Sunday, April 22, 2018

कुलधरा – एक शापित गाँव (Kuldhara – A Haunted Village)

मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप लोद्रवा से वापिस आते हुए रास्ते में पड़ने वाले चुंधी-गणेश मंदिर में दर्शन कर चुके है, जैसलमेर पहुंचकर रात्रि में जैसलमेर दुर्ग के कुछ चित्र लेने के बाद हम भोजन करके आराम करने के लिए वापिस अपनी धर्मशाला पहुंचे ! अब आगे, दिनभर सफ़र की थकान होने के कारण रात को बिस्तर पर जाते ही नींद आ गई, सुबह अपने नियमित समय पर सोकर उठे ! हजूरी सेवा सदन में चाहे खान-पान की सुविधा नहीं थी लेकिन गर्म पानी की बढ़िया व्यवस्था थी, सुबह-2 नहाने के लिए 15 रूपए प्रति बाल्टी के हिसाब से बढ़िया गर्म पानी मिल जाता था ! बिस्तर से निकलकर हम दोनों बारी-2 से नित्य-क्रम से निवृत होने में लग गए, वैसे तो रात भर आराम करने से सारी थकान दूर हो चुकी थी, लेकिन रही-सही कसर गर्म पानी से स्नान ने दूर कर दी ! धर्मशाला में खान-पान की कोई दुकान ना होने के कारण चाय पीने के लिए भी हमें बाज़ार का रुख करना पड़ता था, आज भी नहा-धोकर चाय पीने के लिए हमने बाज़ार का ही रुख किया ! यहाँ से निकलने से पहले हमने एक बैग में खाने-पीने का कुछ सामान रख लिया, और एक बार फिर से हम जैसलमेर की गलियों से होते हुए दुर्ग की ओर जाने वाले मार्ग पर चल पड़े !

कुलधरा गाँव का एक दृश्य

Wednesday, April 18, 2018

लोद्रवा का चुंधी-गणेश मंदिर (Chundhi Ganesh Temple of Lodruva)

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

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जैसलमेर यात्रा के पिछले लेख में आप लोद्रवा के जैन मंदिर घूम चुके है, मंदिर से बाहर निकले तो अँधेरा हो चुका था, गाडी में सवार होकर हम जैसलमेर के लिए वापसी कर रहे थे, इस बीच मन में उधेड़-बुन चल रही थी कि जैसलमेर पहुँच कर कठपुतली का शो देखा जाए या स्थानीय बाज़ार घूमा जाए ! आज दिनभर की यात्रा के पल भी मन के किसी कोने में घूम रहे थे और हम तेजी से जैसलमेर की ओर प्रस्थान कर रहे थे ! इस बीच सड़क पर एक ब्रेकर आया और भूरा राम इसे देख नहीं पाया, नतीजन, गाडी जोर से उछली और हमारा सिर गाडी की छत से टकराया ! मन में चल रहे सारे विचार एकदम से गायब हो गए, हम कुछ कहते उससे पहले भूरा राम ही बोल पड़ा, सरजी मुझे ब्रेकर दिखाई नहीं दिया, इसलिए गाडी उछल गई, आप लोगों को चोट तो नहीं लगी ! खैर, चिंता वाली कोई बात नहीं थी इसलिए हम समय गंवाए बिना फिर से आगे बढ़ गए, कुछ दूर जाने पर रास्ते में पैदल जा रहे एक वृद्ध ने हाथ देकर गाडी रुकने का इशारा किया तो हमने उसे भी अपने साथ बिठा लिया ! उसे पास के ही एक गाँव में जाना था, पैदल जाता तो जाने कितना समय लग जाता, हम उसे रास्ते में छोड़ते हुए आगे बढ़ गए !

चुंधी गणेश मंदिर के अन्दर का एक दृश्य

Tuesday, April 10, 2018

लोद्रवा के जैन मंदिर (Jain Temples of Lodruva)

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप जैसलमेर का बड़ा बाग देख चुके है, यहाँ से चले तो साढ़े पांच बज रहे थे, शाम होने लगी थी लेकिन फिर भी हल्की-2 धूप बाकी थी ! गाडी में सवार होकर कुछ ही देर में हम बड़ा बाग परिसर से निकलकर लोद्रवा जाने वाले मार्ग पर पहुँच गए ! अब आगे, जैसलमेर में मुख्य मार्गों को छोड़ दे तो सहायक मार्ग ज्यादा चौड़े नहीं है, लोद्रवा जाने वाले मार्ग का हाल भी कुछ ऐसा ही था, एकदम सीधी सड़क थी जो काफी दूर तक जाती दिखाई दे रही थी ! रास्ते में बीच-2 में कुछ उतार-चढ़ाव भी है और सड़क के दोनों ओर कंटीली झाड़ियां और नागफनी के पौधे है ! वैसे कुल मिलाकर शानदार दृश्य दिखाई दे रहा था, हमारी गाडी तेजी से आगे बढ़ रही थी, इस बीच सामने से जब कोई दूसरी गाडी आ जाती तो भूरा राम को गाडी सड़क से थोडा नीचे उतारनी पड़ती ! कुछ दूर जाने के बाद रास्ते में ही भूरा राम का गाँव पड़ा, गाडी सड़क के किनारे खड़ी करके कुछ देर के लिए वो गाँव में स्थित अपने घर गया ! परिवार के सदस्यों से मिलकर जब वो 10 मिनट बाद आया तो कुछ बच्चे भी उसके साथ थे, शायद उसके छोटे भाई-बहन थे !

लोद्रवा के जैन मंदिर का एक दृश्य


Saturday, April 7, 2018

जैसलमेर का बड़ा बाग (Bada Bagh of Jaisalmer)

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आपने जैसलमेर की गदीसर झील का भ्रमण किया, अब आगे, हम झील में नौकायान करके निकले तो शाम के पांच बजने वाले थे, भूरा राम के साथ गाडी में सवार होकर हम कुछ ही देर में हम यहाँ की भीड़-भाड़ से निकलकर एक खुले मार्ग पर पहुँच गए ! रास्ते में सड़क के किनारे पड़ने वाले होटलों में चहल-पहल शुरू हो चुकी थी, शाम के समय तो इन पांच-सितारा होटलों की रौनक देखते ही बनती है ! वास्तव में राजस्थान के पांच सितारा होटलों का कोई मुकाबला नहीं है, लम्बे-चौड़े क्षेत्र में फैले यहाँ के होटल किसी किले की तरह दिखाई देते है ! अँधेरा होते-2 इन होटलों में मद्दम रोशनी जगमगाने लगती है और यहाँ बजने वाला मधुर संगीत माहौल को रोमांटिक बना देता है, यहाँ सड़क के दोनों तरफ एक कतार में कई होटल है ! जिस मार्ग पर हम चल रहे थे ये मार्ग सम की ओर जाता है और शाम के समय इस मार्ग पर सम जाने वाले लोगों की भीड़ बढ़ जाती है, आज भी गाड़ियाँ हमारी गाडी के बगल तेजी से तेजी से सम के लिए निकल जा रही थी ! गनीमत थी कि हमें इस मार्ग पर ज्यादा दूर नहीं जाना था, थोडा आगे बढ़ने पर हम एक तिराहे पर पहुँच गए, यहाँ से सीधा जाने वाला मार्ग सम को निकल जाता है जबकि दाईं ओर जाने वाला मार्ग बड़ा बाग होते हुए लोंगेवाला को चला जाता है !
बड़ा बाग में बने छतरियां और स्मारक

Wednesday, April 4, 2018

जैसलमेर की गदीसर झील (Gadisar Lake of Jaisalmer)

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

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यात्रा के पिछले लेख में आप जैसलमेर की प्रमुख हवेलियों का भ्रमण कर चुके है, नाथमल की हवेली देखने के बाद हम बड़ा बाग देखने जाने वाले थे लेकिन बड़ा बाग देखने से पहले हम रास्ते में पड़ने वाली गदीसर झील घूमना चाहते थे ! क्या पता, बाद में ये झील देखने के लिए समय मिले या नहीं, इसलिए आज जैसलमेर के आस-पास की जितनी जगहें देख लेंगे, कल पर दबाव कम हो जाएगा ! नाथमल की हवेली से निकलने के बाद 5-7 मिनट की यात्रा करके हम गदीसर झील के सामने पहुँच गए, हमें मोटरसाइकिल से यहाँ छोड़कर भूरा राम गाडी लेने चला गया ताकि बड़ा बाग़ घूमने जाने में आसानी रहे ! क्या कहा, कौन भूरा राम, अरे ये देखिये, हम भूरा राम के साथ जैसलमेर की हवेलियाँ घूम लिए और मैं भूरा राम से आपका परिचय करवाना ही भूल गया ! भूरा राम एक स्थानीय लड़का था जो हमें जैसलमेर घुमाने के लिए गाइड के रूप में मिला ! हुआ दरअसल कुछ यूं कि जब हम सोनार किले से शाही महल देख कर जैसलमेर की गलियों में भटक रहे थे तो एक गली से गुजरते हुए हम एक चित्रकार के घर के सामने पहुंचे ! यहाँ कुछ चित्रों को सूखने के लिए बाहर लटकाया गया था, ये चित्र इतने सुन्दर थे कि इनपर नज़र पड़ते ही हमारे कदम अपने आप ही रुक गए ! 


गदीसर झील का प्रवेश द्वार (टीलों की द्वार)