Wednesday, January 21, 2015

मसूरी में केंप्टी फॉल है पिकनिक के लिए एक उत्तम स्थान (A Perfect Place for Picnic in Mussoorie – Kempty Fall)

सोमवार, 22 अगस्त 2011

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आज 22 अगस्त है और इस सफ़र का हमारा अंतिम दिन भी, मस्ती भरे 3-4 दिन कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला ! किसी भी सफ़र का अंतिम दिन मुझे बड़ा ही दुखदायी लगता है, आप कहीं भी घूमने गए हों, वापसी के समय मन उदास हो ही जाता है ! मेरी मनोदशा भी कुछ ऐसी ही थी, वापसी का मन तो नहीं हो रहा था, पर अपनी आजीविका के लिए आख़िरकार काम करना भी तो ज़रूरी है ! फिर ये भी सोचा कि इस यात्रा से वापस जाएँगे, तभी तो आगे किसी दूसरी यात्रा पर जाने का विचार बनेगा ! हमेशा की तरह सुबह बिस्तर से उठने के बाद सभी लोग नित्य क्रम में लग गए, फिर भी नहा-धोकर तैयार होते-2 हमें 9 बज गए ! नाश्ते में आलू के पराठे खाने का मन हो रहा था इसलिए अपने होटल के बैरे को बुलाकर हमने आलू के पराठे बनाने के लिए कह दिया ! जब तक हम लोग नहा-धोकर तैयार हुए, हमारा नाश्ता भी तैयार था ! अपना सारा सामान वापस अपने-2 बैग में रखने के बाद हम लोग नाश्ता करने के लिए होटल के हॉल में आकर बैठ गए !
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On the way to Company Garden, Mussoorie

Sunday, January 18, 2015

मसूरी के मालरोड पर एक शाम (An Evening on Mallroad, Musoorie)

रविवार, 21 अगस्त 2011 

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गाड़ी खड़ी करके हम सब अंदर अपने कमरे में आकर अपने-2 बिस्तर पर लेट गए, दिन भर के सफ़र से थकान होने के कारण बिस्तर पर लेटे-2 कब नींद आ गई पता ही नहीं चला ! रात को बढ़िया नींद आई, इसलिए सुबह आराम से सोकर उठे और अपने नित्यक्रम में लग गए ! आज 21 अगस्त है और धनोल्टी में हमारा आख़िरी दिन भी, आज कहीं घूमने जाने की जल्दबाज़ी तो थी नहीं, पर समय से मसूरी के लिए निकलना था ताकि दिन में बढ़िया से मसूरी की सैर कर सके ! अपनी योजना के मुताबिक हम लोग एक रात मसूरी में बिताने वाले थे, नहा-धोकर तैयार होने के बाद फटाफट अपने कमरे के नीचे बरामदे में नाश्ता करने पहुँच गए ! समय देखा तो सुबह के 8 बजकर 45 मिनट हो रहे थे, थोड़ी देर में ही हमारे लिए नाश्ता भी आ गया, नाश्ता करने के बाद हमने होटल का हिसाब-किताब करके बकाया राशि का भुगतान किया और कमरे में से अपना सामान निकाल कर बाहर गाड़ी में रखने लगे ! साढ़े नौ बजते-2 हम लोग अपना सारा सामान गाड़ी में रखकर चलने के लिए तैयार हो गए ! 
dhanolti to mussoorie
दूर दिखाई देते बरफ के पहाड़ (A view of Snow Line)

Wednesday, January 14, 2015

सुरकंडा देवी - माँ सती को समर्पित एक स्थान (A Visit to Surkanda Devi Temple)

शनिवार, 20 अगस्त 2011 

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तपोवन की यात्रा से वापस आने के बाद हम लोग अपने होटल के बरामदे में बैठ कर बातें करते हुए चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे ! उन दिनों अन्ना हज़ारे का आंदोलन बड़े ज़ोरों पर था, सामने मेज पर रखा अख़बार इस बात की गवाही दे रहा था क्योंकि जब अख़बार उठा कर देखा तो पूरा अख़बार ही अन्ना हज़ारे के आंदोलन की सुर्ख़ियों से भरा पड़ा था ! इस आंदोलन के साथ ही भारत में अब तक जितने भी बड़े आंदोलन हुए थे उन सबका लेखा-जोखा भी अख़बार में था ! भारत के विभिन्न शहरों में अन्ना हज़ारे के आंदोलन की लहर दौड़ रही थी, अख़बार पढ़ते-2 ही इस आंदोलन को लेकर हम लोगों की चर्चा शुरू हो गई, जो काफ़ी देर तक चली ! बारी-2 से हम सबने इस आंदोलन को लेकर अपने-2 विचार रखे, कोई कह रहा था कि आंदोलन सफल रहेगा और किसी ने कहा की आंदोलन कमजोर पड़कर ख़त्म हो जाएगा ! थोड़ी देर बाद हमारी चर्चा आंदोलन से हटकर उस दिन के आगे के कार्यक्रम पर होने लगी !अब सभी लोग इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि अब आगे कहाँ जाया जाए !


dhanolti
A Sign Board in Dhanaulti

Saturday, January 10, 2015

बारिश में देखने लायक होती है धनोल्टी की ख़ूबसूरती (A Rainy Trip to Dhanolti)

शनिवार, 20 अगस्त 2011 

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आज धनोल्टी में हमारा दूसरा दिन था, सुबह जब सो कर उठे तो अपने बिस्तर से निकलने का मन ही नहीं हो रहा था ! यहाँ धनोल्टी में अगस्त के महीने में भी काफ़ी ठंड थी इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता था कि नींद खुलने के बाद भी सभी लोग अपने-2 बिस्तर में ही पड़े रहे ! थोड़ी देर बाद जब घड़ी में समय देखा तो सुबह के 7.30 बज रहे थे, फिर तो मैं हिम्मत करके बिस्तर से बाहर निकला और अपने कमरे की खिड़की से ही बाहर झाँक कर देखा, अभी तक धूप नहीं निकली थी और बाहर अभी भी थोड़ा-2 कोहरा छाया हुआ था ! थोड़ी देर बाद ही बाकी लोग भी उठ गए और नित्य-क्रम में लग गए ! आख़िर तपोवन भी तो जाना था, इसलिए सभी लोग फटाफट नहा-धोकर तैयार होने लगे ! तैयार होने के बाद सुबह का नाश्ता करने के लिए हम सब नीचे होटल में चले गए ! वहीं बरामदे में लगी मेज पर बैठ कर नाश्ते का आनंद लिया और फिर रास्ते में अपने साथ ले जाने के लिए कुछ खाने-पीने का सामान भी ले लिया ! मैं वापिस अपने कमरे में गया और रास्ते के लिए ज़रूरत का बाकी समान अपने साथ एक बैग में रखकर तपोवन की चढ़ाई के लिए अपने साथियों के पास नीचे पहुँच गया !

view from dhanoulti
होटल से दिखाई देता एक दृश्य (A view from our hotel in Dhanaulti)

Tuesday, January 6, 2015

धनोल्टी का मुख्य आकर्षण है ईको-पार्क (A Visit to Eco Park, Dhanaulti)

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011 

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यात्रा के पिछले लेख में आपने पढ़ा कि किस तरह हम लोग एक लंबा सफ़र तय करके नोयडा से धनोल्टी पहुँचे ! होटल में कमरा लेने के बाद हम लोग बारी-2 से नहाने-धोने में लग गए ! हमारे कमरे की खिड़की से बाहर का बहुत ही सुंदर नज़ारा दिखाई दे रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे पहाड़ों के नीचे दूर घाटी में बादल तैर रहे हो काफ़ी देर तक तो मैं भी इन नज़ारों को एकटक देखता हुआ अपने ही विचारों में खो गया ! फिर ब्रश करता हुआ वहीं खिड़की के सामने एक स्टूल पर बैठ कर बाहर के नज़ारे देखने लगा ! ब्रश करने के बाद जब एक डब्बे में पानी लिया तो मुझे पानी में पूंछ वाले छोटे-2 जीव तैरते हुए दिखाई दिए ! मैने अपने साथ के बाकी लोगों को भी इस बारे में बताया तो जयंत की हालत देखने वाली थी ! क्योंकि सबसे पहले वो ही गया था बाथरूम में और उसने पानी में मौजूद इन कीड़ों को नहीं देखा था ! उसने नहाने-धोने के लिए इस पानी का बड़े इत्मिनान से इस्तेमाल किया था ! लेकिन अब उसे डर था कि कहीं ये कीड़े उसके शरीर के किसी हिस्से में ना चले गए हों ! 

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कमरे की खिड़की से दिखता दृश्य (A View from Our Balcony)

Friday, January 2, 2015

दोस्तों संग धनोल्टी का एक सफ़र (A Road Trip from Delhi to Dhanaulti)

बात उन दिनों की है जब ऑफिस में काम ज़्यादा होने की वजह से मैने नोयडा रहना शुरू कर दिया था ! हफ्ते के 5 दिन मैं नोयडा में रहता था और सप्ताह के अंत में मेरा अपने घर पलवल आना होता था ! अगस्त 2011 का एक सोमवार था जब मेरा फोन घनघनाया, फोन उठाकर देखा तो ये जयंत था ! जयंत जोकि मेरा कॉलेज मित्र है, मेरी तरह ही नोयडा में एक निजी कंपनी में कार्यरत है ! जब दोनों लोग एक ही शहर में कार्यरत थे तो समय-2 पर मिलना-जुलना तो लगा ही रहता था ! बातचीत के दौरान ही उसने पूछा, कहीं घूमने चलने का मन है क्या ? मैं जानता था कि जयंत ने पहले से ही घूमने जाने के लिए कोई जगह सोच ली होगी, इसलिए मैने कहा नेकी और पूछ-2, बता इस बार कहाँ चलने की तैयारी है ? उसने कहा उत्तराखंड में एक जगह है बिन्सर, वहीं चलते है ! हालाँकि, मैं कभी बिन्सर गया तो नहीं था पर दोस्तों से इस जगह के बारे में सुन ज़रूर रखा था ! फिर जब यात्रा के बारे में विस्तृत जानकारी ली तो जयंत ने बताया कि वीरवार यानि 18 अगस्त 2011 की रात को नोयडा से चलेंगे और सोमवार यानि 22 तारीख की रात तक वापिस आ जाएँगे !

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नोयडा से निकलते समय लिया गया एक चित्र (A view in Noida)