Monday, September 14, 2015

सिलिसढ़ झील के पास बिताए कुछ पल (Moments spent near Siliserh Lake)

रविवार, 2 अगस्त 2015

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हम लोग जब गाड़ी मोड़ कर वापस अलवर की तरफ आने लगे तो फिर से सड़क के किनारे कुछ अन्य जीव खड़े दिखाई दिए ! दोनों तरफ घना जंगल था और सड़क के किनारे दूर तक फैले सूखे पेड़ बहुत ही सुंदर दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे ! वन्य जीव उद्यान बंद होने की बात सुनकर थोड़ा दुख तो था इसलिए सड़क के किनारे मौजूद इन जानवरों को देखना अच्छा लग रहा था ! अक्सर बारिश में सारे ही वन्य जीव उद्यान बंद ही रहते है क्योंकि उद्यान में अंदर जाने वाले मार्ग फिसलन भरे हो जाते है ! इससे किसी भी अप्रिय घटना के घटित होने का ख़तरा बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान उन उद्यानों को बंद ही रखा जाता है ! सरिस्का में भी इस मौसम में काफ़ी कम लोग ही घूमने आते है और जो आते भी है वो अक्सर सिलिसढ़ झील, भृतहरि या आस-पास मौजूद धार्मिक जगहों पर घूमने आते है ! इस समय हम असमंजस में थे, कि अब आगे क्या किया जाए, इतनी दूर से गाड़ी चला कर जिस उद्यान को देखने आए थे वो तो बंद है ! सरिस्का से आगे यही मार्ग जयपुर को चला जाता है, एक बार तो मन हुआ कि अगले दिन का अवकाश लेकर जयपुर ही चला जाए, पर इस बात पर अन्य साथी सहमत नहीं हुए !

sariska alwar road
सरिस्का से वापिस आते हुए (Sariska Alwar Road)

Thursday, September 10, 2015

सरिस्का में दोस्तों संग मस्ती (A Road Trip to Sariska)

रविवार, 2 अगस्त 2015

बहुत दिनों से सरिस्का मेरी घूमने जाने वाली जगहों की सूची में था, पर हर बार ये जगह रह ही जाती थी ! इस बार जब एक रविवार को हितेश का फोन आया कि सरिस्का घूमने चले क्या, तो मैने बिना समय गँवाए हाँ कर दी ! छुट्टी का दिन होने के कारण कोई परेशानी भी नहीं थी, इस यात्रा पर हितेश के साथ उसके दफ़्तर के कुछ सहकर्मी भी जा रहे थे ! क्योंकि ये एक दिन की ही यात्रा थी जिसमें हमें यहाँ से सुबह चलकर दिनभर सरिस्का घूमकर शाम तक वापिस आ जाना था इसलिए यात्रा के लिए ज़्यादा तैयारी करने की ज़रूरत नहीं थी ! जब हितेश से बात करके फोन बंद किया तो सुबह के 7 बज रहे थे, अपनी योजना के मुताबिक हम 8 बजे घर से निकलने वाले थे ! मैं नहा-धोकर समय से तैयार हुआ और नाश्ता करने के बाद एक बैग में अपना कैमरा लेकर घर से निकल लिया ! प्रोग्राम इतनी जल्दी बना था कि सरिस्का के बारे में कुछ जानकारी भी नहीं जुटा पाए ! बस इतना पता था कि वहाँ वन्य जीव उद्यान के अलावा अलवर में सिलिसढ़ झील भी है !

हमारे पायलट हितेश शर्मा

Monday, September 7, 2015

क़ुतुब-मीनार में बिताए कुछ यादगार पल (A Day with Friends in Qutub Minar)

रविवार, 21 जून 2015

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बहुत दिन हो गए थे किसी भी यात्रा पर गए हुए, हर बार यात्रा का विचार बनता फिर किसी ना किसी वजह से रह जाता ! किसी यात्रा पर ना जा पाने के कारण मन काफ़ी तनाव में था, अक्सर ऐसा होता है जब आप रोजाना एक ही तरह की जीवन शैली में रहते है तो थोड़े बदलाव की ज़रूरत होती है ! अगर समय रहते आप ये बदलाव कर लेते है तो जीवन अच्छा चलता रहता है वरना आप तनाव से घिर जाते है ! लोग इस बदलाव के लिए अलग-2 तरीके अपनाते है कोई फिल्में देखने जाते है तो कुछ क्लब की सदस्यता लेकर अपना समय वहाँ बिताते है ! मैं अपनी जीवन शैली में बदलाव के लिए समय-2 पर यात्राएँ करता रहता हूँ, समय और परिस्थिति अनुसार मेरी यात्राएँ कभी छोटी होती है तो कभी बड़ी ! अब क्योंकि किसी लंबी यात्रा पर जाने का संयोग तो बन नहीं पा रहा था इसलिए छोटी यात्रा करके इस जीवन शैली में थोड़ा बदलाव लाना ज़रूरी था ! ऐसे ही एक रविवार को खा-पीकर सुबह घर पर बैठा टेलीविज़न देख रहा था कि तभी मेरा फोन बजा जो इस समय चार्जिंग में लगा था !


सफ़र की शुरुआत

Wednesday, September 2, 2015

पठानकोट से दिल्ली की रेल यात्रा (A Journey from Pathankot to Delhi)

शनिवार, 21 जुलाई 2012

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यात्रा के पिछले लेख में आपने हिमालयन वॉटर फॉल के बारे में पढ़ा, अब आगे, शनिवार सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं बिस्तर में लेटे-2 यही सोच रहा था कि यहाँ हिमाचल में मस्ती भरे 8 दिन कैसे बीत गए पता भी नहीं चला ! अक्सर हमें ऐसा लगता है कि अच्छे पल बहुत जल्दी बीत जाते है और बुरा वक़्त तो ऐसा लगता है मानो कटता ही नहीं ! पर ऐसा नहीं है ये तो हमारे सोचने का नज़रिया है वरना वक़्त तो लगातार एक ही रफ़्तार से चलता रहता  है ! आज सच्चाई का सामना करते हुए काफ़ी दुख हो रहा था, क्योंकि सच्चाई ये थी कि आज यहाँ मक्लोड़गंज में 
हमारा आख़िरी दिन था और हम में से किसी का भी वापिस जाने का बिल्कुल मन नहीं हो रहा था ! मन को बहुत समझाया, पर मन कहाँ मानने वाला था, रह-2 कर यही विचार मन में आ रहे थे कि काश कुछ दिन और यहाँ रह लेते ! वैसे हम यहाँ मक्लॉडगंज से अकेले नहीं जा रहे थे बल्कि हम अपनी यादों में इस खूबसूरत शहर की खूबसूरती को समेट कर अपने साथ ले जा रहे थे ! यहाँ के खूबसूरत पहाड़, कल-कल करते झरने, हरी-भरी वादियाँ और दूर तक दिखाई देती हिमालय पर्वतमाला हमारी आँखों में बस गई थी ! यहाँ बिताए गए हर एक पल की यादें बहुत लंबे समय तक हमारे मन में रहने वाली थी !
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मोनेस्ट्री में विपुल (A view of Monestary, Mcleodganj)