Saturday, August 1, 2015

एक यात्रा जो हो ना सकी

वैसे देखा जाए तो अब तक ये साल यात्रा के लिहाज से मेरे लिए बहुत अच्छा नहीं रहा, कुछ छोटी-मोटी यात्राओं को छोड़ कर इस साल अब तक कोई भी बड़ी यात्रा नहीं कर पाया हूँ ! हालाँकि साल की शुरुआत तो काफ़ी शानदार रही थी, जब मैं जनवरी माह में मथुरा-वृंदावन, बनारस, और फिर शिमला घूम कर आया था ! पर जैसे-2 साल आगे बढ़ा, मेरी यात्रा की रफ़्तार कम होती गई, और मई-जून तक तो जैसे लगभग थम सी गई ! इसकी मुख्य वजह पुरानी नौकरी छोड़कर नई नौकरी पकड़ना था, क्योंकि नई कंपनी में शुरुआत में ना तो ज़्यादा छुट्टी मिल सकती थी और नया काम था तो सीखना भी ज़रूरी था ! लगातार कई हफ्तों से किसी यात्रा पर जाने का मन हो रहा था पर हर बार की तरह इस बार भी यात्रा का संयोग बनते-2 रह जा रहा था ! इसी बीच जून में मन को थोड़ा बहलाने के लिए एक दिन दोस्तों संग क़ुतुब-मिनार देखने भी गया, पर इस यात्रा से मन को संतुष्टि नहीं मिली !
हाँ, दोस्तों संग सुकून के कुछ पल बिताने को ज़रूर मिले, पर वो पल तो जैसे सूखे रेगिस्तान में पानी की कुछ बूँदों के समान थे ! इस सूखे को ख़त्म करने के लिए एक बड़ी यात्रा की दरकार थी, इसलिए विचार बना कि एक-दो दिन की छुट्टी लेकर किसी लंबी यात्रा पर जाया जाए ! इसी योजना के तहत जुलाई के तीसरे सप्ताह में जीतू और सौरभ वत्स के साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित रेणुकाजी झील देखने जाने का विचार बना ! हालाँकि, शुरू में तो जयंत ने भी इस यात्रा पर हमारे साथ चलने की बात कहीं थी, पर उसने यात्रा से एक दिन पहले हमारे साथ जाने से मना कर दिया ! इसलिए अब हम तीनों लोग इस यात्रा पर जाने की योजना बनाने लगे, और लगभग सबकुछ तय भी हो गया था ! योजना के मुताबिक हम तीनों शुक्रवार 17 जुलाई की शाम को अपने-2 दफ़्तर से निकलकर फरीदाबाद स्थित सौरभ के घर मिलने वाले थे !

थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर यहीं से मध्य रात्रि में निकलने का विचार था, पर कई बार मुश्किलें ऐसी योजनाओं पर भारी पड़ जाती है और इस बार हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ ! हुआ कुछ यूँ कि तय कार्यक्रम के अनुसार मैं इस यात्रा पर ले जाने का अपना सारा सामान लेकर शुक्रवार को अपने दफ़्तर पहुँचा ! दिन में हम तीनों की इस यात्रा पर जाने को लेकर बात भी हुई, लेकिन शाम कुछ ऐसी घटना घटी कि मुझे इस यात्रा पर जाने से मना करना पड़ा ! शाम को जब में अपने दफ़्तर से निकला तो मेरी गाड़ी ने चलते-2 बीच राह में धोखा दे दिया, दफ़्तर से निकलने के बाद जब में गुड़गाँव-फरीदाबाद मार्ग पर पहुँचा तो टोल नाका पार करने के बाद ये अचानक से बंद हो गई ! इसे दोबारा चालू करने की खूब कोशिश की, लेकिन काम नहीं बना और ये बंद ही रही ! जब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा तो थक-हार कर देसी तरीका अपनाया और धक्का देकर इसे स्टार्ट किया !

2-3 दिन पहले भी ये ऐसे ही चलते हुए बल्लभगढ़ में बंद हुई थी, तब भी इसे धक्का लगाकर ही स्टार्ट किया था ! दोनों बार मेरे साथ गाड़ी में अन्य लोग भी मौजूद थे, इसलिए ज़्यादा परेशानी नहीं हुई ! पर मैने सोचा क्या होता अगर ये गाड़ी किसी सुनसान मार्ग पर बंद हो जाती, और मदद के लिए कोई पास भी ना होता ! तब तो कोई धक्का लगाने वाला भी नहीं मिलता, और अकेला मैं गाड़ी को धक्का लगता या स्टेरिंग संभालता ! जब दो बार इतने कम अंतराल पर इसने धोखा दे दिया है तो आगे भी देगी, और अब तो जल्दी-2 देगी, इसलिए इसका स्थाई समाधान ढूँढना ज़रूरी था ! हालाँकि, इस यात्रा पर हम तीनों सौरभ की गाड़ी से जाने वाले थे, पर ये मेरी परेशानी का हल नहीं था क्योंकि अगला पूरा सप्ताह मुझे इसी गाड़ी से दफ़्तर भी जाना था ! मेरी गाड़ी में अब तक तो गियर ही अटक रहे थे, पर अब तो इसने बार-2 बंद होना भी शुरू कर दिया था !

अब तक मैने ये सोच रखा था कि इस यात्रा से आने के बाद अगले साप्ताह़िक अवकाश में गाड़ी की सर्विस करवाते समय ही गियर अटकने की दिक्कत भी दिखा दूँगा ! मेरे अनुमान के मुताबिक गियर अटकने की दिक्कत क्लच प्लेट घिसने की वजह से थी क्योंकि गियर आयल तो मैने पिछली सर्विस के दौरान ही बदलवाया था ! गाड़ी के बार-2 बंद होने की दिक्कत कमजोर बैटरी और स्पार्क प्लग पर जमे कार्बन की वजह से थी ! वैसे जाने को तो इस यात्रा पर जाया जा सकता था पर अपनी गाड़ी को इस हालत में छोड़कर जाना मुझे उचित नहीं लग रहा था ! पता चला कि इस हफ्ते तो घूम कर मज़े कर आया और अगले हफ्ते बंद गाड़ी लेकर कहीं किसी सुनसान मार्ग इसे धक्का या लोगों से मदद की गुहार लगा रहा हूँ ! इसलिए मैने घूमने जाने से ज़्यादा गाड़ी ठीक करवाने को प्राथमिकता दी, हालाँकि, ये ग़लत था और मना करते समय मेरा मन भी काफ़ी व्यथित था ! 

जब सौरभ को मैने फोन करके इस यात्रा पर जाने में अपनी असमर्थता जताई तो वो नाराज़ होने लगा ! इस दौरान उसने मुझे ये प्रस्ताव भी दिया था कि अगले हफ्ते के लिए मैं उसकी गाड़ी ले लूँ, लेकिन इससे उसे भी काफ़ी परेशानी उठानी पड़ती ! इसलिए मुझे उसका सुझाव अच्छा नहीं लगा, और मैने अगले सप्ताह के लिए उसकी गाड़ी को लेने से मना कर दिया ! जब मैने सौरभ को अपनी परेशानी से अवगत कराया तो शुरू में तो उसे लगा कि मैं मज़ाक कर रहा हूँ फिर जब उसे आभास हुआ कि मैं वाकई इस यात्रा पर नहीं जा रहा तो उसे बहुत बुरा लगा ! जीतू को भी इस बात से अवगत कराया गया जो आज समय से ही अपने घर पहुँच गया था और यात्रा पर जाने की तैयारियों में लगा था ! सारी तैयारियाँ पूरी हो चुकी थी और ऐसे में किसी के भी पीछे हटने से यात्रा खटाई में पड़ सकती थी ! मैं इस समय असमंजस में था, शायद मेरा फ़ैसला ग़लत भी हो, पर उस समय मुझे जो सही लगा मैने किया !

जब जीतू और सौरभ से फोन पर बात की तो दोनों मुझपर बिफर पड़े, बोलने लगे कमीने हमें पता है तू बहाने बना रहा है ! तेरा इस यात्रा पर जाने का कभी मन ही नहीं था, तू हमें गोली दे रहा है वगेरह-2 ! दोनों ने ये आरोप भी लगाए कि तू जयंत के कहने से अपनी यात्रा स्थगित कर रहा है, हालाँकि ऐसा नहीं था ! वैसे, उनका गुस्सा होना लाजिमी था, क्योंकि अंतिम समय में इस तरह से मना करना सही नहीं था ! किसी एक की वजह से अगर यात्रा स्थगित होने लगे तो बुरा तो लगता ही है, मैं उनकी मनोस्थिति समझ सकता हूँ ! सौरभ ने तो मुझे खूब खरी-खोटी सुनाई, नाराज़ तो जीतू भी था पर उसने अपनी नाराज़गी जताई नहीं ! हालाँकि, मैने उन दोनों से कहा कि यार अगर मैं नहीं जा पा रहा तो तुम दोनों ही घूम आओ, मेरी वजह से अपनी यात्रा रद्द मत करो ! पर मेरे ना जाने की वजह से वो लोग भी नहीं गए, अब अगले दो-तीन दिन तक तीनों ने मेरी खूब क्लास भी लगाई, जी हाँ, आपने बिल्कुल सही सुना, तीनों ने !

हमारी यात्रा स्थगित होने की बात सुनकर जयंत भी उनकी तरफ खड़ा हो गया, किसी ने सही कहा है सच्चे दोस्त वाकई कमीने ही होते है ! वैसे, दोस्तो में ऐसा रूठना-मनाना भी चलता ही रहता है, और फिर यहाँ तो सिर्फ़ रूठना ही था, मनाया तो किसी ने किसी को भी नही ! वैसे, अब हालात सामान्य है पर इस लेख को पढ़ने के बाद शायद स्थिति सामान्य ना रहे और उनके अगले कुछ दिन मज़े में गुज़रे ! तो इस तरह से हमारी रेणुकाजी जाने की योजना बनते-2 रह गई, और ऐसा शायद पहली बार ही हुआ है कि तय कार्यक्रम के बावजूद यात्रा वाले दिन जाने का प्रोग्राम रद्द हुआ हो ! वरना अक्सर किसी एक के मना करने के बाद या तो यात्रा को आगे के लिए स्थगित कर देते है या उस साथी को छोड़कर बाकी लोग यात्रा पर निकल जाते है ! इस यात्रा के स्थगित होने के बाद वैसे अगस्त में सभी मित्र अपने-2 परिवार संग छुट्टियाँ बिताने देश के अलग-2 हिस्सों में जा रहे है ! देखते है अब हम तीनों का एक साथ अगली यात्रा पर जाने का संयोग कब बनता है !

7 comments:

  1. Lappy ji aap ye na samajhiyega k aap aisa blog likh denge to hum samajh jayenge k aapko sach me preshani hui thi.
    Is blog ko padh k pata chala k aapne trip pe na jane ka faisla toll pe hi kar lia tha par aapne mujhe ph kia sikri cross karke. Taki wapis aane ka koi option hi na bache.
    Or mere pass 2 car hain to aapko 1 car poore week k lie dene me mujhe kisi tarah ki koi apatti nahee thi.

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    1. जानकारी के लिए धन्यवाद सौरभ भाई, अगली बार याद रखूँगा कि आप के पास 2 कार और 1 मोटरसाइकल है ! मुझे आगामी शनिवार को अपनी मोटरसाइकल दे दो, मैं और जीतू भानगढ़ जाने का विचार बना रहे है !

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    2. Lappy tujhpe se mera vishwas uth gaya hai
      Tu badal gaya re

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  2. jhoothe makkar lappy
    ek din pehle maine nahi tune mana kiya tha
    maine to kabhi haan hi nahi kaha tha saale
    mai sab news channels tak apni baat pahunchaunga
    aur is baar defamation ke case mein tujhe jail bhijwa ke hi rahunga

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    1. मैं झूठ क्यों बोलने लगा जयंत ! ग्रुप पर बातचीत के दौरान ही मुझे जानकारी मिली थी कि इस यात्रा पर जयंत भी हमारे साथ जाने वाला था पर अंतिम समय में उसने कुछ पारिवारिक कारणों से जाने से मना कर दिया है !

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  3. hahahaaaaa....Vats sahi bol rha hai... I agree with Vats :)

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