Tuesday, June 29, 2021

अकबर का मकबरा - सिकंदरा (Tomb of Akbar, Sikandara)

रविवार, 01 अप्रैल 2018 

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यात्रा के पिछले लेख में आप कीठम झील का भ्रमण कर चुके है, अब आगे, झील का भ्रमण करके बाहर आया तो मैं आगरा जाने वाले मार्ग पर चल दिया ! मेरा अगला पड़ाव आगरा के सिकंदरा में स्थित अकबर का मकबरा था, सूर सरोवर पक्षी विहार से सिकंदरा की दूरी महज 12 किलोमीटर है जिसे तय करने में मुझे 15-20 मिनट का समय ही लगा ! मुख्य मार्ग पर चलते हुए हमारे बाईं ओर सड़क किनारे स्थित इस मकबरे का प्रवेश द्वार दिखाई देने लगता है, थोड़ा आगे बढ़ने पर पार्किंग स्टैंड है, बगल में ही टिकट घर भी है ! सिकंदरा आगरा के व्यस्त इलाकों में आता है, वैसे तो यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए पुलिसकर्मी यहाँ हमेशा तैनात रहते है लेकिन फिर भी कभी-2 यहाँ भयंकर जाम लग जाता है ! अपनी स्कूटी पार्किंग में खड़ी करके मैंने टिकट खिड़की से जाकर मकबरे स्थल पर जाने के लिए एक प्रवेश टिकट लिया ! रविवार होने के बावजूद ना तो आज पार्किंग में भीड़ थी और ना ही टिकट खिड़की पर, जहां पार्किंग में गिनती की गाड़ियां दिखाई दे रही थी वहीँ टिकट खिड़की पर भी इक्का-दुक्का लोग ही खड़े थे ! मकबरे स्थल पर जाने का प्रवेश शुल्क 10 रुपए है और इतना ही शुल्क मुझे पार्किंग में स्कूटी के लिए देना पड़ा ! टिकट खिड़की से हटा तो दोपहर के साढ़े ग्यारह बज रहे थे, धूप तेज थी इसलिए मैं तेजी से प्रवेश द्वार की ओर चल दिया ! टिकट घर से मकबरे के प्रवेश द्वार तक जाने के लिए पक्का मार्ग बना है जिसके दोनों तरफ बड़े-2 कई मैदान है, जहां रंग-बिरंगे फूलों के अलावा अन्य पेड़-पौधे भी लगाए गए है !

सड़क किनारे से दिखाई देता अकबर के मकबरे का प्रवेश द्वार

Friday, June 25, 2021

आगरा का सूर सरोवर पक्षी विहार और कीठम झील (Soor Sarovar Bird Sanctuary and Keetham Lake, Agra)

रविवार, 01 अप्रैल 2018 

आज के इस लेख में मैं आपको मथुरा-आगरा के बीच में पड़ने वाले सूर सरोवर पक्षी विहार और कीठम झील की सैर करवाऊँगा, मुझे इस स्थान की जानकारी आगरा में रहने वाले मेरे मित्र रितेश गुप्ता से मिली थी ! 2-3 साल पहले आगरा से वापिस आते हुए एक बार इस सरोवर के बगल में स्थित डॉलफिन वाटर पार्क में हम कई घंटे रुके भी थे लेकिन जानकारी के अभाव में इस झील को देखना नसीब नहीं हो पाया था ! इस बात का मलाल काफी समय तक रहा इसलिए जब इस साल यहाँ जाने का मौका मिला तो मैं किसी भी हाल में ये मौका हाथ से नहीं देना जाने चाहता था ! बात 1 अप्रैल 2018 की है, गर्मी की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन फिर भी सुबह के मौसम में अभी इतनी ठंडक थी कि कहीं घूमने जाया जा सके ! रविवार का दिन होने के कारण मैं घर पर ही था, मौसम भी अच्छा था इसलिए आज मेरे पास इस झील को देखने जाने का एक सुनहरा मौका था ! नई स्कूटी लिए अभी महीना भी नहीं हुआ था, और पिछले कई दिनों से मन में विचार चल रहा था कि स्कूटी लेकर किसी सड़क यात्रा पर चला जाए, एक ऐसी यात्रा जिसमें सुबह घर से निकलकर दिनभर घूमकर शाम तक वापिस आया जा सके ! इसी बहाने स्कूटी की घुमक्कड़ी तो हो ही जाएगी, दुपहिया चलाने की अपनी शारीरिक क्षमता का आकलन भी हो जायेगा !

आगरा स्थित कीठम झील का एक दृश्य

Monday, June 21, 2021

रामनगर का जिम कॉर्बेट संग्रहालय (A Visit to Corbett Museum)

रविवार, 04 मार्च 2018 

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रानीखेत से वापिस आते हुए हमें कालाढूँगी में स्थित जिम कॉर्बेट संग्रहालय जाने का अवसर मिला, दरअसल हुआ कुछ यूं कि रानीखेत जाते समय तो होली के अवसर पर ये संग्रहालय बंद था इसलिए हम इसे देख नहीं पाए थे ! सोचा था वापसी में इसे देखते हुए निकल जाएंगे, लेकिन वापिस आते हुए जब हमने भुवाली से हल्द्वानी वाला रास्ता ले लिया तो इस संग्रहालय को देखने की रही सही उम्मीद भी जाती रही ! फिर हल्द्वानी से बाहर निकलते हुए रुद्रपुर की जगह जब हम अनजाने में कालाढूँगी वाले रास्ते पर पहुंचे तो इस संग्रहालय को देखने की उम्मीद एक बार फिर से जाग उठी ! कहते है ना कि किस्मत में जो होना होता है उसके लिए संयोग बन ही जाते है, वैसे यात्रा के पिछले लेख में हल्द्वानी से संग्रहालय पहुँचने का वर्णन मैं कर चुका हूँ ! टिकट खिड़की पर जाकर मैंने 10 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से 2 प्रवेश टिकट लिए, झोपड़ी की आकृति में बना ये टिकट घर बहुत ही सुंदर लगता है, टिकट घर के बगल में ही प्रवेश द्वार है, जहां से हम संग्रहालय परिसर में दाखिल हुए ! अंदर जाने पर दाईं ओर छोटी हल्द्वानी हेरिटेज विलेज का बोर्ड लगा है, रास्ता भी बगल से ही जाता है, हालांकि, जानकारी के अभाव में हम इस विलेज का भ्रमण नहीं कर पाए ! थोड़ा आगे बढ़ने पर परिसर में एक किनारे शेड से ढकी जिम कॉर्बेट की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसके नीचे एक बोर्ड पर उनके जीवनकाल से संबंधित जानकारी दी गई है !

संग्रहालय में लगी जिम कॉर्बेट की प्रतिमा 

Friday, June 18, 2021

रानीखेत से वापसी का सफर (Road Trip from Ranikhet to Delhi)

रविवार, 04 मार्च 2018 

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यात्रा के पिछले लेख में आप हेडाखान मंदिर के दर्शन कर चुके है, अब आगे, रानीखेत से वापसी का सफर भी कम मजेदार नहीं है, वापसी में भी हम कई जगहें घूमते हुए आए ! चलिए, दिन की शुरुआत करते है, सुबह समय से सो कर उठे और फटाफट से तैयार होकर एक बार फिर से झूला देवी मंदिर में दर्शन के लिए निकल पड़े, सोचा वापसी की यात्रा शुरू करने से पहले माता का आशीर्वाद ले लेते है ! ये तो मैं आपको पहले भी बता चुका हूँ कि हमारे रेस्ट हाउस से झूला देवी मंदिर ज्यादा दूर नहीं था, 10 मिनट से भी कम समय लगा और हम मंदिर के सामने खड़े थे, झूला देवी मंदिर से संबंधित जानकारी मैं इस यात्रा के पिछले लेख में दे चुका हूँ ! इस समय यहाँ हमारे सिवा कोई नहीं था, मंदिर के सामने पूजा की दुकानें सजने लगी थी, ऐसी ही एक दुकान से प्रसाद लेकर हम मंदिर परिसर में दाखिल हुए ! मुख्य भवन का द्वार भी हमने ही खोला और फिर तसल्ली से पूजा की, बच्चे एक बार फिर से अपनी मस्ती में लगे रहे, पूजा करके आधे घंटे बाद रेस्ट हाउस पहुंचे ! मंदिर जाते हुए हम रेस्ट हाउस के रसोइया को नाश्ता बनाने के लिए बोल गए थे, जो अब तैयार हो चुका था, इसलिए गाड़ी से निकलकर हम सीधे डाइनिंग हाल में पहुंचे, जहां नाश्ते में पोहे, आलू के पराठे, चाय और दूध तैयार थे ! खाने का स्वाद पहले की तरह लाजवाब था, सबने भरपेट नाश्ता किया और कुछ खाना रास्ते के लिए भी ले लिया, सफर में छोटे बच्चों का पता नहीं कब भूख लग जाए !

भीमताल के नौका स्टैंड का एक दृश्य 

Tuesday, June 15, 2021

रानीखेत का हेड़खान मंदिर (Hedakhan Temple of Ranikhet)

शनिवार, 03 मार्च 2018 

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यात्रा के पिछले लेख में आप कटारमल सूर्य मंदिर का भ्रमण कर चुके है अब आगे, दर्शन के बाद मंदिर से निकलकर हम अपनी गाड़ी की ओर चल दिए ! ढलान होने के कारण वापसी में गाड़ी तक पहुँचने में हमें ज्यादा समय नहीं लगा और ज्यादा परेशानी भी नहीं हुई ! जब हम गाड़ी लेकर यहाँ से चले तो दोपहर के तीन बजकर 20 मिनट हो रहे थे, इस समय भी कुछ लोग मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे ! यहाँ से चलकर कुछ समय बाद हम एक बार फिर से उसी मार्ग पर पहुँच गए, जिससे यहाँ आए थे, हरी-भरी पहाड़ियों के बीच से गुजरता ये मार्ग एक शानदार दृश्य प्रस्तुत कर रहा था ! नतीजन, वापसी में भी हम अल्मोड़ा-रानीखेत मार्ग पर प्राकृतिक नज़ारे देखने के लिए कई जगहें रुके, ये नज़ारे इतने मनमोहक है कि आप ना चाहते हुए भी रुक ही जाते है ! इस तरह रुकते-रुकाते लगभग घंटे भर का सफर करके हम एक बार फिर से रानीखेत क्षेत्र में प्रवेश कर चुके थे ! यहाँ हम रुके बिना ही बाजार से निकलकर चिलियानौला मार्ग पर चल दिए, इसी मार्ग पर लगभग 4-5 किलोमीटर आगे जाकर हेडाखान मंदिर स्थित है ! ये रास्ता भी खूबसूरत नज़ारों से भरा पड़ा है, शुरुआत में तो थोड़ा चहल-पहल दिखती है लेकिन रानीखेत से लगभग 2 किलोमीटर चलकर एक रिहायशी कस्बे को पार करने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की संख्या घटकर इक्का-दुक्का ही रह जाती है ! चारों तरफ सन्नाटा ऐसा कि झींगुर की आवाज भी सुनाई देती है, और सड़क को देखकर लग रहा था कि इसका निर्माण जल्द ही हुआ है !

रानीखेत स्थित हेडाखान मंदिर का एक दृश्य