Friday, March 12, 2021

रानीखेत का कुमाऊँ रेजीमेंट (History of Kumaon Regiment, Ranikhet)

शुक्रवार, 02 मार्च 2018

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

हमारी रानीखेत यात्रा के पिछले लेख में आप कुमाऊँ मण्डल के रेस्ट हाउस के बारे में पढ़ चुके है, अब आगे, रात्रि भोजन करके हम कुछ देर रेस्ट हाउस परिसर में टहलते रहे ! यहाँ के शांत माहौल में घूमते हुए हम जीवन के अलग-2 विषयों पर चर्चा करते रहे, फिर आराम करने के लिए अपने कमरे में चले गए ! मुझे तो रोजमर्रा की भागम-भाग से दूर ऐसी शांत जगहें जीवन के अहम विषयों पर चर्चा करने के लिए मुफीद जगह लगती है ! खैर, दिनभर के सफर की थकान के कारण रात को बढ़िया नींद आई, मार्च के महीने में भी यहाँ बढ़िया ठंड थी, लेकिन पर्याप्त गरम कपड़े होने के कारण ज्यादा दिक्कत नहीं हुई ! सुबह समय से सोकर उठे, मैं तो हिमालय दर्शन के लिए व्यू पॉइंट पर भी गया, लेकिन बादलों और ऊंचे-2 पेड़ों के कारण कुछ खास नहीं दिखा ! रेस्ट हाउस वापिस आते हुए माल रोड का एक चक्कर भी लगा आया ! सभी लोग बारी-2 से नित्य-क्रम से निवृत हुए और नाश्ता करने के बाद स्थानीय भ्रमण के लिए अपनी गाड़ी लेकर निकल पड़े ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि यहाँ रानीखेत में स्थानीय भ्रमण के लिए कई जगहें है जिसमें से मनकामेश्वर देवी मंदिर, हेडाखान मंदिर, रानी झील, आशियाना पार्क और कुमाऊँ रेजीमेंट संग्रहालय प्रमुख है ! हम बारी-2 से इन सभी जगहों पर जाएंगे और अपने साथ आपको भी इन जगहों की सैर कराएंगे !

फोटो www.tripoto.com की वेबसाईट से लिया गया है 

Friday, March 5, 2021

रानीखेत का टूरिस्ट रेस्ट हाउस (Tourist Rest House, Ranikhet)

शुक्रवार, 02 मार्च 2018

इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें !

यात्रा के पिछले लेख में आप झूला देवी मंदिर और चौबटिया का भ्रमण कर चुके है, चौबाटिया से चले तो सीधा माल रोड के पास रानीखेत के टूरिस्ट रेस्ट हाउस के सामने आकर रुके ! पहले इस लेख को लिखने का कोई विचार नहीं था लेकिन इस रेस्ट हाउस में रुकने का मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा और ये जानकारी में अपने पाठकों तक भी पहुंचाना चाहता था ताकि अगर आप कभी रानीखेत जाएँ तो इस रेस्टहाउस में रहकर अपने लिए कुछ यादगार लम्हें वापिस ला सके ! आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि रानीखेत पहुँचकर झूला देवी मंदिर जाते हुए रास्ते में हम अपने लिए होटल देखते हुए जा रहे थे ! सबसे पहले माल रोड स्थित मेघदूत होटल पहुंचे, लेकिन इस होटल का रसोइया होली की छुट्टी पर घर गया हुआ था इसलिए होटल मैनेजर ने कहा कि रुकने का इंतजाम तो हो जाएगा लेकिन खाने का प्रबंध आपको खुद करना होगा, यही हाल वहाँ मौजूद दूसरे होटल का भी था ! रानीखेत का मुख्य बाजार यहाँ से 4-5 किलोमिटर दूर था और सफर की थकान के बाद खाने के लिए हम भटकना नहीं चाहते थे, इसलिए हम कुमाऊँ मण्डल के इस रेस्ट हाउस में कमरा देखने चल दिए, यहाँ भी एक मजेदार वाक्या हुआ !

कुमाऊँ मण्डल के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस का एक चित्र