Friday, July 23, 2021

अरावली में है फरीदाबाद की खूनी झील (Death Valley of Faridabad)

यात्रा के इस लेख में मैं आपको फरीदाबाद की एक ऐसी झील के बारे में बताऊँगा जो अरावली पर्वत के बीच पहाड़ों के अवैध खनन से बनी है ! सैकड़ों फुट गहरी इस झील का पानी नीले रंग का दिखाई देता है और यही आकर्षण युवाओं को अपनी ओर आने को बाध्य करता है ! घूमने-फिरने आने वाले बहुत से लोग नहाने के लिए इस झील में उतरते है और पानी के नीचे खड़ी चट्टानों के बीच या गहरी खाई में फँसकर अपनी जान गंवा देते है ! प्रशासन ने अपने स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए कई मुहिम चलाए, जगह-2 बोर्ड लगाकर लोगों को इधर ना जाने की हिदायतें भी दी, स्थानीय लोग भी लोगों को झील में उतरने से मना करते है लेकिन फिर भी बहुत से युवा इधर जाने से नहीं चूकते ! हालत ये है कि हर 5-6 महीने में इस झील में किसी के डूबकर मरने की खबर अखबार की सुर्खियां बन ही जाती है, हालांकि, इस झील में डूबकर मरने वाले लोगों की संख्या का कोई पुख्ता आंकड़ा तो नहीं है लेकिन फिर भी स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक सैकड़ों लोग इस झील की भेंट चढ़ चुके है, इसलिए इसे डेथ वैली के नाम से भी जाना जाता है ! वैसे अलग-2 घटनाओं में लोगों के डूबने का कारण भी अलग-2 ही रहता है, कोई फोटो खींचते हुए फिसलकर झील में गिर गया तो कोई अपने साथी को बचाने के चक्कर में अपनी जान गंवा बैठा, कुछ लोग नशा करके भी झील में नहाने उतरते है जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है !

death valley faridabad
डेथ वैली का एक नजारा

Monday, July 19, 2021

फरीदाबाद का त्रिवेणी हनुमान मंदिर (Highest Statue of Lord Hanuman)

रविवार, 11 जुलाई 2021

यात्रा के इस लेख में मैं आपको फरीदाबाद के त्रिवेणी हनुमान मंदिर लेकर चलूँगा, वैसे तो फरीदाबाद में घूमने के लिए काफी जगहें है जैसे सूरजकुंड झील, नाहर सिंह पैलेस, रानी की छतरी, नाहर सिंह स्टेडियम, हरि पर्बत, परसोन मंदिर, रोज़ गार्डन, टाउन पार्क, साईं मंदिर, शनि मंदिर, सूरजकुंड क्राफ्ट मेला, डेथ वैली और भी बहुत कुछ, ये लिस्ट बहुत लंबी है ! लेकिन फरीदाबाद-गुड़गाँव मार्ग पर स्थित त्रिवेणी हनुमान मंदिर पिछले कुछ वर्षों में फरीदाबाद के एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल के रूप में तेजी से उभरा है ! हालांकि, यहाँ स्थित ये मंदिर काफी पुराना है लेकिन मंदिर के पास 2 साल पहले बनकर तैयार हुई हनुमान जी की मूर्ति के बाद ये मंदिर लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि हनुमान जी की बैठी हुई मुद्रा में ये भारत की सबसे बड़ी प्रतिमा है इसकी ऊंचाई 108 फुट है ! इस प्रतिमा का निर्माण कार्य 2011 में शुरू हुआ था और 9 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद 2019 में ये बनकर तैयार हुई ! हालांकि, इस बीच कुछ समय निर्माण कार्य बंद भी रहा, लेकिन अंतत जब ये बनकर तैयार हुआ तो फरीदाबाद में आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गया है ! फरीदाबाद के अलावा दिल्ली, गुड़गाँव और अन्य शहरों से भी लोग इसे देखने के लिए आते है ! हालांकि, मैं कई वर्षों तक रोजाना अपने ऑफिस जाते हुए इस मंदिर के सामने से निकला, लेकिन तब निर्माण कार्य चल रहा था तो मेरा यहाँ कभी रुकना नहीं हुआ, और अब मौका मिला तो मैं अपने घर से कई किलोमीटर चलकर सिर्फ ये मंदिर देखने के लिए इस मार्ग पर गया !

Triveni Hanuman Temple
त्रिवेणी हनुमान मंदिर में बनी प्रतिमा

Thursday, July 15, 2021

पूर्वाञ्चल सड़क यात्रा - ग़ाज़ीपुर से दिल्ली (Poorvanchal Road Trip – Ghazipur to Delhi)

शनिवार, 27 मार्च 2021

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यात्रा के इस लेख में हम अपनी पूर्वाञ्चल से वापसी की यात्रा का वर्णन करेंगे, पूर्वाञ्चल जाते हुए हमें जो रास्ते खराब मिले थे वापिस आते हुए हमने उन्हें नहीं लिया ! बल्कि दूसरे वैकल्पिक रास्तों से होकर हमने अपना सफर शुरू किया, इस लेख में आपको इन्हीं रास्तों से संबंधित जानकारी दी जाएगी, ताकि अगर आपको कभी इस क्षेत्र में यात्रा करनी हो तो आप अपने लिए सही रास्ते का चुनाव कर सके ! चलिए, बिना देर किए हम अपनी यात्रा की शुरुआत करते है, ग़ाज़ीपुर में एक सप्ताह बिताने के बाद हमारी वापसी 27 मार्च को थी, वापसी में भी हमने अपना सफर सुबह 5 बजे शुरू किया, यात्रा के लिए सारी तैयारियां पिछली रात को ही कर ली थी ! घर से चले तो अभी अंधेरा ही था, चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था, घर से निकलकर कुछ देर बाद हम मजुई चौराहे से बाएं मुड़कर बहरियाबाद जाने वाले मार्ग पर चल रहे थे, सुबह-2 इक्का-दुक्का लोग सड़क पर टहलते हुए दिखाई दिए ! कल शाम को हम इसी मार्ग से हथियाराम मठ आए थे, बहरियाबाद से रायपुर जाने वाले मार्ग पर कुछ दूर चलकर हम अपने बाएं मुड़ गए, कुछ गांवों से निकलने के बाद हम नौरसिया होते हुए लालगंज-तरवाँ मार्ग पर पहुँच गए, ये मार्ग पलहना होते हुए लालगंज के बाहर मसीरपुर बाजार में जाकर आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पर जाकर मिल जाता है ! बहरियाबाद से नौरसिया के बीच थोड़ा खराब रास्ता मिला, बाकि सब ठीक था ! मसीरपुर बाजार से दाएं मुड़कर हम आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पर 18 किलोमीटर चले, इस मार्ग पर सड़क विस्तारीकरण का काम जोरों पर है जिसके तहत इस राजमार्ग को अब 4 लेन का बनाया जा रहा है, इसलिए जगह-2 निर्माण सामग्री बिखरी हुई है और बीच-2 में रास्ता भी खराब है !

agra lucknow expressway
लखनऊ आगरा एक्स्प्रेस-वे 

Monday, July 12, 2021

ग़ाज़ीपुर का प्रसिद्ध हथियाराम मठ (A Visit to Hathiyaram Math, Ghazipur)

शुक्रवार, 26 मार्च 2021

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यात्रा के इस लेख में आज मैं आपको ग़ाज़ीपुर के प्रसिद्ध हथियाराम मठ लेकर चलूँगा, जो देश के मशहूर सिद्धपीठों में गिना जाता है ! यहाँ जाने की कोई पूर्व योजना नहीं थी बस एकदम से विचार बना, और हम घूमने निकल पड़े, दरअसल हुआ कुछ यूं कि शाम को चाय पीते हुए बातों ही बातों में घर के आस-पास घूमने वाली जगहों की चर्चा हुई, और हथियाराम मठ का जिक्र भी हुआ ! फिर क्या था, चाय खत्म करके गाड़ी उठाई और हथियाराम मठ जाने के लिए निकल पड़े, घर से चले तो शाम के साढ़े पाँच बज रहे थे ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि घर से इस मठ की दूरी लगभग 19 किलोमीटर है, घर से निकलकर सादात-जखनियाँ मार्ग से होते हुए हम मजुई चौराहे पर पहुंचे, यहाँ से बाएं मुड़कर बहरियाबाद के लिए निकल पड़े, दूरी 9 किलोमीटर है लेकिन बढ़िया मार्ग बना है तो 15 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगता, रास्ते में कुछ रिहायशी इलाके भी है लेकिन ये मार्ग अक्सर खाली ही रहता है ! बहरियाबाद एक बड़ा कस्बा है मुख्य मार्ग बाजार से होकर निकलता है इसलिए थोड़ा भीड़-भाड़ मिल जाती है इस बाजार में आपको खान-पान के कई विकल्प मिल जाएंगे, मुख्य मार्ग तिराहे पर जाकर खत्म होता है जहां एक पुलिस चौकी भी है ! यहाँ से बाएं जाने वाला मार्ग सैदपुर को चला जाता है, जो आगे जाकर वाराणसी-गोरखपुर मार्ग में मिल जाता है जबकि यहाँ से दाएं जाने वाला मार्ग रायपुर होता हुआ चिरैयाकोट को चला जाता है ! इसी मार्ग पर बहरियाबाद से 4 किलोमीटर आगे चलकर रायपुर में हथियाराम मठ जाने का रास्ता अलग होता है, रायपुर से इस मठ की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है !

हथियाराम मठ का प्रवेश द्वार

Thursday, July 8, 2021

मार्कन्डेय महादेव मंदिर की यात्रा (A Trip to Markandey Mahadev Temple, Kaithi)

शुक्रवार, 26 मार्च 2021

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यात्रा के इस लेख में मैं आपको बनारस-ग़ाज़ीपुर मार्ग पर कैथी गाँव में स्थित मार्कन्डेय महादेव मंदिर के दर्शन करवाऊँगा, जो पूर्वाञ्चल का एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है ! तो हुआ कुछ यूं कि इस यात्रा पर जाने का विचार कल शाम को ही बन गया था इसलिए आज मैं छुट्टी पर था ! सुबह जल्दी उठकर सभी लोग समय से नहा-धोकर तैयार हुए और 8 बजे हम गाड़ी लेकर कैथी के लिए निकल पड़े, जो यहाँ से लगभग 30 किलोमीटर दूर है ! सादात से सैदपुर तक 2 लेन सड़क है, पहले ये मार्ग काफी संकरा मार्ग था लेकिन अब इसका विस्तार करके इसे थोड़ा चौड़ा कर दिया गया है, इस मार्ग पर यातायात के साधन बहुत ज्यादा नहीं है इसलिए अधिकतर निजी गाड़ियां ही दिखाई देती है ! सैदपुर में आकर ये मार्ग वाराणसी-गोरखपुर राजमार्ग में मिल जाता है, जो एक 4 लेन राजमार्ग है, पहले ये भी 2 लेन मार्ग था लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका विस्तारीकरण किया गया है, जिसके तहत इसे अब 4 लेन किया जा रहा है, अधिकतर जगह काम खत्म हो चुका है लेकिन टोल नाके के अलावा कुछ अन्य जगहों पर अभी काम जारी है ! गोमती नदी को पार करने के बाद कुछ दूर चलकर हम राजमार्ग को छोड़कर एक सहायक मार्ग पर चल दिए, ये मार्ग एक रिहायशी कस्बे से होता हुआ मार्कन्डेय महादेव मंदिर की ओर जाता है ! घर से यहाँ पहुँचने में हमें लगभग आधे घंटे का समय लगा और यहाँ से मंदिर पहुँचने में लगभग 10 मिनट ! मंदिर के पास पार्किंग की व्यवस्था भी है, जहां मात्र 20 रुपए का मामूली शुल्क देकर आप गाड़ी खड़ी कर सकते है ! 

मार्कन्डेय महादेव मंदिर का प्रवेश द्वार

Monday, July 5, 2021

ग़ाज़ीपुर के सादात में स्थानीय भ्रमण (Local Sight Seen in Sadat)

मंगलवार, 23 मार्च 2021

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वैसे देखा जाए तो पर्यटन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के पूर्वाञ्चल में अपार संभावनाएं है यहाँ घूमने-फिरने की जगहें तो बहुत है लेकिन पर्यटकों की श्रेणी में बस कुछ चुनिंदा शहर ही है जिसमें वाराणसी, गोरखपुर और मिर्जापुर प्रमुख है ! पर्यटन की दृष्टि से पूर्वाञ्चल में घूमने के लिए अनेकों स्थान है, लेकिन जानकारी के अभाव और उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा उन स्थानों का सही ढंग से प्रचार-प्रसार ना कर पाना कहीं ना कहीं इसके लिए जिम्मेदार है ! इनमें से कुछ दर्शनीय स्थलों के बारे में हम इस यात्रा सीरीज में आगे बात करेंगे, लेकिन उससे पहले मैं आपको पूर्वाञ्चल से संबंधित कुछ जानकारी दे देता हूँ, वैसे तो मिर्जापुर वेब सीरीज देखने के बाद शायद ही कोई ऐसा होगा जिसके लिए पूर्वाञ्चल नाम नया हो ! बोली और रहन-सहन के आधार पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों को सम्मिलित करके एक अलग राज्य बनाने की मांग काफी समय से उठती रही है इसी क्षेत्र को पूर्वाञ्चल के नाम से जाना जाता है ! पूर्वाञ्चल में आने वाले शहरों में वाराणसी, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, ग़ाज़ीपुर, गोरखपुर, कुशीनगर, बलिया, भदोही, देवरिया, आजमगढ़, मऊ, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थ नगर और संत कबीर नगर शामिल है ! वैसे तो इनमें से हर शहर में घूमने के लिए कुछ न कुछ है लेकिन 2-3 शहरों को छोड़कर बाकि जगहें ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है ! वैसे अब तो पूर्वाञ्चल एक्स्प्रेस वे भी कुछ समय में शुरू होने जा रहा है जो लखनऊ से निकलकर पूर्वाञ्चल के अधिकतर शहरों से निकलता हुआ ग़ाज़ीपुर तक जाएगा ! मैं अलग-2 समय पर पूर्वाञ्चल के इन शहरों में जाता रहा हूँ और यात्रा की इस सीरीज में मैं आपको धीरे-2 इन शहरों के प्रसिद्ध स्थानों की सैर करवाऊँगा !

महावीर मंदिर के अंदर का एक दृश्य

Friday, July 2, 2021

पूर्वाञ्चल सड़क यात्रा – दिल्ली से ग़ाज़ीपुर (Poorvanchal Road Trip – Delhi to Ghazipur)

शुक्रवार, 19 मार्च 2021

पिछले साल कोरोना के कारण जब से देशभर में लॉकडाउन लगा, यात्राओं पर तो जैसे ग्रहण सा लग गया, साल भर कहीं भी घूमने जाना नहीं हो पाया ! घूमने के नाम पर सिर्फ फरीदाबाद से पलवल आना-जाना लगा रहा और ज्यादा कुछ हुआ तो घर के आस-पास किसी पार्क या नर्सरी का चक्कर लगा आए, लेकिन पूरे साल किसी भी लंबी यात्रा पर जाने का संयोग नहीं बना ! पूर्वाञ्चल रोड ट्रिप की योजना अचानक ही बनी, दरअसल, हुआ कुछ यूं कि मार्च में बच्चों की परीक्षाएं खत्म होने के बाद बच्चे कहीं घूमने जाने की जिद करने लगे ! कोरोना भी थोड़ा नियंत्रण में आने लगा था इसलिए सरकार ने भी लोगों के आवागमन पर लगी पाबंदियाँ हटा दी थी ! हमारा भीड़-भाड़ वाली किसी जगह पर जाने का मन नहीं था, इसलिए बच्चों के ननिहाल जाने का विचार हुआ, सोचा घूमने के साथ परिवार के लोगों से मुलाकात भी हो जाएगी ! अब योजना अचानक से बनी थी तो ट्रेन में कन्फर्म टिकट नहीं मिली और आखिरी समय में निजी गाड़ी से जाना निश्चित हुआ, इस नई गाड़ी पर ये हमारी पहली रोड ट्रिप थी ! दिन निर्धारित होते ही यात्रा की तैयारियां भी शुरू हो गई, वैसे तैयारी के लिए ज्यादा कुछ नहीं करना था बस कुछ कपड़े और जरूरत का बाकि सामान रखना था, जिसमें ज्यादा समय नहीं लगा, थोड़ी बहुत खरीददारी करनी थी, वो भी निबटा ली ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि इस लेख का मुख्य उद्देश्य पूर्वाञ्चल तक जाने के रास्ते और सड़क की जानकारी देना है, इसलिए जैसे-2 हम आगे बढ़ते जाएंगे, रास्तों के बारे में विस्तार से बताते चलेंगे, तो चलिए, यात्रा की शुरुआत करते है !

लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग पर लिया एक चित्र

Tuesday, June 29, 2021

अकबर का मकबरा - सिकंदरा (Tomb of Akbar, Sikandara)

रविवार, 01 अप्रैल 2018 

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यात्रा के पिछले लेख में आप कीठम झील का भ्रमण कर चुके है, अब आगे, झील का भ्रमण करके बाहर आया तो मैं आगरा जाने वाले मार्ग पर चल दिया ! मेरा अगला पड़ाव आगरा के सिकंदरा में स्थित अकबर का मकबरा था, सूर सरोवर पक्षी विहार से सिकंदरा की दूरी महज 12 किलोमीटर है जिसे तय करने में मुझे 15-20 मिनट का समय ही लगा ! मुख्य मार्ग पर चलते हुए हमारे बाईं ओर सड़क किनारे स्थित इस मकबरे का प्रवेश द्वार दिखाई देने लगता है, थोड़ा आगे बढ़ने पर पार्किंग स्टैंड है, बगल में ही टिकट घर भी है ! सिकंदरा आगरा के व्यस्त इलाकों में आता है, वैसे तो यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए पुलिसकर्मी यहाँ हमेशा तैनात रहते है लेकिन फिर भी कभी-2 यहाँ भयंकर जाम लग जाता है ! अपनी स्कूटी पार्किंग में खड़ी करके मैंने टिकट खिड़की से जाकर मकबरे स्थल पर जाने के लिए एक प्रवेश टिकट लिया ! रविवार होने के बावजूद ना तो आज पार्किंग में भीड़ थी और ना ही टिकट खिड़की पर, जहां पार्किंग में गिनती की गाड़ियां दिखाई दे रही थी वहीँ टिकट खिड़की पर भी इक्का-दुक्का लोग ही खड़े थे ! मकबरे स्थल पर जाने का प्रवेश शुल्क 10 रुपए है और इतना ही शुल्क मुझे पार्किंग में स्कूटी के लिए देना पड़ा ! टिकट खिड़की से हटा तो दोपहर के साढ़े ग्यारह बज रहे थे, धूप तेज थी इसलिए मैं तेजी से प्रवेश द्वार की ओर चल दिया ! टिकट घर से मकबरे के प्रवेश द्वार तक जाने के लिए पक्का मार्ग बना है जिसके दोनों तरफ बड़े-2 कई मैदान है, जहां रंग-बिरंगे फूलों के अलावा अन्य पेड़-पौधे भी लगाए गए है !

सड़क किनारे से दिखाई देता अकबर के मकबरे का प्रवेश द्वार

Friday, June 25, 2021

आगरा का सूर सरोवर पक्षी विहार और कीठम झील (Soor Sarovar Bird Sanctuary and Keetham Lake, Agra)

रविवार, 01 अप्रैल 2018 

आज के इस लेख में मैं आपको मथुरा-आगरा के बीच में पड़ने वाले सूर सरोवर पक्षी विहार और कीठम झील की सैर करवाऊँगा, मुझे इस स्थान की जानकारी आगरा में रहने वाले मेरे मित्र रितेश गुप्ता से मिली थी ! 2-3 साल पहले आगरा से वापिस आते हुए एक बार इस सरोवर के बगल में स्थित डॉलफिन वाटर पार्क में हम कई घंटे रुके भी थे लेकिन जानकारी के अभाव में इस झील को देखना नसीब नहीं हो पाया था ! इस बात का मलाल काफी समय तक रहा इसलिए जब इस साल यहाँ जाने का मौका मिला तो मैं किसी भी हाल में ये मौका हाथ से नहीं देना जाने चाहता था ! बात 1 अप्रैल 2018 की है, गर्मी की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन फिर भी सुबह के मौसम में अभी इतनी ठंडक थी कि कहीं घूमने जाया जा सके ! रविवार का दिन होने के कारण मैं घर पर ही था, मौसम भी अच्छा था इसलिए आज मेरे पास इस झील को देखने जाने का एक सुनहरा मौका था ! नई स्कूटी लिए अभी महीना भी नहीं हुआ था, और पिछले कई दिनों से मन में विचार चल रहा था कि स्कूटी लेकर किसी सड़क यात्रा पर चला जाए, एक ऐसी यात्रा जिसमें सुबह घर से निकलकर दिनभर घूमकर शाम तक वापिस आया जा सके ! इसी बहाने स्कूटी की घुमक्कड़ी तो हो ही जाएगी, दुपहिया चलाने की अपनी शारीरिक क्षमता का आकलन भी हो जायेगा !

आगरा स्थित कीठम झील का एक दृश्य

Monday, June 21, 2021

रामनगर का जिम कॉर्बेट संग्रहालय (A Visit to Corbett Museum)

रविवार, 04 मार्च 2018 

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रानीखेत से वापिस आते हुए हमें कालाढूँगी में स्थित जिम कॉर्बेट संग्रहालय जाने का अवसर मिला, दरअसल हुआ कुछ यूं कि रानीखेत जाते समय तो होली के अवसर पर ये संग्रहालय बंद था इसलिए हम इसे देख नहीं पाए थे ! सोचा था वापसी में इसे देखते हुए निकल जाएंगे, लेकिन वापिस आते हुए जब हमने भुवाली से हल्द्वानी वाला रास्ता ले लिया तो इस संग्रहालय को देखने की रही सही उम्मीद भी जाती रही ! फिर हल्द्वानी से बाहर निकलते हुए रुद्रपुर की जगह जब हम अनजाने में कालाढूँगी वाले रास्ते पर पहुंचे तो इस संग्रहालय को देखने की उम्मीद एक बार फिर से जाग उठी ! कहते है ना कि किस्मत में जो होना होता है उसके लिए संयोग बन ही जाते है, वैसे यात्रा के पिछले लेख में हल्द्वानी से संग्रहालय पहुँचने का वर्णन मैं कर चुका हूँ ! टिकट खिड़की पर जाकर मैंने 10 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से 2 प्रवेश टिकट लिए, झोपड़ी की आकृति में बना ये टिकट घर बहुत ही सुंदर लगता है, टिकट घर के बगल में ही प्रवेश द्वार है, जहां से हम संग्रहालय परिसर में दाखिल हुए ! अंदर जाने पर दाईं ओर छोटी हल्द्वानी हेरिटेज विलेज का बोर्ड लगा है, रास्ता भी बगल से ही जाता है, हालांकि, जानकारी के अभाव में हम इस विलेज का भ्रमण नहीं कर पाए ! थोड़ा आगे बढ़ने पर परिसर में एक किनारे शेड से ढकी जिम कॉर्बेट की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसके नीचे एक बोर्ड पर उनके जीवनकाल से संबंधित जानकारी दी गई है !

संग्रहालय में लगी जिम कॉर्बेट की प्रतिमा 

Friday, June 18, 2021

रानीखेत से वापसी का सफर (Road Trip from Ranikhet to Delhi)

रविवार, 04 मार्च 2018 

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यात्रा के पिछले लेख में आप हेडाखान मंदिर के दर्शन कर चुके है, अब आगे, रानीखेत से वापसी का सफर भी कम मजेदार नहीं है, वापसी में भी हम कई जगहें घूमते हुए आए ! चलिए, दिन की शुरुआत करते है, सुबह समय से सो कर उठे और फटाफट से तैयार होकर एक बार फिर से झूला देवी मंदिर में दर्शन के लिए निकल पड़े, सोचा वापसी की यात्रा शुरू करने से पहले माता का आशीर्वाद ले लेते है ! ये तो मैं आपको पहले भी बता चुका हूँ कि हमारे रेस्ट हाउस से झूला देवी मंदिर ज्यादा दूर नहीं था, 10 मिनट से भी कम समय लगा और हम मंदिर के सामने खड़े थे, झूला देवी मंदिर से संबंधित जानकारी मैं इस यात्रा के पिछले लेख में दे चुका हूँ ! इस समय यहाँ हमारे सिवा कोई नहीं था, मंदिर के सामने पूजा की दुकानें सजने लगी थी, ऐसी ही एक दुकान से प्रसाद लेकर हम मंदिर परिसर में दाखिल हुए ! मुख्य भवन का द्वार भी हमने ही खोला और फिर तसल्ली से पूजा की, बच्चे एक बार फिर से अपनी मस्ती में लगे रहे, पूजा करके आधे घंटे बाद रेस्ट हाउस पहुंचे ! मंदिर जाते हुए हम रेस्ट हाउस के रसोइया को नाश्ता बनाने के लिए बोल गए थे, जो अब तैयार हो चुका था, इसलिए गाड़ी से निकलकर हम सीधे डाइनिंग हाल में पहुंचे, जहां नाश्ते में पोहे, आलू के पराठे, चाय और दूध तैयार थे ! खाने का स्वाद पहले की तरह लाजवाब था, सबने भरपेट नाश्ता किया और कुछ खाना रास्ते के लिए भी ले लिया, सफर में छोटे बच्चों का पता नहीं कब भूख लग जाए !

भीमताल के नौका स्टैंड का एक दृश्य 

Tuesday, June 15, 2021

रानीखेत का हेड़खान मंदिर (Hedakhan Temple of Ranikhet)

शनिवार, 03 मार्च 2018 

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यात्रा के पिछले लेख में आप कटारमल सूर्य मंदिर का भ्रमण कर चुके है अब आगे, दर्शन के बाद मंदिर से निकलकर हम अपनी गाड़ी की ओर चल दिए ! ढलान होने के कारण वापसी में गाड़ी तक पहुँचने में हमें ज्यादा समय नहीं लगा और ज्यादा परेशानी भी नहीं हुई ! जब हम गाड़ी लेकर यहाँ से चले तो दोपहर के तीन बजकर 20 मिनट हो रहे थे, इस समय भी कुछ लोग मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे ! यहाँ से चलकर कुछ समय बाद हम एक बार फिर से उसी मार्ग पर पहुँच गए, जिससे यहाँ आए थे, हरी-भरी पहाड़ियों के बीच से गुजरता ये मार्ग एक शानदार दृश्य प्रस्तुत कर रहा था ! नतीजन, वापसी में भी हम अल्मोड़ा-रानीखेत मार्ग पर प्राकृतिक नज़ारे देखने के लिए कई जगहें रुके, ये नज़ारे इतने मनमोहक है कि आप ना चाहते हुए भी रुक ही जाते है ! इस तरह रुकते-रुकाते लगभग घंटे भर का सफर करके हम एक बार फिर से रानीखेत क्षेत्र में प्रवेश कर चुके थे ! यहाँ हम रुके बिना ही बाजार से निकलकर चिलियानौला मार्ग पर चल दिए, इसी मार्ग पर लगभग 4-5 किलोमीटर आगे जाकर हेडाखान मंदिर स्थित है ! ये रास्ता भी खूबसूरत नज़ारों से भरा पड़ा है, शुरुआत में तो थोड़ा चहल-पहल दिखती है लेकिन रानीखेत से लगभग 2 किलोमीटर चलकर एक रिहायशी कस्बे को पार करने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की संख्या घटकर इक्का-दुक्का ही रह जाती है ! चारों तरफ सन्नाटा ऐसा कि झींगुर की आवाज भी सुनाई देती है, और सड़क को देखकर लग रहा था कि इसका निर्माण जल्द ही हुआ है !

रानीखेत स्थित हेडाखान मंदिर का एक दृश्य

Sunday, May 30, 2021

अल्मोड़ा का कटारमल सूर्य मंदिर (Katarmal Sun Temple, Almora)

शनिवार, 03 मार्च 2018 

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यात्रा के पिछले लेख में आप रानीखेत का स्थानीय भ्रमण कर चुके है, अब आगे, गोल्फ कोर्स ग्राउन्ड से चले तो हमारा अगला पड़ाव कटारमल सूर्य मंदिर था जो यहाँ से लगभग 27 किलोमीटर दूर है ! इस मार्ग पर 7 किलोमीटर चलने के बाद बाईं ओर मजखाली-सोमेश्वर रोड अलग हो जाता है जबकि हम रानीखेत-अल्मोड़ा मार्ग पर चलते रहे ! इस मार्ग पर प्राकृतिक दृश्यों की कोई कमी नहीं है, नज़ारे ऐसे कि हर मोड पर रुकने को मन करता, यहाँ की सुंदरता को निहारने के लिए हम रास्ते में कई जगह रुके ! बीच में कुछ छोटे-2 रिहायशी कस्बे भी आए, जब कोई रिहायशी कस्बा आता तो सड़क किनारे इक्का-दुक्का दुकानें भी दिख जाती और कस्बे से बाहर निकलते ही फिर से वही सड़क किनारे ऊंचे-2 चीड़ के पेड़ दिखाई देने लगते ! सड़क के एक ओर पहाड़ी थी तो दूसरी ओर घाटी, घुमावदार मार्ग पर चलते हुए ये घाटी कभी हमारे दाईं तरफ रहती तो कभी बाईं तरफ, कुल मिलाकर बढ़िया सफर कट रहा था ! आगे बढ़ते हुए ऐसे ही एक मोड पर मैंने गाड़ी रोक दी और पास ही बने एक ऊंचे टीले पर फोटो खिंचवाने के लिए पहुँच गया ! यहाँ से आस-पास की घाटी का जो सुंदर दृश्य दिखाई दे रहा था, वो आँखों को सुकून देने वाला था ! बच्चों ने भी सफर का पूरा आनंद लिया, और खूब मस्ती की, परिवार संग बिताए ये पल आज भी मेरे जेहन में ताजा है !

कटारमल मंदिर का एक दृश्य 

Thursday, April 22, 2021

रानीखेत में स्थानीय भ्रमण – (Local Sight Seen in Ranikhet)

शनिवार, 03 मार्च 2018 

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यात्रा के पिछले लेख में आप रानीखेत स्थित कुमाऊँ रेजीमेंट के संग्रहालय का भ्रमण कर चुके है अब आगे, संग्रहालय से निकलकर हम रानीखेत में स्थानीय भ्रमण के लिए चल पड़े ! स्थानीय भ्रमण की कड़ी में हमारा पहला पड़ाव मनकामेश्वर मंदिर था जो संग्रहालय से थोड़ी दूरी पर था, 10 मिनट बाद हम मंदिर के सामने जाकर रुके ! गाड़ी से उतरकर हम मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने पहुंचे, अंदर जाते ही एक गलियारा सीधा मंदिर के मुख्य भवन तक जाता है जबकि कुछ अन्य गलियारे मंदिर परिसर में मौजूद अन्य दर्शनीय स्थलों तक जाते है ! प्रवेश द्वार से भवन तक जाने वाले मुख्य मार्ग को शेड से ढका गया है ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का गर्मी और बारिश से बचाव हो सके ! प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कुमाऊँ रेजीमेंट द्वारा 1978 में करवाया गया था ! ये मंदिर माँ काली, भगवान शिव और राधा-कृष्ण को समर्पित है, हालांकि, मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई है ! भक्तों के लिए मंदिर के द्वार सुबह 5 बजे खुल जाते है जो दोपहर 12 बजे बंद होते है और ये द्वार शाम को फिर से 4 बजे खुलकर रात को 9 बजे बंद होते है ! ये मंदिर यहाँ के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में आता है, स्थानीय लोगों के अलावा रानीखेत में तैनात सैन्य अधिकारी भी सपरिवार यहाँ समय-2 पर आते रहते है !

Mankameshwar Temple
रानीखेत का मनकामेश्वर मंदिर

Friday, March 12, 2021

रानीखेत का कुमाऊँ रेजीमेंट (History of Kumaon Regiment, Ranikhet)

शनिवार, 03 मार्च 2018

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हमारी रानीखेत यात्रा के पिछले लेख में आप कुमाऊँ मण्डल के रेस्ट हाउस के बारे में पढ़ चुके है, अब आगे, रात्रि भोजन करके हम कुछ देर रेस्ट हाउस परिसर में टहलते रहे ! यहाँ के शांत माहौल में घूमते हुए हम जीवन के अलग-2 विषयों पर चर्चा करते रहे, फिर आराम करने के लिए अपने कमरे में चले गए ! मुझे तो रोजमर्रा की भागम-भाग से दूर ऐसी शांत जगहें जीवन के अहम विषयों पर चर्चा करने के लिए मुफीद जगह लगती है ! खैर, दिनभर के सफर की थकान के कारण रात को बढ़िया नींद आई, मार्च के महीने में भी यहाँ बढ़िया ठंड थी, लेकिन पर्याप्त गरम कपड़े होने के कारण ज्यादा दिक्कत नहीं हुई ! सुबह समय से सोकर उठे, मैं तो हिमालय दर्शन के लिए व्यू पॉइंट पर भी गया, लेकिन बादलों और ऊंचे-2 पेड़ों के कारण कुछ खास नहीं दिखा ! रेस्ट हाउस वापिस आते हुए माल रोड का एक चक्कर भी लगा आया ! सभी लोग बारी-2 से नित्य-क्रम से निवृत हुए और नाश्ता करने के बाद स्थानीय भ्रमण के लिए अपनी गाड़ी लेकर निकल पड़े ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि यहाँ रानीखेत में स्थानीय भ्रमण के लिए कई जगहें है जिसमें से मनकामेश्वर देवी मंदिर, हेडाखान मंदिर, रानी झील, आशियाना पार्क और कुमाऊँ रेजीमेंट संग्रहालय प्रमुख है ! हम बारी-2 से इन सभी जगहों पर जाएंगे और अपने साथ आपको भी इन जगहों की सैर कराएंगे !

फोटो www.tripoto.com की वेबसाईट से लिया गया है 

Friday, March 5, 2021

रानीखेत का टूरिस्ट रेस्ट हाउस (Tourist Rest House, Ranikhet)

शनिवार, 03 मार्च 2018

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यात्रा के पिछले लेख में आप झूला देवी मंदिर और चौबटिया का भ्रमण कर चुके है, चौबाटिया से चले तो सीधा माल रोड के पास रानीखेत के टूरिस्ट रेस्ट हाउस के सामने आकर रुके ! पहले इस लेख को लिखने का कोई विचार नहीं था लेकिन इस रेस्ट हाउस में रुकने का मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा और ये जानकारी में अपने पाठकों तक भी पहुंचाना चाहता था ताकि अगर आप कभी रानीखेत जाएँ तो इस रेस्टहाउस में रहकर अपने लिए कुछ यादगार लम्हें वापिस ला सके ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि रानीखेत पहुँचकर झूला देवी मंदिर जाते हुए रास्ते में हम अपने लिए होटल देखते हुए जा रहे थे ! सबसे पहले माल रोड स्थित मेघदूत होटल पहुंचे, लेकिन इस होटल का रसोइया होली की छुट्टी पर घर गया हुआ था इसलिए होटल मैनेजर ने कहा कि रुकने का इंतजाम तो हो जाएगा लेकिन खाने का प्रबंध आपको खुद करना होगा, यही हाल वहाँ मौजूद दूसरे होटल का भी था ! रानीखेत का मुख्य बाजार यहाँ से 4-5 किलोमिटर दूर था और सफर की थकान के बाद खाने के लिए हम भटकना नहीं चाहते थे, इसलिए हम कुमाऊँ मण्डल के इस रेस्ट हाउस में कमरा देखने चल दिए, यहाँ भी एक मजेदार वाक्या हुआ !

कुमाऊँ मण्डल के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस का एक चित्र

Sunday, February 28, 2021

झूला देवी मंदिर, रानीखेत (Jhula Devi Temple of Ranikhet)

शुक्रवार, 02 मार्च 2018

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दोस्तों, यात्रा के पिछले लेख में हम कैंची धाम के दर्शन करने के बाद रानीखेत के लिए प्रस्थान कर चुके है, होली का दिन होने के कारण आज सड़क पर ज्यादा चहल-पहल भी नहीं थी ! कैंची धाम में भी हमारे अलावा गिनती के लोग ही थे, सड़क किनारे स्थित अधिकतर दुकानें बंद थी और नैनीताल-रानीखेत मार्ग पर भी ना के बराबर ही गाड़ियाँ दिखाई दे रही थी ! नतीजन, हम तेजी से इस मार्ग पर रानीखेत की ओर बढे जा रहे थे, रास्ते में कोई ख़ास दर्शनीय स्थल नहीं था तो हम कहीं रुके भी नहीं ! पहाड़ी मार्ग पर बीच-2 में मोबाइल के सिग्नल की आवाजाही भी जारी थी, हालांकि, सड़क किनारे खम्बों पर लटकती केसरी रंग की फाइबर केबल दिखाई दे रही थी लेकिन फिलहाल तो यहाँ मोबाइल नेटवर्क बहुत अच्छा नहीं था ! 10-11 किलोमीटर चलने के बाद हम एक तिराहे पर जाकर रुके, यहाँ हमारी बाईं ओर कोसी नदी पर एक पुल बना था पुल से होता हुआ ये मार्ग रानीखेत को चला जाता है जबकि इस तिराहे से सीधा जाने वाला मार्ग अल्मोड़ा, जागेश्वर और पित्थोरागढ़ को चला जाता है इसी मार्ग पर चितई देवता का मंदिर भी है, जो यहाँ से 42 किलोमीटर दूर था ये सब जानकारी मुझे इस तिराहे पर लगे एक दिशा सूचक बोर्ड से मिली !
झूला देवी मंदिर, रानीखेत