Friday, March 30, 2018

जैसलमेर की शानदार हवेलियाँ (Beautiful Haveli’s of Jaisalmer)

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

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इस यात्रा के पिछले लेख में आप जैसलमेर दुर्ग का भ्रमण करते हुए यहाँ स्थित राजा और रानी के शाही महल देख चुके है, महल से बाहर आने के बाद हम जैसलमेर दुर्ग की संकरी गलियों से होते हुए बाहर जाने वाले मार्ग पर चल दिए ! इस महल के अलावा जैसलमेर शहर में घूमने के लिए अभी गदीसर झील, मंदिर पैलेस, और यहाँ की विश्व प्रसिद्द हवेलियाँ अभी बाकी है ! राजस्थानी परिधान और साज सज्जा का सामान लेने के लिए जैसलमेर में कई बाज़ार है, इन सभी जगहों के बारे में बारी-2 से बताऊंगा, चलिए, फिल्हाल दुर्ग का भ्रमण जारी रखते हुए आज के सफ़र की शुरुआत करते है जैसलमेर की हवेलियों से, जो अपनी सुन्दरता के लिए देश ही नहीं, विदेशों में भी प्रसिद्द है ! जैसलमेर में पीले-2 पत्थरों से बनी ऐसी कई विशाल और सुन्दर हवेलियाँ है जिन्हें शाही अंदाज में सजाया गया है और जिनके दीदार के लिए रोजाना हज़ारों देसी-विदेशी पर्यटक राजस्थान के इस रेगिस्तान का रुख करते है ! इन बहुमंजिला हवेलियों में अनगिनत कमरे है, जिनकी बालकनी और दरवाजों पर विशेष कलाकृतियाँ बनाई गई है, पत्थरों को तराश कर बनाई गई ये कलाकृतियाँ राजस्थानी कलाकारी का एक उत्कृष्ट नमूना है जो यहाँ आने वाले पर्यटकों का ध्यान बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती है !
सालम सिंह की हवेली का एक दृश्य

Saturday, March 24, 2018

जैसलमेर के सोनार किले की सैर (A Visit to Jaisalmer Fort)

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप जोधपुर से जैसलमेर पहुँचने और यहाँ रुकने का इंतजाम करने के हमारे संघर्ष के बारे में पढ़ चुके है ! दोपहर का भोजन करने के बाद हम सदर बाज़ार से होते हुए जैसलमेर दुर्ग के अखय पोल के सामने पहुंचे, अब आगे, अखय पोल किले में जाने का एक बाहरी प्रवेश द्वार है इस द्वार से होते हुए महल तक जाने के लिए आपको 3 और द्वार पार करने होंगे जिनके नाम क्रमश: सूरज पोल, गणेश पोल और हवा पोल है ! जैसे-2 हम आगे बढ़ते जायेंगे, मैं इन द्वारों का वर्णन करता रहूँगा ! अखय पोल के ठीक सामने एक व्यस्त चौराहा है, जहाँ हमेशा ऑटो वालों का जमावड़ा लगा रहता है लेकिन फिर भी यातायात व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने के लिए यहाँ पुलिस वाले भी तैनात किये गए है ! अखय पोल द्वार के दोनों तरफ शाही ध्वज के साथ ढाल और भाले लगाए गए है ! इस प्रवेश द्वार से अन्दर जाते ही एक खुला क्षेत्र है जहाँ दाईं ओर तो एक कतार में कई दुकानें है जबकि बाईं ओर एक पार्किंग स्थल है ! यहाँ खड़े होकर देखने से इस दुर्ग की विशालता का अंदाजा हो जाता है, कहते है जैसलमेर भारत का इकलौता दुर्ग है जिसमें वर्तमान में भी लोग निवास करते है ! पार्किंग स्थल से थोडा आगे बढ़ने पर बाईं ओर चबूतरे पर एक मंदिर बना है, जिसका वर्णन मैं इस यात्रा के अंतिम लेख में करूँगा !



जैसलमेर किले के अन्दर महल का एक दृश्य

Monday, March 19, 2018

जोधपुर से जैसलमेर की रेल यात्रा (A Train Trip from Jodhpur to Jaisalmer)

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने जोधपुर के क्लॉक टावर और कुछ प्रमुख मंदिरों के बारे में पढ़ा, जोधपुर घूमने के बाद हम रात्रि ट्रेन पकड़कर जैसलमेर के लिए प्रस्थान कर चुके है ! अब आगे, रात को जब हमारी ट्रेन जोधपुर से चली तभी कुछ दलाल हमारी कोच में घूम रहे थे, जो जैसलमेर में सस्ता होटल दिलाने के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाते है ! ट्रेन के हर कोच में ऐसे 2-3 दलाल रहते है, रात को ट्रेन चलते ही ये यात्रियों में से अपना शिकार ढूंढना शुरू कर देते है ! चलती ट्रेन में होटल के पम्पलेट बांटे जाते है जिसमें होटल के कमरों की फोटो, और वहां मिलने वाली सुख-सुविधाएं से सम्बंधित जानकारी रहती है ! इसी पम्पलेट में होटल सस्ता देने का कारण भी बताया जाता है, जिसे पढ़कर अच्छे-खासे पढ़े लिखे आदमी भी आसानी से इन दलालों के जाल में फँस जाते है ! खासतौर से अगर कोई जैसलमेर पहली बार आ रहा हो तो उसका इनके जाल में फंसने की पूरी संभावना रहती है, ऐसे ही दलाल जयपुर से जैसलमेर आने वाली ट्रेन में भी घूमते रहते है ! मेरी आप लोगों से अपील है कि अगर आप जैसलमेर घूमने आ रहे है तो इन दलालों से दूर ही रहे, वरना आपका घूमने का मजा तो किरकिरा होगा ही, आप बुरे अनुभव के साथ यहाँ से वापिस जायेंगे !

मंदिर पैलेस का एक दृश्य

Friday, March 16, 2018

जोधपुर का क्लॉक टावर और कुछ प्रसिद्द मंदिर (Temples and Clock Tower of Jodhpur)

रविवार, 24 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने बालसमंद और कायलाना झील के बारे में पढ़ा, दोनों झील देखने के बाद हम एक माल में पहुंचे ! अब आगे, मॉल से निकले तो कुछ देर बाद हम राव जोधा की मूर्ति के पास से होकर ही निकले, शहर के बाहर ही बाहर होते हुए हम बाइक वाले के पास पहुंचे ! स्कूटी वापिस करके हमने अपने कागज़ वापिस लिए और पैदल ही जोधपुर के क्लॉक टावर की ओर चल दिए, कल हम क्रिसमस की वजह से क्लॉक टावर नहीं देख पाए थे, इसलिए आज तो इसे देखना ही था ! टहलते हुए कुछ बाज़ारों से निकलकर हम क्लॉक टावर पहुंचे, क्लॉक टावर के पास भी एक बड़ा बाज़ार है जहाँ खान-पान से लेकर साज-सज्जा का सामान मिलता है, बाज़ार के बीच से निकलकर हम क्लॉक टावर के सामने खड़े थे ! चलिए, अन्दर जाने से पहले मैं आपको इस क्लॉक टावर से सम्बंधित कुछ जरुरी जानकारी दे देता हूँ ! सन 1910 में राजा सरदारसिंह के शासनकाल में जोधपुर में नई मंडी के पास एक बाज़ार बनवाया गया, इस बाज़ार का नाम सरदार सिंह के नाम पर ही था ! चौपड़ के आकर में बने इस बाज़ार के बीचों-बीच सौ फुट ऊंचे एक घंटाघर का निर्माण करवाया गया, जिसमें तीन लाख रूपए की घडी लगवाई गई !


जोधपुर के क्लॉक टावर का एक दृश्य

Tuesday, March 13, 2018

जोधपुर की बालसमंद और कायलाना झील (Balasmand and Kaylana Lake of Jodhpur)

रविवार, 24 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप मंडोर उद्यान घूम चुके है, पार्किंग से अपनी स्कूटी लेने के बाद हम वापिस जोधपुर जाने वाले मार्ग पर चल दिए ! अब आगे, कुछ दूर चलने के बाद हम मुख्य मार्ग को छोड़कर अपनी दाईं ओर जा रहे एक मार्ग पर मुड गए, ये बीकानेर-बाड़मेर मार्ग था, इस पर ज्यादा यातायात नहीं था ! कुछ दूर चलने के बाद चढ़ाई भरा मार्ग शुरू हो गया, यहाँ सड़क किनारे पेड़-पौधे तो थे लेकिन आस-पास खनन क्षेत्र होने के कारण धूल भी बहुत उड़ रही थी ! लगभग 3 किलोमीटर चलने के बाद हम सड़क के बाईं ओर जा रहे एक कच्चे मार्ग पर मुड गए ! यहाँ दूर तक फैली पत्थरों की खदानें थी, जहाँ बड़े-2 पत्थरों को काट कर भवन निर्माण के लिए पत्थर निकाले जा रहे थे ! कहीं मशीनों से काम लिया जा रहा था तो कहीं मजदूर पत्थर तोड़ने में लगे थे, बाहरी लोगों का आवागमन तो यहाँ ना के बराबर ही था ! यहाँ काम करने वाले लोगों के अलावा हम ही थे जो इस मार्ग पर चल रहे थे, हमारे लिए सांस लेना भी दूभर हो रहा था लेकिन फिर भी हिम्मत करके हम घुमावदार रास्तों से होते हुए आगे बढ़ते रहे ! कुछ दूर चलने के बाद गूगल मैप ने रास्ता दिखाना बंद कर दिया, देवेन्द्र असमंजस में था कि अब किधर जाए ! अब यहाँ कोई पक्का मार्ग तो था नहीं, कच्चे मार्ग पर ही ट्रेक्टर और ट्रकों से पत्थरों की ढुलाई हो रही थी !


balasmand lake
बालसमंद झील का एक दृश्य (A view of Balasmand Lake)

Saturday, March 10, 2018

रावण की ससुराल और मारवाड़ की पूर्व राजधानी है मण्डोर (Mandor, the Old Capital of Marwar)

रविवार, 24 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप उम्मेद भवन घूम चुके है, अब आगे, उम्मेद भवन से बाहर निकले तो पार्किंग से अपनी स्कूटी लेकर हम उसी मार्ग से वापिस आ गए जिससे यहाँ आए थे ! कुछ ही देर में हम उम्मेद भवन वाले मार्ग से निकलकर मुख्य मार्ग पर पहुँच गए, फिर एक फ्लाईओवर से होते हुए हम रास्ते में पड़ने वाले एक बाज़ार को पार करने के बाद मंडोर उद्यान पहुंचे ! यहाँ उद्यान के सामने ही एक पार्किंग स्थल है, अपनी स्कूटी पार्किंग में खड़ी करके हम उद्यान के प्रवेश द्वार की ओर बढे, लेकिन अन्दर जाने से पहले हमारी नज़र सड़क के उस पार स्थित मिठाइयों की दुकानों पर पड़ी ! हमने मन ही मन सोचा उद्यान घूमने में तो काफी समय लग जायेगा इसलिए अन्दर जाने से पहले पेट-पूजा कर लेते है, पता नहीं अन्दर कुछ खाने को मिलेगा भी या नहीं ? फिर सड़क के उस पार जाकर हमने एक दुकान पर रूककर चाय पी और कचोरियाँ खाई, देवेन्द्र को शायद ये ज्यादा अच्छी नहीं लगी, लेकिन अपने को ये गरमा-गर्म कचोरियाँ खाकर मजा आ गया और भूख भी कुछ हद तक शांत हो गई ! कचोरियाँ निबटाकर हम प्रवेश द्वार से होते हुए उद्यान में दाखिल हुए, जहाँ अन्दर जाने के लिए पक्का मार्ग बना है और मार्ग के किनारे चलने के लिए फुटपाथ भी है, जिसपर थोड़ी-2 दूरी पर फेरी वाले अपनी दुकान सजाये बैठे है !


मंडोर उद्यान में बने देवल (Deval in Mandor Garden)