Friday, April 29, 2016

भानगढ़ के किले से वापसी (Bhangarh to Delhi – Return Journey)

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किले से निकलकर हम पार्किंग स्थल पर पहुँचे, जो प्रवेश द्वार के ठीक सामने था, जब हम किले से बाहर निकल रहे थे तो काफ़ी लोग एक साथ किले में जा रहे थे ! जैसे-2 दिन बढ़ता जाएगा, यहाँ आने वाले लोगों की तादात भी बढ़ती जाएगी और फिर शाम होते-2 सब अपने घर लौट जाएँगे ! बाहर आते हुए ध्यान आया कि किले से थोड़ी दूरी पर एक बावली और कुछ अन्य इमारतें भी है गाड़ी पार्किंग में ही छोड़कर हम लोग मुख्य मार्ग से हटकर एक कच्चे मार्ग पर चल दिए ! जिस इमारत की मैं बात कर रहा हूँ वो किसी का मकबरा था, कहते है ये किसी हिंदू शासक का मकबरा है जिसने बाद में इस्लाम धर्म अपना लिया था ! मुख्य मार्ग से हटकर कच्चे रास्ते से होते हुए हम इस मक़बरे की ओर चल दिए ! दूर से देखने पर ही ये मकबरा बहुत सुंदर लग रहा था, थोड़ी देर बाद हम मक़बरे के पास पहुँच गए ! ये मकबरा एक ऊँचे चबूतरे पर बना है और अंदर जाने के लिए पत्थर की सीढ़ियाँ भी बनी है ! जिस समय हम मक़बरे पर पहुँचे, वहाँ कुछ स्थानीय बच्चे खेल रहे थे !

मक़बरे का एक दृश्य

Tuesday, April 26, 2016

भानगढ़ के किले में दोस्तों संग बिताया एक दिन (A Day in Bhangarh Fort)

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पिछले लेख में आपने पढ़ा कि कैसे हम पाराशर धाम की यात्रा करने के बाद वापिस अपने होटल आकर नाश्ते के लिए रुके, नाश्ता करने के बाद हम लोग भानगढ़ के लिए निकल पड़े ! मुख्य मार्ग पर कुछ किलोमीटर चलकर हम उस तिराहे पर पहुँचे जहाँ से भानगढ़ जाने का मार्ग अलग होता है ! इस तिराहे से बाएँ मुड़कर हम भानगढ़ जाने वाले मार्ग पर हो लिए, कुछ दूर जाकर एक सहायक मार्ग दाएँ मुड़ता है ! इसी मार्ग पर आधा किलोमीटर चलने के बाद भानगढ़ का किला है, सुबह जब इस मार्ग से आए थे तो चारों तरफ सन्नाटा था लेकिन अब सड़क के किनारे वाली दुकानें खुल चुकी थी और इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन भी था ! एक दुकान से खाने-पीने का थोड़ा सामान लिया और किले की ओर चल दिए ! किले से थोड़ा पहले ही मार्ग पर एक रस्सी से बैरियर लगाकर पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा था, वैसे आप इस पार्किंग से थोड़ी पहले गाड़ी खड़ी करके भी किले में जा सकते है, तब आपको पार्किंग शुल्क नहीं देना होगा ! सुरक्षा के लिहाज से हमने 50 रुपए देकर पार्किंग में ही गाड़ी खड़ी करना उचित समझा !


गोपीनाथ मंदिर का एक दृश्य

Saturday, April 23, 2016

भानगढ़ का नारायणी माता मंदिर और पाराशर धाम (Parashar Dham and Narayani Temple in Bhangarh)

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भानगढ़ यात्रा के मेरे पिछले लेख में आपने पढ़ा कि कैसे हम भानगढ़ के किले की दीवार फांदकर खंडहर बन चुकी बस्ती से होते हुए किले के दूसरे प्रवेश द्वार तक पहुँच गए ! अब आगे, इस बात से तो सब वाकिफ़ होंगे कि डर में शायद ही किसी का दिमाग़ ठीक ढंग से काम करता हो, हममें से भी किसी एक के दिमाग़ ने ही काम किया और बाकी सब तो बस उसके पीछे-2 हो लिए ! फिलहाल तो किले में जाने की हमारी हिम्मत इस दरवाजे पर ही जवाब दे गई थी, इसलिए यहाँ से वापसी की राह पकड़ना ही बेहतर लगा ! हमने सोचा, उजाला होने के बाद आराम से भानगढ़ का किला देखने आएँगे ! जितना समय हमें यहाँ तक पहुँचने में लगा था उससे आधे समय में ही हम वापिस किले की बाहरी दीवार के पास पहुँच गए ! एक-दूसरे को सहारा देते हुए हम सब दीवार कूदकर किले से बाहर निकल गए और अपनी गाड़ी की ओर तेज कदमों से चल दिए ! गाड़ी में सवार होने की देर थी फिर तो पता ही नहीं चला कि कब अपने होटल के सामने पहुँच गए, होटल से थोड़ी आगे ही एक मंदिर था, जहाँ टहलते हुए हम रात को भी आए थे ! यहाँ एक-दो चाय की दुकानें खुल चुकी थी, 4 चाय का आदेश देकर वहीं रखे एक तख्त पर हम चारों बैठ गए !


पाराशर धाम जाने का मार्ग

Wednesday, April 20, 2016

भानगढ़ की वो यादगार रात (A Scary Night in Bhangarh)

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अब तक आपने पढ़ा कि किस तरह हम एक लंबा सफ़र तय करके भानगढ़ पहुँचे और एक होटल में जाकर रात्रि भोजन के लिए रुके ! हम लोगों का मन तो रात को ही किले में जाने का था, इसलिए खाना खाने के लिए रसोई के बगल में बने डाइनिंग हाल में आकर बैठ गए ! हमसे पहले कुछ अन्य लोग भी भोजन करने के लिए यहाँ बैठे हुए थे, हमारे बैठते ही रसोइया बोला कि आप लोगों को खाना परोसने में थोड़ा समय लगेगा क्योंकि आपसे पहले ये लोग बैठे है ! इन्हें खिला लेने के बाद ही आपके लिए खाना तैयार करूँगा ! दरअसल, सुनसान जगह होने के कारण यहाँ ज़्यादा लोग नहीं आते, इसलिए ये होटल वाला ऑर्डर पर ही खाना बनाता है ! हमारा खाना तैयार होने में अभी समय था, और यहाँ बैठकर करने के लिए कुछ नहीं था इसलिए हमने सोचा यहाँ बैठने से अच्छा है कि होटल के आस-पास कहीं घूम लेते है, शायद इसी बहाने कोई ज़रूरी जानकारी भी मिल जाए ! टहलते हुए हम सब होटल से थोड़ी दूरी पर स्थित एक मंदिर के सामने पहुँचे !


हमारे होटल से दिखाई देता एक नज़ारा

Sunday, April 17, 2016

भानगढ़ की एक सड़क यात्रा (A road trip to Bhangarh)

शुक्रवार, 25 मार्च 2016

शायद ही कोई शख्स होगा जिसने भानगढ़ के बारे में ना सुना हो, आख़िर ये जगह मशहूर ही इतनी है कि लोगों ने इसके बारे में जाने-अंजाने सुन ही रखा होगा ! वैसे अगर आप इस जगह के बारे में नहीं जानते तो आपको बता दूँ कि भारत की सबसे डरावनी जगहों में से एक है राजस्थान के अलवर में स्थित भानगढ़ का किला ! यही कारण है कि यहाँ रोजाना हज़ारों लोग घूमने और किले परिसर में मौजूद मंदिर में पूजा करने के लिए आते है ! तो चलिए इस यात्रा को शुरू से बताता हूँ, भानगढ़ जाने की इच्छा काफ़ी समय से मन में थी, लेकिन अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए किसी का साथ ढूँढ रहा था ! जब तक किसी का साथ नहीं मिल रहा था इस यात्रा को मैं आगे खिसकाते जा रहा था लेकिन संयोग देखिए कि जो यात्रा पिछले 1 साल से लटकी हुई थी उसपर जाने का विचार मात्र 10 मिनट में बन गया ! इस बार भी ये यात्रा ना हो पाती, लेकिन होली से अगले दिन एकदम से कुछ ऐसा घटित हुआ कि आनन-फानन में इस यात्रा पर निकल पड़े ! हुआ कुछ यूँ कि होली पर 4 छुट्टियों का संयोग बन रहा था, इसलिए हम 3-4 मित्रों का कहीं घूमने जाने का विचार था ! होली आकर चली भी गई लेकिन किसी ने भी यात्रा पर जाने के बाबत बात नहीं की !

अलवर की सिलिसढ़ झील का एक दृश्य 

Thursday, April 14, 2016

लोधी गार्डन - सिकंदर लोदी का मकबरा (Lodhi Garden - Lodhi Road, New Delhi)

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सफ़दरजंग के मक़बरे से निकलते हुए धूप काफ़ी तेज हो गई थी, लेकिन अभी तो आधा दिन भी नहीं गुजरा था ! मैने सोचा, क्यों ना पास में ही स्थित लोधी गार्डन भी घूम लिया जाए, क्या पता इधर आने का मौका फिर कब लगे ! लोधी गार्डन इस मक़बरे से बहुत ज़्यादा दूर नहीं है बमुश्किल 200-300 मीटर की दूरी पर होगा ! मक़बरे के प्रवेश द्वार के ठीक सामने जाने वाला मार्ग लोधी रोड ही है, जो इस पार्क के किनारे से होता हुए आगे दयाल सिंह कॉलेज की ओर चला जाता है ! वैसे तो इस मार्ग पर बसें भी खूब चलती है लेकिन दूरी ज़्यादा ना होने के कारण मैं इस मार्ग पर पैदल ही चल दिया ! लोधी रोड पर स्थित ये पार्क ऐतिहासिक दृष्टि से भी काफ़ी महत्वपूर्ण है, 90 एकड़ में फैले इस पार्क में कई मुगल शासकों के मक़बरे है जिसमें मोहम्मद शाह, और सिकंदर लोदी के मक़बरे प्रसिद्ध है ! सुबह-शाम स्थानीय लोग इस पार्क में टहलने के लिए आते है तो दोपहर होते-2 यहाँ प्रेमी-युगलों के अलावा पर्यटक भी आने लगते है ! इस पार्क में मुगल शासकों के मकबरों के अलावा शीश-गुंबद और बड़ा-गुंबद भी है, पार्क में स्थित इन मकबरों और अन्य इमारतों को पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित घोषित किया जा चुका है !


मुहम्मद शाह का मकबरा

Sunday, April 10, 2016

सफ़दरजंग के मक़बरे की सैर (Safdarjung Tomb, New Delhi)

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दिल्ली घूमते हुए आज मैं आपको दिल्ली की एक और ऐतिहासिक इमारत को घुमाने लेकर चल रहा हूँ, ये इमारत भी दिल्ली के एक व्यस्त इलाक़े में स्थित है ! ज़ोर बाग मेट्रो स्टेशन के पास स्थित इस इमारत से लोधी गार्डन भी बहुत ज़्यादा दूर नहीं है ! अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि मैं सफ़दरजंग के मक़बरे की बात कर रहा हूँ, जो दिल्ली का एक ऐतिहासिक स्थल है ! 1754 में बने इस मक़बरे का निर्माण नवाब शुजा-उद्-दौला ने अपने पिता मिर्ज़ा-मुकीम-अबुल-मंसूर-ख़ान के सम्मान में करवाया था ! मुगल शासक मुहम्मद शाह के शासन काल में मिर्ज़ा साहब अवध प्रांत के गवर्नर थे और उन्होने अवध प्रांत पर स्वतंत्र शासक की तरह राज किया ! इस दौरान उन्हें सफ़दरजंग की उपाधि से नवाजा गया था, वे काफ़ी धनवान और ताकतवर शासक थे ! मुहम्मद शाह का शासनकाल 1719 से 1748 तक रहा, 1748 में मुगल शासक की मृत्यु के बाद मिर्ज़ा साहब अवध से दिल्ली चले आए ! फिर जब अहमद शाह ने दिल्ली की कमान संभाली तो मिर्ज़ा साहब को दिल्ली की सल्तनत का मुख्य मंत्री (वज़ीर) बनाया गया !


सफ़दरजंग के मक़बरे का एक दृश्य


Wednesday, April 6, 2016

बहाई उपासना केंद्र - कमल मंदिर - (Lotus Temple in Delhi)

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दिल्ली भ्रमण के दौरान आज हम दक्षिणी दिल्ली के नेहरू प्लेस इलाक़े में आ पहुँचे है ! आज हम जिस इमारत को देखने जा रहे है वो दक्षिणी दिल्ली में स्थित एक धार्मिक स्थल है ! ऐतिहासिक नगरी दिल्ली में वैसे तो कई धार्मिक स्थल है लेकिन जो जगह आज मैं आपको दिखाने वाला हूँ उसका दिल्ली में अपना अलग ही महत्व है ! नेहरू प्लेस का नाम सुनते ही काफ़ी लोग तो इस जगह के बारे में जान चुके होंगे, बाकी लोगों को बता दूँ कि मैं दिल्ली के कमल मंदिर की बात कर रहा हूँ ! नेहरू प्लेस के पास स्थित कमल मंदिर खूबसूरती की एक मिसाल है, इसलिए लोग दूर-2 से इस मंदिर को देखने के लिए आते है ! नेहरू प्लेस से लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस मंदिर का निर्माण बहाई समुदाय द्वारा करवाया गया है ! ये मंदिर दिल्ली के मुख्य आकर्षण केंद्रों में से एक है इसलिए  दिल्ली घूमने आने वाले अधिकतर लोग इस मंदिर में भी ज़रूर जाते है ! ये मंदिर की खूबसूरती ही है कि कुछ लोग धार्मिक कारणों से तो अन्य लोग मंदिर की बनावट को देखने के लिए इसकी ओर खिंचे चले आते है ! मंदिर तक पहुँचने के लिए यातायात के वैसे तो कई विकल्प मौजूद है, लेकिन सबसे सस्ता और बढ़िया साधन दिल्ली मेट्रो ही है ! नेहरू प्लेस और कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन से इस मंदिर की दूरी मात्र 300 मीटर ही है इसलिए इन दोनों स्टेशनो में से आप कहीं भी उतर कर मंदिर तक पैदल भी जा सकते है ! 

कमल मंदिर का एक दृश्य 

Sunday, April 3, 2016

अग्रसेन की बावली - एक ऐतिहासिक धरोहर (Agrasen ki Baoli, New Delhi)

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आज मैं आपको दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में स्थित एक छोटी लेकिन ऐतिहासिक जगह की सैर पर लेकर चल रहा हूँ ! इस ऐतिहासिक इमारत के पास से रोजाना हज़ारों लोग गुज़रते है लेकिन इस भीड़ में से गिनती के कुछ लोग ही इस खूबसूरत जगह को देखने जाते है ! जी हाँ, जिस ऐतिहासिक धरोहर की मैं बात कर रहा हूँ वो बाराखंबा रोड और मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन से बराबर दूरी पर स्थित एक बावली है ! अगर आप अभी भी इस जगह का अनुमान नहीं लगा पाए है तो आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैं अग्रसेन की बावली की बात कर रहा हूँ ! वैसे इस बावली तक जाने का रास्ता बहुत आसान है लेकिन ऊँची-2 इमारतों से घिरी होने के कारण दूर से इस बावली का पता ही नहीं चलता ! कई बार तो लोग इसके पास से निकल जाते है और जानकारी के अभाव में इस जगह को नहीं देख पाते ! मैं लोकल ट्रेन में बैठकर शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन पहुँचा, फिर स्टेशन से बाहर आकर पैदल ही बाराखंबा मेट्रो स्टेशन की ओर चल दिया ! बाराखंबा मेट्रो स्टेशन से मंडी हाउस की ओर चलने पर आगे जाकर दाई ओर एक मार्ग हैली रोड के लिए अलग होता है ! इसी मार्ग पर 200 मीटर चलने के बाद फिर दाईं ओर एक मार्ग अंदर गली में जाता है, इसी गली में ये बावली स्थित है !

अग्रसेन की बावली का एक दृश्य (A Glimpse of Agrsen ki Baoli, New Delhi)