेता ! हितेश ने शायद इस हाउसबोट के बारे में ज़्यादा जाँच-पड़ताल नहीं की थी, वैसे देखा जाए तो फ़र्क तो पड़ता ही है अकेले या मित्रों के साथ और परिवार के साथ यात्रा करने में !

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हाउसबोट से दिखाई देता सुबह का एक दृश्य (A view from Houseboat, Dal Lake, Srinagar)

Friday, December 4, 2015

श्रीनगर हवाई अड्डे से डल झील की बस यात्रा (A Road Trip to Dal Lake)

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अब तक आपने पढ़ा कि किस तरह हम दोनों (मैं और हितेश) अलग-2 विमानों से अलग-2 समय अंतराल पर श्रीनगर पहुँचे ! वैसे हितेश तो 2 बजे से पहले ही यहाँ पहुँच गया था पर वो यहीं हवाई अड्डे पर रुककर मेरे आने की प्रतीक्षा कर रहा था ताकि आगे का सफ़र हम दोनों साथ में तय कर सके ! एयरपोर्ट से बाहर आते हुए मुझे हितेश भी वहीं खड़ा मिला, यहाँ से हम दोनों साथ हो लिए ! फिर हम दोनों मेरा बैग लेने एयरपोर्ट के उस हिस्से में आ गए जहाँ विमान से उतारकर यात्रियों का सामान लाया जाता है ! यहाँ एक अंडाकार आकृति की बेल्ट घूमती रहती है जिस पर यात्रियों का सारा सामान डाल दिया जाता है यात्री इस बेल्ट के चारों तरफ खड़े रहते है और पहचान कर अपना-2 सामान ले लेते है ! थोड़ी देर इंतजार के बाद मेरा बैग भी आ गया, जिसे लेकर हम दोनों एयरपोर्ट से बाहर की ओर चल दिए ! श्रीनगर अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, इसके बावजूद भी यहाँ बहुत ज़्यादा विमानों की आवाजाही नहीं है, फिर भी सुरक्षा कारणों से यहाँ हमेशा बहुत भीड़ रहती है !

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डल झील से दिखाई देता एक दृश्य (A view from Dal Lake, Srinagar)

Tuesday, December 1, 2015

दिल्ली से श्रीनगर की विमान यात्रा (Flying Delhi to Srinagar)

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पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम दोनों ने अपने घर से दिल्ली एयरपोर्ट तक का सफ़र तय किया ! यहाँ प्रतीक्षालय में बैठे-2 जब बोरियत होने लगी तो सोचा कि क्यों ना समय का सदुपयोग करते हुए एयरपोर्ट परिसर में ही थोड़ा घूम लिया जाए ! अभी 11 बज रहे थे और बोर्डिंग पास के अनुसार हितेश का बोर्डिंग समय 12 बजे का था, मतलब अभी भी हमारे पास एक घंटा बचा था ! हम दोनों अपना-2 बैग बोर्डिंग पास लेते समय जमा करवा ही चुके थे इसलिए अब हमारे पास सिर्फ़ कैबिन बैग ही थे, जिन्हें लेकर घूमने में कोई परेशानी नहीं थी ! इसलिए हम दोनों प्रतीक्षालय से उठकर एयरपोर्ट परिसर में टहलने लगे, घूमते हुए जब हमने वहाँ मौजूद एक स्नैक्स पॉइंट से पता किया तो वहाँ चाय-कॉफी के अलावा ज़्यादातर सामान पहले का बनाकर रखा हुआ था, जिसमें पनीर पेटीज, बर्गर, केक, और कुछ अन्य वस्तुएँ थी ! वैसे भूख तो लग रही थी, पर वहाँ रखा ज़्यादातर सामान ताज़ा नहीं लग रहा था ! इस बीच हितेश ने सुझाव दिया कि चल यार बाहर चलकर कुछ खा लेते है, वैसे भी अभी तो हमारे पास काफ़ी समय है !

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दिल्ली हवाई अड्डे का एक चित्र (A view from Delhi Airport)